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अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर वाराणसी में ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग महाअभियान, 10 हजार से अधिक का लक्ष्‍य

अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर वाराणसी में ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग महाअभियान, 10 हजार से अधिक का लक्ष्‍य
Mar 07, 2026, 12:02 PM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर काशी में विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं. इसी क्रम में सिगरा स्टेडियम में भी एक वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह ने बताया कि महिला दिवस 8 मार्च 2026 के उपलक्ष्य में, जिला प्रशासन द्वारा आईटीबी फाउंडेशन के सहयोग से कल सिगरा स्टेडियम में महिलाओं के लिए एक महा अभियान, ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग के लिए आयोजित किया जा रहा है. विदित है कि 14 जनवरी को नमो रथ नाम से हम लोगों ने 20 एंबुलेंस यहां पर चलाई थीं और जिसके माध्यम से पूरे जनपद में 20 अलग-अलग स्थानों पर प्रतिदिन ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग की जा रही थी. पिछले दिनों में 36,000 से ज्यादा महिलाओं की अब तक स्क्रीनिंग की जा चुकी है.


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सीडीओ ने बताया कि इसी उपलक्ष्य में महिला दिवस के अवसर पर, एक ही जगह पर हम लोग कल 10,000 से ज्यादा महिलाओं का ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग, एआई एनेबल टेक्नोलॉजी के माध्यम से करने जा रहे हैं. यह जो तकनीक है, यह नो टच नो सी प्रोसेस पर आधारित है. यानी कोई टच या किसी भी व्यक्ति की उपस्थिति उस समय नहीं होती है, तो महिलाओं की प्राइवेसी एनसॉल्ड रहती है. मैं आपके माध्यम से हमारी वाराणसी जनपद की महिलाओं से अनुरोध करना चाहूंगा कि आप ज्यादा से ज्यादा संख्या में, जिला सिगरा स्टेडियम में कल आएं और यह जो ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग की जांच है, इसको कराएं ताकि आपको अर्ली स्टेज में अगर कोई कैंसर है या कोई बीमारी है, तो उसको डिटेक्ट किया जा सके और आगे का जो प्रोसीजर है, उसमें भी जिला प्रशासन आपके साथ हमेशा सहयोग में खड़ा रहेगा.


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टाटा कैंसर हॉस्पिटल और अन्य हॉस्पिटल से जो सहयोग भी चाहिए होगा, उसमें भी जिला प्रशासन खड़ा रहेगा. कल 8 मार्च 2026 को सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक सिगरा स्टेडियम में अपनी ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग की, जो एआई अनेबल थर्मल इमेजिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित जांच है, जो नो टच नो सी प्रोसीजर पर है, उसको कराने के लिए ज्यादा से ज्यादा संख्या में आएं

बनारस में नदी में होगी जलयानों की मरम्मत....
बनारस में नदी में होगी जलयानों की मरम्मत....
