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चार दिन बाद बदल सकता है मौसम, फिलहाल रात की गर्मी भी पड़ रही भारी...

चार दिन बाद बदल सकता है मौसम, फिलहाल रात की गर्मी भी पड़ रही भारी...
May 23, 2026, 07:59 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : पूर्वांचल सहित वाराणसी के मौसम में अब बदलाव का अनुमान लगाया जा रहा है. लगातार तपने के बाद अब मौसम चार द‍िनों के बाद बदल सकता है. नौतपा 25 मई से दो जून तक होना था लेकि‍न माना जा रहा है क‍ि दो द‍िनों के बाद 27 मई के बाद मौसम का रुख बदलेगा और वातावरण का रुख थोड़ा बेहतर हो जाएगा. मौसम व‍िभाग के अनुमानों के अनुसार आने वाले द‍िनों में मौसम का रुख बदलने का अनुमान है लेक‍िन आने वाले कुछ द‍िनों में वातावरण का रुख बेहतर हो सकता है.


शन‍िवार की सुबह आसमान साफ रहा और द‍िन चढ़ने के साथ ही वातावरण में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता गया. सुबह नौ बजे के बाद गर्म हवाओं का असर शुरू हो गया. 11 बजे के बाद लू सरीखा अहसास भी साफ नजर आने लगा. मौसम का रुख दोपहर होते होते तल्‍ख हो चला और वातावरण में गर्मी का प्रकोप प्रभावी हो गया. जबक‍ि आसमान से मानो आंच की बार‍िश होने लगी तो रातें भी अब गर्म हो चली हैं. हालांक‍ि द‍िन में हल्‍की पुरवाई का असर लोगों को राहत देता नजर आया.


बीते चौबीस घंटों में अध‍िकतम तापमान 43.3°C दर्ज क‍िया गया जो सामान्‍य से 2.3 डि‍ग्री अध‍िक रहा. न्‍यूनतम तापमान 28.0°C दर्ज क‍िया गया जो सामान्‍य से 1.6 ड‍िग्री अध‍िक रहा. आर्द्रता इस दौरान न्‍यूनतम 22% और अध‍िकतम 55% दर्ज क‍िया गया. मौसम व‍िभाग ने लगातार चार द‍िनों के ल‍िए ऑरेंज अलर्ट जारी क‍िया है. इसकी वजह से वातावरण में गर्मी का अनुमान जताया गया है. जबक‍ि मौसम व‍ि‍भाग की ओर से नौतपा की शुरुआत होने के बाद तापमान में कुछ राहत का अनुमान भी जताया गया है.


मौसम व‍िभाग का अनुमान


विभाग ने यूपी के कई क्षेत्रों में 'उष्ण रात्रि' यानी बेहद गर्म रातें होने की आशंका जताई है. इसके कारण न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी और लोगों को चौबीसों घंटे उमस, तपिश और भारी बेचैनी का सामना करना पड़ेगा. इस भीषण गर्मी के बीच अगले पांच दिनों तक पूरे उत्तर प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क रहने का अनुमान है.


पाकिस्तान और उससे सटे पंजाब-हरियाणा पर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है, जिसके प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में धूल भरी आंधी और छिटपुट बारिश हो सकती है. उत्तर प्रदेश को फिलहाल इस तपिश से कोई बड़ी राहत मिलती नहीं दिख रही है. 23 और 24 मई को मौसम विभाग ने चेतावनी का स्तर 'लाल' से घटाकर 'नारंगी' (ऑरेंज अलर्ट) जरूर किया है, लेकिन इन दो दिनों में भी तीखी धूप के साथ कुछ स्थानों पर लू का प्रकोप लगातार जारी रहेगा.

