Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

स्वामी करपात्री जी के विचारों को बताया प्रेरणादायक...

स्वामी करपात्री जी के विचारों को बताया प्रेरणादायक...
Jul 02, 2026, 11:42 AM
|
Posted By Gaandiv

वाराणसी : संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय की ओर से बुधवार को धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी द्वारा रचित ग्रंथ 'मार्क्सवाद और रामराज्य' पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं व्याख्यान का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की.


मुख्य अतिथि एवं वक्ताओं ने कहा कि स्वामी करपात्री जी का चिंतन भारतीय संस्कृति, सनातन दर्शन और लोककल्याण की भावना पर आधारित था. उनके विचार आज भी समाज को नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना की दिशा में प्रेरित करते हैं. वक्ताओं ने बताया कि 'मार्क्सवाद और रामराज्य' केवल वैचारिक विमर्श नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन और आदर्श शासन व्यवस्था की गहन व्याख्या प्रस्तुत करने वाला महत्वपूर्ण ग्रंथ है.


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारतीय परंपरा में रामराज्य की अवधारणा न्याय, समानता, उत्तरदायित्व और जनकल्याण के सिद्धांतों पर आधारित रही है. उन्होंने स्वामी करपात्री जी के साहित्य को भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर बताते हुए उसके अध्ययन और प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया.


ALSO READ : खंभे में उतरे करंट की चपेट में आने से चाट विक्रेता की मौत, बारिश के बाद हुआ हादसा...


संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने भारतीय एवं पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार रखे. कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया.

BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरी
BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरी
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मालवीय भवन में रविवार को गीता समिति की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘रविवासरीय गीता प्रवचन’ का सत्रारंभ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन प्रत्येक रविवार की तरह सुबह 10 बजे से 11:30 बजे तक किया जाएगा और पूरे शैक्षणिक सत्र में इसकी निरंतरता बनी रहेगी।कार्यक्रम की शुरुआत वेद विभाग के विद्यार्थियों के वैदिक मंगलाचरण से हुई। इसके बाद संगीत एवं मंच कला संकाय के विद्यार्थियों ने कुलगीत एवं भजन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के उस विचार को प्रमुखता से रेखांकित किया गया, जिसमें शिक्षा के उद्देश्य को केवल बौद्धिक विकास तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों में नैतिक और आध्यात्मिक चेतना के विकास पर जोर दिया गया था।इस अवसर पर प्रो. हृदयरंजन शर्मा ने कहा कि महामना मालवीय का विश्वास था कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के लिए श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वभौमिक जीवन-मूल्यों और सिद्धांतों से उनका परिचय आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उन्होंने विश्वविद्यालय में रविवासरीय गीता प्रवचन की परंपरा शुरू की थी।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए BHU के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति विद्यार्थियों में रुचि बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि नवप्रवेशी विद्यार्थियों के इंडक्शन कार्यक्रम में भी गीता से संबंधित आयोजन शामिल किए जाएं, ताकि विद्यार्थियों में प्रारंभ से ही भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति जुड़ाव विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि गीता के माध्यम से मन को संस्कारित करने और जीवन-मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास जरूरी है।मालवीय भवन के मानित निदेशक प्रो. पतंजलि मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती भौतिक प्रतिस्पर्धा और तनाव के कारण व्यक्ति मानसिक एवं शारीरिक परेशानियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में गीता के संदेश और जीवन-दर्शन की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।गीता समिति के सचिव प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय ज्ञान-परंपरा का अमूल्य ग्रंथ है, जो मनुष्य को कर्तव्य, आत्मसंयम और सदाचार का मार्ग दिखाता है। उन्होंने बताया कि महामना ने विश्वविद्यालय परिवार से प्रत्येक रविवार डेढ़ घंटे का ‘समय-दान’ गीता प्रवचन में शामिल होने के लिए अपनी गुरु-दक्षिणा के रूप में देने की अपील की थी।अहं त्यागकर विनम्रता और आत्मसंयम से जीवन जीने का संदेशकार्यक्रम के मुख्य अतिथि सद्गुरु माधव प्रियदास जी, अध्यक्ष, स्वामीनारायण गुरुकुल, गुजरात, अहमदाबाद ने गीता के अध्ययन, मनन और उसके अनुसार जीवन जीने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अहं की भावना का त्याग कर विनम्रता और आत्मसंयम के साथ जीवन जीने का सुझाव दिया।उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बाहरी ज्ञान से परिचित कराना नहीं, बल्कि व्यक्ति को उस ज्ञान को ग्रहण करने योग्य बनाना भी है। भगवान विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार त्रिविक्रम ने तीन पगों में समस्त ब्रह्मांड को नाप लिया, उसी प्रकार गीता जैसे विराट विषय को सीमित शब्दों में समेटना कठिन है। उन्होंने कहा कि किसी विषय को समझे बिना उसका सही विवेचन संभव नहीं है, इसलिए गीता के संदेश को समझने और जीवन में उतारने की आवश्यकता है।कार्यक्रम का संचालन भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शारदिंदु कुमार त्रिपाठी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन गीता समिति की संयुक्त सचिव प्रो. सुमन जैन ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
गंभीर हादसे के बाद BHU छात्र के इलाज में देरी का आरोप, छात्रों ने की निष्पक्ष जांच की मांग....
गंभीर हादसे के बाद BHU छात्र के इलाज में देरी का आरोप, छात्रों ने की निष्पक्ष जांच की मांग....
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के बिरला ‘C’ छात्रावास के एमए फ्रेंच द्वितीय वर्ष के छात्र राम के साथ शनिवार देर रात गंभीर दुर्घटना हो गई। घायल अवस्था में छात्र को तत्काल बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। छात्रावास के विद्यार्थियों ने ट्रॉमा सेंटर में उपचार में कथित देरी और अस्पताल कर्मियों व प्रॉक्टोरियल अधिकारियों पर छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं।छात्रों के मुताबिक, दुर्घटना के बाद राम को रात करीब 12 बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्हें तत्काल आवश्यक प्राथमिक उपचार नहीं मिला। आरोप है कि उनके गंभीर घाव पर कई घंटों तक टांके नहीं लगाए गए और उपचार की प्रक्रिया में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई।सुबह घायल छात्र का हाल जानने और उपचार में मदद के लिए बिरला ‘C’ छात्रावास के कई छात्र ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने अस्पताल कर्मियों से तत्काल इलाज शुरू करने का आग्रह किया, लेकिन इस दौरान कुछ सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। छात्रों ने दावा किया कि उन्हें धमकी भरे लहजे में कहा गया कि इलाज नहीं करेंगे, जो करना है कर लें।