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कान में ईयरफोन लगाकर टहलना युवक को पड़ा भारी, ट्रेन की चपेट में आने से मौत...

कान में ईयरफोन लगाकर टहलना युवक को पड़ा भारी, ट्रेन की चपेट में आने से मौत...
Jun 10, 2026, 07:42 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : जिले के लोहता थाना क्षेत्र के गोपालपुर गांव के सामने बुधवार की सुबह जरा सी लापरवाही युवक पर भारी पड़ गई. कान में ईयरफोन लगाकर टहलने के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से उसकी दर्दनाक मौत हो गई. सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. घटना की खबर लगते ही युवक के परिवार में कोहराम मच गया. ग्राम प्रधान बखरिया सुरेश पाल ने बताया कि थाना क्षेत्र के बखरिया गांव के सुरेंद्र पाल का बेटा अमन पाल (21 वर्ष) बुधवार की सुबह दोनों कानों में ईयर फोन लगाकर रेलवे लाइन पर टहल रहा था.ACCI8DENT


इसी बीच नई दिल्ली से बनारस आ रही काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस ट्रेन भदोही से बनारस की तरफ जा रही थी. अमन उसकी चपेट में आ गया, जिससे उसका शरीर दो भागों में बंट गया. सूचना के बाद परिवार के लोग मौक पर पहुंचे और घटना की जानकारी पुलिस को दी. मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष दिगंबर उपाध्याय ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. मृतक दो भाइयों और एक बहन में दूसरे नंबर का था. उधर, बेटे की मौत से माता उर्मिला पाल का रो- रो कर बुरा हाल हो गया है.


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मिर्जामुराद में ट्रेन से कटकर मजदूर ने दी जान


इसके अलावा वाराणसी के मिर्जामुराद के रखौना गांव स्थित रेल लाइन पर मंगलवार की देर रात अनिल कुमार (42) ने ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली. मृतक मजदूरी का काम करता था. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. आत्महत्या का कारण पारिवारिक विवाद बताया जा रहा है. रखौना गांव निवासी स्व. मुख्तार राम के दो पुत्रों में ज्येष्ठ अनिल मजदूरी का काम करता था. उसे शराब पीने की लत भी थी. वह रात को घर पर सोया हुआ था, तभी अचानक चारपाई से उठा और घर के पीछे जाकर रेल लाइन पर ट्रेन से कट गया. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. ग्रामीणों के जुटने पर मृतक के पुत्र राजन ने शव की पहचान की. शव की पहचान होते ही परिवार में मातम पसर गया. मृतक के एक पुत्र और एक पुत्री हैं. उसकी पत्नी प्रिया आंगनबाड़ी में सहायिका हैं, जो इस घटना से अत्यंत दुखी हैं और उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया है.

