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कामिक्स के जरिए बताई डीएनए वारियर डा. लालजी सिंह की कहानी, जन्मदिन पर हुई लांच...

कामिक्स के जरिए बताई डीएनए वारियर डा. लालजी सिंह की कहानी, जन्मदिन पर हुई लांच...
Jul 05, 2026, 10:25 AM
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Posted By Shivangi Ojha

वाराणसी : पहली बार कामिक्स माध्यम से जन-जन तक पहुँचेगी भारत के डीएनए योद्धा की प्रेरणादायक जीवनगाथा; प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और डॉ. चंदना बसु की अनोखी पहल भारत के आधुनिक फोरेंसिक विज्ञान के शिल्पकार, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के जनक पद्मश्री डा. लालजी सिंह के जन्मदिन पर उनकी संपूर्ण जीवन गाथा अनोखे और लोकप्रिय माध्यम कामिक्स के रूप में देश के सामने आई है. द डीएनए वारियर: डा. लालजी सिंह ए लाइफ अनलाकिंग इंडियाज जेनेटिक सीक्रेट्स नामक इस 28 पृष्ठीय इलस्ट्रेटेड कामिक्स का लोकार्पण पद्मश्री डा. के. थंगराज ने किया.


1947 में जौनपुर के कलवारी गांव में जन्मे डा. लालजी सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से सांपों के सेक्स क्रोमोसोम पर शोध कर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की. एडिनबर्ग में बीकेएम सैटेलाइट डीएनए की खोज ने भारत को डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक विकसित करने वाला विश्व का तीसरा देश बना दिया.


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उन्होंने ऐडनेट, सीडीएफडी, जीनोम फाउंडेशन और लेकोन्स जैसी संस्थाओं की नींव रखी, बीएचयू के 25 वे कुलपति रहे और प्राचीन डीएनए शोध में अग्रणी भूमिका निभाई. डा. सिंह ने विज्ञान को केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज की सेवा और राष्ट्र-निर्माण का माध्यम बनाया.

विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, किताबों और वृत्तचित्रों के माध्यम से डा. लालजी सिंह के योगदानों के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है. पहली बार उनके संघर्ष, जिज्ञासा, देशभक्ति और विज्ञान के प्रति समर्पण की पूरी गाथा को एक अनोखे, सरल, चित्रात्मक और जन-समर्पित तरीके से आम लोगों, खासकर छात्रों और युवाओं तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जीन विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और उनकी धर्मपत्नी डा. चंदना बसु ने पद्मश्री डा. के. थंगराज और डा. लालजी सिंह जन्मदिन के अवसर पर इस कामिक्स का लोकार्पण करते हुए कहा कि उनकी विरासत को अनूठे माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना सराहनीय कदम है। इस प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और डा. चंदना बसु ने बताया की उन्होंने महसूस किया कि पारंपरिक लेखन और भाषणों तक सीमित रहने से विज्ञान की प्रेरणा आम जनता तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाती। इसलिए उन्होंने कामिक्स जैसे लोकप्रिय माध्यम को चुना.


JJJइस महत्वाकांक्षी परियोजना में उन्होंने एनसीबीएस बंगलुरु की शोधकर्ता डा. वैष्णवी श्रीधर को कहानी बोर्डिंग और स्क्रिप्ट लेखन का दायित्व सौंपा. चित्रांकन का कार्य अनुभवी चित्रकार इंजीनियर नंदिनी चिलकम ने संभाला, जबकि कंप्यूटर आर्टिस्ट अभिषेक रामानुजम ने आधुनिक डिजिटल तकनीक से चित्रों को और अधिक जीवंत बनाया. कंटेंट रिव्यू विज्ञानी डा पंकज श्रीवास्तव, डा आशीष सिंह, डा गरिमा जैन, डा त्रिपुरा और पूजा रानी ने किया.


पूरी टीम ने डा. सिंह के जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव, बचपन की जिज्ञासा, बीएचयू में कठिन शोध, एडिनबर्ग की ऐतिहासिक खोज, सीसीएमबी में संसाधनों की कमी के बीच संघर्ष, प्रेमानंद मामले में ऐतिहासिक डीएनए साक्ष्य, संस्था-निर्माण, बीएचयू के कुलपति काल और छात्रों को प्रेरित करने वाली विरासत को संवेदनशीलता और कलात्मकता के साथ चित्रित किया है.


28 पृष्ठों में फैली यह कामिक्स पाठकों को डा. सिंह के जीवन की यात्रा पर ले जाती है. जन्म से लेकर वैज्ञानिक उपलब्धियों, सामाजिक न्याय में योगदान, संस्था-निर्माण और अमर विरासत तक हर पहलू को सरल भाषा और प्रभावशाली चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है. विशेष रूप से प्रेमानंद मामले को सावधानीपूर्वक चित्रित किया गया है, जिसमें डीएनए फिंगरप्रिंटिंग ने न्याय की नई परिभाषा गढ़ी. यह संपूर्ण कार्य ऐडनेट सोसाइटी और सोसाइटी फार थे स्टडी आफ एवोल्यूशन के सहयोग से पूरा हुआ है.


