काशी में 'निर्वासित क्रांतिकारी' पुस्तक का हुआ विमोचन...

वाराणसी: स्वतंत्रता संग्राम के अल्पज्ञात सेनानी स्वर्गीय पंडित नारायण मूर्ति के संघर्षपूर्ण जीवन पर आधारित पुस्तक 'निर्वासित क्रांतिकारी: पंडित नारायण मूर्ति के संघर्ष, स्वाभिमान और अधूरे सम्मान की गाथा' का रविवार को पराड़कर स्मृति भवन में विमोचन किया गया. लेखक डॉ. रवि शर्मा की इस पुस्तक के लोकार्पण समारोह में साहित्य, शिक्षा, राजनीति और पत्रकारिता जगत की कई प्रमुख हस्तियों के साथ बड़ी संख्या में इतिहास प्रेमी और नागरिक शामिल हुए.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व दक्षिण विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी रहे, जबकि अध्यक्षता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के धर्मशास्त्र एवं मीमांसा विभाग के प्रो. माधव जनार्दन राटाटे ने की. विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर निगम के उपसभापति नरसिंह दास मौजूद रहे. समारोह में स्वतंत्रता सेनानी पंडित नारायण मूर्ति के परिजन भी उपस्थित रहे.
नीलकंठ तिवारी ने कहा कि देश की आजादी अनगिनत गुमनाम और त्यागमयी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का परिणाम है. उन्होंने कहा कि पंडित नारायण मूर्ति जैसे क्रांतिकारियों का इतिहास नई पीढ़ी तक पहुंचना चाहिए, ताकि युवा अपने गौरवशाली अतीत से परिचित हो सकें.
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. माधव जनार्दन राटाटे ने कहा कि यह पुस्तक केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन उपेक्षित अध्यायों को सामने लाने का महत्वपूर्ण प्रयास है, जिन्हें इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका.
नरसिंह दास सहित अन्य वक्ताओं ने पंडित नारायण मूर्ति के राष्ट्रप्रेम, संघर्ष और सामाजिक योगदान को याद करते हुए पुस्तक को ऐतिहासिक धरोहर बताया.
लेखक डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि इस पुस्तक को तैयार करने में वर्षों का शोध, दुर्लभ दस्तावेजों का अध्ययन और पारिवारिक साक्ष्यों का संकलन किया गया है. उन्होंने कहा कि इस कृति का उद्देश्य केवल पंडित नारायण मूर्ति के जीवन को सामने लाना नहीं, बल्कि उन हजारों गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान दिलाना है, जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में पर्याप्त रूप से दर्ज नहीं हो सका.
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कार्यक्रम का संचालन नलिन नयन मिश्रा ने किया. समारोह के अंत में अतिथियों और उपस्थित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया. कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने पुस्तक का स्वागत करते हुए इसे स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और काशी की गौरवशाली विरासत को समझने वाली महत्वपूर्ण कृति बताया.
इस अवसर पर प्रकाश कुमार, संतोष सोलापुरकर, सुनील तिवारी, कनकलता मिश्रा, निशा, बबलू सेठ, तारकेश्वर गुप्ता, संतोष पाटील, बनवारी गुप्ता, विनोद अवस्थी, विभूति मिश्रा, आर्यन पंड्या, रोशन गुजराती, ज्ञानेश्वर तोलेदार समेत अन्य उपस्थित रहे.