काशी की गंगा लहरों पर गूंज रही कजरी की मिठास, पद्मश्री मालिनी अवस्थी क्रूज पर दे रहीं संगीत की अनूठी पाठशाला
काशी की गंगा लहरों पर गूंज रही कजरी की मिठास, पद्मश्री मालिनी अवस्थी क्रूज पर दे रहीं संगीत की अनूठी पाठशाला
वाराणसी : सावन की रिमझिम फुहारों, गंगा की लहरों और काशी की आध्यात्मिक आभा के बीच इन दिनों लोकसंगीत की अमूल्य धरोहर कजरी की मधुर स्वर लहरियां गूंज रही हैं। पद्मश्री लोकगायिका मालिनी अवस्थी गंगा के बीच क्रूज (बजरा) पर देश-विदेश से आए विद्यार्थियों को कजरी गायन का प्रशिक्षण दे रही हैं। यह अनूठी संगीत कार्यशाला केवल गायन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और प्रकृति से जुड़ने का भी अद्भुत अवसर बन गई है।छह वर्षों से सावन में आयोजित हो रही कार्यशालापद्मश्री मालिनी अवस्थी ने बताया कि बाबा विश्वनाथ की कृपा और आशीर्वाद से पिछले छह वर्षों से प्रत्येक वर्ष आषाढ़ और सावन के महीने में कजरी कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को लोकसंगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ना और कजरी की विरासत को आगे बढ़ाना है।उन्होंने बताया कि शुरुआती तीन कार्यशालाएं मिर्जापुर में आयोजित की गई थीं, क्योंकि कजरी का उद्गम स्थल मिर्जापुर को माना जाता है। इसके बाद चुनार, चंदौली और राजदरी जैसे प्राकृतिक स्थलों पर भी कार्यशालाएं आयोजित हुईं। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी को चुना गया, ताकि गंगा और बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी में विद्यार्थियों को प्रकृति के सान्निध्य में संगीत का प्रशिक्षण दिया जा सके।प्रकृति के बीच सीख रहे हैं संगीतमालिनी अवस्थी का कहना है कि कजरी केवल सुरों का संगीत नहीं, बल्कि प्रकृति की अनुभूति है। उनका मानना है कि जब तक विद्यार्थी वर्षा की बूंदों, पत्तों की सरसराहट, बादलों की गर्जना और प्रकृति की ध्वनियों को महसूस नहीं करेंगे, तब तक वे कजरी के भावों को सही मायने में अभिव्यक्त नहीं कर पाएंगे।इसी उद्देश्य से दो दिन राजदरी और तीन दिन गंगा के बीच क्रूज पर कार्यशाला आयोजित की गई है। सभी विद्यार्थी एक साथ इसी बजरे पर रहते हैं, भोजन करते हैं, अभ्यास करते हैं और दिनभर संगीत साधना में लीन रहते हैं।देश-विदेश से पहुंचे 56 प्रतिभागीइस कार्यशाला में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी प्रतिभागी पहुंचे हैं। कुल 56 विद्यार्थी इस बार प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें सिंगापुर के साथ-साथ भागलपुर, हैदराबाद, उदयपुर, अहमदाबाद, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, आगरा, गोरखपुर, सिवान सहित देश के कई शहरों से संगीत प्रेमी शामिल हुए हैं।ALSO READ : कैंट पुलिस का जुए के अड्डे पर छापा, नगदी समेत छह जुआरी गिरफ्तार.प्रतिभागियों की आयु भी इस कार्यशाला की विशेषता है। सबसे छोटी छात्रा 18 वर्ष की है, जबकि 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ प्रतिभागी भी पूरे उत्साह के साथ कजरी सीख रहे हैं। 60 से 75 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं भी पूरे समर्पण के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।युवाओं में लोकसंगीत के प्रति बढ़ा समर्पणमालिनी अवस्थी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को लेकर कई तरह की धारणाएं बनाई जाती हैं, लेकिन इस कार्यशाला में शामिल अधिकांश छात्र-छात्राओं की उम्र 21 से 26 वर्ष के बीच है और उनमें लोकसंगीत सीखने का अद्भुत समर्पण, अनुशासन और विनम्रता देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह देखकर विश्वास और मजबूत होता है कि भारतीय लोक परंपराओं का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।गुरु पूर्णिमा पर होगा समापनपांच दिवसीय इस कार्यशाला का समापन गुरु पूर्णिमा के अवसर पर होगा। सुबह 10 बजे सभी विद्यार्थी मंच पर अपनी सीखी हुई कजरियों की प्रस्तुति देंगे। मालिनी अवस्थी ने संगीत प्रेमियों को इस विशेष आयोजन में शामिल होने का आमंत्रण देते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा से सुंदर अवसर कोई नहीं हो सकता, जब गुरु अपने शिष्यों को ज्ञान देकर अपने गुरुओं को श्रद्धांजलि अर्पित करे।केवल संगीत नहीं, जीवन जीने की कला भीइस कार्यशाला की सबसे खास बात यह है कि यहां केवल गायन का अभ्यास नहीं कराया जाता। विद्यार्थियों को योग, ध्यान और एकाग्रता का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। मालिनी अवस्थी बताती हैं कि अच्छा गायक बनने के लिए केवल स्वर नहीं, बल्कि मन की स्थिरता और आत्मिक संतुलन भी जरूरी है।वह बताती हैं कि पांच दिनों तक प्रत्येक विद्यार्थी के साथ व्यक्तिगत संवाद भी किया जाता है। कई युवा अपने करियर, संगीत साधना और जीवन से जुड़ी दुविधाएं साझा करते हैं। देर रात तक चलने वाली इन बैठकों में उन्हें मार्गदर्शन दिया जाता है। मालिनी अवस्थी कहती हैं कि यह अनुभव उन्हें अपने गुरुजनों के साथ बिताए दिनों की याद दिलाता है।वर्षा में भीगकर गाने का अलग ही आनंदउन्होंने एक रोचक अनुभव साझा करते हुए बताया कि कार्यशाला के दौरान जब सभी विद्यार्थी गंगा किनारे कजरी का अभ्यास कर रहे थे, तभी अचानक बारिश शुरू हो गई। लेकिन कोई भी भीतर जाने को तैयार नहीं हुआ। सभी बारिश में भीगते हुए गाते रहे।मालिनी अवस्थी ने मुस्कुराते हुए कहा कि "कजरी गायन में न छाते की जरूरत होती है और न रेनकोट की। भीगकर गाने का जो आनंद है, वही इस लोकसंगीत की आत्मा है।"