ऐडनेट के अध्यक्ष प्रो. सतीश कुमार ने कहा की यह लालजी सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि है. उन्होंने आगे कहा कि यह कामिक्स न केवल डा. सिंह की याद को जीवित रखेगी, बल्कि विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के नए रास्ते भी खोलेगी.


इस कामिक्स को जल्द ही हिंदी सहित सभी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं, तमिल, तेलुगु, बांग्ला, मराठी, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, पंजाबी आदि में भी जारी किया जाएगा. इसका उद्देश्य है कि देश के हर राज्य, हर गाँव और हर स्कूल में डा. लालजी सिंह की प्रेरणादायक कहानी पहुंचे.


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डा लालजी सिंह सेंटर, जौनपुर के निदेशक डा. आशीष सिंह ने कहा की यह कामिक्स आने वाली पीढ़ियों के लिए न केवल डा. लालजी सिंह की अमर विरासत को सहेजेगी, बल्कि उन्हें विज्ञान, संघर्ष, न्याय और राष्ट्र-सेवा की प्रेरणा भी देगी. विज्ञान जब कामिक्स बनता है, तो वह जन-जन की भाषा बन जाता है. डा. लालजी सिंह के जन्मदिन पर दी गई यह सचित्र श्रद्धांजलि भारत के विज्ञान संचार इतिहास में एक स्वर्णिम पृष्ठ जोड़ने जा रही है.