वाराणसीः इनलैंड वाटरवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने रामनगर में बंदरगाह के उत्तरी छोर पर चार बीघा क्षेत्र में बनने वाले शिप रिपेयरिंग सेन्टर की शुरुआत की है. इसके साथ ही वाराणसी देश का पहला शहर होगा जहां नदी में जलयानों की मरम्मयत की जाएगी.कार्यदायी संस्था लार्सन एन्ड टुब्रो जिओ स्ट्रक्चर के कर्मचारियों ने प्राथमिक कार्य शुरू कर दिया है. यहां जहाजों को रिपेयर करने के लिए उत्त्तरी छोर पर एक वाटर चैनल बनाया जाएगा जहा जहाज नदी की मुख्य धारा से अंदर चैनल में रिपेयर होने के लिए आएंगे.कार्यदायी संस्था फिलहाल रिपेयर फैसिलिटी के प्लेटफार्म को बनाने का काम कर रही है उनके मुख्य अभियंता रमेश जोशी ने बताया कि प्रोजेक्ट को दो साल में पूरा करना है. बताया कि बारिश खत्म होने का इंतजार कर रहे थे लेकिन प्रोजेक्ट को जल्दी खत्म करने के लिए जल्दी ही काम शुरू करना पड़ा.ALSO READ: ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्रइस बाबत उन्होंने बताया कि देश मे किसी भी नदी पर बनने वाला यह पहला शिप रिपेयरिंग सेंटर है. यहां कुछ जहाजों को क्रेन के माध्यम से ड्राई डाक सूखी सतह पर लाकर रिपेयर करने की सुविधा होगी। इसके साथ ही जहाज में पानी की सतह से ऊपर की खराबी को नदी में ही ठीक कर दिया जाएगा.बताया रि देश मे अभी तक शिप रिपेयरिंग सेन्टर समुद्रों के किनारे ही बनाये जाते है देश मे किसी नदी के ऊपर पहली बार शिप रिपेयरिंग सेन्टर बन रहा है. पहले जहाजों को रिपेयरिंग के लिए कोलकाता जाना होता था जो अब बनारस में भी संभव है.
ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
वाराणसी। बालू परिवहन में ओवरलोडिंग और बिना आवश्यक वैध दस्तावेजों के वाहनों के संचालन को लेकर बनारस ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने प्रशासन और खनन विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह ने संबंधित अधिकारियों को पत्र सौंपकर ओवरलोड एवं बिना आवश्यक आईएसटीपी/वैध कागजात के बालू परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाने की मांग की।एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ समय पहले प्रशासन की ओर से ओवरलोड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया था। इस दौरान विभिन्न थाना क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ओवरलोड वाहनों को पकड़ा गया और कार्रवाई की गई। अभियान का असर यह रहा कि कुछ समय तक ओवरलोड बालू वाहनों का संचालन काफी हद तक नियंत्रित रहा, लेकिन कार्रवाई की गति धीमी पड़ने के बाद एक बार फिर ऐसे वाहनों के संचालन की शिकायतें सामने आने लगी हैं।ओवरलोडिंग से वैध ट्रक ऑपरेटरों को नुकसानएसोसिएशन के संरक्षक विजय सिंह ने कहा कि ओवरलोडिंग का सीधा असर निर्धारित क्षमता के अनुसार वाहन चलाने वाले ट्रक मालिकों पर पड़ रहा है। वैध तरीके से क्षमता के अनुरूप बालू परिवहन करने वाले वाहन संचालकों की लागत अधिक आती है, जबकि ओवरलोड वाहन कम लागत में अधिक माल पहुंचाकर अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं। इससे नियमों का पालन करने वाले ट्रक ऑपरेटरों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बन रही है।एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की कि पूर्व की तरह नियमित और प्रभावी अभियान चलाया जाए तथा बालू लदे प्रत्येक वाहन के भार और दस्तावेजों की जांच सुनिश्चित की जाए।सड़क क्षति और राजस्व नुकसान की भी जताई आशंकाट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने कहा कि ओवरलोडिंग का असर केवल परिवहन कारोबार तक सीमित नहीं है। क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले भारी वाहनों से सड़कों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सड़कें समय से पहले क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। वहीं, नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।बैठक के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों और बालू मंडी से जुड़े व्यापारियों ने ओवरलोडिंग के मुद्दे पर चर्चा की। इसके बाद प्रशासन और खनन विभाग से प्रभावी कार्रवाई के लिए पत्र सौंपने का निर्णय लिया गया।ALSO READ: BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरीमिलीभगत के आरोपों की जांच की मांगएसोसिएशन से जुड़े कुछ ऑपरेटरों ने ओवरलोड वाहनों को कथित रूप से पास कराने में बालू माफिया और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एसोसिएशन ने प्रशासन से इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि आरोप गलत पाए जाएं तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।इस दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह, संरक्षक विजय सिंह, उपाध्यक्ष कुंवर सिंह, राकेश सिंह, नीतेश सिंह, महामंत्री आनंद भूषण सिंह, उपमहामंत्री शुभांशु सिंह, मंत्री मुकुंद सिंह, धर्मेंद्र यादव, जितेंद्र सिंह, मीडिया प्रभारी अजित कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष अनुराग सिंह (गुड्डू सिंह), सचिव दीपू यादव समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरी
BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरी
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मालवीय भवन में रविवार को गीता समिति की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘रविवासरीय गीता प्रवचन’ का सत्रारंभ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन प्रत्येक रविवार की तरह सुबह 10 बजे से 11:30 बजे तक किया जाएगा और पूरे शैक्षणिक सत्र में इसकी निरंतरता बनी रहेगी।कार्यक्रम की शुरुआत वेद विभाग के विद्यार्थियों के वैदिक मंगलाचरण से हुई। इसके बाद संगीत एवं मंच कला संकाय के विद्यार्थियों ने कुलगीत एवं भजन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के उस विचार को प्रमुखता से रेखांकित किया गया, जिसमें शिक्षा के उद्देश्य को केवल बौद्धिक विकास तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों में नैतिक और आध्यात्मिक चेतना के विकास पर जोर दिया गया था।इस अवसर पर प्रो. हृदयरंजन शर्मा ने कहा कि महामना मालवीय का विश्वास था कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के लिए श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वभौमिक जीवन-मूल्यों और सिद्धांतों से उनका परिचय आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उन्होंने विश्वविद्यालय में रविवासरीय गीता प्रवचन की परंपरा शुरू की थी।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए BHU के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति विद्यार्थियों में रुचि बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि नवप्रवेशी विद्यार्थियों के इंडक्शन कार्यक्रम में भी गीता से संबंधित आयोजन शामिल किए जाएं, ताकि विद्यार्थियों में प्रारंभ से ही भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति जुड़ाव विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि गीता के माध्यम से मन को संस्कारित करने और जीवन-मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास जरूरी है।मालवीय भवन के मानित निदेशक प्रो. पतंजलि मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती भौतिक प्रतिस्पर्धा और तनाव के कारण व्यक्ति मानसिक एवं शारीरिक परेशानियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में गीता के संदेश और जीवन-दर्शन की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।गीता समिति के सचिव प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय ज्ञान-परंपरा का अमूल्य ग्रंथ है, जो मनुष्य को कर्तव्य, आत्मसंयम और सदाचार का मार्ग दिखाता है। उन्होंने बताया कि महामना ने विश्वविद्यालय परिवार से प्रत्येक रविवार डेढ़ घंटे का ‘समय-दान’ गीता प्रवचन में शामिल होने के लिए अपनी गुरु-दक्षिणा के रूप में देने की अपील की थी।अहं त्यागकर विनम्रता और आत्मसंयम से जीवन जीने का संदेशकार्यक्रम के मुख्य अतिथि सद्गुरु माधव प्रियदास जी, अध्यक्ष, स्वामीनारायण गुरुकुल, गुजरात, अहमदाबाद ने गीता के अध्ययन, मनन और उसके अनुसार जीवन जीने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अहं की भावना का त्याग कर विनम्रता और आत्मसंयम के साथ जीवन जीने का सुझाव दिया।उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बाहरी ज्ञान से परिचित कराना नहीं, बल्कि व्यक्ति को उस ज्ञान को ग्रहण करने योग्य बनाना भी है। भगवान विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार त्रिविक्रम ने तीन पगों में समस्त ब्रह्मांड को नाप लिया, उसी प्रकार गीता जैसे विराट विषय को सीमित शब्दों में समेटना कठिन है। उन्होंने कहा कि किसी विषय को समझे बिना उसका सही विवेचन संभव नहीं है, इसलिए गीता के संदेश को समझने और जीवन में उतारने की आवश्यकता है।कार्यक्रम का संचालन भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शारदिंदु कुमार त्रिपाठी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन गीता समिति की संयुक्त सचिव प्रो. सुमन जैन ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।