Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

BHU की सुरक्षा व्यवस्था में निजी एजेंसी की एंट्री, अब 900 से अधिक सुरक्षाकर्मी करेंगे काम

BHU की सुरक्षा व्यवस्था में निजी एजेंसी की एंट्री, अब 900 से अधिक सुरक्षाकर्मी करेंगे काम
May 15, 2026, 06:03 AM
|
Posted By Preeti Kumari

Private agency enters BHU security system, over 900 security personnel on the run


वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. आईआईटी बीएचयू के बाद अब बीएचयू परिसर में भी निजी सुरक्षा एजेंसी की एंट्री हो गई है. विश्वविद्यालय के 900 से अधिक सुरक्षाकर्मी अब सिक्योरिटी इंटेलीजेंस सर्विसेज (एसआईएस) और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के संयुक्त नियंत्रण में कार्य करेंगे. इस नई व्यवस्था को लेकर परिसर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.


क


सुविधाओं का जिम्मा एसआईएस के पास


जानकारी के अनुसार, सुरक्षाकर्मियों की वर्दी पहले की तरह बीएचयू की ही रहेगी, ताकि विश्वविद्यालय की पहचान और अनुशासन व्यवस्था में कोई बदलाव नजर न आए. हालांकि, अब उनके वेतन, पीएफ, मेडिक्लेम और अन्य सुविधाओं का जिम्मा एसआईएस के पास होगा. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे सुरक्षा व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और पेशेवर होगी.


क


सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालेगा बीएचयू प्रशासन


नई व्यवस्था के तहत सुरक्षा व्यवस्था की कमान अभी भी बीएचयू प्रशासन के हाथ में ही रहेगी, चीफ प्रॉक्टर सहित सुरक्षा से जुड़े बड़े प्रशासनिक पदों पर विश्वविद्यालय के अधिकारी ही बने रहेंगे, यह व्यवस्था कुछ हद तक आईआईटी बीएचयू के मॉडल की तर्ज पर लागू की गई है, जहां निजी एजेंसी और संस्थान प्रशासन मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं.


इन दिनों एसआईएस के अधिकारी बीएचयू के सेंट्रल ऑफिस में लगातार आते-जाते दिखाई दे रहे हैं. कैंपस में एसआईएस का एक रैपिड एक्शन वाहन भी देखा जा रहा है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की तैयारी चल रही है. हालांकि, नियमित गश्त और सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश वाहन बीएचयू प्रशासन के ही रहेंगे.


आठ घंटे की होगी ड्यूटी, समय पर मिलेगा वेतन


नई व्यवस्था के तहत सुरक्षाकर्मियों को सबसे बड़ी राहत ड्यूटी और वेतन व्यवस्था में मिलने जा रही है, अब उनकी ड्यूटी केवल आठ घंटे की निर्धारित की जाएगी. साथ ही उन्हें समय पर वेतन, छुट्टियां और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी. सूत्रों के मुताबिक, पहले कई बार सुरक्षाकर्मियों को वेतन मिलने में देरी का सामना करना पड़ता था, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बना रहता था. अब एसआईएस के माध्यम से भुगतान व्यवस्था नियमित होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके अलावा पीएफ, मेडिक्लेम और अन्य कर्मचारी सुविधाओं के व्यवस्थित संचालन से सुरक्षाकर्मियों को भी राहत मिलेगी.


ग


यह भी पढ़ें: दिल्ली-NCR में आंधी-तूफान के साथ बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट


विश्वविद्यालय परिसर में लागू की गई इस नई व्यवस्था को लेकर जहां कुछ लोग इसे सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग निजी एजेंसी की भूमिका बढ़ने को लेकर भी चर्चा कर रहे हैं, फिलहाल आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नई व्यवस्था बीएचयू की सुरक्षा प्रणाली को कितना प्रभावी बना पाती है.

