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काशी विद्यापीठ में रिफ्रेशर कोर्स का तीसरा दिन, बुनियादी साक्षरता कौशल और नई शिक्षा नीति पर विशेषज्ञों ने रखे विचार...

काशी विद्यापीठ में रिफ्रेशर कोर्स का तीसरा दिन, बुनियादी साक्षरता कौशल और नई शिक्षा नीति पर विशेषज्ञों ने रखे विचार...
Jul 09, 2026, 03:48 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स के तीसरे दिन विभिन्न शिक्षाविदों ने प्रारंभिक शिक्षा, बुनियादी साक्षरता कौशल और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए.


कार्यक्रम के प्रथम सत्र में काशी विद्यापीठ के डीन (एकेडमिक) प्रो. बंशीधर पाण्डेय ने कहा कि जन्म से आठ वर्ष तक की आयु किसी भी बच्चे के बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इसी अवधि में बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, सामाजिक व्यवहार और नैतिक मूल्यों की नींव पड़ती है. उन्होंने खेल-आधारित शिक्षण और उत्तरदायी देखभाल पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को स्नेहपूर्ण और सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराना उनके समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है.

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द्वितीय सत्र में बीएचयू के अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र के प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने बहुविषयक शिक्षा प्रणाली में इंटर्नशिप के समावेशन, सिद्धांत और व्यवहार के संतुलन तथा बहु-प्रवेश एवं बहु-निर्गमन व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने मिश्रित अधिगम (ब्लेंडेड लर्निंग), विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग और सतत विकास लक्ष्य–4 के संदर्भ में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया.


तृतीय सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग के डॉ. गौरव राव ने बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक कौशल (FLN) के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने मौखिक भाषा विकास, डिकोडिंग, पढ़ने की प्रवाह क्षमता, पढ़कर समझने की योग्यता, लेखन कौशल तथा प्रारंभिक गणितीय दक्षता को बच्चों की शिक्षा का आधार बताते हुए इनके प्रभावी विकास के उपायों पर जानकारी दी.


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कार्यक्रम का संचालन मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के निदेशक प्रो. रमाकान्त सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संतोष सिंह कुशवाहा ने दिया. आयोजन में जय दीप सेन गुप्ता, डॉ. गिरीश चन्द्र तिवारी, डॉ. विनय सिंह, अनुपम मिश्रा, दीपशिखा श्रीवास्तव, त्रियंबिका सिंह, सारिका एवं सरस्वती ने तकनीकी एवं व्यवस्थागत सहयोग प्रदान किया.