छात्रों के अनुसार, दुर्घटना के करीब 12 घंटे बाद लगातार मांग और चिकित्सकों से हस्तक्षेप की अपील के बाद राम का उपचार शुरू हुआ। बाद में उसके गंभीर घाव पर 29 टांके लगाए गए। छात्रों ने उपचार में हुई इस कथित देरी को गंभीर मामला बताते हुए पूरी मेडिकल टाइमलाइन और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।प्रॉक्टोरियल अधिकारियों पर भी लगाए आरोपमामले की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल अधिकारी मौके पर पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि स्थिति को शांत करने और उनकी बात सुनने के बजाय अधिकारियों ने उनसे कथित तौर पर अभद्र भाषा में बात की। छात्रों ने धक्का-मुक्की और हाथापाई जैसी स्थिति उत्पन्न होने का भी आरोप लगाया है।छात्रों का यह भी दावा है कि घायल छात्र राम के लिए कथित रूप से असंवेदनशील भाषा का इस्तेमाल किया गया और उसे ‘लावारिस’ कहकर संबोधित किया गया। इसको लेकर छात्रों ने नाराजगी जताई है।छात्रों के मुताबिक, जब उन्होंने उपचार में देरी और अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर अधिकारियों से सवाल किए तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी दौरान पुलिस को मौके पर बुलाया गया। छात्रों का आरोप है कि बाद में घटना को इस तरह पेश करने का प्रयास किया गया कि छात्रों ने प्रॉक्टर के साथ मारपीट की। छात्र समुदाय ने इस आरोप को गलत बताते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है।उपचार पूरा होने से पहले डिस्चार्ज करने का आरोपछात्रों ने आरोप लगाया कि घायल राम को उचित उपचार पूरा हुए बिना डिस्चार्ज करने का प्रयास भी किया गया। विरोध के बाद उन्हें दोबारा भर्ती किया गया। छात्रों के अनुसार, उन्हें बताया गया कि करीब तीन बजे चिकित्सक उपलब्ध होंगे।प्रशासनिक वार्डन ने संभाली स्थितिघटना के दौरान तनाव बढ़ने पर प्रशासनिक वार्डन मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और पूरे मामले को अपने संज्ञान में लिया। इसके बाद छात्रों को छात्रावास वापस भेजा गया, ताकि अस्पताल परिसर में तनाव कम हो और घायल छात्र के उपचार पर ध्यान दिया जा सके।छात्र समुदाय ने प्रशासनिक वार्डन की पहल को सकारात्मक कदम बताते हुए मामले में आगे निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।ALSO READ: रामनगर पुलिस ने साइबर ठगों के चंगुल से वापस कराए 97 हजार रुपयेछात्रों की प्रमुख मांगेंछात्रों ने राम के उपचार में हुई कथित देरी और लापरवाही की स्वतंत्र जांच, दुर्घटना से उपचार शुरू होने तक की मेडिकल टाइमलाइन व अस्पताल रिकॉर्ड की जांच, अस्पताल कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के कथित दुर्व्यवहार की जांच तथा प्रॉक्टोरियल अधिकारियों और छात्रों के बीच हुई कथित धक्का-मुक्की की निष्पक्ष जांच की मांग की है।इसके अलावा छात्रों ने घायल विद्यार्थी को उसकी स्थिति के अनुरूप पूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और भविष्य में किसी भी घायल छात्र को समय पर प्राथमिक उपचार सुनिश्चित करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि घायल विद्यार्थी के उचित उपचार और सम्मान की रक्षा करना है।
रामनगर पुलिस ने साइबर ठगों के चंगुल से वापस कराए 97 हजार रुपये
रामनगर पुलिस ने साइबर ठगों के चंगुल से वापस कराए 97 हजार रुपये
वाराणसी: रामनगर पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क की सक्रियता के चलते साइबर ठगी के शिकार एक युवक को उसके 97,250 रुपये वापस मिल गए हैं. पुलिस के अनुसार, रामनगर थाना क्षेत्र निवासी विकास यादव से साइबर ठगों ने बीते एक जुलाई को साइबर जालसाजों का शिकार हो गए थे. ठगों ने उनके बैंक खाते से 97,250 रुपये उड़ा लिए. जैसे ही विकास को पैसे कटने का पता चला, उन्होंने बिना कोई देरी किए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराई. ALSO READ : बरेका में अखिल भारतीय ऑन-द-स्पॉट निबंध प्रतियोगिता का आयोजन, 267 बच्चों ने लिया हिस्सा.ठगी गई पूरी रकम बैंक स्तर पर ही होल्ड हो गई. पैसे होल्ड होने के बाद विकास यादव ने रामनगर थाने पहुंचकर प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा से मुलाकात की और अपनी पूरी समस्या बताई. मामले की गंभीरता को समझते हुए एसएचओ संजय मिश्रा ने त्वरित संज्ञान लेकर रामनगर थाने की साइबर हेल्प डेस्क टीम को मामले में लगाया जिसपर पुलिस टीम ने पीड़ित की सहायता करते हुए कानूनी प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया. रामनगर पुलिस की इस कुशल और त्वरित पैरवी के परिणामस्वरूप, पीड़ित के खाते से कटे पूरे 97,250 रुपये सफलतापूर्वक उनके बैंक खाते में वापस आ गए. ठगी गई रकम वापस पाकर विकास यादव का चेहरा खुशी से खिल उठा. उन्होंने इस सराहनीय कार्य और त्वरित मदद के लिए प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा, साइबर हेल्प डेस्क टीम और पूरी वाराणसी पुलिस को धन्यवाद दिया है. प्रभारी निरीक्षक रामनगर संजय मिश्रा ने अपील किया कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तत्काल 1930 पर कॉल करें. समय से की गई शिकायत से रुपये वापस मिलने की संभावना काफी अधिक होती है, जैसा कि विकास यादव के मामले में साबित हुआ.