BHU की सुरक्षा व्यवस्था में निजी एजेंसी की एंट्री, अब 900 से अधिक सुरक्षाकर्मी करेंगे काम

Private agency enters BHU security system, over 900 security personnel on the run
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. आईआईटी बीएचयू के बाद अब बीएचयू परिसर में भी निजी सुरक्षा एजेंसी की एंट्री हो गई है. विश्वविद्यालय के 900 से अधिक सुरक्षाकर्मी अब सिक्योरिटी इंटेलीजेंस सर्विसेज (एसआईएस) और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के संयुक्त नियंत्रण में कार्य करेंगे. इस नई व्यवस्था को लेकर परिसर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.

सुविधाओं का जिम्मा एसआईएस के पास
जानकारी के अनुसार, सुरक्षाकर्मियों की वर्दी पहले की तरह बीएचयू की ही रहेगी, ताकि विश्वविद्यालय की पहचान और अनुशासन व्यवस्था में कोई बदलाव नजर न आए. हालांकि, अब उनके वेतन, पीएफ, मेडिक्लेम और अन्य सुविधाओं का जिम्मा एसआईएस के पास होगा. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे सुरक्षा व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और पेशेवर होगी.

सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालेगा बीएचयू प्रशासन
नई व्यवस्था के तहत सुरक्षा व्यवस्था की कमान अभी भी बीएचयू प्रशासन के हाथ में ही रहेगी, चीफ प्रॉक्टर सहित सुरक्षा से जुड़े बड़े प्रशासनिक पदों पर विश्वविद्यालय के अधिकारी ही बने रहेंगे, यह व्यवस्था कुछ हद तक आईआईटी बीएचयू के मॉडल की तर्ज पर लागू की गई है, जहां निजी एजेंसी और संस्थान प्रशासन मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं.
इन दिनों एसआईएस के अधिकारी बीएचयू के सेंट्रल ऑफिस में लगातार आते-जाते दिखाई दे रहे हैं. कैंपस में एसआईएस का एक रैपिड एक्शन वाहन भी देखा जा रहा है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की तैयारी चल रही है. हालांकि, नियमित गश्त और सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश वाहन बीएचयू प्रशासन के ही रहेंगे.
आठ घंटे की होगी ड्यूटी, समय पर मिलेगा वेतन
नई व्यवस्था के तहत सुरक्षाकर्मियों को सबसे बड़ी राहत ड्यूटी और वेतन व्यवस्था में मिलने जा रही है, अब उनकी ड्यूटी केवल आठ घंटे की निर्धारित की जाएगी. साथ ही उन्हें समय पर वेतन, छुट्टियां और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी. सूत्रों के मुताबिक, पहले कई बार सुरक्षाकर्मियों को वेतन मिलने में देरी का सामना करना पड़ता था, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बना रहता था. अब एसआईएस के माध्यम से भुगतान व्यवस्था नियमित होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके अलावा पीएफ, मेडिक्लेम और अन्य कर्मचारी सुविधाओं के व्यवस्थित संचालन से सुरक्षाकर्मियों को भी राहत मिलेगी.

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विश्वविद्यालय परिसर में लागू की गई इस नई व्यवस्था को लेकर जहां कुछ लोग इसे सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग निजी एजेंसी की भूमिका बढ़ने को लेकर भी चर्चा कर रहे हैं, फिलहाल आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नई व्यवस्था बीएचयू की सुरक्षा प्रणाली को कितना प्रभावी बना पाती है.



