गंगा खतरे के निशान की ओर, वरुणा का पानी घरों में घुसा, तटवर्ती इलाके बेहाल

वाराणसी : गंगा का जलस्तर लगातार रह रहकर हो रही बरसात के साथ चेतावनी बिंंदु क्रास करने के बाद भी बढ़ रहा है. केंद्रीय जल आायोग की ओर से बुधवार की दोपहर जारी रिपोर्ट में बताया गया कि दोपहर 12 बजे गंगा का जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की गति से बढ़ रहा है. राजघाट स्थित केंद्रीय जलआयोग की टीम ने बताया कि सुबह दस बजे चेतावनी बिंंदु 70.262 मीटर. के ऊपर गंगा का जलस्तर 70.36 मीटर है. जबकि जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की दर से लगातार बढ़ रहा है. जबकि शहर में खतरा बिंंदु 71.262 मीटर. है जहां का जलस्तर अब पार करने में एक मीटर से भी कम का फासला बचा है. बनारस में अब तक 73.901 मीटर सर्वाधिक जलस्तर पहुंचा है. मौसम विभाग की ओर से आगे भी बरसात के अनुमान के साथ ही वातावरण में नमी का स्तर बने रहने से बारिश के संकेत हैं. इसका असर गंगा के जलस्तर पर भी पड़ना तय है. पहाड़ों पर लगातार बारिश हो रही है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बारिश का माहौल बना हुआ है. बारिश का दौर रहने से पानी मैदानी क्षेत्रों में भी पहुंच रहा है.

गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में महाश्मशान मणिकर्णिका और हरिशचंद्र घाट पर गंगा का की लहरों ने कब्जा जमाया है. यहां गलियों में नाव चलने की नौबत आ चुकी है. गलियों में नाव चलने की नौबत आने के साथ ही तटवर्ती क्षेत्रों के लोग घरों से निकलने के लिए अब नाव का सहारा ले रहे हैंं. जबकि चिताओं को जलाने के लिए नंबर लगाना पड़ रहा है. तटवर्ती क्षेत्रों के लोग घरों से निकलने के लिए अब नाव का सहारा ले रहे हैंं. गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण सामने घाट स्थित अपना घर आश्रम में बाढ़ का पानी घुस गया. दिव्यांग वार्ड लबालब हो गया. 108 दिव्यांगों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रथम और द्वितीय तल पर शिफ्ट कर दिया गया. संचालक डॉ. के निरंजन ने बताया कि हर बार बाढ़ में आश्रम में पानी आ जाता है.
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दूसरी ओर सारनाथ सहित वरुणा के कुछ तटीय क्षेत्रों में पलट प्रवाह से नदी का जलस्तर चेतावनी दे रहा है. तमाम निचले क्षेत्रों में रह रहे परिवार पलायन कर चुके हैं या पलायन करने की तैयारी में हैं. जबकि बाढ़ राहत शिविर में लोगाें के पहुंचने का क्रम जारी है. माना जा रहा है कि बाढ़ का स्तर और बढ़ा तो शाम तक और परिवार भी शिविर का रुख कर सकते हैं. शास्त्री घाट पर वरुणा का पानी सीढ़ियों तक पहुंच गया. हनुमान मंदिर चारों ओर से पानी से घिर गया है. वरुणा कॉरिडोर का अधिकांश हिस्सा डूब गया है. केवल प्रवेश वाला हिस्सा दिख रहा है. वहीं, मशीन लगाकर जलकुंभी निकाली गई है. लोहता क्षेत्र में भी वरुणा का पानी 12 घंटे में तीन फीट बढ़ गया. बेदौली, मथुरापुरा, भरथरा, छितौनी, टड़िया, कोटवां, कोरऊत और अयोध्यापुर के तटवर्ती इलाके प्रभावित हैं. खरीफ की फसलें पानी में डूब गई हैं. पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है. नक्खीघाट से सरैया तक कई बस्तियों में संकट खड़ा कर दिया है. हजारों घरों में पानी घुस गया है. ढेलवरिया, नई बस्ती, मौजा हाल, दीनदयालपुर, अमरपुर बटलोहिया, मढ़िया, उंचवा, सक्कर तालाब, पुराने पुल, सरैया, शैलपुत्री माता मंदिर और तीन पुलिया क्षेत्र में बाढ़ का पानी घरों में पहुंच गया. इससे लोगों को पलायन करना पड़ा.

13 बाढ़ राहत शिविर चालू, 219 प्रभावित परिवारों के 935 व्यक्ति रह रहे
एडीएम प्रशासन सदानंद गुप्ता ने बताया कि 11 मोहल्ले/वार्ड आंशिक रूप से बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. वरुणा नदी के बाढ़ से जनपद में 328 परिवारों के 1388 व्यक्ति प्रभावित हुए हैं. जिले में 13 बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं। 219 प्रभावित परिवारों के 935 व्यक्ति निवास कर रहे हैं. जिला प्रशासन ने 32 नावों की व्यवस्था की है.
गंगा की स्थिति
बुधवार दोपहर 12 बजे तक जलस्तर : 70.34 मीटर
चेतावनी बिंदु : 70.26 मीटर
खतरे का निशान : 71.26 मीटर
ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर : 73.90 मीटर
स्थिति : एक सेंटीमीटर प्रतिघंटा बढाव



