Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

BHU ईसी की बैठक में इन फैसलों पर बनी सहमति, ब्राह्मणवादी पितृसत्ता सवाल पर जताई नाराजगी

BHU ईसी की बैठक में इन फैसलों पर बनी सहमति, ब्राह्मणवादी पितृसत्ता सवाल पर जताई नाराजगी
May 28, 2026, 08:07 AM
|
Posted By Preeti Kumari

The BHU EC meeting agreed on these decisions, expressing displeasure over the issue of Brahminical patriarchy.


वाराणसी: बीएचयू में कार्यकारिणी परिषद (ईसी) की बैठक में कई महत्‍वपूर्ण फैसलों पर सहमति बनी है. बुधवार को साल की पहली ईसी की बैठक करीब 10 घंटे तक चली. बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की अध्यक्षता में कुलसचिव प्रो. अरुण सिंह के साथ कुल आठ सदस्य मौजूद रहे. ब्राह्मणवादी पितृसत्ता से सेमेस्टर परीक्षा का सवाल बनाने वाली प्रोफेसर सुतापा दास पर कार्रवाई का मुद्दा भी छाया रहा. सभी सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए प्रश्नपत्र तैयार करने वाले लोगों की बीएचयू में मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए गए.


lkiokjuun


तीन महीने पर आयोजित की जाएगी बैठक


बुधवार को नौ महीने बाद हुई ईसी की बैठक में यह भी तय किया गया कि अब हर तीन महीने पर बैठक आयोजित की जाएगी. दोपहर एक बजे शुरू हुई बैठक रात सवा 10 बजे तक चली. पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय, मेयर अशोक तिवारी और भाजपा काशी क्षेत्र के अध्यक्ष दिलीप पटेल ने कई तीखे सवाल पूछे. ट्रॉमा सेंटर के सीनियरिटी मामले में तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसमें ईसी सदस्य डॉ. श्वेता, डॉ. यूपी शाही और डॉ. ओम प्रकाश भारतीय को सदस्य बनाया गया है. जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.


जारी कर जॉइन कराने की क्या जरूरत


वहीं सदस्यों ने कुलपति से पूछा कि कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक के परिणाम इतनी तेजी से जारी कर जॉइन कराने की क्या जरूरत थी, जबकि नियमतः ईसी की बैठक में इसका लिफाफा खोला जाना था. सदस्यों ने आरोप लगाया कि वीसी पद का दुरुपयोग हुआ है. बैठक में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, समाजशास्त्र विभाग के प्रो. ओम प्रकाश भारतीय, प्रो. श्वेता प्रसाद, प्रो. बेचन लाल और प्रो. उदय प्रताप शाही मौजूद रहे.


jkiuj


इन फैसलों पर बनी सहमति


डॉ. अशोक सोनकर की वापस ली गई पीएचडी उपाधि पुनः बहाल करने पर सहमति बनी. जांच में पाया गया कि उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया था. हड्डी विभाग के डॉ. शिवम सिन्हा की मांग को भी स्वीकृति दी गई. उनका कहना था कि प्रमोशन के दौरान उनका एक रिसर्च पेपर मूल्यांकन से छूट गया था, जिसे शामिल किया जाए. ईसी सदस्यों ने इसे शामिल कर प्रमोशन देने पर मुहर लगाई. इसी तरह अंग्रेजी विभाग की डॉ. अर्चना को भी प्रमोशन मिलेगा.


Also Read: हीट स्ट्रोक मरीजों के लिए हर अस्‍पताल में बना कोल्ड रूम, दिया जाएगा ORS का घोल


प्रमोशन की मांग को लेकर धरना देने के कारण जांच के दायरे में आए 26 शिक्षकों को भी राहत देने की बात कही गई. सदस्यों ने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए खड़े हुए थे, इसलिए उनके खिलाफ कोई जांच नहीं चलाई जानी चाहिए. पूर्व कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन के उस फैसले को पलट दिया गया, जिसमें उन्होंने यूडब्ल्यूडी और ईडब्ल्यूएसएस को एक साथ समाहित किया था. अब दोनों विभागों को फिर से अलग-अलग करने के पुराने नियम पर मुहर लगाई गई. संविदा कर्मियों के मसले पर भी मंथन हुआ लेकिन कोई फैसला नहीं लिया गया.