संस्कृत यूनिवर्सिटी में दीक्षांत महोत्सव के तहत तीरंदाजी, भाषण और काव्य लेखन प्रतियोगिता...
संस्कृत यूनिवर्सिटी में दीक्षांत महोत्सव के तहत तीरंदाजी, भाषण और काव्य लेखन प्रतियोगिता...
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 44वें दीक्षांत महोत्सव की श्रृंखला के तहत बुधवार को तीरंदाजी, भाषण एवं काव्य लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया इसमें छात्रों ने अपने प्रतिभा दिखाई. तीरंदाजी में अक्षत सिंह और भाषण में विपुल पांडेय रहे अव्वल.प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी खेल, साहित्यिक और बौद्धिक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया.कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के बौद्धिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और शारीरिक विकास के साथ-साथ उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना था.विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, चरित्र, कौशल और नेतृत्व क्षमता का विकास करना भी है. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में साहित्य, संस्कृति और परंपरागत खेल व्यक्तित्व निर्माण के सशक्त माध्यम हैं तथा ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं.तीरंदाजी प्रतियोगिता में टीम इंडियन राउंड में निहाल चौहान, अंकित निषाद और महेश पटेल की टीम विजेता रही. रिकर्व राउंड में अक्षत सिंह, सर्वेश कुमार और वर्षा जाट राणा की टीम उपविजेता बनी. व्यक्तिगत नाकआउट स्पर्धा में अक्षत सिंह ने पहला, सर्वेश कुमार ने दूसरा और निहाल चौहान ने तीसरा स्थान हासिल किया. भाषण प्रतियोगिता में विपुल पाण्डेय ने प्रथम, वर्षा जाटराणा ने द्वितीय और रुद्रांश सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया. वहीं काव्य लेखन प्रतियोगिता में आनन्द कुमार झा को जीत मिली.शौर्य सिंह दूसरे स्थान पर रहे. विश्वविद्यालय परिवार की ओर से सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं. कार्यक्रम की अध्यक्षता नोडल अधिकारी प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने की. उन्होंने कहा कि साहित्य, संस्कृति और खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं. ऐसे आयोजन युवाओं में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करते हैं. कार्यक्रम का संचालन डा. सुमिता ने किया. डा. रविशंकर पाण्डेय एवं डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे.
बीएचयू के वैज्ञानिकों ने बनाई बहु शक्तिशाली स्टेम सेल, लाइलाज बीमारी का खोजेंगे इलाज...
बीएचयू के वैज्ञानिकों ने बनाई बहु शक्तिशाली स्टेम सेल, लाइलाज बीमारी का खोजेंगे इलाज...
वाराणसीः बीएचयू के विज्ञान संस्थान के सेंटर फार जेनेटिक डिसआर्डर्स के शोधकर्ताओं ने बहु शक्तिशाली स्टेम सेल (Induced Pluripotent Stem Cell - iPSC) का विकास करने में सफलता प्राप्त किया है. इसमें उनकी मदद “टाटा इंस्टीट्यूट फार जेनेटिक्स एंड सोसाइटी" (टीआईजीएस), बंगलुरु ने किया है. इस नई खोज से अब वैज्ञानिक और औषधि विकासकर्ता “डिश में रोग” (रीढ़ की हड्डी और जोड़ों का रोग) माडल स्थापित कर सकेंगे. इनकी सहायता से जटिल और कठिन-उपचार योग्य रोगों की मूलभूत कार्यप्रणाली का अध्ययन कर सकेंगे.इसके साथ ही मानव परीक्षणों से पहले नई दवाओं की विषाक्तता और प्रभावशीलता का परीक्षण भी कर सकेंगे.ऐसे प्रत्यारोपण योग्य ऊतकों का विकास कर सकेंगे जो प्रतिरक्षा-आधारित अस्वीकृति (Immune Rejection) जैसी समस्याओं को कम कर सकें. शोध दल इन स्टेम कोशिकाओं का उपयोग करके त्रि-आयामी सूक्ष्म अंग माडल (आर्गेनाइड्स) विकसित करेगा जो रोगग्रस्त ऊतकों की जीवंत प्रतिकृतियों के रूप में कार्य करेंगे.