BHU महिला प्रोफेसर की शिकायत पर कोर्ट का बड़ा आदेश, पूर्व ट्रॉमा प्रभारी के खिलाफ अंतिम रिपोर्ट निरस्त.

वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की महिला प्रोफेसर डॉ. मंजरी मिश्रा से छेड़छाड़ के मामले में वाराणसी की अदालत ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करते हुए मामले में अग्रिम विवेचना का आदेश दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट संख्या-09, वाराणसी ने 15 सितंबर 2026 को यह आदेश पारित किया। न्यायालय ने वादिनी की ओर से दाखिल प्रोटेस्ट प्रार्थना-पत्र को स्वीकार करते हुए मामले की आगे जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
मामला थाना लंका में दर्ज मु.अ.सं. 214/2025 से संबंधित है। इसमें बीएनएस की धारा 352, 75(3) और 351(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। प्रकरण में पूर्व ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह के साथ बाउंसर बताए गए धनंजय राय और आशीष सिंह के नाम अभियुक्त के तौर पर सामने आए हैं।
विवेचना पर उठाए गए थे सवाल
न्यायालय के आदेश के अनुसार वादिनी ने पुलिस विवेचना पर कई गंभीर आपत्तियां उठाते हुए प्रोटेस्ट प्रार्थना-पत्र दाखिल किया था। इसमें आरोप लगाया गया कि विवेचना के दौरान वादिनी का समुचित बयान दर्ज नहीं किया गया, स्वतंत्र गवाहों के बयान नहीं लिए गए और घटनास्थल का निरीक्षण भी नहीं किया गया।
इसके अलावा उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक और अन्य साक्ष्यों की पर्याप्त जांच नहीं किए जाने की बात भी प्रोटेस्ट प्रार्थना-पत्र में कही गई थी। न्यायालय ने कहा कि वादिनी की ओर से उठाए गए बिंदुओं और लगाए गए विशिष्ट आरोपों की सत्यता का परीक्षण मौखिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के जरिए किया जाना आवश्यक है।
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इन्हीं आधारों पर अदालत ने पुलिस की ओर से प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करते हुए मामले में अग्रिम विवेचना कराने का आदेश दिया है। इसका अर्थ है कि मामले की जांच आगे जारी रहेगी और उपलब्ध साक्ष्यों तथा शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की दोबारा जांच की जाएगी।
पहले भी विवादों में रहे हैं सौरभ सिंह
प्रो. सौरभ सिंह को लेकर इससे पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। आरोपों के अनुसार, उत्तर प्रदेश लोकायुक्त की ओर से ट्रॉमा सेंटर से जुड़े भ्रष्टाचार और आयुष्मान भारत योजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में उन्हें समन जारी किया गया था। शिकायत में वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए गए थे। हालांकि, इन आरोपों और मौजूदा छेड़छाड़ के मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।



