गंगा थीम पर बनेगा वाराणसी नगर निगम का नया हाईटेक सदन भवन, 12 महीने में होगा तैयार...

वाराणसी:सिगरा स्थित नगर निगम परिसर में जल्द ही काशी की संस्कृति और आधुनिक तकनीक का संगम देखने को मिलेगा. पुराने जर्जर भवन की जगह अब अत्याधुनिक नगर निगम सदन भवन का निर्माण शुरू हो गया है. करीब 96.99 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह नया भवन गंगा थीम और शिवलिंग स्वरूप डिजाइन पर आधारित होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ईपीसी मोड पर तैयार किया जाएगा.
बुधवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल की मौजूदगी में निर्माण स्थल पर विधिवत पूजन-अर्चन के साथ शिलापट्ट स्थापित किया गया। इस दौरान निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत हुई. प्रधानमंत्री द्वारा 28 अप्रैल को बरेका मैदान से इस परियोजना की वर्चुअल आधारशिला रखी गई थी.

12 हजार वर्ग मीटर में बनेगा नया प्रशासनिक केंद्र
बी+जी+4 स्वरूप में बनने वाला यह भवन 12 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला होगा. भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसकी नींव सात मंजिल तक के भार को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है. भवन में 180 पार्षदों की क्षमता वाला आधुनिक सदन हॉल बनाया जाएगा. इसके साथ ही पर्यावरण, लाइसेंस और न्याय विभाग के कार्यालय भी इसी परिसर में होंगे.
भूतल पर रिकॉर्ड रूम, कैश काउंटर, मीटिंग रूम और ग्रीन रूम बनाए जाएंगे, जबकि दूसरे तल पर महापौर, नगर आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय, कॉन्फ्रेंस रूम और वीवीआईपी रूम होंगे. तीसरे और चौथे तल पर विभिन्न प्रशासनिक विभागों के कार्यालय और प्रतीक्षा कक्ष तैयार किए जाएंगे.
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एक ही छत के नीचे मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
नए नगर निगम परिसर में यूनियन हॉल, पुलिस चौकी, बैंक, पोस्ट ऑफिस, सर्वर रूम, पीआर कक्ष, कैंटीन और टैक्स कलेक्शन सेंटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी.परिसर में डेटा सर्वर सेंटर और सीसीटीवी आधारित सुरक्षा व्यवस्था भी विकसित की जाएगी.
टाउनहॉल की निर्भरता होगी खत्म
अब तक नगर निगम के पास बड़ा सदन हॉल नहीं होने के कारण बैठकों के लिए टाउनहॉल पर निर्भर रहना पड़ता था. नया भवन तैयार होने के बाद अधिकारियों और पार्षदों को बड़ी राहत मिलेगी और सभी प्रशासनिक गतिविधियां एक ही परिसर में संचालित की जा सकेंगी.
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि यह भवन काशी की गरिमा और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप बनाया जा रहा है. उन्होंने कार्यदायी संस्था को 12 महीने के भीतर गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए हैं.




