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संस्कृत यूनिवर्सिटी में दीक्षांत महोत्सव के तहत तीरंदाजी, भाषण और काव्य लेखन प्रतियोगिता...

संस्कृत यूनिवर्सिटी में दीक्षांत महोत्सव के तहत तीरंदाजी, भाषण और काव्य लेखन प्रतियोगिता...
Jul 08, 2026, 02:51 PM
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Posted By Diksha Mishra

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 44वें दीक्षांत महोत्सव की श्रृंखला के तहत बुधवार को तीरंदाजी, भाषण एवं काव्य लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया इसमें छात्रों ने अपने प्रतिभा दिखाई. तीरंदाजी में अक्षत सिंह और भाषण में विपुल पांडेय रहे अव्वल.

प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी खेल, साहित्यिक और बौद्धिक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया.


कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के बौद्धिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और शारीरिक विकास के साथ-साथ उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना था.


विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, चरित्र, कौशल और नेतृत्व क्षमता का विकास करना भी है. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में साहित्य, संस्कृति और परंपरागत खेल व्यक्तित्व निर्माण के सशक्त माध्यम हैं तथा ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं.


तीरंदाजी प्रतियोगिता में टीम इंडियन राउंड में निहाल चौहान, अंकित निषाद और महेश पटेल की टीम विजेता रही. रिकर्व राउंड में अक्षत सिंह, सर्वेश कुमार और वर्षा जाट राणा की टीम उपविजेता बनी. व्यक्तिगत नाकआउट स्पर्धा में अक्षत सिंह ने पहला, सर्वेश कुमार ने दूसरा और निहाल चौहान ने तीसरा स्थान हासिल किया. भाषण प्रतियोगिता में विपुल पाण्डेय ने प्रथम, वर्षा जाटराणा ने द्वितीय और रुद्रांश सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया. वहीं काव्य लेखन प्रतियोगिता में आनन्द कुमार झा को जीत मिली.


शौर्य सिंह दूसरे स्थान पर रहे. विश्वविद्यालय परिवार की ओर से सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं. कार्यक्रम की अध्यक्षता नोडल अधिकारी प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने की. उन्होंने कहा कि साहित्य, संस्कृति और खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं. ऐसे आयोजन युवाओं में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करते हैं. कार्यक्रम का संचालन डा. सुमिता ने किया. डा. रविशंकर पाण्डेय एवं डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे.

