वाराणसी में टेंट सिटी लगाने वालों की अब खैर नहीं, लगेगा भारी भरकम जुर्माना

Varanasi News: अस्सी घाट के गंगा की तलहटी में बसाई गई टेंट सिटी को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानि (एनजीटी) ने अवैध करार दिया है. जहां एनजीटी द्वारा दिए गए आदेश में ये साफ कहा गया है कि, नदी के बाढ़ क्षेत्र नदी के तट और बाढ़ क्षेत्र में टेंट सिटी का निर्माण और संचालन पर्यावरणीय नियमों, गंगा संरक्षण कानूनों और ट्रिब्यूनल के पूर्व आदेशों का खुला उल्लंघन था, इसलिए भविष्य में गंगा के तट पर किसी भी तरह का टेंट सिटी बसाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

ट्रिब्यूनल ने यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानि (यूपीपीसीबी) और पर्यावरण, वन समेत जलवायु परिवर्तन विभाग को निर्देश दिया है कि, दोनों टेंट सिटी संचालकों से लगाई गई 34.24 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तीन माह के भीतर वसूली जाए, यह आदेश एनजीटी की प्रधान पीठ नई दिल्ली ने तुषार गोस्वामी बनाम भारत संघ व अन्य में पारित किया गया. इस मामले की सुनवाई 12 दिसंबर 2025 को पूरी हुई थी, जबकि फैसला 8 जनवरी 2026 को सुनाया गया था.

"काशी में विकास जरूरी पर उल्लंघन नहीं"
वहीं ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि काशी में विकास आवश्यक है, लेकिन गंगा की अविरलता, निर्मलता और जैव विविधता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है. बता दें, अस्सी घाट के सामने गंगा नदी के दाहिने तट और नदी तल पर दो निजी कंपनियों प्रवेज कम्युनिकेशंस (इंडिया) लिमिटेड और निरान टेंट सिटी को पर्यटन उद्देश्य से टेंट सिटी विकसित करने की अनुमति दी गई थी, यह टेंट सिटी जनवरी 2023 से मई 2023 तक संचालित रहीं, टेंट सिटी के लिए भूमि वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के माध्यम से दी गई थी.

गौरतलब है कि, एनजीटी के आदेश पर गठित हुए सात सदस्यीय संयुक्त समिति ने स्थल निरीक्षण के बाद गंभीर उल्लंघनों की पुष्टि की है. समिति ने पाया कि दोनों टेंट सिटी बिना अनुमति के संचालित की जा रही थीं. गंगा के नदी तल पर ईंट से बने स्थायी सीवेज चैंबर बनाए गए थे, जिनमें नीचे कोई अभेद्य लाइनिंग नहीं थी.

इससे गंदे पानी के रिसाव और नदी प्रदूषण का खतरा बना रहा. समिति ने इन चैंबरों को नदी तल पर बने सोक पिट जैसा बताया. इसके अलावा गंगा के मुख्य प्रवाह में अस्थायी जेटी बनाई गई, मोटर बोट्स का संचालन हुआ और डीजल जनरेटर सेट निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। यह स्थिति गंगा की जल गुणवत्ता और जलीय जीवों के लिए गंभीर खतरा मानी गई.



