राजमहल के बीच रास्ते से लौटने के बाद नई कवायद, गंगा की तलहटी से गाद और कठोर परत हटाएंगे

वाराणसी : कोलकाता से वाराणसी के लिए चले राजमहल क्रूज का बीच रास्ते से वापस लौटने के बाद नई कवायद शुरू की जा रही है. इसके तहत भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) गाजीपुर से वाराणसी के बीच 133 किलोमीटर लंबा जल हाईवे बनाएगा. इस पर करीब 102.98 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसके तहत गंगा की तलहटी में मौजूद गाद और कठोर परत हटाई जाएगी.
जल हाईवे के निर्माण के बाद गंगा के अंदर नैविगेशन चैनल के माध्यम से एक विशेष रास्ता तैयार किया जाएगा.
इससे बड़े जहाजों का आना-जाना आसानी से हो सकेगा. पानी कम हो या फिर ज्यादा बड़े जहाजों के संचालन में कोई बाधा नहीं आएगी. यह काम राष्ट्रीय राजमार्ग प्रथम और जलमार्ग विकास परियोजना के तहत हो रहा है. गाजीपुर-वाराणसी खंड में 2.20 मीटर न्यूनतम उपलब्ध गहराई (एलएडी) बनाए रखने का लक्ष्य है.
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आईडब्ल्यूएआई के अधिकारियों के अनुसार गंगा में पानी का प्रवाह और नदी की तलहटी लगातार बदलती रहती है. इससे कई स्थानों पर उथले हिस्से बन जाते हैं. ऐसे स्थानों पर ड्रेजिंग कर तलहटी से गाद हटाई जाएगी. जहां तलहटी में कठोर परत मिलेगी है, उसे हटाकर निर्धारित नेविगेशन चैनल को बेहतर बनाया जाएगा. इससे वाराणसी से हल्दिया के बीच 1500 से 2000 डेडवेट टन भार (डीडब्ल्यूटी) क्षमता वाले जलपोतों का आवागमन आसान हो जाएगा.
जलमार्ग के ये होंगे फायदे
वाराणसी के मल्टीमॉडल टर्मिनल तक कार्गो को पहुंचाने में सहूलियत.
भारी और थोक माल की ढुलाई का विकल्प मजबूत होगा.
कृषि उत्पाद और औद्योगिक माल को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी.
सड़कों पर ट्रकों का दबाव कम होगा. लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में जल परिवहन की भूमिका बढ़ेगी.
पूर्वांचल के कारोबार को मिलेगी गति
परियोजना का सीधा लाभ वाराणसी और पूर्वांचल के कारोबार को मिलेगा. सड़क की तुलना में जल परिवहन से भारी और थोक माल को लंबी दूरी तक ले जाने की लागत कम होगी. मल्टीमॉडल टर्मिनल के निर्माण के बाद गाजीपुर-वाराणसी का फेयरवेल मजबूत होने पर टर्मिनल तक माल की आवाजाही और आगे सड़क-रेल से कनेक्टिविटी अधिक प्रभावी होगी. गाजीपुर, वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों के कृषि उत्पाद, खाद्यान्न, निर्माण सामग्री और अन्य थोक माल को जलमार्ग के जरिये बड़े बाजारों तक भेजने के विकल्प बढ़ेंगे.