ये माडल वैज्ञानिकों को वास्तविक समय में रोग की प्रगति का अवलोकन करने तथा न्यूरोडीजेनेरेशन के लिए जिम्मेदार कारणों की पहचान करने में सक्षम बनाएंगे. इससे वैज्ञानिक समुदाय उन रोगों के लिए उपचार विकसित करने की दिशा में और आगे बढ़ सकेंगे जिनका वर्तमान में कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है.इसके जरिए अत्याधुनिक जीनोम एडिटिंग तकनीक का उपयोग करके जटिल न्यूरोडीजेनेरेटिव (तंत्रिका अपक्षयी) रोगों, पार्किंसन रोग और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS), का माडल भी तैयार किया है. स्टेम कोशिकाएं हमारे शरीर की वे 'मास्टर कोशिकाएं' हैं जो अन्य सभी प्रकार की कोशिकाओं को जन्म देती है. iPSC वे स्टेम कोशिकाएं हैं जो प्राकृतिक रूप से भ्रूण में नहीं, बल्कि प्रयोगशाला में वैज्ञानिक तरीके से विकसित की जाती हैं. प्रयोगशाला में वयस्क सामान्य कोशिकाओं (जैसे त्वचा या रक्त) को रीप्रोग्राम करके बनाई गई विशेष कोशिकाएं हैं. इनमें शरीर के किसी भी ऊतक (tissue) या अंग में बदलने की असीमित क्षमता होती है.यह शोध दो पीएचडी शोधार्थी सूरजित मालाकार और शैलेयी राय चौधरी ने किया है. इस संयुक्त अध्ययन का नेतृत्व बीएचयू से प्रो. परिमल दास, प्रो. दीपिका जोशी तथा टाटा इंस्टीट्यूट फार जेनेटिक्स एंड सोसाइटी (टीआईजीएस) से डा. वसंत थामोदरन ने किया. दोनों केंद्रों के विशेष संसाधनों को एकीकृत करते हुए शोध दल ने अत्यंत गंभीर रोगों, विशेषकर पार्किंसन रोग और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS), के जैविक रहस्यों को समझने पर अपना ध्यान केंद्रित किया. यह खोज अत्याधुनिक कोशिकीय पुनःप्रोग्रामिंग (Cellular Reprogramming) तकनीक पर आधारित है. यह विधि परिपक्व मानव कोशिकाओं की जैविक घड़ी को प्रभावी ढंग से पीछे ले जाकर उन्हें उनके प्रारंभिक विकासात्मक चरण में वापस पहुंचा देती है.इस अवस्था को प्राप्त करने के लिए शोध दल ने विशिष्ट ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर्स के अत्यंत सटीक संयोजन का उपयोग किया, जिन्हें वैज्ञानिक समुदाय में सामूहिक रूप से "यामानाका फैक्टर्स" के नाम से जाना जाता है. इन कारकों को स्वस्थ सोमैटिक (दैहिक) कोशिकाओं, जैसे वयस्क रक्त नमूनों से प्राप्त कोशिकाओं, में प्रविष्ट कराकर वैज्ञानिकों ने उनकी पूर्व विशेषीकृत पहचान को सफलतापूर्वक मिटा दिया. इस प्रक्रिया ने परिपक्व कोशिकाओं को भ्रूण-सदृश, बहु-शक्तिशाली (Pluripotent) अवस्था में परिवर्तित कर दिया. इस मूल अवस्था में नव-विकसित iPSC लाइनों में न खत्म होने की अद्भुत क्षमता होती है. वे अनिश्चितकाल तक विभाजित होती रह सकती हैं और साथ ही मानव शरीर में पाए जाने वाले किसी भी प्रकार के ऊतक में परिवर्तित होने की क्षमता बनाए रखती हैं.ALSO READ:संस्कृत यूनिवर्सिटी में दीक्षांत महोत्सव के तहत तीरंदाजी, भाषण और काव्य लेखन प्रतियोगिता...केवल स्वस्थ कोशिकाओं का विकास करने के बजाय, बीएचयू और टीआईजीएस की संयुक्त टीम ने इस आणविक "कैंची" प्रणाली का उपयोग करके पार्किंसन रोग और ALS से जुड़ी सटीक आनुवंशिक विविधताओं को इनमें सम्मिलित किया.प्रयोगशाला में आनुवंशिक उत्परिवर्तनों (Mutations) की हूबहू नकल करके शोधकर्ताओं ने न्यूरोडीजेनेरेशन के अत्यंत समान और सटीक माडल तैयार किए. स्टेम सेल जीवविज्ञान और जीनोम संपादन का यह लक्षित संयोजन वैज्ञानिकों को कोशिकीय क्षरण के शुरुआती चरणों का अध्ययन करने में सक्षम बनाता है, जो किसी मानव रोगी में शारीरिक लक्षण प्रकट होने से बहुत पहले शुरू हो जाते हैं.