आकाश गंगा कॉलोनी में 7.55 लाख रुपये की लागत से बनेगी नई सड़क...
आकाश गंगा कॉलोनी में 7.55 लाख रुपये की लागत से बनेगी नई सड़क...
वाराणसी : शहर के विभिन्न इलाकों में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में नगर निगम लगातार कार्य कर रहा है.इसी क्रम में चिरईगांव क्षेत्र की कर्मदेनी देवी आकाश गंगा कॉलोनी में नई सड़क निर्माण परियोजना की शुरुआत की गई है.इस सड़क के निर्माण पर लगभग 7.55 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सकेगी.जानकारी के अनुसार, आकाश गंगा कॉलोनी के मुरारी चौक सामनेघाट स्थित मकान से लेकर बृज किशोर पांडेय के मकान तक करीब 62 मीटर लंबी सड़क का निर्माण कराया जाएगा.लंबे समय से इस मार्ग की स्थिति खराब होने के कारण स्थानीय लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था.बरसात के दिनों में यह समस्या और अधिक बढ़ जाती थी.बुधवार को वाराणसी के महापौर अशोक कुमार तिवारी ने सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास किया.इस दौरान उन्होंने कहा कि नगर निगम का लक्ष्य शहर के हर क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करना है.बेहतर सड़क, साफ-सफाई, जल निकासी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं.महापौर ने निर्माण कार्य से जुड़ी कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि सड़क का निर्माण तय समय सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए.उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लोगों को जल्द से जल्द इस परियोजना का लाभ मिलना चाहिए.ALSO READ : वाराणसी एयरपोर्ट पर 'हब एंड स्पोक' विमान सेवा की शुरुआत, मंत्री ने चार यात्रियों को दिए बोर्डिंग पास...स्थानीय नागरिकों ने भी सड़क निर्माण की शुरुआत पर खुशी जताई.उनका कहना है कि नई सड़क बनने से कॉलोनी में आवागमन आसान होगा और क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी.नगर निगम की इस पहल से क्षेत्र के निवासियों को लंबे समय से चली आ रही समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है.
वाराणसी एयरपोर्ट पर 'हब एंड स्पोक' विमान सेवा की शुरुआत, मंत्री ने चार यात्रियों को दिए बोर्डिंग पास...
वाराणसी एयरपोर्ट पर 'हब एंड स्पोक' विमान सेवा की शुरुआत, मंत्री ने चार यात्रियों को दिए बोर्डिंग पास...
वाराणसी : लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्‍ट्रीय एयरपोर्ट पर बुधवार की शाम केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने 'हब एंड स्पोक' विमान सेवा का शुभारंभ किया. इस दौरान उन्होंने चार यात्रियों को बोर्डिंग पास दिया. इस मॉडल का उद्देश्य भारत को दुनिया से और दुनिया को भारत से जोड़ना है. ईज़ी कनेक्ट सर्विस के तहत पहली फ्लाइट एआई 1111 आज सुबह 9:23 बजे वाराणसी से रवाना हुई. इस फ्लाइट में ऐसे अंतरराष्ट्रीय यात्री सवार थे जो दिल्ली से आगे भारत के बाहर 9 गंतव्यों - जैसे दुबई, कोलंबो, जेद्दा, रियाद, काठमांडू और फुकेत - के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट लेने वाले थे. उत्तर प्रदेश के मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्‍हा और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष विपिन कुमार की उपस्थिति में एक विशेष कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ. मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन के अपर सचिव पुनीत कंसल और मंडलायुक्त वाराणसी एस. राजलिंगम भी इस अवसर पर मौजूद रहे.हब एंड स्‍पोक एक विमानन नेटवर्क प्रणाली है, जहाँ एक केंद्रीय हवाई अड्डे (हब) का उपयोग यात्री यातायात को केंद्रित करने और उसे छोटे हवाई अड्डों (स्पोक) से जोड़ने के लिए किया जाता है. इस अवसर पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने कहा कि यहां की हवा, पानी, धरती और मिट्टी के हर कण में शंकर की शक्ति नजर आती है. यह हम सबके लिए एक महत्वपूर्ण दिन है. आज का यह विशेष कार्यक्रम वाराणसी से शुरू होकर भारत में इतिहास रचने वाला है. इसके लिए सभी को आनंद और गौरव की अनुभूति हो रही है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद और उनके नेतृत्व में शुरू हो रहा है. भारत इस कार्यक्रम का लंबे समय से इंतजार कर रहा था. नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार ने कहा कि पिछले 12 साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हवाई यात्रा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. नगर विमानन क्षेत्र में भी उल्लेखनीय विकास देखने को मिला है. विश्व में किसी अन्य देश में ऐसा विकास नहीं देखा गया है. 2014 में भारत में 74 हवाई अड्डे थे, जो अब 160 से अधिक हो गए हैं। दुनिया इतने कम समय में इतने हवाई अड्डे बनने से हैरान है. यात्रियों की संख्या भी दोगुनी हो गई है.