BHU ईसी की बैठक में इन फैसलों पर बनी सहमति, ब्राह्मणवादी पितृसत्ता सवाल पर जताई नाराजगी

The BHU EC meeting agreed on these decisions, expressing displeasure over the issue of Brahminical patriarchy.
वाराणसी: बीएचयू में कार्यकारिणी परिषद (ईसी) की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर सहमति बनी है. बुधवार को साल की पहली ईसी की बैठक करीब 10 घंटे तक चली. बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की अध्यक्षता में कुलसचिव प्रो. अरुण सिंह के साथ कुल आठ सदस्य मौजूद रहे. ब्राह्मणवादी पितृसत्ता से सेमेस्टर परीक्षा का सवाल बनाने वाली प्रोफेसर सुतापा दास पर कार्रवाई का मुद्दा भी छाया रहा. सभी सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए प्रश्नपत्र तैयार करने वाले लोगों की बीएचयू में मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए गए.

तीन महीने पर आयोजित की जाएगी बैठक
बुधवार को नौ महीने बाद हुई ईसी की बैठक में यह भी तय किया गया कि अब हर तीन महीने पर बैठक आयोजित की जाएगी. दोपहर एक बजे शुरू हुई बैठक रात सवा 10 बजे तक चली. पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय, मेयर अशोक तिवारी और भाजपा काशी क्षेत्र के अध्यक्ष दिलीप पटेल ने कई तीखे सवाल पूछे. ट्रॉमा सेंटर के सीनियरिटी मामले में तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसमें ईसी सदस्य डॉ. श्वेता, डॉ. यूपी शाही और डॉ. ओम प्रकाश भारतीय को सदस्य बनाया गया है. जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.
जारी कर जॉइन कराने की क्या जरूरत
वहीं सदस्यों ने कुलपति से पूछा कि कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक के परिणाम इतनी तेजी से जारी कर जॉइन कराने की क्या जरूरत थी, जबकि नियमतः ईसी की बैठक में इसका लिफाफा खोला जाना था. सदस्यों ने आरोप लगाया कि वीसी पद का दुरुपयोग हुआ है. बैठक में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, समाजशास्त्र विभाग के प्रो. ओम प्रकाश भारतीय, प्रो. श्वेता प्रसाद, प्रो. बेचन लाल और प्रो. उदय प्रताप शाही मौजूद रहे.

इन फैसलों पर बनी सहमति
डॉ. अशोक सोनकर की वापस ली गई पीएचडी उपाधि पुनः बहाल करने पर सहमति बनी. जांच में पाया गया कि उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया था. हड्डी विभाग के डॉ. शिवम सिन्हा की मांग को भी स्वीकृति दी गई. उनका कहना था कि प्रमोशन के दौरान उनका एक रिसर्च पेपर मूल्यांकन से छूट गया था, जिसे शामिल किया जाए. ईसी सदस्यों ने इसे शामिल कर प्रमोशन देने पर मुहर लगाई. इसी तरह अंग्रेजी विभाग की डॉ. अर्चना को भी प्रमोशन मिलेगा.
Also Read: हीट स्ट्रोक मरीजों के लिए हर अस्पताल में बना कोल्ड रूम, दिया जाएगा ORS का घोल
प्रमोशन की मांग को लेकर धरना देने के कारण जांच के दायरे में आए 26 शिक्षकों को भी राहत देने की बात कही गई. सदस्यों ने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए खड़े हुए थे, इसलिए उनके खिलाफ कोई जांच नहीं चलाई जानी चाहिए. पूर्व कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन के उस फैसले को पलट दिया गया, जिसमें उन्होंने यूडब्ल्यूडी और ईडब्ल्यूएसएस को एक साथ समाहित किया था. अब दोनों विभागों को फिर से अलग-अलग करने के पुराने नियम पर मुहर लगाई गई. संविदा कर्मियों के मसले पर भी मंथन हुआ लेकिन कोई फैसला नहीं लिया गया.



