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वाराणसी में देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन यात्री जलयान सेवा शुरू, सर्बानंद सोनोवाल ने दिखाई हरी झंडी

वाराणसी में देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन यात्री जलयान सेवा शुरू, सर्बानंद सोनोवाल ने दिखाई हरी झंडी
Dec 12, 2025, 03:29 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : भारत ने अपने हरित समुद्री अभियान में एक बड़ा कदम उठाया है, क्योंकि पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने आज यहां नमो घाट पर देश के पहले पूरी तरह से स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन चालित यात्री यात्री जलयान वाणिज्यिक संचालन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.

यह जलयान भारत में समुद्री परिवेश में हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रणोदन का प्रदर्शन करने वाला पहला जलयान है और इसमें पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है। यह एक निम्न तापमान प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन ईंधन सेल प्रणाली पर संचालित होता है जो संग्रहित हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित करता है और उप-उत्पाद के रूप में केवल पानी उत्सर्जित करता है.

इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत स्वच्छ, टिकाऊ और आत्मनिर्भर परिवहन प्रणालियों की ओर एक परिवर्तनकारी बदलाव देख रहा है। हमारे पहले स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन चालित जलयान का शुभारंभ प्रधानमंत्री जी के इस दृष्टिकोण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.

यह उपलब्धि प्रधानमंत्री की 'मेक इन इंडिया' की प्रतिबद्धता और सभी क्षेत्रों में हरित परिवहन की ओर बदलाव को दर्शाती है। यह उपलब्धि हमारी पवित्र गंगा के पुनरुद्धार और संरक्षण के व्यापक मिशन को भी मजबूत करती है। जलमार्गों पर स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा देते हुए, हम न केवल नवाचार को प्रोत्साहित कर रहे हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि विकास पर्यावरण के प्रति हमारे दायित्व के साथ-साथ चले। आज की यह उपलब्धि हमारे राष्ट्र के लिए एक हरित और समृद्ध समुद्री भविष्य के निर्माण के प्रति प्रधानमंत्री के अटूट संकल्प को दर्शाती है.

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के स्वामित्व वाला यह जलयान कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित किया गया है। परीक्षण संचालन पूर्ण होने के बाद जलयान सेवा में प्रवेश करेगा। यह पहल 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने की सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है और भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों में स्वच्छ, टिकाऊ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के प्रयासों का समर्थन करती है.

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हाइड्रोजन ईंधन चालित जलयान की वाणिज्यिक सेवा की शुरुआत स्वच्छ और अधिक टिकाऊ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में भारत के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री सोनोवाल के नेतृत्व में, आईडब्ल्यूएआई मेरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मेरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के अंतर्गत उन्नत हरित प्रौद्योगिकियों और वैकल्पिक ईंधनों को अपनाने को बढ़ावा दे रहा है.

सर्बानंद सोनोवाल ने आगे कहा, "हाइड्रोजन ईंधन चालित इस जलयान की सफल तैनाती स्वच्छ और टिकाऊ जलमार्गों की दिशा में भारत के परिवर्तन को गति देने के लिए हमारे मंत्रालय की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मैं इस अग्रणी जलयान को उपलब्ध कराने के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और विभिन्न परीक्षणों के बाद इसे वाणिज्यिक सेवा में शामिल करने के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण को बधाई देता हूं। यह उपलब्धि 2070 तक भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों को पूरा करने और अंतर्देशीय जल परिवहन क्षेत्र में अत्याधुनिक हरित प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने के हमारे संकल्प का प्रमाण है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के परिवर्तनकारी मेरीटाइम इंडिया विजन (एमआईवी) 2030 और मेरीटाइम अमृत काल विजन (एमएकेवी) 2047 के दीर्घकालिक रोडमैप के मार्गदर्शन में, हम देश के लिए एक आधुनिक, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को निरंतर आकार दे रहे हैं.

शहरी परिवहन के लिए डिज़ाइन की गई 24 मीटर लंबा यह कैटामरान वातानुकूलित केबिन में 50 यात्रियों को ले जा सकती है और 6.5 समुद्री मील की गति से चलती है। इसकी हाइब्रिड ऊर्जा प्रणाली में हाइड्रोजन ईंधन सेल, बैटरी और सौर ऊर्जा का संयोजन है, जिससे एक बार हाइड्रोजन भरने पर यह आठ घंटे तक चल है. यह जलयान इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग द्वारा प्रमाणित है.