"अपना हुनर अपनी पहचान" के दृष्टिगत पीएम ने कामगार महिलाओं से सीधा संवाद किया
"अपना हुनर अपनी पहचान" के दृष्टिगत पीएम ने कामगार महिलाओं से सीधा संवाद किया
वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी आयें और हमेशा की तरह इस बार भी काशीवासियों को सौगात दी. मिर्जामुराद के खोचवां में अहमदाबाद गुजरात की कपड़ा निर्माता कंपनी अरविंद लिमिटेड (अरविंद मिल्स) के लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 7-8 एकड़ में बने पहले मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का उन्होंने शुभारंभ किया. "अपना हुनर अपनी पहचान" के दृष्टिगत यहां कामगार महिलाओं से सीधा संवाद किया.इस औद्योगिक प्लांट में स्थानीय ही नहीं पूर्वांचल के हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा. इतना ही नहीं स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है और 300 से ज्यादा महिलाओं की भर्ती हो भी चुकी है, जिन्हें यूनिट में प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यह पहल कपड़ा और परिधान निर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करेगी.बताते चलें कि पूर्वांचल में अरविंद मिल्स का यह पहला बड़ा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट है. प्लांट शुरू होने के बाद 2 फेस का निर्माण होगा, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा. काशी के इस नए प्लांट में स्पोर्टस वियर, अंडर गारमेंट आदि कपड़े का उत्पादन होगा. यहां जॉकी, यूएस पोलो और एरो जैसे ब्रांड्स का निर्माण होगा.अरविंद मिल्स सिर्फ कपड़ा बनाने वाली कंपनी नहीं है. यह धागे और कपड़े से लेकर तैयार कपड़ों तथा औद्योगिक इस्तेमाल के विशेष वस्त्रों तक का कारोबार करती है. इसकी शुरुआत 1931 में हुई थी और इसका मुख्यालय अहमदाबाद, गुजरात में है. यह डेनिम के कपड़े (इससे जींस बनाई जाती है) के साथ सूती व लिनेन के कपड़े, सादे कपड़े, सूट के लिए फैब्रिक, स्पोर्ट्सवियर के साथ घरेलू और विदेशी परिधान ब्रांडों को कपड़ा उपलब्ध कराती है.ALSO READ : रामनगर में आस्था का सैलाब, भोर की आरती में गूंजा 'जय श्रीराम, लाखों श्रद्धालु बने साक्षीप्रधानमंत्री ने शुभारंभ के पश्चात मिल के पदाधिकारियों से वहां पर बनाए जा रहे कपड़ों, खादी के बने कपड़ों एवं उनके मैटेरियल के बारे में जानकारी ली. "अपना हुनर अपनी पहचान" के दृष्टिगत महिलाओं से संवाद किया. उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों, उनकी चुनौतियों के बाबत विस्तार से जानकारी ली. अरविन्द मिल्स द्वारा उत्पादित कपड़ों की लगाई गई प्रदर्शनी का भी उन्होंने अवलोकन किया. इस दौरान प्रधानमंत्री के साथ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे. इससे पूर्व मिर्जामुराद के खोचवां पहुंचने पर हेलीपैड पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वागत किया.
रामनगर में आस्था का सैलाब, भोर की आरती में गूंजा 'जय श्रीराम, लाखों श्रद्धालु बने साक्षी
रामनगर में आस्था का सैलाब, भोर की आरती में गूंजा 'जय श्रीराम, लाखों श्रद्धालु बने साक्षी
वाराणसी : विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में भोर की आरती का अप्रतिम महत्व है. यह आरती श्रीराम के राज्याभिषेक के बाद पहली बार होती है. रविवार 25 अक्‍टूबर की सुबह इस अद्भुत आरती में लाखों लीलाप्रेमी शामिल हुए. आधुनिकता से दूर यह रामलीला अपने अनूठे प्रसंगों और अद्भुत मंचन के लिए जानी जाती है. पूरी काशी मानो इस आरती का हिस्सा बनने के लिए उमड़ पड़ी थी. लाखों की भीड़ ने "जय श्री राम" और "हर हर महादेव" के नारे लगाए. इससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया.सदियों से चली आर रही परंपरायह आरती सूर्योदय के दौरान उगते सूर्य के लिए एक विशेष अनुष्ठान है. यह परंपरा सदियों से इसी तरह चली आ रही है. आस्था का यह सैलाब गांव, गली और मोहल्लों से होता हुआ रामलीला स्थल अयोध्या पहुंचा. आरती के लिए घंटा घड़ियाल बजने लगे, जिससे आस्था का कोई ओर-छोर नजर नहीं आ रहा था.