BHU के कुलसचिव पर नियमों की अनदेखी कर लाभ लेने का आरोप, उठी जांच की मांग

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कुलसचिव प्रोफेसर अरुण कुमार सिंह पर सेवा संबंधी नियमों के उल्लंघन तथा पेंशन एवं अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इस संबंध में वाराणसी निवासी अंजनी कुमार शुक्ला ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (एक्जीक्यूटिव काउंसिल) के अध्यक्ष एवं सदस्यों को शिकायत पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.

शिकायतकर्ता का आरोप
इस मामले में शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह ने अपने पद के प्रभाव का उपयोग करते हुए पूर्व सेवाओं को जोड़कर पेंशन तथा अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त किए, जबकि इस प्रक्रिया में केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) तथा संबंधित मंत्रालयों के नियमों का समुचित पालन नहीं किया गया, शिकायत पत्र में ये भी कहा गया है कि डीओपीटी के वर्ष 2005 एवं 2009 के दिशा-निर्देशों के अनुसार पुरानी पेंशन योजना का लाभ तभी दिया जा सकता है, जब पूर्व सेवा नियमानुसार जोड़ने योग्य हो तथा उससे संबंधित जीपीएफ खाता एवं प्रो-राटा पेंशन की प्रक्रिया पूरी की गई हो.
जिसके चलते शिकायतकर्ता का दावा है कि प्रो. सिंह की नियुक्ति के वर्षों बाद तक उनका जीपीएफ खाता नहीं खोला गया, जिससे उनकी पात्रता पर सवाल खड़े होते हैं. यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2016 में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा तैयार किए गए वित्तीय प्रस्तावों और गणना पत्रों में बाद में बदलाव किए गए, आरोप है कि पूर्व नियोक्ता से आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए बिना ही उनकी पूर्व सेवाओं को पेंशन गणना में शामिल कर लिया गया, जो प्रचलित नियमों के विपरीत है.
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आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी
अंजनी कुमार शुक्ला ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि प्रो. सिंह की पूर्व सेवाओं, विशेष रूप से व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) में किए गए कार्यकाल को शिक्षण अनुभव में शामिल कर लाभ दिया गया, शिकायतकर्ता के अनुसार यह प्रक्रिया यूजीसी के मानकों और नियमों के अनुरूप नहीं प्रतीत होती. शिकायतकर्ता ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि यह देश के प्रतिष्ठित आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक बीएचयू की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है, उन्होंने सभी अभिलेखों और तथ्यों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है. हालांकि, समाचार लिखे जाने तक बीएचयू प्रशासन अथवा कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी. आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है तथा जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.