वहीं एयर इंडिया ने वाराणसी से दिल्ली के माध्यम से विश्व के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को जोड़ने वाली अपनी पहली हब एंड स्पोक उड़ान सेवा का शुभारंभ किया. एयर इंडिया ने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन से जोड़ा है, जिसके तहत भारत को वैश्विक विमानन हब और अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात का प्रमुख केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है.नई व्यवस्था के तहत वाराणसी से दिल्ली पहुंचने वाले यात्रियों को दिल्ली हब के माध्यम से यूरोप, उत्तरी अमेरिका, खाड़ी देशों, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए बेहतर और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी. इससे पूर्वांचल के यात्रियों, व्यापारियों, छात्रों और पर्यटकों को विशेष लाभ होने की उम्मीद है.ALSO READ : वरुणा नदी के कायाकल्प का रोडमैप तैयार, रिवरफ्रंट संवारने को VDA-ONGC में समझौता...एयर इंडिया के स्टेशन मैनेजर आतिफ इदरीश ने बताया कि हब एंड स्पोक मॉडल के माध्यम से क्षेत्रीय शहरों को देश के प्रमुख विमानन केंद्रों से जोड़कर यात्रियों को अधिक विकल्प, बेहतर कनेक्शन समय और व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक शहर को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ना एयर इंडिया की रणनीति का अहम हिस्सा है.वाराणसी एयरपोर्ट के निदेशक पुनीत गुप्ता ने कहा कि इस सेवा के शुरू होने को पूर्वांचल की हवाई कनेक्टिविटी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा आसान होगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है.
वरुणा नदी के कायाकल्प का रोडमैप तैयार, रिवरफ्रंट संवारने को VDA-ONGC में समझौता...
वरुणा नदी के कायाकल्प का रोडमैप तैयार, रिवरफ्रंट संवारने को VDA-ONGC में समझौता...
वाराणसी : काशी की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरणीय पहचान से जुड़ी वरुणा नदी के कायाकल्प की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. वरुणा रिवरफ्रंट विकास परियोजना के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) और ओएनजीसी के बीच 260.61 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए. ओएनजीसी अपनी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) निधि से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का वित्तपोषण करेगी. इससे वरुणा नदी के तटों का सुनियोजित विकास होने के साथ काशी में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधाओं को नया आयाम मिलेगा.वीडीए सभागार में पिछले दिनों आयोजित कार्यक्रम में वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा और ओएनजीसी के सीएसआर प्रमुख नीरज कुमार बंसल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य वरुणा नदी को केवल स्वच्छ और संरक्षित बनाना ही नहीं, बल्कि इसे आधुनिक रिवरफ्रंट के रूप में विकसित करना भी है. इसके तहत नदी तटों को हरित क्षेत्रों, पैदल पथ, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधाओं, सार्वजनिक उपयोग के खुले स्थलों और अन्य आधुनिक शहरी सुविधाओं से विकसित किया जाएगा.परियोजना मंडलायुक्त एवं वीडीए अध्यक्ष एस. राजलिंगम के मार्गदर्शन में तैयार की गई है. वहीं, ओएनजीसी के महाप्रबंधक अटल श्रीवास्तव ने इसे अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यह परियोजना भारत सरकार के जल निकाय पुनर्जीवन मिशन की अवधारणा के अनुरूप है. इससे जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और सतत शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधुनिक सुविधाओं से युक्त काशी की परिकल्पना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नदी संरक्षण एवं शहरी विकास की प्राथमिकताओं को भी गति देगी.नदी तट का विकासपरियोजना के मुख्य उद्देश्य यह परियोजना काशी के शहरी सुंदरीकरण, पर्यावरण संरक्षण और नदी तट विकास पर केंद्रित है. इसका लक्ष्य पर्यटन संवर्धन और जनसुविधाओं का विस्तार करना भी है. ओएनजीसी सीएसआर से इस परियोजना को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी. इसका उद्देश्य वाराणसी को एक आधुनिक, स्वच्छ और हरित नगर के रूप में स्थापित करना है.परियोजना के तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने से लेकर निर्माण कार्य तक सभी चरण तय समयबद्ध योजना के अनुसार पूरे किए जाएंगे.ALSO READ:काशी विद्यापीठ में छात्रों ने किया कुलपति का घेराव, हाॅस्‍टल से निकाले जाने पर जताया विरोध...वरुणा नदी काशी की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है. लंबे समय से इसके संरक्षण और विकास की आवश्यकता महसूस की जा रही थी. यह परियोजना नदी के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उसके किनारों को व्यवस्थित और आकर्षक बनाएगी. - पुर्ण बोरा, वीडीए उपाध्यक्ष