वर्षों से श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पुनर्गठन की फाइल अटकी, सिर्फ काेरम हो रहा पूरा...

वाराणसी : श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का मामला पिछले 19 महीनों से शासन स्तर पर अटका हुआ है. इस महत्वपूर्ण न्यास में सदस्यता पाने के लिए काशी के कई विद्वानों और धर्मगुरु कतार में हैं. सूत्रों के अनुसार, मंदिर प्रशासन द्वारा भेजी गई पहली सूची शासन को पसंद नहीं आई, जिसके बाद लगभग पांच महीने पहले एक दूसरी सूची भेजी गई, लेकिन वह भी अब तक अधर में है. इस बीच, केवल पदेन अध्यक्ष और सदस्यों के भरोसे ही बैठकों का कोरम पूरा कर मंदिर प्रबंधन के आवश्यक फैसले लिए जा रहे हैं. हालांकि, विधायी संस्था होने के बावजूद न्यास में मनोनीत अध्यक्ष और सदस्यों के न होने से मंदिर के बड़े फैसलों में जो लोकतांत्रिक व्यवस्था होनी चाहिए, वह विहीन है.
मंदिर में व्याप्त दुर्व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1983 में मंदिर का अधिग्रहण किया था, जिसके बाद व्यवस्था संभालने के लिए मंदिर न्यास परिषद का गठन किया गया. इस व्यवस्था के तहत शृंगेरी शंकराचार्य के प्रतिनिधि, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति, वित्त और कानून के जानकार तथा कमिश्नर-कलेक्टर सहित नौ पदेन सदस्य होते हैं.
इसके साथ ही काशी के पांच विद्वानों को तीन-तीन साल के लिए बतौर सदस्य नामित किया जाता है और उन्हीं में से एक को अध्यक्ष बनाया जाता है. इस नियम के तहत दिसंबर 2021 में प्रो. नागेंद्र पांडेय को अध्यक्ष और पांच अन्य विद्वानों को सदस्य बनाया गया था. इस टीम का कार्यकाल दिसंबर 2024 में पूरा हो चुका है. तब से अब तक डेढ़ साल से ऊपर होनेके बाद भी सरकार द्वारा नए नामों का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया जा सका है.
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नियम के अनुसार, मनोनीत अध्यक्ष के न होने पर वाराणसी के मंडलायुक्त पदेन अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं. उनके नेतृत्व में शृंगेरी शंकराचार्य के प्रतिनिधि, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति और अन्य प्रशासनिक अधिकारी ही फिलहाल व्यवस्था संभाल रहे हैं.
इस संबंध में मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने बताया कि न्यास के नौ पदेन सदस्यों से बैठकों का कोरम पूरा हो जाता है, इसलिए मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज और व्यवस्था संचालन में कोई तकनीकी बाधा नहीं आ रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्वानों के आवेदनों के आधार पर शासन के निर्देशानुसार दूसरी संशोधित सूची भी भेजी जा चुकी है. अब यह पूरा प्रस्ताव शासन के पास विचाराधीन है और इस पर अंतिम निर्णय सरकार के स्तर से ही लिया जाना है.