काशी विद्यापीठ में रिफ्रेशर कोर्स का तीसरा दिन, बुनियादी साक्षरता कौशल और नई शिक्षा नीति पर विशेषज्ञों ने रखे विचार...
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वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स के तीसरे दिन विभिन्न शिक्षाविदों ने प्रारंभिक शिक्षा, बुनियादी साक्षरता कौशल और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए.कार्यक्रम के प्रथम सत्र में काशी विद्यापीठ के डीन (एकेडमिक) प्रो. बंशीधर पाण्डेय ने कहा कि जन्म से आठ वर्ष तक की आयु किसी भी बच्चे के बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इसी अवधि में बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, सामाजिक व्यवहार और नैतिक मूल्यों की नींव पड़ती है. उन्होंने खेल-आधारित शिक्षण और उत्तरदायी देखभाल पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को स्नेहपूर्ण और सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराना उनके समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है.द्वितीय सत्र में बीएचयू के अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र के प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने बहुविषयक शिक्षा प्रणाली में इंटर्नशिप के समावेशन, सिद्धांत और व्यवहार के संतुलन तथा बहु-प्रवेश एवं बहु-निर्गमन व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने मिश्रित अधिगम (ब्लेंडेड लर्निंग), विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग और सतत विकास लक्ष्य–4 के संदर्भ में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया.तृतीय सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग के डॉ. गौरव राव ने बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक कौशल (FLN) के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने मौखिक भाषा विकास, डिकोडिंग, पढ़ने की प्रवाह क्षमता, पढ़कर समझने की योग्यता, लेखन कौशल तथा प्रारंभिक गणितीय दक्षता को बच्चों की शिक्षा का आधार बताते हुए इनके प्रभावी विकास के उपायों पर जानकारी दी.ALSO READ:भगवा रंग में रंगी बनारस की भैरव गली, बन गई सेल्फी प्वाइंट...कार्यक्रम का संचालन मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के निदेशक प्रो. रमाकान्त सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संतोष सिंह कुशवाहा ने दिया. आयोजन में जय दीप सेन गुप्ता, डॉ. गिरीश चन्द्र तिवारी, डॉ. विनय सिंह, अनुपम मिश्रा, दीपशिखा श्रीवास्तव, त्रियंबिका सिंह, सारिका एवं सरस्वती ने तकनीकी एवं व्यवस्थागत सहयोग प्रदान किया.
संस्कृत यूनिवर्सिटी में दीक्षांत महोत्सव के तहत तीरंदाजी, भाषण और काव्य लेखन प्रतियोगिता...
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सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 44वें दीक्षांत महोत्सव की श्रृंखला के तहत बुधवार को तीरंदाजी, भाषण एवं काव्य लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया इसमें छात्रों ने अपने प्रतिभा दिखाई. तीरंदाजी में अक्षत सिंह और भाषण में विपुल पांडेय रहे अव्वल.प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी खेल, साहित्यिक और बौद्धिक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया.कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के बौद्धिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और शारीरिक विकास के साथ-साथ उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना था.विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, चरित्र, कौशल और नेतृत्व क्षमता का विकास करना भी है. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में साहित्य, संस्कृति और परंपरागत खेल व्यक्तित्व निर्माण के सशक्त माध्यम हैं तथा ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं.तीरंदाजी प्रतियोगिता में टीम इंडियन राउंड में निहाल चौहान, अंकित निषाद और महेश पटेल की टीम विजेता रही. रिकर्व राउंड में अक्षत सिंह, सर्वेश कुमार और वर्षा जाट राणा की टीम उपविजेता बनी. व्यक्तिगत नाकआउट स्पर्धा में अक्षत सिंह ने पहला, सर्वेश कुमार ने दूसरा और निहाल चौहान ने तीसरा स्थान हासिल किया. भाषण प्रतियोगिता में विपुल पाण्डेय ने प्रथम, वर्षा जाटराणा ने द्वितीय और रुद्रांश सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया. वहीं काव्य लेखन प्रतियोगिता में आनन्द कुमार झा को जीत मिली.शौर्य सिंह दूसरे स्थान पर रहे. विश्वविद्यालय परिवार की ओर से सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं. कार्यक्रम की अध्यक्षता नोडल अधिकारी प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने की. उन्होंने कहा कि साहित्य, संस्कृति और खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं. ऐसे आयोजन युवाओं में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करते हैं. कार्यक्रम का संचालन डा. सुमिता ने किया. डा. रविशंकर पाण्डेय एवं डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे.