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पायलट जलयान एफसीवी पायलट-01 को चालू करने के लिए, आईडब्ल्यूएआई, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और इनलैंड एंड कोस्टल शिपिंग लिमिटेड ने तकनीकी सहायता, संचालन और निगरानी को रेखांकित करते हुए एक त्रिपक्षीय समझौता किया है। इस समझौते में वित्तीय शर्तें, सुरक्षा प्रक्रियाएं, निगरानी तंत्र और पायलट चरण के दौरान आवधिक निरीक्षण के प्रावधान शामिल हैं.

वाराणसी में शुरू हाइड्रोजन ईंधन चालित जलयान शहरी जल परिवहन को कई महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाता है, जिनमें यात्रियों और तीर्थयात्रियों के लिए शोर-मुक्त यात्रा, केवल जल उत्सर्जन धुआं मुक्त, प्रदूषण मुक्त, और जलमार्गों के माध्यम से तेज आवागमन से सड़क पर भीड़भाड़ में कमी शामिल है। इससे स्थानीय पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है, साथ ही वाराणसी हाइड्रोजन-संचालित यात्री परिवहन को अपनाने वाले विश्व के पहले शहरों में से एक बन जाएगा। तकनीकी रूप से, पूरी तरह से वातानुकूलित 50 सीटों वाला यह जलयान संग्रहित हाइड्रोजन पर आठ घंटे तक चल सकता है, 7 से 9 समुद्री मील की गति से चलता है, और पूरी तरह से स्वदेशी, पर्यावरण के अनुकूल तकनीक द्वारा संचालित है जो सुरक्षित और कुशल संचालन सुनिश्चित करता है।

नमो घाट से ललिता घाट तक पांच किलोमीटर की यात्रा पर पहली बार चलने वाले इस जलयान में मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य लोगों के एक दल को ले जाया, जो गंगा नदी पर हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाले यात्री जलयान के वाणिज्यिक संचालन का संकेत था (राष्ट्रीय जलमार्ग 1).

केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दया शंकर मिश्रा 'दयालू' सहित कई प्रतिष्ठित नेता उपस्थित थे. कई विधायक - अवधेश सिंह, नीलकंठ तिवारी, डॉ. सुनील पटेल, सौरभ श्रीवास्तव, अनिल राजभर, नील रतन सिंह और त्रिभुवन राम - और वाराणसी नगर निगम के महापौर अशोक कुमार तिवारी भी मौजूद थे. इसके अलावा पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव श्री विजय कुमार, आईडब्ल्यूएआई अध्यक्ष श्री सुनील पालीवाल और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे.

हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कैटामारन की शुरुआत के बाद, हाइड्रोजन ईंधन चालित जलयान की तैनाती देश के अंतर्देशीय जल परिवहन नेटवर्क के आधुनिकीकरण और डीकार्बोनाइजेशन के लिए आईडब्ल्यूएआई की दीर्घकालिक योजना को मजबूती प्रदान करती है.

