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युवाओं को मिल रहा जुमला, राहुल ने मोदी पर साधा निशाना...

युवाओं को मिल रहा जुमला, राहुल ने मोदी पर साधा निशाना...
Aug 16, 2025, 06:44 AM
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Posted By Anurag Sachan

Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के सांसद राहुल गाँधी ने पीएम मोदी के घोषित विकसित भारत योजना को लेकर कटाक्ष किया. जिसमें आरोप लगाया कि उनके पास कोई नया विचार नहीं है तथा युवाओं को रोजगार नहीं सिर्फ जुमले मिलेंगे. राहुल गांधी ने संसद के मानसून सत्र के दौरान कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय से पूछे गए लिखित प्रश्न और उनके उत्तर की प्रति साझा की.


पीएम मोदी ने लाल किले से की प्रधानमंत्री विकसित भारत योजना की घोषणा


गौरतलब है कि पीएम मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए "प्रधानमंत्री विकसित भारत योजना" की घोषणा की, जिसके तहत निजी क्षेत्र में पहली नौकरी पाने वाले युवाओं को 15 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी इस योजना के तहत एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इससे लगभग 3.5 करोड़ युवाओं को लाभ मिलेगा.





राहुल गाँधी ने X पर किया पोस्ट....


बता दें कि पीएम मोदी के विकसित भारत योजना को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर राहुल ने पोस्ट किया और लिखा कि- "एक लाख करोड़ रुपये का जुमला - सीज़न 2- 11 साल बाद भी मोदी जी के वही पुराने जुमले, वही रटे-रटाए आंकड़े." उन्होंने कहा कि पिछले साल एक लाख करोड़ से एक करोड़ इंटर्नशिप का वादा किया गया और इस साल फिर एक लाख करोड़ रुपये की नौकरी योजना का वादा किया गया.


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राहुल ने किया कटाक्ष...


बता दें कि राहुल गाँधी ने मोदी पर कटाक्ष किया और कहा कि, "सच क्या है? संसद में मेरे सवाल पर सरकार ने माना कि 10 हज़ार से भी कम इंटर्नशिप हुई. मेहनताना इतना कम था कि 90 प्रतिशत युवाओं ने मना कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया, "मोदी जी के पास अब कोई नया आइडिया नहीं बचा. इस सरकार से युवाओं को रोज़गार नहीं, बस जुमले मिलेंगे.

