वाराणसी परिक्षेत्र में हजारों यात्रियों ने मुफ्त बस सेवा का उठाया लाभ, सहयोगी को भी मिली सुविधा....

वाराणसी : रक्षाबंधन के अवसर पर राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) की ओर से महिलाओं को दी गई तीन दिवसीय मुफ्त बस यात्रा सुविधा का व्यापक असर देखने को मिला. दो दिनों में वाराणसी परिक्षेत्र में 31,685 यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ उठाया. इनमें 21,181 महिला यात्री और उनके साथ सफर करने वाले 10,504 सहायक शामिल रहे.
रक्षाबंधन के चलते गुरुवार रात से ही रोडवेज बसों में यात्रियों की भीड़ बढ़ गई थी. शुक्रवार को भी अधिकांश प्रमुख रूटों पर बसें यात्रियों से भरी रहीं. मुफ्त यात्रा सुविधा मिलने के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं अपने मायके और अन्य गंतव्यों के लिए रवाना हुईं. इससे सामान्य दिनों की तुलना में यात्रियों की संख्या में काफी इजाफा दर्ज किया गया. सबसे ज्यादा परेशानी लंबी दूरी के कुछ रूटों पर देखने को मिली. गोरखपुर जाने वाली बसों में भीड़ के कारण महिला यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा. गाजीपुर और जौनपुर जाने वाली बसों में भी बड़ी संख्या में महिलाओं को बैठने की जगह नहीं मिल सकी. कई यात्रियों को मजबूरी में निजी बसों का सहारा लेना पड़ा.
मिर्जापुर और प्रयागराज जाने वाली बसों में भी यात्रियों की भारी भीड़ रही. विंध्याचल जाने वाली बसों में भी कई महिला यात्रियों को जगह नहीं मिल पाई. बसों में सीटों के लिए यात्रियों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा. कुछ रूटों पर अतिरिक्त बसें चलाए जाने के बावजूद भीड़ कम नहीं हो सकी.
रोडवेज अधिकारियों के अनुसार, रक्षाबंधन पर यात्रियों की संभावित भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त बसों और फेरों की व्यवस्था पहले से की गई थी. इसके बावजूद प्रमुख मार्गों पर यात्रियों की संख्या सामान्य से कई गुना बढ़ने के कारण दबाव बढ़ गया.
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क्षेत्रीय प्रबंधक परशुराम पांडेय ने बताया कि त्योहार के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त बसें और फेरे लगाए गए. रोडवेज का पूरा प्रयास रहा कि महिला यात्रियों को कम से कम असुविधा हो और उन्हें समय पर उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा सके. उन्होंने बताया कि दो दिनों में 31,685 यात्रियों को मुफ्त यात्रा सुविधा का लाभ मिला.
रक्षाबंधन के चलते बस अड्डों पर भी दिनभर यात्रियों की भीड़ रही. बड़ी संख्या में महिलाएं बच्चों और परिजनों के साथ यात्रा करती नजर आईं. मुफ्त यात्रा सुविधा से महिलाओं को राहत मिली, लेकिन कई रूटों पर क्षमता से अधिक यात्रियों के कारण उन्हें परेशानी भी झेलनी पड़ी.



