सेवा, समर्पण और क्षेत्रीय दक्षता से बनेगा सामाजिक कार्य का सशक्त भविष्य

वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के अंतर्गत संचालित एमए इन सोशल वर्क कार्यक्रम में प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए प्लेसमेंट, व्यावसायिक दक्षता और करियर की संभावनाओं को लेकर विशेष संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में चिल्ड्रेन्स रिसर्च यूनिवर्सिटी, गुजरात के सहायक प्रोफेसर डॉ. शैलेश ब्रह्मभट्ट ने विद्यार्थियों को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में रोजगार, नेतृत्व और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी दी।
पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. वीके लहरी ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों को प्लेसमेंट टीम की कार्यप्रणाली और करियर निर्माण में उसकी भूमिका से परिचित कराया। उन्होंने समाज सेवा को भारतीय जीवन-दर्शन और ‘सेवा परमो धर्मः’ की भावना से जोड़ते हुए कहा कि एक सफल समाजसेवी के व्यक्तित्व में सहयोग और योगदान का समन्वय होना जरूरी है।
डॉ. शैलेश ब्रह्मभट्ट ने विद्यार्थियों के साथ अपनी संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा और अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य के प्रति अडिग रहना सफलता की पहली सीढ़ी है। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रेरक संकल्पना ‘तेजस्वी बालक, तेजस्वी भारत’ का उल्लेख करते हुए सामाजिक कार्य के क्षेत्र में सेवा, संवेदना, समर्पण और सामाजिक परिवर्तन के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO), क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम, ब्लड बैंक, मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोरोग सेवाओं, बाल संरक्षण सोसायटी, आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में रोजगार और नेतृत्व के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।
डॉ. ब्रह्मभट्ट ने ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ श्लोक का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को कर्मनिष्ठा, आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य की व्यावसायिक दक्षता केवल किताबों तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर निकलकर समुदाय के बीच जाना, लोगों की समस्याओं को समझना, संवाद स्थापित करना और नियमित क्षेत्रकार्य करना जरूरी है।
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उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रेरक उद्घोष के माध्यम से विद्यार्थियों में साहस, संकल्प और चुनौतियों का सामना करने की भावना विकसित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने सामाजिक कार्य के क्षेत्र में करियर और उच्च शिक्षा से जुड़े सवाल भी पूछे।
यह संवाद सत्र विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक रहा। कार्यक्रम ने उन्हें सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उपलब्ध व्यावसायिक, शैक्षणिक और शोधपरक अवसरों से परिचित कराया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अशोक श्रीवास्तव ने किया।