गोरक्षा एवं सम्‍मान यात्रा निकालकर जिला मुख्‍यालय पहुंचे साधु-संत, सौंपा ज्ञापन...
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वाराणसी : गोमाता की सेवा, सुरक्षा और सम्मान को लेकर चलाए जा रहे गो सम्मान आह्वान अभियान का दूसरा चरण सोमवार 27 जुलाई को देशभर में एक साथ आयोजित किया गया. काशी में इस अभियान के तहत साधु संताें एवं गोभक्‍तों की सहभागिता से बुलडोज़र के साथ गो-सम्मान एवं गोरक्षा पदयात्रा निकाली गई. यात्रा के समापन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया. इस दौरान डीएम कार्यालय के पोर्टिको में प्रदर्शन किया और अपनी मांग उठाई.काशी में अभियान की शुरुआत शिवपुर मिनी स्टेडियम से गो-संकीर्तन यात्रा के साथ हुई. यात्रा में साधु-संत, गोसेवक, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे. कार्यक्रम का शुभारम्भ निर्धारित शुभ मुहूर्त में गोमाता के पूजन, शंखनाद एवं "श्री राम जय राम जय जय राम" विजय मंत्र के सामूहिक जप के साथ हुजा. इसके उपरांत गोभक्त झंडे, बैनर, अभियान संदेशों वाले प्लेकार्ड एवं भजन-कीर्तन के साथ शांतिपूर्ण एवं अनुशासित प्रार्थना-यात्रा निकालते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुँचे.प्रार्थना-यात्रा में भगवान श्रीकृष्ण-बलराम के स्वरूप, गोमाता की झांकी तथा अभियान के अंतर्गत संकलित हस्ताक्षरों का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया. तत्पश्चात संत-महात्माओं, जिला कार्यकारिणी, विभित्र सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन एवं हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना-पत्र सौंपा.इस अवसर पर अभियान के प्रतिनिधियों ने कहा कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का विषय ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति जनकल्याण का भी महत्वपूर्ण आधार है. कहा कि यह अभियान शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संधानिक तरीके से संचालित किया जा रहा है तथा तक चरणबद्ध रूप से आगे भी जारी होगा. इस अवसर पर जिले के संत-महात्मा दिभित्र सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं गोभक्त उपस्थित रहे.पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक देवाचार्य महाराज ने बताया कि यात्रा में साधु-संत, गोसेवक, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. यात्रा गोमाता के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन का संदेश देते हुए जिला मुख्यालय तक पहुंची. उन्होंने बताया कि अभियान के माध्यम से केंद्र सरकार से गोहत्या निषेध के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाने की मांग की गई. साथ ही गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने, गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, केंद्रीय गो मंत्रालय की स्थापना, केंद्रीय गो-चारा नीति लागू करने सहित कुल 36 मांगों को पूरा करने का आग्रह किया गया.ALSO READ:दुकान पर तीन बच्‍चों को छोड़कर आटो चालक फरार, पुलिस ने बालगृह भेजा...जगद्गुरु बालक देवाचार्य महाराज ने कहा कि इन मांगों के समर्थन में देशभर में जनजागरण और हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है. अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में गो-संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा और सरकार तक जनभावनाएं पहुंचाई जाएंगी. काशी में यात्रा के दौरान गोमाता के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प भी दिलाया गया. उन्होंने कहा कि अभियान का अगला चरण अक्टूबर माह में आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर में व्यापक स्तर पर जनसंपर्क और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे.अभियान के प्रथम चरण में 27 अप्रैल को देशभर की 5000 तहसीलों में पांच करोड़ से अधिक लोगों ने गोमाता के संरक्षण के समर्थन में हस्ताक्षर कर केंद्र और प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा था. बालक देवाचार्य ने बताया कि प्रथम चरण के दौरान उठाई गई मांगों पर अब तक सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया, इसलिए अभियान का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है.
दुकान पर तीन बच्‍चों को छोड़कर आटो चालक फरार, पुलिस ने बालगृह भेजा...
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वाराणसी : चोलापुर थाना क्षेत्र में स्‍तब्‍ध करने वाला एक मामला सामने आया है. रविवार की शाम नेहिया बाजार में उस समय लोग दंग रह गए जब एक ऑटो चालक तीन बच्चों को एक दुकान पर छोड़कर फरार हो गया. दुकानदार ने जब ऑटो चालक से बच्चों के बारे में पूछा तो उसने कहा कि उनकी मां पीछे खड़ी हैं और जल्द आ जाएंगी. इतना कहने के बाद वह मौके से निकल गया.काफी देर इंतजार के बाद जब कोई महिला बच्चों को लेने नहीं पहुंची तो दुकानदार ने उनसे पूछताछ की. बच्चों ने अपना नाम राकेश (7), छोटी (6) और चंचल (5) बताया, लेकिन वे अपना घर या परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके. बच्चों की स्थिति देखकर दुकानदार ने तुरंत डायल 112 पर सूचना दी. सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चों से जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन वे केवल अपना नाम ही बता पाए. इसके बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों में बच्चों के परिजनों की तलाश शुरू की.चोलापुर थाना प्रभारी निरीक्षक जगदीश सिंह ने बताया कि नेहिया बाजार स्थित एक चाय की दुकान के पास ऑटो पहुंचा था. उसमें बैठे व्यक्ति ने तीनों बच्चों को नीचे उतारा और चला गया. दुकानदार ऑटो का नंबर नोट नहीं कर सका, जिसके कारण चालक की पहचान में परेशानी हो रही है. पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि ऑटो और उसमें सवार लोगों की पहचान की जा सके.ALSO READ:वाराणसी मंडल के रेलकर्मियों ने लौटाया यात्री का खोया पर्स,नकदी समेत सभी दस्तावेज मिले सुरक्षित...पुलिस ने फिलहाल तीनों बच्चों को बाल गृह भेज दिया है. उनके परिजनों का पता लगाने के लिए वाराणसी जिले के सभी थानों को सूचना दी गई है. इसके अलावा आसपास के जिलों को भी अलर्ट किया गया है. दुकानदार ने आशंका जताई कि ऑटो में सवार लोग संदिग्ध लग रहे थे. हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है.
वाराणसी मंडल के रेलकर्मियों ने लौटाया यात्री का खोया पर्स,नकदी समेत सभी दस्तावेज मिले सुरक्षित...
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वाराणसी: पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल के वाणिज्य कर्मचारियों ने ईमानदारी और तत्परता का परिचय देते हुए एक यात्री का खोया हुआ पर्स सुरक्षित लौटाकर मिसाल पेश की है। पर्स में ₹5,000 नकद के साथ एटीएम कार्ड, पैन कार्ड और आधार कार्ड सुरक्षित रखे गए थे.मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन के निर्देशन एवं वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक प्रशस्ति श्रीवास्तव के नेतृत्व में कर्मयोगी मॉड्यूल से प्रशिक्षित वाणिज्य कर्मचारी यात्रियों को बेहतर और संवेदनशील सेवाएं प्रदान करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं.रेलवे के अनुसार, 23 जुलाई को बनारस रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या-8 पर स्थित स्टॉल संख्या-1819 के पास एक यात्री का पर्स मिला था. कर्मचारियों ने पर्स को सुरक्षित रखते हुए उसके वास्तविक स्वामी की पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की.रविवार को संबंधित यात्री के बनारस स्टेशन पहुंचने पर उसने अपना यात्रा टिकट और पहचान पत्र प्रस्तुत किया. सत्यापन के बाद सीनियर टीई अमृत राय ने यात्री को उसका पर्स सकुशल सौंप दिया। पर्स में मौजूद नकद सहित सभी जरूरी दस्तावेज सुरक्षित मिले.also read:काशी विद्यापीठ में 'शैक्षणिक प्रवास' पत्रिका का लोकार्पण, 'विद्या का आनन्द विद्यापीठ' डॉक्यूमेंट्री का हुआ प्रदर्शन.अपना खोया हुआ सामान वापस मिलने पर यात्री ने वाराणसी मंडल के वाणिज्य कर्मचारियों की ईमानदारी, त्वरित कार्रवाई और यात्री सेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए रेलवे प्रशासन का आभार व्यक्त किया.