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राजमहल के बीच रास्‍ते से लौटने के बाद नई कवायद, गंगा की तलहटी से गाद और कठोर परत हटाएंगे

राजमहल के बीच रास्‍ते से लौटने के बाद नई कवायद, गंगा की तलहटी से गाद और कठोर परत हटाएंगे
Sep 14, 2026, 06:54 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : कोलकाता से वाराणसी के लिए चले राजमहल क्रूज का बीच रास्‍ते से वापस लौटने के बाद नई कवायद शुरू की जा रही है. इसके तहत भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) गाजीपुर से वाराणसी के बीच 133 किलोमीटर लंबा जल हाईवे बनाएगा. इस पर करीब 102.98 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसके तहत गंगा की तलहटी में मौजूद गाद और कठोर परत हटाई जाएगी.

जल हाईवे के निर्माण के बाद गंगा के अंदर नैविगेशन चैनल के माध्यम से एक विशेष रास्ता तैयार किया जाएगा.


इससे बड़े जहाजों का आना-जाना आसानी से हो सकेगा. पानी कम हो या फिर ज्यादा बड़े जहाजों के संचालन में कोई बाधा नहीं आएगी. यह काम राष्ट्रीय राजमार्ग प्रथम और जलमार्ग विकास परियोजना के तहत हो रहा है. गाजीपुर-वाराणसी खंड में 2.20 मीटर न्यूनतम उपलब्ध गहराई (एलएडी) बनाए रखने का लक्ष्य है.


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आईडब्ल्यूएआई के अधिकारियों के अनुसार गंगा में पानी का प्रवाह और नदी की तलहटी लगातार बदलती रहती है. इससे कई स्थानों पर उथले हिस्से बन जाते हैं. ऐसे स्थानों पर ड्रेजिंग कर तलहटी से गाद हटाई जाएगी. जहां तलहटी में कठोर परत मिलेगी है, उसे हटाकर निर्धारित नेविगेशन चैनल को बेहतर बनाया जाएगा. इससे वाराणसी से हल्दिया के बीच 1500 से 2000 डेडवेट टन भार (डीडब्ल्यूटी) क्षमता वाले जलपोतों का आवागमन आसान हो जाएगा.


जलमार्ग के ये होंगे फायदे


वाराणसी के मल्टीमॉडल टर्मिनल तक कार्गो को पहुंचाने में सहूलियत.

भारी और थोक माल की ढुलाई का विकल्प मजबूत होगा.

कृषि उत्पाद और औद्योगिक माल को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी.

सड़कों पर ट्रकों का दबाव कम होगा. लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में जल परिवहन की भूमिका बढ़ेगी.


पूर्वांचल के कारोबार को मिलेगी गति


परियोजना का सीधा लाभ वाराणसी और पूर्वांचल के कारोबार को मिलेगा. सड़क की तुलना में जल परिवहन से भारी और थोक माल को लंबी दूरी तक ले जाने की लागत कम होगी. मल्टीमॉडल टर्मिनल के निर्माण के बाद गाजीपुर-वाराणसी का फेयरवेल मजबूत होने पर टर्मिनल तक माल की आवाजाही और आगे सड़क-रेल से कनेक्टिविटी अधिक प्रभावी होगी. गाजीपुर, वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों के कृषि उत्पाद, खाद्यान्न, निर्माण सामग्री और अन्य थोक माल को जलमार्ग के जरिये बड़े बाजारों तक भेजने के विकल्प बढ़ेंगे.

