स्वामी करपात्री जी के विचारों को बताया प्रेरणादायक...

वाराणसी : संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय की ओर से बुधवार को धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी द्वारा रचित ग्रंथ 'मार्क्सवाद और रामराज्य' पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं व्याख्यान का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की.
मुख्य अतिथि एवं वक्ताओं ने कहा कि स्वामी करपात्री जी का चिंतन भारतीय संस्कृति, सनातन दर्शन और लोककल्याण की भावना पर आधारित था. उनके विचार आज भी समाज को नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना की दिशा में प्रेरित करते हैं. वक्ताओं ने बताया कि 'मार्क्सवाद और रामराज्य' केवल वैचारिक विमर्श नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन और आदर्श शासन व्यवस्था की गहन व्याख्या प्रस्तुत करने वाला महत्वपूर्ण ग्रंथ है.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारतीय परंपरा में रामराज्य की अवधारणा न्याय, समानता, उत्तरदायित्व और जनकल्याण के सिद्धांतों पर आधारित रही है. उन्होंने स्वामी करपात्री जी के साहित्य को भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर बताते हुए उसके अध्ययन और प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया.
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संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने भारतीय एवं पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार रखे. कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया.



