वाराणसी में साइबर ठगी से निपटने की तैयारी, महिलाएं मास्टर ट्रेनर बनकर सिखाएंगी बचाव के गुर

वाराणसी : साइबर ठगी से निपटने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम ) के तहत बडी तैयारी की गई है. करीब 16 हजार स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं 1.9 लाख महिलाओं को साइबर ठगी से बचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाने की योजना है. वहीं, 35 महिलाओं को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जा रहा. वह गांव में समूह की महिलाओं को साइबर क्राइम से बचने का तरीका बताएंगी. इसके अलावा सांप सीढ़ी खेल के जरिए वित्तीय अनुशासन का भी पाठ पढ़ाएंगी. महिलाएं हर माह करोड़ों रुपये का बैंकिंग लेनदेन करती हैं और जानकारी के अभाव में उनके साइबर ठगों के झांसे में आने की ज्यादा संभावना रहती है.
खेल के माध्यम से करेंगी जागरूक
समस्त विकास खंड में संकुल स्तर पर प्रशिक्षण सेंटर भी खुल चुके हैं. 35 महिलाएं संकुल स्तर पर मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण ले रही हैं. वह ग्राम पंचायत स्तर पर वित्तीय साक्षरता कैंप लगाएंगी. रिवाल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश निधि, जोखिम निवारण, आजीविका निधि के मद में दिए जाने वाले करोड़ों रुपये के वित्तीय अनुशासन की भी जानकारी देंगी. डिजिटल फ्राड, डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी के सही उपयोग, चेक भरते समय ध्यान देने वाली जानकारी, आइडियल फंड के बारे में भी बताया जाएगा.
इसके साथ महिलाएं सांप-सीढ़ी खेल के माध्यम से बैंकिंग की अच्छी व बुरी आदतों के बारे में जागरूक करेंगी. महिलाएं इस खेल के जरिए वित्तीय अनुशासन को आसानी से समझ भी सकेंगी.
साइबर ठगी के नौ तरीके
- डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग और फर्जी लिंक
- फेक इन्वेस्टमेंट और पोंजी स्कीम्स, पार्ट-टाइम जाब स्कैम
- एपीके फाइल फ्राड, बास स्कैम-सीईओ फ्रॉड
- यूपीआइ और क्यूआर कोड फ्राड, एक्सटार्शन और हनीट्रैप
- पार्सल या कूरियर स्कैम
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उप निदेशक स्वत: रोजगार पवन कुमार सिंह का कहना है कि समूहों के जरिए हर माह करोड़ों रुपये का लेनदेन होता है. इन्हें जागरूक करना जरूरी है. बेंगलुरू की कार्यशाला भी साइबर का्रइम पर केंद्रित था. 35 महिलाओं को मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. ये ग्राम पंचायतों में समूहों से जुड़ीं 1.9 लाख महिलाओं को साइबर क्राइम से बचाव के टिप्स देंगी.