वराह भगवान का हुआ दिव्य शृंगार, भक्तो ने चढ़ाया छप्पन भोग
वराह भगवान का हुआ दिव्य शृंगार, भक्तो ने चढ़ाया छप्पन भोग
वाराणसी : जौनपुर - वाराणसी की सीमा के पास रामगढ़ चंदवक स्थित श्री कोटि तीर्थ वराह धाम में रविवार को भगवान वराह के प्राकट्योत्सव के मौके पर धार्मिक कार्यक्रम हुआ. इस दौरान मंदिर में भगवान वराह का भव्य शृंगार किया गया और पूरे मंदिर को फूल माला से सजाया गया. प्राकट्योत्सव के अवसर पर भगवान वराह जी और लक्ष्मी माता जी को छप्पन भोग चढ़ाया गया.सुबह से ही मंदिर में भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो देर शाम तक चलता रहा. भक्तों ने भगवान के दर्शन पूजन किये और परिवार की सुख - शांति और खुशहाली की प्रार्थना की. इस अवसर पर संत सम्मलेन का भी आयोजन हुआ. उस सम्मलेन में अलग - अलग जगहों से 100 से अधिक साधु संत लोग पहुंचे. संतो के पहुंचने से मंदिर परिसर में और भक्तिमय माहौल बना रहा. भक्तो ने संतो के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किए.ALSO RAED:दालमंडी में सीवर का काम शुरू, भूमिगत पाइपलाइन डालने के बाद बनेगी सड़क...पूरे दिन चले धार्मिक कार्यक्रम के बाद शाम को मंदिर में भव्य आरती का आयोजन किया गया. बड़ी संख्या में भक्त आरती में शामिल हुए. उस समय मंदिर परिसर में भगवान वराह जी के जयकारो से गूंज उठा. भक्तों ने आरती में शामिल होकर सुख -समृद्धि की कामना की. प्राकट्योत्सव के मौके पर भंडारे का भी आयोजन किया गया. इसमें संतो और भक्तो के लिए प्रसाद की अच्छी व्यवस्था की गयी. बड़ी संख्या में लोगों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किए. पूरे कार्यक्रम के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला. विशेष शृंगार ,छप्पन भोग संत सम्मलेन,आरती और भंडारे के साथ भगवान वराह जी का प्राकट्योत्सव श्रद्धा के साथ मनाया गया.
दालमंडी में सीवर का काम शुरू, भूमिगत पाइपलाइन डालने के बाद बनेगी सड़क...
दालमंडी में सीवर का काम शुरू, भूमिगत पाइपलाइन डालने के बाद बनेगी सड़क...
वाराणसी : महीनों तक चले ध्‍वस्‍तीकरण के बाद दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत सीवर लाइन बिछाने का काम सोमवार से प्रारंभ कर दिया गया है. चौक थाने की ओर करीब 4.30 मीटर गहरा गड्ढा खोदकर पाइपलाइन डालने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए काम चल रहा है. गड्ढे के चारों तरफ सुरक्षा के लिए लोहे के गार्ड व प्लेट लगाए जा रहे हैं. मौके पर सीवर लाइन में इस्तेमाल होने वाली लोहे की पाइप भी पहुंचा दी गई है. करीब पांच मीटर लंबाई और तीन मीटर चौड़ाई में गड्ढा खोदा गया है.इसी गड्ढे के माध्यम से पाइप को जमीन के अंदर प्रेस कर आगे बढ़ाया जाएगा. इससे पूरी सड़क की खोदाई किए बिना भूमिगत सीवर पाइपलाइन बिछाई जा सकेगी. मौके पर पहुंचाई गई लोहे की पाइप करीब दो फीट चौड़ी और 20 फीट लंबी है.दालमंडी में पहले से क्षतिग्रस्त सीवर व पेयजल पाइप लाइनों के कारण जलजमाव की समस्या बनी हुई है. सीवर लाइन बिछने के बाद क्षेत्र में जलनिकासी की व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है. इसके बाद सड़क, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कराया जाएगा. बाकी प्रक्र‍िया भी जल्‍द शुरू हो जाएगी.ALSO READ: गंगा के तेज बहाव में नमो घाट से बहकर चंदौली पहुंचा चेंजिंग रूम, ग्रामीण कर रहे रखवाली...बता दें कि दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना के तहत करीब 650 मीटर लंबे मार्ग को 17.4 मीटर चौड़ा किया जाना है. इसमें 10 मीटर सड़क और दोनों तरफ 3.5-3.5 मीटर चौड़ा फुटपाथ बनाया जाएगा. परियोजना की जद में 181 भवन और छह मस्जिदें प्रभावित हुई हैं. परियोजना को नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. ध्‍वस्‍तीकरण के दौरान दर्जनों मकान जमींदोज किए गए. इस दौरान क्षेत्रीय लोगों की मिश्रित प्रतिक्रिया भी सामने आई. करोडों रुपये मुआवजे के रूप में बांटे गए.
गंगा के तेज बहाव में नमो घाट से बहकर चंदौली पहुंचा चेंजिंग रूम, ग्रामीण कर रहे रखवाली...
गंगा के तेज बहाव में नमो घाट से बहकर चंदौली पहुंचा चेंजिंग रूम, ग्रामीण कर रहे रखवाली...
वाराणसी: काशी में नमो घाट पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए जेटी पर लगाया गया चेंजिंग रूम गंगा की तेज धार में बहकर कई किलोमीटर दूर चंदौली के कुंडा कलां गांव पहुंच गया. चौंकाने वाली बात यह है कि पूरी संरचना बहकर दूसरे जिले के इलाके में पहुंचे एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक संबंधित विभाग की ओर से इसे वापस ले जाने की पहल नहीं हुई. गंगा में आई बाढ़ और तेज बहाव के दौरान नमो घाट के पास लगाए गए दो चेंजिंग रूम में से एक अपनी जगह से उखड़ गया और पानी के साथ बहता हुआ कोसों दूर चंदौली जिले के कुंडा कलां गांव तक पहुंच गया.ग्रामीणों ने जब इस चेंजिंग रूम को बहते हुए देखा तो उसे सुरक्षित रखने के लिए कुंडा कलां पंप कैनाल के पास लोहे के तार से बांध दिया. ग्रामीणों के अनुसार इसे बहकर आए करीब एक महीने से अधिक समय हो चुका है. शुरुआत में गंगा का पानी अधिक होने के कारण इसे संभालना मुश्किल था, लेकिन बाद में ग्रामीणों ने इसे तार से बांधकर सुरक्षित कर दिया, ताकि यह दोबारा पानी के साथ बह न जाए और संबंधित अधिकारी या कर्मचारी जब इसे तलाशते हुए आएं तो आसानी से वापस ले जा सकें.ग्रामीणों का कहना है कि यह चेंजिंग रूम नमो घाट पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए लगाया गया था, जहां गंगा स्नान के बाद लोग कपड़े बदल सकें.लेकिन अब यह चंदौली के कुंडा कलां में पड़ा है, जहां न तो ऐसा कोई घाट है और न ही इस चेंजिंग रूम की वैसी जरूरत है जैसी नमो घाट पर थी.स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, चेंजिंग रूम के यहां पहुंचने के बाद से अब तक कोई अधिकारी इसे देखने या वापस ले जाने नहीं आया. ग्रामीणों ने इसे इसलिए बांधकर रखा है, ताकि सरकारी संपत्ति दोबारा गंगा में न बह जाए. उनकी मांग है कि संबंधित विभाग जल्द मौके पर पहुंचे और इसे कुंडा कलां से वापस नमो घाट ले जाकर दोबारा स्थापित करे. इस पूरे मामले ने सरकारी सुविधाओं की सुरक्षा और रखरखाव पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.ALSO READ:राजमहल के बीच रास्‍ते से लौटने के बाद नई कवायद, गंगा की तलहटी से गाद और कठोर परत हटाएंगेफिलहाल कुंडा कलां में ग्रामीणों द्वारा तार से बांधकर सुरक्षित रखा गया यह चेंजिंग रूम सरकारी व्यवस्था और बाढ़ के दौरान नदी किनारे बनाए गए इंतजामों की मजबूती पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है. अब देखना होगा कि संबंधित विभाग कब इस चेंजिंग रूम को यहां से उठाकर वापस नमो घाट पहुंचाता है.