काशी विद्यापीठ में रिफ्रेशर कोर्स का तीसरा दिन, बुनियादी साक्षरता कौशल और नई शिक्षा नीति पर विशेषज्ञों ने रखे विचार...

वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स के तीसरे दिन विभिन्न शिक्षाविदों ने प्रारंभिक शिक्षा, बुनियादी साक्षरता कौशल और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए.
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में काशी विद्यापीठ के डीन (एकेडमिक) प्रो. बंशीधर पाण्डेय ने कहा कि जन्म से आठ वर्ष तक की आयु किसी भी बच्चे के बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इसी अवधि में बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, सामाजिक व्यवहार और नैतिक मूल्यों की नींव पड़ती है. उन्होंने खेल-आधारित शिक्षण और उत्तरदायी देखभाल पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को स्नेहपूर्ण और सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराना उनके समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है.

द्वितीय सत्र में बीएचयू के अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र के प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने बहुविषयक शिक्षा प्रणाली में इंटर्नशिप के समावेशन, सिद्धांत और व्यवहार के संतुलन तथा बहु-प्रवेश एवं बहु-निर्गमन व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने मिश्रित अधिगम (ब्लेंडेड लर्निंग), विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग और सतत विकास लक्ष्य–4 के संदर्भ में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया.
तृतीय सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग के डॉ. गौरव राव ने बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक कौशल (FLN) के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने मौखिक भाषा विकास, डिकोडिंग, पढ़ने की प्रवाह क्षमता, पढ़कर समझने की योग्यता, लेखन कौशल तथा प्रारंभिक गणितीय दक्षता को बच्चों की शिक्षा का आधार बताते हुए इनके प्रभावी विकास के उपायों पर जानकारी दी.
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कार्यक्रम का संचालन मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के निदेशक प्रो. रमाकान्त सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संतोष सिंह कुशवाहा ने दिया. आयोजन में जय दीप सेन गुप्ता, डॉ. गिरीश चन्द्र तिवारी, डॉ. विनय सिंह, अनुपम मिश्रा, दीपशिखा श्रीवास्तव, त्रियंबिका सिंह, सारिका एवं सरस्वती ने तकनीकी एवं व्यवस्थागत सहयोग प्रदान किया.