संस्कृत संरक्षण के साथ व्यवहारिक प्रयोग पर जोर, BHU में संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ
संस्कृत संरक्षण के साथ व्यवहारिक प्रयोग पर जोर, BHU में संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में मंगलवार को संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ हुआ। संस्कृत भारती, काशी तथा संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, मालवीय भवन, वैदिक विज्ञान केंद्र, संस्कृत विभाग एवं श्री विश्वनाथ मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन, अध्ययन-अध्यापन के साथ ही इसे दैनिक व्यवहार और संवाद की भाषा बनाने पर जोर दिया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध ज्ञान-विज्ञान, सभ्यता और संस्कृति की संवाहक है। आध्यात्मिक चिंतन, दर्शन, साहित्य और ज्ञान की विभिन्न परंपराओं के विकास में संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।उन्होंने कहा कि संस्कृत के संरक्षण के साथ इसके निरंतर और व्यवहारिक प्रयोग पर भी ध्यान देने की जरूरत है। संस्कृत को केवल अध्ययन का विषय न मानकर दैनिक व्यवहार और संवाद की भाषा के रूप में अपनाया जाना चाहिए। विभिन्न संकायों के विद्यार्थी संस्कृत में संवाद की पहल करें और अधिक से अधिक शिक्षक एवं विद्यार्थी इसके व्यवहार को अपनाएं तो संस्कृत को कठिन भाषा मानने की धारणा और झिझक दूर की जा सकती है।कुलपति ने कहा कि संस्कृत का अध्ययन केवल संस्कृत विषय के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। विभिन्न विषयों के विद्यार्थियों को भी भारतीय ज्ञान परंपरा की इस समृद्ध भाषा से जुड़ना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय के सभी संकायों और विद्यार्थियों से संस्कृत के व्यवहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा, “जयतु संस्कृतम्, जयतु भारतम्।”उन्होंने संस्कृत सप्ताह के दौरान लिए जाने वाले संकल्पों को केवल कार्यक्रम तक सीमित न रखकर जीवन और व्यवहार में उतारने की आवश्यकता बताई। उन्होंने संस्कृत भारती के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय में कुछ संकायों और विद्यार्थियों से संस्कृत में सामान्य बोलचाल की शुरुआत कर इसे व्यापक स्तर तक ले जाने पर जोर दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. राजाराम शुक्ल ने की। उन्होंने उपस्थित विद्वानों, आचार्यों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए संस्कृत सप्ताह के आयोजन के उद्देश्य और उपयोगिता पर प्रकाश डाला।संस्कृत भारती के अखिल भारतीय शिक्षण प्रमुख डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में संस्कृत के उत्थान और संवर्धन के लिए इस प्रकार का आयोजन गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की संस्कृत के प्रति गहरी आस्था थी और संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन की उनकी भावना को आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है। संस्कृत को किसी एक विषय या वर्ग तक सीमित न रखकर इसके अध्ययन, अध्यापन और व्यवहारिक प्रयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने की जरूरत है।ALSO READ : बीएचयू लॉ फैकल्टी की राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि, वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों में देश में नंबर-1कार्यक्रम में डॉ. जगद्गुरु परमहंस, छावनी पीठ अयोध्या, व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रो. रामनारायण द्विवेदी, संस्कृत भारती के अध्यक्ष प्रो. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. सरोज कुमार पाण्डेय, श्री अशोक चौधरी और श्री अमरचन्द शुक्ल समेत अनेक आचार्य, विद्वान, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।संस्कृत सप्ताह के तहत पूरे सप्ताह संस्कृत से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनका उद्देश्य संस्कृत के प्रति जागरूकता बढ़ाने, अध्ययन-अध्यापन को प्रोत्साहित करने और संस्कृत को व्यवहार की भाषा के रूप में स्थापित करने के प्रयासों को गति देना है। कार्यक्रम के अंत में संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
बीएचयू लॉ फैकल्टी की राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि, वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों में देश में नंबर-1
बीएचयू लॉ फैकल्टी की राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि, वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों में देश में नंबर-1
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के लॉ फैकल्टी ने वर्ष 2026 की प्रमुख राष्ट्रीय रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान कायम की है। बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026 में फैकल्टी ने देश के 10 बेस्ट वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों की श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया है। फैकल्टी का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) स्कोर 78.53 रहा। वहीं सभी लॉ संस्थानों की समग्र रैंकिंग में 1428.1 के कंपोजिट स्कोर के साथ इसे देश में 13वां स्थान मिला।फैकल्टी ने द वीक-हंसा रिसर्च सर्वे 2026 में भी देशभर में आठवीं रैंक हासिल की है। इसके अलावा आउटलुक सर्वे 2026 में लॉ फैकल्टी को देश में 11वां स्थान मिला, जबकि IIRF लॉ रैंकिंग 2026 में फैकल्टी देश में 13वें और उत्तर प्रदेश में तीसरे स्थान पर रही। IIRF में फैकल्टी का ओवरऑल इंडेक्स स्कोर 70.84 रहा।सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में भी बीएचयू के योगदान का उल्लेखराष्ट्रीय रैंकिंग के अलावा बीएचयू लॉ फैकल्टी के क्लिनिकल लीगल एजुकेशन और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के ऐतिहासिक योगदान को भारत के सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक रिपोर्ट में भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग द्वारा अक्टूबर 2024 में प्रकाशित “लीगल एड थ्रू लॉ स्कूल्स: ए रिपोर्ट ऑन वर्किंग ऑफ लीगल एड सेल्स इन इंडिया” में बीएचयू के योगदान का उल्लेख किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, बीएचयू ने 1970 के दशक की शुरुआत में भारत के शुरुआती क्लिनिकल लॉ कोर्स में से एक शुरू किया था। इसके तहत सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में क्लिनिक आधारित कानूनी सहायता, अदालतों का दौरा और अधिवक्ताओं के साथ इंटर्नशिप जैसी व्यवस्थाओं को जोड़ा गया था।रिपोर्ट में बीएचयू के लीगल एड एंड सर्विसेज क्लिनिक की ओर से 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर क्रिमिनल पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) का भी उल्लेख है। इस मामले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को कैदियों की दैनिक मजदूरी बढ़ाने और जेलों में भीड़ कम करने के लिए अतिरिक्त सुधार गृहों के निर्माण की दिशा में कदम उठाने पड़े।ALSO READ : वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन-अर्चन, पुष्पों और फलों से सजा माँ गंगा का दिव्य स्वरूपआधुनिक सुविधाओं और शोध पर रहेगा जोरलॉ फैकल्टी के प्रमुख एवं डीन प्रो. (डॉ.) प्रदीप कुमार सिंह ने इन उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि फैकल्टी अपनी समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, अत्याधुनिक कानूनी शोध, उद्योग और न्यायपालिका के साथ साझेदारी मजबूत करने तथा छात्रों की प्रो-बोनो कानूनी सेवा पहलों को सक्रिय करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि शैक्षणिक और विकास के सभी मानकों को बेहतर बनाते हुए फैकल्टी की रैंकिंग में निरंतर सुधार का प्रयास किया जाएगा। साथ ही नैतिक मूल्यों से युक्त और विश्वस्तरीय कानूनी पेशेवर तैयार करने की दिशा में संस्थान को और मजबूत किया जाएगा।


वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन-अर्चन, पुष्पों और फलों से सजा माँ गंगा का दिव्य स्वरूप
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन-अर्चन, पुष्पों और फलों से सजा माँ गंगा का दिव्य स्वरूप
वाराणसी : पावन नगरी काशी के दशाश्वमेध घाट पर मंगलवार को गंगोत्री सेवा समिति की ओर से आयोजित भव्य गंगा आरती के दौरान माँ गंगा का विशेष हरियाली एवं झूला श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद माँ गंगा का मनोहारी श्रृंगार किया गया। हरियाली, रंग-बिरंगे पुष्पों, विभिन्न प्रकार के फूलों और फलों से सुसज्जित माँ गंगा का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।कार्यक्रम की शुरुआत माँ गंगा के पूजन-अर्चन से हुई। आचार्यों एवं समिति के सदस्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माँ गंगा का विधिवत पूजन किया गया। गंगाजल, पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन, फल एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर माँ गंगा का आह्वान किया गया। इसके बाद धूप-दीप प्रज्वलित कर आरती और स्तुति की गई। श्रद्धालुओं ने भी माँ गंगा के चरणों में पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि और परिवार के मंगल की कामना की।— फूलों और फलों से हुआ आकर्षक श्रृंगारपूजन के उपरांत माँ गंगा का विशेष हरियाली श्रृंगार किया गया। विभिन्न प्रकार के हरे पत्तों, बेल-पत्र, मौसमी हरियाली और सुगंधित पुष्पों से घाट पर आकर्षक सजावट की गई। इसके साथ ही अनेक प्रकार के फूलों और फलों से माँ गंगा के श्रृंगार को भव्य रूप दिया गया। प्राकृतिक सामग्री से तैयार श्रृंगार ने पूरे आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया।— झूला श्रृंगार ने मोहा श्रद्धालुओं का मनहरियाली श्रृंगार के साथ माँ गंगा का झूला श्रृंगार भी किया गया। आकर्षक फूलों और हरियाली से सजे झूले को विशेष रूप से सजाया गया। झूला श्रृंगार के दर्शन के लिए घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। माँ गंगा का मनोहारी स्वरूप देखते ही बन रहा था। श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुष्प अर्पित किए और भक्ति भाव से आरती में सहभागिता की।— गंगा आरती के दौरान गूंजे मंत्र और जयकारेविशेष श्रृंगार के बाद दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती का आयोजन हुआ। आरती के दौरान शंखनाद, घंटियों और मंत्रोच्चार से पूरा घाट गूंज उठा। दीपों की रोशनी और फूलों से सजे माँ गंगा के स्वरूप ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। गंगा आरती के दर्शन के लिए घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।ALSO READ : बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में एड्स जागरूकता अभियान, दिए गए चिकित्‍सकीय परामर्शगंगोत्री सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि माँ गंगा के प्रति श्रद्धा और आस्था को समर्पित इस विशेष आयोजन का उद्देश्य सनातन परंपराओं एवं धार्मिक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के साथ ही प्रकृति और पर्यावरण के प्रति प्रेम का संदेश देना है। हरियाली एवं प्राकृतिक वस्तुओं से किए गए श्रृंगार के माध्यम से लोगों को प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया गया। समिति की ओर से बताया गया कि माँ गंगा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की प्रमुख धारा हैं। इसलिए उनकी आराधना के साथ स्वच्छता, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेना भी प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।