राज्याभिषेक की आरतीराज्याभिषेक की आरती रविवार को तड़के लगभग 5:35 बजे शुरू हुई. अनंत नारायण सिंह राजपरिवार के सदस्यों और दरबारियों के साथ रामनगर दुर्ग से पैदल लीला स्थल अयोध्या मैदान पहुंचे. लगभग 5:45 बजे भगवान भास्कर के दर्शन होते ही माता कौशल्या ने आरती उतारी. उन्होंने अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान की आरती की.ALSO READ : रामनगर किले में खुले दुर्लभ 'श्‍याम वर्ण हनुमान' जी के कपाट, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़लाल और सफेद महताबी रोशनी के बीच यह चार मिनट की आरती झांकी अनुपम थी. उपस्थित विशाल जनसमूह ने इस छटा को अपने मानस पटल पर अंकित कर लिया. अनंत नारायण सिंह ने भी खड़े होकर राम राज्याभिषेक की आरती का दर्शन किया.आरती के बाद अनंत नारायण सिंह टहलने के लिए निकले. इसके बाद श्रीराम को कंधे पर उठाए बजरंग बली और सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न भक्तों के कंधों पर बैठकर बाजार भ्रमण के लिए बलुआघाट स्थित धर्मशाला पहुंचे.
रामनगर किले में खुले दुर्लभ 'श्‍याम वर्ण हनुमान' जी के कपाट, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
रामनगर किले में खुले दुर्लभ 'श्‍याम वर्ण हनुमान' जी के कपाट, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
वाराणसी : विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में 'राम राज्याभिषेक' (राजगद्दी) के पावन अवसर के बाद आज रविवार को ऐतिहासिक रामनगर किले में स्थित रहस्यमयी एवं दुर्लभ दक्षिणमुखी श्‍याम वर्ण हनुमान जी के दर्शन शुरू हो गए हैं. साल में केवल एक बार खुलने वाले इस पौराणिक मंदिर के कपाट खुलते ही भगवान बजरंगबली के दर्शन और आशीर्वाद पाने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की किलोमीटर लंबी कतारें लग गई थी.वर्ष में केवल एक दिन खुलते हैं कपाटवर्ष में केवल एक दिन खुलते हैं मंदिर के कपाटरामनगर दुर्ग (किले) की परंपराओं के अनुसार, दक्षिणमुखी काले हनुमान जी का कपाट साल में केवल एक बार, राम राज्याभिषेक के ठीक अगले दिन ही श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है. स्थानीय मान्यताओं और दुर्ग की परंपरा के अनुसार, इस दक्षिणमुखी काले हनुमान जी की दिव्य शक्ति और आशीर्वाद से ही सदियों से रामनगर किले (दुर्ग) का अस्तित्व और वैभव सुरक्षित है. इसी आस्था के चलते काशी ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के जिलों से भी हजारों भक्त इस दुर्लभ दर्शन का पुण्य लाभ कमाने रामनगर पहुंच रहे हैं.त्रेतायुग और श्रीराम-समुद्र संवाद से जुड़ी है पौराणिक कथामंदिर के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व को लेकर एक बेहद रोचक प्रसंग प्रचलित है. मान्यता है कि इस प्रतिमा का संबंध त्रेतायुग में भगवान श्रीराम और रावण के युद्ध काल से है:समुद्र पर श्रीराम का कोप: जब भगवान रामेश्वरम में लंका जाने के लिए समुद्र तट पर मार्ग मांग रहे थे और समुद्र ने रास्ता नहीं दिया, तब कुपित होकर श्रीराम ने अपने धनुष पर बाण चढ़ाकर समुद्र को सुखा देने की चेतावनी दी थी.ALSO READ : वाराणसी में पीएम मोदी ने अरविंद मिल की नई परिधान निर्माण इकाई का किया उद्घाटनहनुमान जी ने रोका था बाण: भयभीत होकर जब समुद्र प्रकट हुआ और उसने अनुनय-विनय की, तो श्रीराम ने प्रत्यंचा पर चढ़ चुके उस अमोघ बाण को दिशा बदलकर पश्चिम की ओर छोड़ दिया.अग्निबाण के तेज से काला पड़ा रंग: उस प्रचंड बाण के प्रभाव से सृष्टि को बचाने के लिए हनुमान जी ने उसे स्वयं पर रोक लिया था. बाण के असीम तेज और ज्वाला के कारण हनुमान जी का रंग श्याम (काला) पड़ गया था.सुरक्षा के कड़े इंतजाम, जयकारों से गूंजा किला परिसरअलौकिक दक्षिणमुखी काले हनुमान जी के दर्शन के लिए रामनगर किला परिसर में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के कड़े इंतजाम किए गए हैं. पूरा किला परिसर 'जय श्री राम' और 'जय बजरंगबली' के उद्घोष से गुंजायमान है. श्रद्धालु अनुशासित रूप से कतारबद्ध होकर दर्शन कर रहे हैं और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं.