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वाराणसी के वैज्ञानिक अनुराग चौरसिया हुए "Honour of Ashoka Award 2025" से सम्मानित

वाराणसी के वैज्ञानिक अनुराग चौरसिया हुए "Honour of Ashoka Award 2025" से सम्मानित
Oct 13, 2025, 10:08 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत कार्यरत भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी के वैज्ञानिक डॉ. अनुराग चौरसिया को देश की नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान के लिए "Honour of Ashoka Award 2025" से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान "Charls Walter Council of Innovation & Research" और "Association of Indian Bureaucrats" द्वारा आयोजित एक संयुक्त समारोह में इंडिया हैबिटेट सेंटर, लोधी रोड, नई दिल्ली में प्रदान किया गया. इस अवसर पर भारतीय सेना के तीनों अंगों के प्रमुख और देश के 13 उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश भी उपस्थित थे।


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ज्यूरी ने की इनके योगदान की सराहना

इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए ज्यूरी में शामिल गणमान्य व्यक्तियों ने अनुराग चौरसिया के भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy), विज्ञान नीति (Science Policy) और जीन संशोधित फसलों (GMO Policy) के निर्माण में किए गए योगदान की सराहना की. गौरतलब है कि डॉ. चौरसिया के शोध लेख दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका ‘Nature’ में प्रकाशित हो चुके हैं, जिन्हें वैश्विक स्तर पर व्यापक प्रशंसा प्राप्त हुई. उनके लेखों ने भारत की नीति निर्माण प्रक्रिया में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मज़बूती दी है।


पूर्व में भारत रत्न से सम्मानित हस्तियों ने दिया था प्रशंसा-पत्र


उल्लेखनीय है कि देश की पॉलिसी निर्माण में सहायता मिलने पर भारत रत्न डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन और डॉ. कस्तूरीरंगन ने भी डॉ. चौरसिया को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रशंसा-पत्र (Appreciation Letter) प्रदान किया था.


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इनकी रही विशेष उपस्थिति


इस समारोह में देश के विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ सचिवों और उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी "Honour of Ashoka Award" से सम्मानित किया गया. पूर्व राज्यपाल तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने यह अवार्ड अनुराग चौरसिया के देश के पॉलिसी जैसे की नेशनल एजुकेशन पॉलिसी साइंस पॉलिसी GMO पॉलिसी के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करते हुए दिया. जजिंग कमेटी में 13 हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तीनों आर्मी के प्रमुख शामिल हैं.

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पहला दिन आज, इन मंत्रों के साथ करें कलश स्थापना
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पहला दिन आज, इन मंत्रों के साथ करें कलश स्थापना
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज यानी 19 मार्च से शुरू हो चुका है. यह नौ दिनों का त्योहार मां दुर्गा की आराधना और भक्ति का दिन माना जाता है. इस दौरान भक्त पूरे श्रद्धा भाव के साथ माता रानी के नौ स्वरूपों की पूजा-अराधना करते है. जहां सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना यानी कलश स्थापना के साथ की जाती है. मान्यता है कि कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा का घर में आगमन होता है. ऐसे में आइए जानते हैं कलश स्थापना का शुभ समय, सही तरीका, साथ ही जानेंगे कलश स्थापना करते समय किन मंत्रों का जाप करना चाहिए.कलश स्थापना का समय पंचांग के अनुसार, 19 मार्च को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 52 मिनट तक है. यदि किसी कारणवश इस समय पूजा करना संभव न हो, तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में भी यह शुभ कार्य किया जा सकता है. अभिजीत मुहूर्त दोपहर, 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा.कैसे करें कलश स्थापनापूजा की शुरुआत हमेशा भगवान गणेश के ध्यान से करनी चाहिए. ऐसा माना जाता है कि बिना गणेश जी की पूजा के कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं होता.सबसे पहले पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें. इसके साथ 'ओम अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।।' मंत्र का जाप करना चाहिए. कलश स्थापना करने के लिए हल्दी से अष्टदल बनाएं. इसके बाद एक मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं.यह भी पढ़ें: दिल्ली के इस इमारत में भीषण आग, नौ लोगों को रेस्क्यू करने में जुटी फायर ब्रिगेडजौ को समृद्धि और उन्नति का प्रतीक माना जाता है. अब एक कलश लें, उस पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और मौली बांधें. कलश में स्वच्छ जल भरकर उसमें गंगाजल की कुछ बूंदें डालें. साथ ही सिक्का, हल्दी, सुपारी, अक्षत, पान, फूल और इलायची भी डालें.इसके ऊपर आम के पत्ते रखें और फिर लाल चुनरी में लिपटा नारियल कलश पर स्थापित करें. यही कलश मां दुर्गा का प्रतीक माना जाता है.कलश स्थापना करते हुए करें इन मंत्रों का जाप ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः, मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताःॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितःमूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताःकुक्षौ तु सागराः सर्वे सप्तद्वीपा वसुन्धरा,ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेदः सामवेदो ह्यथर्वणः
हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ आज से, इस साल 12 नहीं 13 महीने...
हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ आज से, इस साल 12 नहीं 13 महीने...
हिन्दू नववर्ष: भारत में आज से हिंदू नववर्ष की शुरुआत हो चुकी है.पूरे देश में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ लोग नववर्ष का स्वागत कर रहे हैं.मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हो रही है, वहीं घर-घर में मंगलकामनाओं के साथ नए साल की शुरुआत की जा रही है.हिंदू नववर्ष केवल एक कैलेंडर परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल बैठाकर चलने वाली जीवन शैली का प्रतीक है.इस समय प्रकृति भी नए रूप में दिखाई देती है.पतझड़ के बाद वृक्ष अपने पुराने पत्तों को त्याग देते हैं और वसंत ऋतु में नई कोपलें जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती हैं.इसी तरह यह नववर्ष भी हमें पुरानी नकारात्मकताओं को छोड़कर सकारात्मक सोच और नए उत्साह के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है. अगर आर्थिक दृष्टि से देखें, तो इस पर्व का बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी खासा प्रभाव पड़ता है. नववर्ष के मौके पर लोग नए वस्त्र, आभूषण, वाहन और घरेलू सामान की खरीदारी करते हैं, जिससे बाजार में रौनक बढ़ जाती है.मंदिरों में पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजन...मंदिरों में पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों के चलते फूल विक्रेताओं, मिठाई दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को विशेष लाभ मिलता है.इसके अलावा, कृषि प्रधान समाज में यह समय नई फसलों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है.इस तरह हिंदू नववर्ष आस्था के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाला पर्व है, जो समाज को सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से जोड़ने का काम करता है.शुक्ल योग-उत्तरभाद्रपद नक्षत्र में हिन्दू नववर्ष 2083 का शुभारंभहिन्दू नववर्ष 2083 का शुभारंभ शुक्ल योग और उत्तरभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है. आज शुक्ल योग प्रात:काल से लेकर देर रात 01:17 ए एम तक है. वहीं उत्तरभाद्रपद नक्षत्र भी प्रात:काल से लेकर कल 04:05 ए एम तक है. उसके बाद से रेवती नक्षत्र है.ALSO READ : स्कूल संचालक के साथ जमकर मारपीट, अटेंडेंस को लेकर छिड़ा विवादहिन्दू नववर्ष 2083 में 12 नहीं 13 महीनेइस बार हिन्दू नववर्ष में 12 की जगह पर 13 महीने होंगे. ज्येष्ठ माह में एक अधिकमास जुड़ जाएगा, इसकी वजह से 12 के स्थान पर 13 महीने होंगे. अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. यह जिस माह के साथ जुड़ता है, उसमें कृष्ण पक्ष के बाद अधिक मास का शुक्ल पक्ष 15 तिथियों तक होता है.
दिल्ली के इस इमारत में भीषण आग, नौ लोगों को रेस्क्यू करने में जुटी फायर ब्रिगेड
दिल्ली के इस इमारत में भीषण आग, नौ लोगों को रेस्क्यू करने में जुटी फायर ब्रिगेड
राजधानी दिल्ली में साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के साध नगर इलाके में आज सुबह भीषण आग लग गई. जिसके चलते इलाके में हंगामा मच गया. ये आग साध नगर इलाके में स्थित एक इमारत में लगी है, जहां देखते ही देखते आग ने भयानक रूप ले लिया. जिससे चारों तरफ आग की लपटे तेजी से फैल गई. इसी के चलते एक ही परिवार के 9 लोग बुरी तरह से फंस गए हैं.घटना मामले की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस संग दमकल विभाग ने घटनास्थल का जायजा लिया और बिल्डिंग के अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत बचाव अभियान चलाया. इसी के साथ ही फायर ब्रिग्रेड की गाड़ियों ने आग बुझाने में जुट गई, लेकिन कई घंटों के बाद भी आग को बुझाया नहीं जा सका, क्योंकि भयकंर तरीके से लगी आग ने विकराल रूप ले लिया था, जिस पर काबू पाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.आग पर काबू पाने की कोशिश मामले की जांच-पड़ताल में जुटी पुलिस के मुताबिक, बिल्डिंग में लगी आग ने भयानक रूप ले लिया, जिसके धुंए का गुब्बारा आसमान में उठने लगा. जिसकी भनक लगते ही लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया, ग्रामीणों की सूचना मिलते ही दमकल विभाग द्वारा आग पर काबू पाने की कोशिश की गई.पहले भी झुलस चुका है दिल्ली की ये इलाका दिल्ली के इलाके में लगी ये आग का कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी हूबहू ऐसा ही मामला देखने को मिला, जी हां, बीते 6 दिन पहले उत्तम नगर के मछली मंडी इलाके में भी भयानक आग ने तबाही मचा रखी थी, जहां दुकानें और झुग्गी-झोपड़ियों को आग ने अपनी चपेट में ले लिया था, जब तक दमकल विभाग पहुंचा तब-तक काफी कुछ जल कर राख हो चुका था.यह भी पढ़ें: योगी सरकार के नौ साल पूरे, स्टाम्प मंत्री ने गिनाई कई उपलब्धियां...मगर देर से पहुंची बचाव दल ने घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, जबकि नुकसान का सही आंकलन अब तक सामने नहीं आ पाया है. हालांकि इस दौरान 300 से 400 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं. मटियाला के पास स्थित इस घनी बस्ती में गर्मी के चलते आग तेजी से फैली और पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया, जबकि आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है.