Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

वाराणसी के सामने घाट पर होगा क्रूज टर्मिनल का निर्माण, नगर निगम देगा दो एकड़ भूमि

वाराणसी के सामने घाट पर होगा क्रूज टर्मिनल का निर्माण, नगर निगम देगा दो एकड़ भूमि
May 05, 2026, 07:48 AM
|
Posted By Preeti Kumari

A cruise terminal will be built on the ghat in front of Varanasi; the municipal corporation will provide two acres of land.


वाराणसी: काशी को एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय जल परिवहन केंद्र में भी विकसित करने की तैयारी है. इस क्रम में लंबे समय से प्रतीक्षित सामने घाट क्रूज टर्मिनल के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. नगर निगम की कार्यकारिणी समिति ने सामने घाट स्थित दो एकड़ भूमि भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्यू एआई) को देने के लिए सैद्धांतिक रूप से सशर्त सहमति प्रदान कर दी है. शर्त यह है कि प्राधिकरण को इस बेशकीमती भूमि का किराया डीएम सर्किल रेट के आधार पर देना होगा, अन्यथा निर्मित होने वाले टर्मिनल भवन का एक फ्लोर निगम को आवंटित करना होगा. इससे निगम के राजस्व में वृद्धि होगी और सरकारी संपत्तियों का उचित मुद्रीकरण सुनिश्चित हो सकेगा.


h


टर्मिनल से गंगा के उस पार पर्यटकों की बढ़ेगी आवाजाही


बहरहाल निगम के इस निर्णय से न केवल क्रूज संचालन को व्यवस्थित आधार मिलेगा, बल्कि बनारस के पर्यटन और बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है. आराजी संख्या 316/25 की दो एकड़ भूमि पर बनने वाला यह प्रोजेक्ट काशी को स्मार्ट सिटी से आगे बढ़कर एक ग्लोबल टूरिस्ट हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. यह टर्मिनल न केवल गंगा की लहरों पर पर्यटन को सुगम बनाएगा, बल्कि बनारस की अर्थव्यवस्था में भी एक नया अध्याय जोड़ेगा. अभी तक अधिकांश क्रूज और नावों का संचालन मुख्य घाटों तक सीमित था, जिससे वहां भारी दबाव रहता था. इस टर्मिनल के बनने से गंगा के उस पार और सामने घाट क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे स्थानीय हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों को नए अवसर मिलेंगे. क्रूज संचालन, टर्मिनल प्रबंधन, और संबंधित सेवाओं (होटल, गाइड, परिवहन) के माध्यम से सैकड़ों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा. यह टर्मिनल भविष्य में वॉटर टैक्सी और अन्य जल परिवहन सेवाओं के लिए मुख्य पड़ाव बनेगा, जिससे शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा.


सेवा बस्तियों का कायाकल्प


निगम शहर के सेवा बस्तियों (मलीन बस्ति‍यों ) का सर्वे शुरू कर दिया है. इसमें शिवपुर स्थित कांशीराम आवास भी शामिल है. इन बस्तियों में सितंबर-अक्टूबर तक बिजली, सड़क, नाली और शुद्ध पेयजल सहित अन्यर मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने का का लक्ष्य है. वहीं 67 लाख रुपये की लागत से ऐढ़े स्थित गौशाला के पीछे खाली जमीन पर नई चाहरदीवारी और गौशाला का निर्माण कराया जाएगा. गौशाला के विस्तार से निराश्रित गोवंश को बेहतर आश्रय मिल सकेगा.


f


Also Read: CM योगी का दो दिवसीय वाराणसी दौरा, कानून व्‍यवस्‍था और विकास कार्यों की करेंगे समीक्षा


1.52 करोड़ रुपये की लागत से परेड कोठी में बनेगा पार्किंग स्‍थल


कार्यकारिणी ने शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए कुछ प्रोजेक्टों का निर्माण अवस्थापना विकास निधि से कराने की हरी झंडी दी गई है. इसमें 98.,59 लाख रुपये की लागत से (नदेसर) दैनिक जागरण कार्यालय के पास रेलवे लाइन के किनारे नाला निर्माण, चौकीदार कक्ष और शौचालय बनाने के साथ-साथ परिसर में इंटरलॉकिंग का कार्य शामिल है. वहीं कैंटोमेंट क्षेत्र में 44.96 लाख रुपये की लागत से चौकीदार कक्ष, शौचालय, सबमर्सिबल और नाली निर्माण का कार्य प्रस्तावित है. साथ ही करीब 1.52 करोड़ रुपये की लागत से परेड कोठी में पार्किंग, ऑफिस कक्ष, वर्कशॉप शेड और अन्य निर्माण कार्य कराए जाएंगे.