भगवा रंग में रंगी बनारस की भैरव गली, बन गई सेल्फी प्वाइंट...
भगवा रंग में रंगी बनारस की भैरव गली, बन गई सेल्फी प्वाइंट...
वाराणसी:बनारस को गलियों का शहर कहा जाता है. देश दुनिया के लोग यहां की गली घाट विरासत को निहारने के लिए आते हैं. यहां की गलियां जहां अपने खास बनावट सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जाती है तो वहीं अब इन्हें नए कलेवर में तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत सबसे पहले बनारस की भैरव गली को भगवा रूप दिया गया है. यह भगवा रूप लोगों की खूब पसंद भी बना हुआ है इसकी खूबसूरती ऐसी है कि हर कोई इसे देखकर के अभिभूत हो रहा है.भैरव गली को बाबा काल भैरव की गली भी कहा जाता है. यहां हर दिन लाखों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं. बनारस की गलियों के कायाकल्प करने के फेज में सबसे पहले काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव की गली को बदल गया है. आध्यात्मिक परंपरा के रंग भगवे रंग से रंगा गया है. इस गली के सभी मकानों को एक जैसा बनाया गया है जो न सिर्फ दिखने में आकर्षक हैं बल्कि लोगों के लिए कौतूहल का विषय भी बने हुए हैं.करीने से सहेज रहे सांस्कृतिक विरासत इस बारे में नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव का कहना है कि बनारस सांस्कृतिक विरासत का शहर है. इसकी खूबसूरती गलियां हर किसी को आकर्षित करती हैं. सौंदरीकरण के तहत नगर निगम इन्हें और आकर्षक बना रहा है. पहले फेज में भैरव गली को बदल गया है. गली में मौजूद सभी दुकान मकान को एक रंग में रंगते हुए उन पर सुंदर आकृति बनाई गई है. उन्होंने बताया कि इस गली में भगवा रंग का प्रयोग किया गया है और इसके साथ ही सफेद रंग से आकृतियां तैयार की गई है. बड़ी बात यह है कि यहां कलाकृति के लिए पारंपरिक अल्पना के डिजाइन का प्रयोग किया गया है और घरों पर बने झरोखों को भी अलग तरीके से पेंट किया गया है.यह रंग इस गली को एक अनोखे रूप में दिखा रही है जो दिखने में बेहद खूबसूरत लग रही है और लोगों को खूब पसंद भी आ रही है .इन धर्मिक स्थलों पर भी दिखेगी अलग झलकउन्होंने बताया कि भैरव गली ही नहीं बल्कि बनारस में जितने भी धार्मिक स्थल हैं महत्वपूर्ण उन सब स्थान की तस्वीर को बदलने की शुरुआत हो चुकी है,जिसमें संकटमोचन की गली, दुर्गाकुंड की गली,बाबा विश्वनाथ की गलियां लगायत अन्य जो भी प्रमुख तीर्थ स्थल है, उन सभी को एक रंग में रंग जाएगा और उसकी एक पहचान को उजागर किया जाएगा. उन्होंने बताया कि हमारी प्राथमिकता है कि काशी आने वाले हर पर्यटक यहां एक नए अनुभव एहसास को लेकर के जाएं और यहां हर दिन लाखों की संख्या में पर्यटक श्रद्धालु आते हैं अपने फोन में बनारस की यादों को लेकर के जाते हैं तो ऐसे में हमारी प्रमुखता है कि हम उन्हें कुछ अच्छी यादें दें और इसी के तहत इन गलियों का कायाकल्प किया जा रहा है.इन गलियों की भी बदली तस्वीर ग़ौरतलब हो कि, बनारस के सौंदर्यीकरण के तहत यहां के सड़कों को फसाड लाइट से सवारा जा रहा है, तो वहीं सिर्फ धार्मिक स्थल की गालियां ही नहीं बल्कि यहां की अन्य गलियां जो पद्मश्री, पद्मभूषण, काशी की विभूतियों के नाम से हैं उन गलियों को भी संवारा जा रहा है. इसके लिए विशेष रंग का प्रयोग किया जा रहा है, लाइट लगाई जा रही है और इसी के तहत पहली तस्वीर भैरव गली में नजर आई है. इस गली में पेंटिंग की शुरुआत वाराणसी के महापौर और नगर आयुक्त ने की थी जिसके बाद अब यह गली इन दोनों काशी में आने वाले लोगों की पसंद बनी हुई है और हर कोई इसे अपने कैमरे मेंbhairav-कैद कर रहा है.