बीएचयू के वैज्ञानिकों ने बनाई बहु शक्तिशाली स्टेम सेल, लाइलाज बीमारी का खोजेंगे इलाज...
बीएचयू के वैज्ञानिकों ने बनाई बहु शक्तिशाली स्टेम सेल, लाइलाज बीमारी का खोजेंगे इलाज...
वाराणसीः बीएचयू के विज्ञान संस्थान के सेंटर फार जेनेटिक डिसआर्डर्स के शोधकर्ताओं ने बहु शक्तिशाली स्टेम सेल (Induced Pluripotent Stem Cell - iPSC) का विकास करने में सफलता प्राप्त किया है. इसमें उनकी मदद “टाटा इंस्टीट्यूट फार जेनेटिक्स एंड सोसाइटी" (टीआईजीएस), बंगलुरु ने किया है. इस नई खोज से अब वैज्ञानिक और औषधि विकासकर्ता “डिश में रोग” (रीढ़ की हड्डी और जोड़ों का रोग) माडल स्थापित कर सकेंगे. इनकी सहायता से जटिल और कठिन-उपचार योग्य रोगों की मूलभूत कार्यप्रणाली का अध्ययन कर सकेंगे.इसके साथ ही मानव परीक्षणों से पहले नई दवाओं की विषाक्तता और प्रभावशीलता का परीक्षण भी कर सकेंगे.ऐसे प्रत्यारोपण योग्य ऊतकों का विकास कर सकेंगे जो प्रतिरक्षा-आधारित अस्वीकृति (Immune Rejection) जैसी समस्याओं को कम कर सकें. शोध दल इन स्टेम कोशिकाओं का उपयोग करके त्रि-आयामी सूक्ष्म अंग माडल (आर्गेनाइड्स) विकसित करेगा जो रोगग्रस्त ऊतकों की जीवंत प्रतिकृतियों के रूप में कार्य करेंगे.ये माडल वैज्ञानिकों को वास्तविक समय में रोग की प्रगति का अवलोकन करने तथा न्यूरोडीजेनेरेशन के लिए जिम्मेदार कारणों की पहचान करने में सक्षम बनाएंगे. इससे वैज्ञानिक समुदाय उन रोगों के लिए उपचार विकसित करने की दिशा में और आगे बढ़ सकेंगे जिनका वर्तमान में कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है.इसके जरिए अत्याधुनिक जीनोम एडिटिंग तकनीक का उपयोग करके जटिल न्यूरोडीजेनेरेटिव (तंत्रिका अपक्षयी) रोगों, पार्किंसन रोग और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS), का माडल भी तैयार किया है. स्टेम कोशिकाएं हमारे शरीर की वे 'मास्टर कोशिकाएं' हैं जो अन्य सभी प्रकार की कोशिकाओं को जन्म देती है. iPSC वे स्टेम कोशिकाएं हैं जो प्राकृतिक रूप से भ्रूण में नहीं, बल्कि प्रयोगशाला में वैज्ञानिक तरीके से विकसित की जाती हैं. प्रयोगशाला में वयस्क सामान्य कोशिकाओं (जैसे त्वचा या रक्त) को रीप्रोग्राम करके बनाई गई विशेष कोशिकाएं हैं. इनमें शरीर के किसी भी ऊतक (tissue) या अंग में बदलने की असीमित क्षमता होती है.यह शोध दो पीएचडी शोधार्थी सूरजित मालाकार और शैलेयी राय चौधरी ने किया है. इस संयुक्त अध्ययन का नेतृत्व बीएचयू से प्रो. परिमल दास, प्रो. दीपिका जोशी तथा टाटा इंस्टीट्यूट फार जेनेटिक्स एंड सोसाइटी (टीआईजीएस) से डा. वसंत थामोदरन ने किया. दोनों केंद्रों के विशेष संसाधनों को एकीकृत करते हुए शोध दल ने अत्यंत गंभीर रोगों, विशेषकर पार्किंसन रोग और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS), के जैविक रहस्यों को समझने पर अपना ध्यान केंद्रित किया. यह खोज अत्याधुनिक कोशिकीय पुनःप्रोग्रामिंग (Cellular Reprogramming) तकनीक पर आधारित है. यह विधि परिपक्व मानव कोशिकाओं की जैविक घड़ी को प्रभावी ढंग से पीछे ले जाकर उन्हें उनके प्रारंभिक विकासात्मक चरण में वापस पहुंचा देती है.इस अवस्था को प्राप्त करने के लिए शोध दल ने विशिष्ट ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर्स के अत्यंत सटीक संयोजन का उपयोग किया, जिन्हें वैज्ञानिक समुदाय में सामूहिक रूप से "यामानाका फैक्टर्स" के नाम से जाना जाता है. इन कारकों को स्वस्थ सोमैटिक (दैहिक) कोशिकाओं, जैसे वयस्क रक्त नमूनों से प्राप्त कोशिकाओं, में प्रविष्ट कराकर वैज्ञानिकों ने उनकी पूर्व विशेषीकृत पहचान को सफलतापूर्वक मिटा दिया. इस प्रक्रिया ने परिपक्व कोशिकाओं को भ्रूण-सदृश, बहु-शक्तिशाली (Pluripotent) अवस्था में परिवर्तित कर दिया. इस मूल अवस्था में नव-विकसित iPSC लाइनों में न खत्म होने की अद्भुत क्षमता होती है. वे अनिश्चितकाल तक विभाजित होती रह सकती हैं और साथ ही मानव शरीर में पाए जाने वाले किसी भी प्रकार के ऊतक में परिवर्तित होने की क्षमता बनाए रखती हैं.ALSO READ:संस्कृत यूनिवर्सिटी में दीक्षांत महोत्सव के तहत तीरंदाजी, भाषण और काव्य लेखन प्रतियोगिता...केवल स्वस्थ कोशिकाओं का विकास करने के बजाय, बीएचयू और टीआईजीएस की संयुक्त टीम ने इस आणविक "कैंची" प्रणाली का उपयोग करके पार्किंसन रोग और ALS से जुड़ी सटीक आनुवंशिक विविधताओं को इनमें सम्मिलित किया.प्रयोगशाला में आनुवंशिक उत्परिवर्तनों (Mutations) की हूबहू नकल करके शोधकर्ताओं ने न्यूरोडीजेनेरेशन के अत्यंत समान और सटीक माडल तैयार किए. स्टेम सेल जीवविज्ञान और जीनोम संपादन का यह लक्षित संयोजन वैज्ञानिकों को कोशिकीय क्षरण के शुरुआती चरणों का अध्ययन करने में सक्षम बनाता है, जो किसी मानव रोगी में शारीरिक लक्षण प्रकट होने से बहुत पहले शुरू हो जाते हैं.