s


बीएचयू में फाइन आर्ट्स के छात्रों का धरना, प्रैक्टिकल कॉपियों की दोबारा जांच की मांग
बीएचयू में फाइन आर्ट्स के छात्रों का धरना, प्रैक्टिकल कॉपियों की दोबारा जांच की मांग
वाराणसी : बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय के बाहर मंगलवार को बीएफए के छात्र-छात्राओं ने विभिन्‍न मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया. हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर पहुंचे विद्यार्थियों ने प्रायोगिक परीक्षा में कथित अनियमितता का आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. छात्रों की मुख्य मांग है कि बीएफए प्रैक्टिकल की कॉपियों की दोबारा जांच कराई जाए और मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए. प्रदर्शन की सूचना पर प्राक्टोरियल बोर्ड की टीम भी मौके पर पहुंची.प्रदर्शन कर रहे छात्राें ने कहा कि प्रैक्टिकल परीक्षा में विद्यार्थियों को उनकी अपेक्षा के विपरीत बेहद कम अंक दिए गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 400 अंकों के प्रैक्टिकल में कई छात्रों को 100, 200 या उसके आसपास अंक मिले हैं. छात्रों का कहना है कि पिछले वर्ष जिन विद्यार्थियों को उनके कार्य के आधार पर अच्छे अंक मिले थे, इस वर्ष उन्हीं के अंकों में काफी गिरावट आई है. छात्रा नसी चंद ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले वर्ष उनके प्रैक्टिकल में 350 अंक आए थे, जबकि इस बार 215 अंक दिए गए. उन्होंने सवाल उठाया कि एक साल की मेहनत और पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष किए गए कार्य के बावजूद अंकों में इतनी बड़ी गिरावट किस आधार पर हुई.एक अन्य छात्र ने बताया कि पिछले वर्ष उसे 365 अंक मिले थे, जबकि इस बार करीब 240 अंक दिए गए. छात्रों ने कहा कि उनके पास पिछले और इस वर्ष के बनाए गए आर्टवर्क मौजूद हैं. प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने अपने काम भी दिखाए और दावा किया कि मूल्यांकन के बाद मिले अंकों को देखकर उन्हें पूरी प्रक्रिया पर संदेह हो रहा है.ALSO READ : वाराणसी में मौतों का मंगलवार : बारिश के दौरान हादसों में दंपती समेत पांच की मौत, करंट और जर्जर दीवार बनी वजहतीन प्रमुख मांगें रखींछात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. पहली, सभी प्रैक्टिकल कॉपियों की दोबारा जांच कराई जाए. दूसरी, जब तक री-चेकिंग पूरी नहीं होती, तब तक फीस भुगतान की प्रक्रिया रोकी जाए. तीसरी, 400 अंकों के प्रैक्टिकल में मूल्यांकन और अंक देने का स्पष्ट आधार विद्यार्थियों के सामने रखा जाए. छात्रों का कहना है कि उन्हें यह जानकारी मिलनी चाहिए कि किस आधार पर अंक काटे गए और अलग-अलग विद्यार्थियों के कार्य का मूल्यांकन किस पैमाने से किया गया.
वाराणसी में मौतों का मंगलवार : बारिश के दौरान हादसों में दंपती समेत पांच की मौत, करंट और जर्जर दीवार बनी वजह
वाराणसी में मौतों का मंगलवार : बारिश के दौरान हादसों में दंपती समेत पांच की मौत, करंट और जर्जर दीवार बनी वजह
वाराणसी : शहर के लिए मंगलवार की सुबह अमंगल भरी रही. भारी बारिश के दौरान अलग - अलग हादसों में दंपती समेत पांच लोगों की मौत हो गई. कहीं करंट तो कहीं जर्जर दीवार और मकान हादसों की वजह बनी. मंडुवाडीह थाना क्षेत्र के चांदपुर इंडस्ट्रियल क्षेत्र में सुबह दर्दनाक हादसा हो गया. पोस्ट ऑफिस के पास स्थित एक पुराने मकान की जजर्र दीवार अचानक भरभराकर गिर गई. मलबे में दबने से दंपती की मौके पर ही मौत हो गई. मृतकों की पहचान रविन्द्र मिश्र (62 वर्ष) और उनकी पत्नी प्रतिमा देवी (55 वर्ष) के रूप में हुई है.बताया जा रहा है कि दंपती मूल रूप से झारखंड के गढ़वा जिले के डुमरिया के रहने वाले थे. पिछले कई वर्षों से वह चांदपुर इंडस्ट्रियल क्षेत्र में रहकर मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे. जिस कैंपस में वे रहते थे, वह राजेश दौलिया का बताया जा रहा है. वहीं एक हिस्से में दीवार बनी हुई थी, जो बारिश के कारण कमजोर हो गई थी. परिजनों के अनुसार दोनों पति-पत्नी चांदपुर स्थित कैपकोन कंपनी में काम करते थे, जहा वायर बनाने का काम होता है. उनका बेटा आनंद मिश्र भी चांदपुर की ही एक कंपनी में काम करता है. सोमवार रात उसकी नाइट ड्यूटी थी. सुबह जब वह ड्यूटी से लौटा तो देखा कि घर की दीवार गिर गई है और उसके माता-पिता मलबे में दबे हुए हैं. यह देख उसके होश उड़ गए. उसने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया और तुरंत पुलिस को सूचना दी.