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सुशासन के प्रतीक थे भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, काशी विद्यापीठ में विविध आयोजन

सुशासन के प्रतीक थे भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, काशी विद्यापीठ में विविध आयोजन
Dec 25, 2025, 11:18 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती गुरुवार को 'सुशासन दिवस' के रूप में मनाई गई. इस मौके पर 'सुशासन के प्रतीक : भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी' विषयक संगोष्ठी, भाषण प्रतियोगिता एवं एकल काव्य पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. वक्ताओं ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन के प्रतीक थे. वह अजातशत्रु थे. उन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम समझा न कि शक्ति का स्रोत. यही कारण था कि हर विचारधारा के लोग उनका सम्मान करते थे.


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ऐसी व्यवस्था प्रदान की जिसमें था सबका सम्मान


मुख्य अतिथि मानविकी संकाय के अध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्र ने कहा कि वाजपेयी जी ने ऐसी व्यवस्था प्रदान की जिसमें सबका सम्मान था. अटल जी ने समाज के हर वर्ग का ध्यान रखा, उनका मानना था कि किसी को साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. मनुष्य से मनुष्यता का बर्ताव करना चाहिए. अटल जी के सुशासन की उपादेयता हमेशा बनी रहेगी.

कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रभा शंकर मिश्र ने कहा कि अटल जी शासन व्यवस्था एक रोल मॉडल के रूप में सामने आती हैं. उनकी स्वर्णिम चतुर्भुज योजना और परमाणु परीक्षण ने देश को मजबूती प्रदान की. वह उच्च कोटि के कवि थे. उनकी कई कविताएं देश के लोगों को याद हैं. राष्ट्र के निर्माण में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा. डॉ. नागेन्द्र पाठक ने कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री के रूप में एक अच्छे प्रशासक थे. वह विपक्ष में रहते हुए सत्ता पक्ष की आलोचना तो करते ही थे लेकिन अच्छे कार्य के लिए उनकी सराहना भी करते थे. वह अपने प्रारंभिक जीवन में पत्रकारिता से भी जुड़े थे. डॉ. गिरीश कुमार दुबे ने वाजपेयी जी के साथ के संस्मरणों को साझा किया. उनकी सुहृदयता को याद करते हुए महान नेता बताया. डॉ. मुंकेश कुमार शुक्ल ने वाजपेयी की प्रत्युत्पन्नमति और संवेदना पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि अटल जी ने देश की कई समस्याओं को समाप्त किया। वह युगपुरुष थे. देश को ऐसा नेता मिलना मुश्किल है.


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कार्यक्रम सह-समन्वयक डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय ने कहा कि वाजपेयी जी अपने विचारों और व्यवहार से हमेशा युवा रहे. यही कारण था कि वह बहुत लोकप्रिय थे. उनके भाषण को लोग सुनने दूर-दूर से आते थे. डॉ. पाण्डेय ने कहा कि वाजपेयी जी का जीवन न केवल राजनीति, बल्कि साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रीयता के प्रतीक के रूप में याद किया जाना चाहिए. डॉ. खुशबू सिंह ने अटल जी के सफल प्रधान मंत्रित्व काल में उठाये गए कई महत्वपूर्ण कदमो की चर्चा की. विजय कुमार सिंह ने कहा कि अटल जी एक प्रखर वक्ता के साथ ही कवि हृदय के राजनेता थे.


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भाषण प्रतियोगिता में साजिया व काव्य पाठ में हिमांशु को प्रथम स्थान


इस मौके पर हुए भाषण प्रतियोगिता में एम.ए. मास कम्युनिकेशन प्रथम सेमेस्टर की साजिया खान प्रथम, बी.ए. (ऑनर्स) मास कम्युनिकेशन द्वितीय वर्ष की रिद्धि गुप्ता व मनीष विश्वकर्मा द्वितीय तथा बी.ए. (ऑनर्स) मास कम्युनिकेशन प्रथम सेमेस्टर के आशीष तिवारी तृतीय स्थान पर रहे. वहीं, एकल काव्य पाठ प्रतियोगिता में बी.ए. (ऑनर्स) मास कम्युनिकेशन द्वितीय वर्ष के हिमांशु तिवारी प्रथम, बी.ए. (ऑनर्स) मास कम्युनिकेशन प्रथम सेमेस्टर की निहारिका व एम.ए. मास कम्युनिकेशन प्रथम सेमेस्टर की रिया सोनी द्वितीय तथा बी.ए. (ऑनर्स) मास कम्युनिकेशन प्रथम सेमेस्टर के फैजान अहमद तीसरे स्थान पर रहे.

संचालन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मनोहर लाल व डॉ. खुशबू सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम सह-समन्वयक डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय ने किया. इस अवसर पर डॉ. शिव जी सिंह, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. सरिता राव, डॉ. वैष्णवी शुक्ला, भागीरथी, हर्ष, वंशिका, जूली, जाह्नवी, कोमल, अनुष्का, समीक्षा, पीयूष, गौरव, जय कृष्णा, शिवांग, श्रवण, श्रेया, दिशान, लुकमान, ज्योति, खुशी, रीमा, मुस्कान आदि उपस्थित रहे.

गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
वाराणसी : गुरु पूर्णिमा से पूर्व काशी के श्रद्धालुओं ने सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर शंकराचार्य ने काशीवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।बताया गया कि इस वर्ष शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा से पहले ही उनकी चरण पादुका के पूजन की अनुमति मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय 'गविष्ठी यात्रा' पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया। अपने संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं और शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास उनमें माना गया है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौरक्षा का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए।शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें गौरक्षा आंदोलन और शंकराचार्य की गौरक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।ALSO READ: बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, स्वामी निधिरव्यानंद, गिरीश चंद्र तिवारी, अविनाश मिश्रा, रवि त्रिवेदी, रमेश उपाध्याय, अभय शंकर तिवारी, विमल तिवारी, हजारी कीर्ति शुक्ला, मनीष पाण्डेय, मयंक दोषी, शाश्वत मिश्रा, लता पाण्डेय, मंजरी पाण्डेय, चांदनी चौबे, नीलम दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।