उनका कहना है कि वर्षा केवल मौसम नहीं, बल्कि जेठ की तपती धरती को मिला इंद्रदेव का आशीर्वाद है। इसी आनंद और प्रकृति के उत्सव को कजरी के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है।कजरी की समृद्ध परंपरामालिनी अवस्थी ने कहा कि कजरी विश्वभर में प्रसिद्ध है और इसकी सबसे मजबूत जड़ें पूर्वांचल की धरती में हैं। काशी, मिर्जापुर, चुनार और चंदौली में आज भी कजरी के अखाड़े मौजूद हैं, जहां गुरु-शिष्य परंपरा के तहत इस विधा का संरक्षण किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि भारतेंदु हरिश्चंद्र, प्रेमधन व्यास और अंबिकादत्त व्यास जैसे साहित्यकारों ने कजरी को समृद्ध किया। वहीं हीरालाल यादव, गुल्लू यादव, पंडित राम कैलाश यादव, उर्मिला श्रीवास्तव, सिद्धेश्वरी देवी और गिरिजा देवी जैसी महान विभूतियों ने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।उनके अनुसार बनारस घराने का शायद ही कोई शास्त्रीय गायक हो, जिसने कजरी न गाई हो। कजरी की अधिकांश धुनें राग देश, सारंग, सोरठ और मेघ जैसे वर्षा ऋतु के रागों पर आधारित हैं। यही कारण है कि इन्हें सुनते ही मानो आकाश में काले बादल उमड़ आते हैं और बरसात का वातावरण जीवंत हो उठता है।पहला कजरी गीत आज भी यादअपने जीवन की पहली कजरी का जिक्र करते हुए मालिनी अवस्थी ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले यह कजरी गाई थी—"बरसे सावनवा के बैरी बदरवा, कजरवा धुल-धुल जाए मोर राम..."इसके बाद उन्होंने अवधी शैली की प्रसिद्ध कजरी—"अरे रामा, कृष्ण बने मनिहारन..."सीखी और गाई।लोक परंपरा के संरक्षण का अनूठा प्रयासगंगा की गोद में, सावन की फुहारों के बीच आयोजित यह कजरी कार्यशाला केवल संगीत सीखने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय लोकसंस्कृति, प्रकृति, आध्यात्मिकता और गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत बनाए रखने का एक अनूठा प्रयास है। इसमें शामिल विद्यार्थी केवल बेहतर गायक बनकर नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहरी समझ लेकर लौट रहे हैं।
कैंट पुलिस का जुए के अड्डे पर छापा, नगदी समेत छह जुआरी गिरफ्तार.
कैंट पुलिस का जुए के अड्डे पर छापा, नगदी समेत छह जुआरी गिरफ्तार.
वाराणसी: कमिश्नरेट पुलिस के ऑपरेशन चक्रव्यूह अभियान के तहत कैंट थाना पुलिस ने सोमवार रात अर्दली बाजार स्थित एमएम लॉन के पास संचालित जुए के अड्डे पर छापेमारी कर छह जुआरियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके से फड़ पर लगी 5,400 रुपये की नगदी, आरोपितों की तलाशी से 2,200 रुपये तथा 52 पत्तों की एक खुली ताश की गड्डी बरामद की।प्रभारी निरीक्षक राज किशोर पांडेय के नेतृत्व में सोमवार रात करीब 8:40 बजे की गई कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपितों की पहचान रोहित पटेल, दीपक पटेल, चंदन पटेल, पवन कुमार गौतम, राजीव कुमार पटेल और सूरज कुमार के रूप में हुई। सभी आरोपी कैंट थाना क्षेत्र के टकटकपुर एवं आसपास के रहने वाले हैं।ALSO READ : बरेका में अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित, 51 अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया हिस्सा.पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ उत्तर प्रदेश जुआ अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। छापेमारी टीम में उपनिरीक्षक बलवंत कुमार, उपनिरीक्षक अभिषेक सिंह, कांस्टेबल अतुल कुमार पांडेय, नागेंद्र कुमार, राजन कुमार राव और अमित तिवारी शामिल रहे।
बरेका में अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित, 51 अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया हिस्सा.
बरेका में अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित, 51 अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया हिस्सा.
वाराणसी : बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में मंगलवार को राजभाषा विभाग के तत्वावधान में प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र में अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुपालन में तथा बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत के मार्गदर्शन में आयोजित हुई।मुख्य राजभाषा अधिकारी रामजन्म चौबे के नेतृत्व में आयोजित प्रतियोगिता का उद्देश्य रेलवे बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के लिए बरेका के प्रतिभागियों का चयन करना तथा अधिकारियों और कर्मचारियों में हिंदी के प्रयोग, राजभाषा नीति एवं सामान्य ज्ञान के प्रति जागरूकता और रुचि बढ़ाना था।प्रतियोगिता में बरेका के विभिन्न विभागों के 51 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हिंदी माध्यम में आयोजित इस प्रतियोगिता में रेलवे, हिंदी भाषा एवं साहित्य, राजभाषा नीति तथा सामान्य ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे गए। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।ALSO READ : बीएचयू में 'नयी चाल की हिन्दी' विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ.प्रतियोगिता का आयोजन सुव्यवस्थित और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। प्रतिभागियों ने इसे ज्ञानवर्धक, उपयोगी और प्रेरणादायक बताते हुए इसकी सराहना की। प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागी अब रेलवे बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली अखिल रेल हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में बरेका का प्रतिनिधित्व करेंगे।राजभाषा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ कर्मचारियों के ज्ञानवर्धन और राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।