सूचना के बाद मंडुवाडीह थाना प्रभारी अजय राज वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. इसके साथ ही फायर विभाग, एनडीआरएफ और स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पहुंच गई. टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को मलबे से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. थाना प्रभारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया बारिश के कारण दीवार कमजोर होने से हादसा हुआ है. मामले की जांच की जा रही है. घटना के बाद से क्षेत्र में शोक का माहौल है.सीर गोवर्धन में कच्‍चा मकान गिरालंका थाना क्षेत्र के सीर गोवर्धन (वार्ड नंबर 23) में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर करती एक दर्दनाक घटना सामने आई है. हरिजन बस्ती में भारी बारिश के कारण एक कच्चा मकान अचानक जमींदोज हो गया. इस हादसे में मकान मालिक और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गए. जानकारी के अनुसार सुबह करीब 5 बजे राम जी का कच्चा मकान बारिश की वजह से अचानक भरभराकर गिर पड़ा. उस वक्त राम जी अपनी पत्नी के साथ अंदर सो रहे थे. तेज आवाज सुनकर पहुंचे स्थानीय निवासियों ने तत्परता दिखाते हुए मलबे से दंपती को बाहर निकाला और तुरंत इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया. हादसे में उनके बेटा-बेटी को भी हल्की चोटें आई हैं. वहीं, मलबे में दबने से परिवार की एक पालतू बकरी और दो कुत्तों की मौके पर ही मौत हो गई. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सीर गोवर्धनपुर में आज भी करीब 100 से अधिक परिवार कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं. लगातार हो रही बारिश से इन मकानों के ढहने की आशंका बनी हुई है. क्षेत्रवासियों का सवाल है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए और कोई बड़ी जनहानि हुई, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा.घटना के बाद मौके पर तुरंत प्रशासनिक मदद न पहुंचने से लोगों में काफी नाराजगी देखी गई. मौके पर पहुंचे वार्ड नंबर 23 के सभासद राम सिंह यादव उर्फ 'कल्लू' ने प्रभावित परिवार से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं. उन्होंने कहा कि वह संबंधित लेखपाल से बात कर पात्र परिवारों की सूची तैयार करवाएंगे, ताकि जिन जरूरतमंदों को अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है, उन्हें जल्द से जल्द पक्का मकान स्वीकृत कराया जा सके. क्षेत्र के निवासियों ने वाराणसी प्रशासन से मांग की है कि पूरी बस्ती का तुरंत सर्वे कराकर जर्जर और कच्चे मकानों को चिन्हित किया जाए और पात्र गरीबों को तत्काल आवास योजना के तहत राहत प्रदान की जाए.करंट की चपेट में आने से तीन की मौतवाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र के लल्लापुरा स्थित काजीपुर खुर्द में मंगलवार सुबह बारावफात की सजावट के दौरान करंट की चपेट में आने से पिता-पुत्र की मौत हो गई. जानकारी के अनुसार, सलीमुद्दीन उर्फ पप्पू (45) अपने 17 वर्षीय बेटे अनस के साथ घर के सामने बारावफात की सजावट कर रहे थे. इसी दौरान अनस करंट की चपेट में आ गया. बेटे को बचाने के प्रयास में पिता सलीमुद्दीन भी करंट की चपेट में आ गए. हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं, वाटर कूलर में उतरे करंट की चपेट में आने से चेतगंज निवासी करीब 55 वर्षीय मोदनवाल की भी मौत हो गई. घटना के बाद तीनों को कबीरचौरा स्थित श्री शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय ले जाया गया. चिकित्सालय के प्रमुख अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार के अनुसार, तीनों की मौत करंट लगने से हुई है.ALSO READ : संपूर्णानंद विश्वविद्यालय परिसर से निकली तिरंगा यात्रा, ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से गूंजा मार्ग जलजमाव ने बढाई दुश्‍वारीभारी बारिश से बीएचयू में कई पेड़ गिर पड़े. सरसुंदर लाल अस्‍पताल पानी-पानी हो गया. मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. बीती रात से शुरू हुई झमाझम बारिश के बाद नगर निगम की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खुलती नजर आ रही है. बनारस के कई क्षेत्रों में जल जमाव होने के कारण स्थानीय लोगों को ढेरों परेशानी का सामना करना पड़ा. वहीं आदमपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला तेलियाना में बारिश का पानी अभी तक सड़कों पर जमा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जलभराव की समस्या का समाधान नहीं किया गया और पानी की निकासी नहीं हुई, तो आने वाली बारिश में स्थिति और गंभीर हो सकती है. सड़कों पर पहले से जमा पानी के कारण लोगों को आशंका है कि तेज बारिश होने पर पानी घरों और दुकानों में घुस सकता है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. पिंडरा तहसील परिसर में बारिश का पानी भरने से फरियादियों और अधिवक्ताओं को आने जाने में दिक्कत का सामना करना पडा. एक दिन के बारिश ने तहसील प्रशासन के पानी निकासी के तमाम दावों की पोल खोल दी. प्रदेश की नम्बर वन तहसील की व्यवस्था हवा हवाई मिली.
संपूर्णानंद विश्वविद्यालय परिसर से निकली तिरंगा यात्रा, ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से गूंजा मार्ग
संपूर्णानंद विश्वविद्यालय परिसर से निकली तिरंगा यात्रा, ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से गूंजा मार्ग
वाराणसी: सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में राष्ट्रभाव, अनुशासन और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रतिदिन तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है, साहित्य संस्कृति संकायाध्यक्ष एवं मुख्य छात्रावास के चीफ वार्डन प्रो. दिनेश कुमार गर्ग के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा विश्वविद्यालय के मुख्य भवन से शुरू होकर लहुराबीर स्थित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा तक पहुंच रही है.यात्रा में विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस स्वयंसेवक और स्काउट-गाइड के विद्यार्थी हाथों में तिरंगा लेकर उत्साह और अनुशासन के साथ शामिल हो रहे हैं। इस दौरान ‘भारत माता की जय’ समेत देशभक्ति के जयघोष से पूरा मार्ग राष्ट्रप्रेम की भावना से गूंज उठता है.प्रो. दिनेश कुमार गर्ग ने कहा कि तिरंगा केवल राष्ट्रध्वज नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता, गौरव, एकता और अखंडता का जीवंत प्रतीक है, युवाओं के हाथों में तिरंगा देश के उज्ज्वल भविष्य के प्रति विश्वास जगाता है. उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध, अनुशासन, त्याग और समर्पण की भावना को मजबूत करना है.उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा तक यात्रा पहुंचाना विद्यार्थियों को स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और राष्ट्रनिष्ठा से जोड़ने का माध्यम है, संस्कृत विश्वविद्यालय केवल शिक्षा और ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रचेतना और संस्कारों का भी महत्वपूर्ण केंद्र है.ALSO READ: बारावफात की सजावट के दौरान करंट की चपेट में पिता-पुत्र की मौत, वाटर कूलर से करंट लगने पर एक और व्यक्ति ने गंवाई जानतिरंगा यात्रा में डॉ. विजेन्द्र आर्य, डॉ. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. नितिन कुमार आर्य समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं. हाथों में लहराता तिरंगा, विद्यार्थियों का अनुशासन और देशभक्ति के उद्घोष यात्रा को विशेष बना रहे हैं.विश्वविद्यालय के अनुसार, यह यात्रा विद्यार्थियों के लिए राष्ट्र के प्रति सम्मान, शहीदों के प्रति कृतज्ञता और भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के प्रति संकल्प का प्रेरणादायी अभियान बन गई है.