BHU में अब चार वर्षीय B.Ed कोर्स, 12वीं के बाद शिक्षक बनने का सुनहरा मौका
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वाराणसी: बीएचयू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की सिफारिशों को लागू करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया है. शिक्षा संकाय ने शैक्षणिक सत्र 2026-2027 से एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आइटीईपी) अंतर्गत चार वर्षीय बीए बीएड (सेकेंडरी स्टेज) डिग्री कोर्स शुरू करने की घोषणा की है. अब तक की पारंपरिक व्यवस्था में छात्र पहले तीन साल की ग्रेजुएशन (बीए, बीएससी या बीकाम) करते थे और फिर दो साल का बीएड करते, यानी शिक्षक बनने के लिए कुल पांच साल लगते थे लेकिन बीएचयू में शुरू किए जा रहे इस एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम के बाद समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा.आठ सेमेस्टर में विभाजित कार्यक्रम यह कार्यक्रम आठ सेमेस्टर में विभाजित किया गया है, जिसमें कुल 180 क्रेडिट होंगे. इस पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ड्यूल-मेजर व्यवस्था है. प्रथम मेजर (शिक्षा) में कुल 96 क्रेडिट होंगे, जो छात्र को पेशेवर शिक्षक के रूप में तैयार करेंगे. द्वितीय मेजर (विषय) में कला या सामाजिक विज्ञान के किसी एक विषय में 84 क्रेडिट अर्जित करने होंगे. यह कार्यक्रम शिक्षा संकाय द्वारा कला और सामाजिक विज्ञान संकाय के सहयोग से संचालित किया जाएगा.शिक्षा संकाय के वरिष्ठ प्रोफेसर सुनील सिंह ने बताया कि अभी तक यह व्यवस्था वसंत कालेज फार विमेन राजघाट और आर्य महिला पीजी कालेज चेतगंज में प्रभावी की जा रही है लेकिन भविष्य की नीतिगत स्थिति के अनुसार मुख्य कैंपस में भी लागू किया जा सकता है. दोनों कालेजों में कुल सौ सीटों पर प्रवेश होगा. खास बात यह है कि विषय संबंधी पाठ्यक्रम वही होंगे, जो विश्वविद्यालय के अन्य स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रमों में लागू हैं ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता और मानकों में एकरूपता बनी रहे. ऐसे में छात्रों का समय बचेगा, चार साल के भीतर ही स्नातक और बीएड दोनों की डिग्री हासिल कर सकेंगे.यह भी पढ़ें: अस्सी घाट पर गंगा आरती कर्मियों पर हमला, पुलिस ने मुख्य आरोपी को किया गिरफ्तारमल्टीपल एंट्री-एग्जिट की व्यवस्था होगी, इस कोर्स में बीच में पढ़ाई छोड़ने या पुनः जुड़ने का विकल्प भी उपलब्ध होगा, इसे विशेष तौर से माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को तैयार करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह अध्यादेश भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन और एनसीटीई के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जो आने वाले समय में देश को उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षक प्रदान करेगा.इस पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका समानांतर ढांचा है, जहां पुराने ढर्रे में छात्र पहले विषय पढ़ते थे और फिर शिक्षण सीखते थे लेकिन विवि का यह नया माडल दोनों को साथ लेकर चलेगा. इस कोर्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि छात्र अपनी विषय विशेषज्ञता व शिक्षक प्रशिक्षण में संतुलन बना सके. इनका विस्तार प्रथम छह सेमेस्टर (तीन वर्ष) तक रहेगा. यानी छात्र अपने चुने हुए विषय (जैसे इतिहास, भूगोल, या राजनीति शास्त्र) की गहराई को शुरुआती तीन सालों में ही आत्मसात कर लेगा. शिक्षा शास्त्र पूरे आठ सेमेस्टर (4 वर्ष) तक चलेगा.
अस्सी घाट पर गंगा आरती कर्मियों पर हमला, पुलिस ने मुख्य आरोपी को किया गिरफ्तार
अस्सी घाट पर गंगा आरती कर्मियों पर हमला, पुलिस ने मुख्य आरोपी को किया गिरफ्तार
वाराणसी: अस्सी घाट गंगा आरती से जुड़े कर्मियों पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. घटना सोमवार देर रात की बताई जा रही है, जब आरती संपन्न होने के बाद लौटते समय चाय की दुकान पर एक युवक पर दबंगों ने हमला कर दिया. घटना के पीछे दो पहिया गाडी पर बैठने को लेकर विवाद बताया जा रहा है.अस्सी घाट गंगा आरती में सहयोग मिली जानकारी के अनुसार, चित्रकूट निवासी यश द्विवेदी, जो वाराणसी में रहकर पढ़ाई के साथ अस्सी घाट गंगा आरती में सहयोग करते हैं, आरती के बाद मछली बंदर मठ के पास एक चाय की दुकान पर मौजूद थे. इसी दौरान गाडी पर बैठने को लेकर विवाद हुआ. कहासुनी चल रही थी कि तभी देखते ही देखते आरोपी हमलावर हो गए.यह भी पढ़ें: चैत्र नवरात्री पर वाराणसी में मीट-मछली की दुकानें रहेंगी बंद, नगर निगम का बड़ा फैसलाआरोप है कि हमलावरों ने युवक को लात-घूसों से पीटा और एक आरोपी ने बाइक की चाबी से सिर पर वार कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. घायल अवस्था में युवक ने पुलिस चौकी पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी आयुष को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के दौरान अन्य आरोपियों की पहचान भी हुई है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है.एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं. पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि घटना में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
चैत्र नवरात्री पर वाराणसी में मीट-मछली की दुकानें रहेंगी बंद, नगर निगम का बड़ा फैसला
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वाराणसी: चैत्र नवरात्र के पावन पर्व को लेकर वाराणसी नगर निगम ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. नगर निगम सीमा के अंतर्गत आने वाली सभी मीट, मुर्गा और मछली की दुकानें नवरात्र के दौरान पूर्ण रूप से बंद रहेंगी. यह निर्णय महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में सिगरा स्थित वाराणसी स्मार्ट सिटी सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में लिया गया."आदेश का कड़ाई से किया जाए पालन"बैठक में कहा गया कि नवरात्र के दौरान शहर में धार्मिक वातावरण और श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए इस आदेश का कड़ाई से पालन कराया जाएगा. महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नवरात्र शुरू होने से पहले सभी प्रमुख देवी मंदिरों की ओर जाने वाले मार्गों का निरीक्षण कर तत्काल पैचवर्क और गड्ढों की मरम्मत कराई जाए. इसके साथ ही स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए सड़कों के किनारे नियमित रूप से चूने का छिड़काव भी सुनिश्चित किया जाए.सीवर ओवरफ्लो की नहीं होनी चाहिए समस्याउन्होंने जलकल विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि पर्व के दौरान शहर में कहीं भी सीवर ओवरफ्लो की समस्या नहीं होनी चाहिए और पेयजल आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रहे. वहीं आलोक विभाग को मंदिरों तक जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर मार्ग प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई. बैठक में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सभी विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने पर जोर दिया.यह भी पढ़ें: पैथोलॉजी लैब में छलका जाम, शराब पीने के आरोप में लैब टेक्‍नीशियन समेत चार के खिलाफ कार्रवाईताकि नवरात्र पर्व के दौरान शहर में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो. इस अवसर पर अपर नगर आयुक्त सविता यादव, अमित कुमार सिंह, विनोद कुमार गुप्ता, जलकल महाप्रबंधक अनूप सिंह, पियूष नेहरा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.