पुलिस कमिश्नर ने पेंशनर्स की समस्याएं सुनीं, दो सप्ताह में निस्तारण के दिए निर्देश...
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वाराणसी: पुलिस आयुक्त ने बुधवार को यातायात पुलिस लाइन सभागार में आयोजित पुलिस पेंशनर्स एसोसिएशन की गोष्ठी में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों की समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से सुना. इस दौरान उन्होंने विभिन्न मामलों के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.बैठक में पुलिस आयुक्त ने विशेष रूप से पेंशनर्स के मेडिकल प्रतिपूर्ति बिलों एवं अन्य कल्याणकारी मामलों पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि पेंशनर्स से संबंधित कोई भी फाइल पुलिस स्तर पर दो सप्ताह से अधिक लंबित नहीं रहनी चाहिए.उन्होंने कहा कि सभी मामलों का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए.गोष्ठी के दौरान रिटायर्ड डिप्टी एसपी सूर्यबली सिंह को पुलिस पेंशनर्स एसोसिएशन का अध्यक्ष चुने जाने पर पुलिस आयुक्त ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और उनके सफल कार्यकाल की कामना की.इस अवसर पर पुलिस पेंशनर शिशिर द्विवेदी ने अपनी पुत्री आकांक्षा द्विवेदी द्वारा लिखित पुस्तक "Redefining Womanhood in India" पुलिस आयुक्त को भेंट की.बैठक में पुलिस आयुक्त ने साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों को लेकर भी पेंशनर्स को जागरूक किया. उन्होंने विभिन्न साइबर फ्रॉड के तरीकों की जानकारी देते हुए सतर्क रहने की अपील की तथा समाज में साइबर जागरूकता फैलाने में उनकी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया.ALSO READ:कार्यक्रम के अंत में पुलिस आयुक्त ने सभी सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के योगदान की सराहना करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना की.इस अवसर पर अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय) शिवहरी मीणा, पुलिस उपायुक्त लाइन/मुख्यालय प्रमोद कुमार, पुलिस पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सूर्यबली सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी उपस्थित रहे.vidIQ
काशी विद्यापीठ में रिफ्रेशर कोर्स का तीसरा दिन, बुनियादी साक्षरता कौशल और नई शिक्षा नीति पर विशेषज्ञों ने रखे विचार...
काशी विद्यापीठ में रिफ्रेशर कोर्स का तीसरा दिन, बुनियादी साक्षरता कौशल और नई शिक्षा नीति पर विशेषज्ञों ने रखे विचार...
वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स के तीसरे दिन विभिन्न शिक्षाविदों ने प्रारंभिक शिक्षा, बुनियादी साक्षरता कौशल और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए.कार्यक्रम के प्रथम सत्र में काशी विद्यापीठ के डीन (एकेडमिक) प्रो. बंशीधर पाण्डेय ने कहा कि जन्म से आठ वर्ष तक की आयु किसी भी बच्चे के बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इसी अवधि में बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, सामाजिक व्यवहार और नैतिक मूल्यों की नींव पड़ती है. उन्होंने खेल-आधारित शिक्षण और उत्तरदायी देखभाल पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को स्नेहपूर्ण और सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराना उनके समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है.द्वितीय सत्र में बीएचयू के अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र के प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने बहुविषयक शिक्षा प्रणाली में इंटर्नशिप के समावेशन, सिद्धांत और व्यवहार के संतुलन तथा बहु-प्रवेश एवं बहु-निर्गमन व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने मिश्रित अधिगम (ब्लेंडेड लर्निंग), विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग और सतत विकास लक्ष्य–4 के संदर्भ में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया.तृतीय सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग के डॉ. गौरव राव ने बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक कौशल (FLN) के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने मौखिक भाषा विकास, डिकोडिंग, पढ़ने की प्रवाह क्षमता, पढ़कर समझने की योग्यता, लेखन कौशल तथा प्रारंभिक गणितीय दक्षता को बच्चों की शिक्षा का आधार बताते हुए इनके प्रभावी विकास के उपायों पर जानकारी दी.ALSO READ:भगवा रंग में रंगी बनारस की भैरव गली, बन गई सेल्फी प्वाइंट...कार्यक्रम का संचालन मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के निदेशक प्रो. रमाकान्त सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संतोष सिंह कुशवाहा ने दिया. आयोजन में जय दीप सेन गुप्ता, डॉ. गिरीश चन्द्र तिवारी, डॉ. विनय सिंह, अनुपम मिश्रा, दीपशिखा श्रीवास्तव, त्रियंबिका सिंह, सारिका एवं सरस्वती ने तकनीकी एवं व्यवस्थागत सहयोग प्रदान किया.
संस्कृत यूनिवर्सिटी में दीक्षांत महोत्सव के तहत तीरंदाजी, भाषण और काव्य लेखन प्रतियोगिता...
संस्कृत यूनिवर्सिटी में दीक्षांत महोत्सव के तहत तीरंदाजी, भाषण और काव्य लेखन प्रतियोगिता...
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 44वें दीक्षांत महोत्सव की श्रृंखला के तहत बुधवार को तीरंदाजी, भाषण एवं काव्य लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया इसमें छात्रों ने अपने प्रतिभा दिखाई. तीरंदाजी में अक्षत सिंह और भाषण में विपुल पांडेय रहे अव्वल.प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी खेल, साहित्यिक और बौद्धिक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया.कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के बौद्धिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और शारीरिक विकास के साथ-साथ उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना था.विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, चरित्र, कौशल और नेतृत्व क्षमता का विकास करना भी है. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में साहित्य, संस्कृति और परंपरागत खेल व्यक्तित्व निर्माण के सशक्त माध्यम हैं तथा ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं.तीरंदाजी प्रतियोगिता में टीम इंडियन राउंड में निहाल चौहान, अंकित निषाद और महेश पटेल की टीम विजेता रही. रिकर्व राउंड में अक्षत सिंह, सर्वेश कुमार और वर्षा जाट राणा की टीम उपविजेता बनी. व्यक्तिगत नाकआउट स्पर्धा में अक्षत सिंह ने पहला, सर्वेश कुमार ने दूसरा और निहाल चौहान ने तीसरा स्थान हासिल किया. भाषण प्रतियोगिता में विपुल पाण्डेय ने प्रथम, वर्षा जाटराणा ने द्वितीय और रुद्रांश सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया. वहीं काव्य लेखन प्रतियोगिता में आनन्द कुमार झा को जीत मिली.शौर्य सिंह दूसरे स्थान पर रहे. विश्वविद्यालय परिवार की ओर से सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं. कार्यक्रम की अध्यक्षता नोडल अधिकारी प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने की. उन्होंने कहा कि साहित्य, संस्कृति और खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं. ऐसे आयोजन युवाओं में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करते हैं. कार्यक्रम का संचालन डा. सुमिता ने किया. डा. रविशंकर पाण्डेय एवं डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे.