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दार्जिलिंग के ‘सिसने पाहा’ मेंढक की आनुवंशिक विविधता बेहद कम, वैज्ञानिकों ने दी संरक्षण की चेतावनी.

दार्जिलिंग के ‘सिसने पाहा’ मेंढक की आनुवंशिक विविधता बेहद कम, वैज्ञानिकों ने दी संरक्षण की चेतावनी.
Oct 02, 2026, 02:30 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : हिमालय के जैव विविधता हॉटस्पॉट दार्जिलिंग और कलिम्पोंग क्षेत्र में पाए जाने वाले मार्बल्ड कैस्केड फ्रॉग यानी Amolops marmoratus की आनुवंशिक स्थिति को लेकर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। स्थानीय स्तर पर ‘सिसने पाहा’ या ‘सिसने पा’ के नाम से पहचाने जाने वाले इस मेंढक की दार्जिलिंग क्षेत्र की आबादी में आनुवंशिक विविधता बेहद कम पाई गई है। कलकत्ता विश्वविद्यालय और काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) समेत पांच संस्थानों के 12 वैज्ञानिकों के अध्ययन में पहली बार इस प्रजाति की दार्जिलिंग आबादी की विस्तृत आनुवंशिक जांच की गई है। शोध अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका BMC Genetics में प्रकाशित हुआ है।


शोधकर्ताओं ने दार्जिलिंग हिल रीजन में 57 स्थानों पर सर्वे किया। करीब 200 मीटर से 2400 मीटर तक की ऊंचाई वाले झरनों, तेज धाराओं और चट्टानी नालों से नमूने जुटाए गए। सर्वे के दौरान कुल 60 मेंढक देखे गए, जिनमें से 35 के डीएनए का विश्लेषण किया गया। नमूनों की प्रजातिगत पहचान की पुष्टि प्राणी सर्वेक्षण भारत (Zoological Survey of India), कोलकाता से कराई गई।


दार्जिलिंग की आबादी में सबसे कम आनुवंशिक विविधता


वैज्ञानिकों ने दो मानक जीन—16S rRNA और COI—का अध्ययन किया। दार्जिलिंग से मिले डीएनए अनुक्रमों की दुनिया के अन्य हिस्सों से उपलब्ध आनुवंशिक आंकड़ों से तुलना की गई। अध्ययन में दार्जिलिंग की आबादी में आनुवंशिक विविधता एशिया के अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम पाई गई। वहीं म्यांमार, दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन की आबादियों में अपेक्षाकृत अधिक विविधता मिली।


आनुवंशिक दूरी के विश्लेषण में दार्जिलिंग और चीन की आबादी के बीच सबसे अधिक अंतर सामने आया, जबकि म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया की आबादियों के बीच आनुवंशिक दूरी अपेक्षाकृत कम रही। वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि दार्जिलिंग की आबादी लंबे समय से अन्य क्षेत्रों की आबादियों से काफी हद तक अलग-थलग रही है।


शोध के प्रथम लेखक कुमरेश मंडल के अनुसार, दार्जिलिंग की आबादी संभवतः ऐतिहासिक रूप से एक छोटे समूह से शुरू हुई। इसे फाउंडर इफेक्ट से जोड़कर देखा गया है। इसके बाद आबादी के तेजी से विस्तार के बावजूद आनुवंशिक विविधता सीमित रही। आनुवंशिक वंशवृक्ष में दार्जिलिंग के नमूने अलग शाखा पर दिखाई दिए और उनकी शाखाएं अपेक्षाकृत छोटी रहीं।


करोड़ों वर्ष पुराना है साझा पूर्वज


डीएनए आधारित समय-विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति के विकास और अलगाव का अनुमान भी लगाया है। अध्ययन के मुताबिक एशिया में इस प्रजाति का साझा पूर्वज करीब 1.74 करोड़ वर्ष पहले मौजूद था। दक्षिण एशियाई यानी दार्जिलिंग शाखा करीब 1.12 करोड़ वर्ष पहले अलग हुई, जबकि मौजूदा दार्जिलिंग वंश का क्षेत्र में तेजी से विस्तार लगभग 9.4 लाख वर्ष पहले हुआ।


वैज्ञानिकों के मुताबिक भौगोलिक अलगाव, सीमित जीन प्रवाह और ऐतिहासिक जनसंख्या घटनाएं कम आनुवंशिक विविधता के प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर मेंढकों के पारंपरिक शिकार को भी अतिरिक्त दबाव के तौर पर देखा गया है।


पारंपरिक शिकार से बढ़ रहा दबाव


दार्जिलिंग और आसपास के इलाकों में स्थानीय लोग इन मेंढकों को भोजन और पारंपरिक उपचार के लिए पकड़ते रहे हैं। बरसात के मौसम में रात के समय चट्टानों और झाड़ियों पर बैठे मेंढकों को पकड़ना कई क्षेत्रों में प्रचलित है। क्षेत्र में मुख्य रूप से Amolops marmoratus और Nanorana liebigii का सेवन किया जाता है। इनमें ‘सिसने पाहा’ का वितरण अपेक्षाकृत व्यापक होने के कारण शिकार का दबाव भी इसी प्रजाति पर अधिक पड़ने की बात शोधकर्ताओं ने कही है।


कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राकेश तामांग के नेतृत्व में यह अध्ययन किया गया। उन्होंने इसे दार्जिलिंग क्षेत्र में इस प्रजाति का पहला संयुक्त आकारिकी और आनुवंशिक अध्ययन बताया। उनके अनुसार, आबादी का अलग और कम विविधता वाला होना संरक्षण नीति बनाते समय महत्वपूर्ण तथ्य है।


वहीं BHU के ज्ञान लैब के जीन विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा कि हिमालयी मेंढकों की आनुवंशिक विविधता पर अभी सीमित शोध हुआ है। कम आनुवंशिक विविधता वाली आबादी जलवायु परिवर्तन, बीमारियों और अंतःप्रजनन जैसे दबावों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकती है। उन्होंने संरक्षण के लिए स्थानीय समुदायों को जागरूक करने की जरूरत पर जोर दिया।


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भविष्य में बारकोडिंग और निगरानी में मदद करेगा DNA डेटा


अध्ययन में पहली बार दार्जिलिंग क्षेत्र से लिए गए इस प्रजाति के नमूनों से COI जीन के अनुक्रम भी तैयार किए गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह आनुवंशिक डेटा भविष्य में प्रजाति की बारकोडिंग और पर्यावरणीय डीएनए (eDNA) आधारित निगरानी में उपयोगी हो सकता है।


शोधकर्ताओं ने अनियमित शिकार पर नियंत्रण, स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाने और खासतौर पर निचली व मध्यम ऊंचाई वाली पहाड़ी धाराओं तथा इनके आवासों के संरक्षण की जरूरत बताई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मेंढक जल गुणवत्ता और पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण संकेतक भी होते हैं। ऐसे में इनकी आबादी में गिरावट केवल एक प्रजाति के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ी जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते दबाव का संकेत हो सकती है।

शहर में दाखिल नहीं हो पाए मोकामा विधायक अनंत सिंह...
शहर में दाखिल नहीं हो पाए मोकामा विधायक अनंत सिंह...
वाराणसी: मोकामा विधायक अनंत सिंह वाराणसी शहर में दाखिल नहीं हो पाए. उनका काफिला चंदौली से चलकर वाराणसी पहुंचा तो पुलिस ने हरसेवानंद स्कूल के पास रोक लिया. अनंत सिंह का मुख्य कार्यक्रम लंका चौराहे पर पं. मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा का माल्यार्पण करना था. पुलिस के रोकने पर अनंत सिंह के समर्थकों और पुलिस में नोकझोंक हुई. पुलिस के समझाने पर अनंत सिंह काफिले के साथ हाइवे से होते प्रयागराज रवाना हो गए.समर्थकों संग पुलिस की नोकझोंकअनंत सिंह को प्रयागराज को पप्पू सलमान के बेटे की शादी के वलीमा में शामिल होने जा रहे थे. उन्हें शाम को प्रयागराज पहुंचा लेकिन रास्ते में समर्थकों द्वारा जगह-जगह स्वागत के लिए रुकने की वजह से वह काफी लेट हुए. अनंत सिंह को पटना से बिहटा, आरा, बक्सर, मोहनिया, चंदौली होते प्रयागराज जाना था. अनेक जगहों पर समर्थकों ने उनका स्वागत किया है. आरा में जेसीबी से फूल बरसाए तो बक्सर में चांदी का मुकुट पहनाया. अनंत सिंह की प्रयागराज यात्रा एक तूफानी रोड शो की तरह प्लान की गई जिससे शक्ति प्रदर्शन भी हो जाए. बिहटा, आरा और बक्सर होते हुए यह काफिला मोहनिया पहुंचा, जहां से उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश किया.चंदौली में विधायक सुशील सिंह से मिले यूपी में सबसे पहले चंदौली में भाजपा विधायक सुशील सिंह के आवास पर उनका स्वागत हुआ. इसके बाद वाराणसी में लंका पं. मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण का कार्यक्रम था. काफिला वाराणसी पहुंचने के बाद हरसेवानंद स्कूल के पास उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसे रोक लिया और घेर लिया और वहीं से प्रयागराज के लिए रवाना कर दिया. इससे पहले बिहार के विधायक अनंत सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अपनी बेटी की शादी में सभी को न्योता देंगे. तेजस्वी यादव समेत सभी को बुलाएंगे.ALSO READ: भाजपा महानगर कार्यालय में दीपावली स्नेह मिलन, विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर हुआ मंथन...जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी पूर्व एमएलए नीलम देवी को छह साल के लिए निकाल दिया है. जेडीयू की तरफ से विधानसभा सदस्यता खत्म करने की मांग पर स्पीकर ने अनंत सिंह को सात दिन में जवाब देने का नोटिस भेजा है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव मर्डर केस में उनको हाईकोर्ट से मिली जमानत को सस्पेंड करते हुए 4 दिसंबर तक सरेंडर करने और जेल जाने का आदेश दिया है. बेटी की 25 नवंबर को हो रही शादी के लिए कोर्ट ने एक महीने की मोहलत दी है.
भाजपा महानगर कार्यालय में दीपावली स्नेह मिलन, विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर हुआ मंथन...
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वाराणसी: भारतीय जनता पार्टी वाराणसी महानगर के गुलाबबाग स्थित कार्यालय में शुक्रवार को दीपावली स्नेह मिलन समारोह का आयोजन किया गया. महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर दीपावली की शुभकामनाएं दीं. इस दौरान आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठनात्मक रणनीति पर भी चर्चा हुई.स्नेह मिलन समारोह के दौरान महानगर अध्यक्ष ने पदाधिकारियों और मंडल अध्यक्षों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों, क्षेत्रीय स्तर पर बेहतर समन्वय और संगठन की जिम्मेदारियों को लेकर विचार-विमर्श किय. उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने और आगामी चुनाव के मद्देनजर कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया.इस अवसर पर प्रदीप अग्रहरि ने काशीवासियों को धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान धनवंतरी सभी को आरोग्य प्रदान करें और मां लक्ष्मी हर घर-आंगन को सुख-समृद्धि से भर दें. उन्होंने बाबा विश्वनाथ से सभी के कल्याण की कामना की. साथ ही लोगों से स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए स्वदेशी दीयों का इस्तेमाल कर दीपावली मनाने और उनके रोजगार को प्रोत्साहित करने की अपील की.ALSO READ: खिलाड़ियों और विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला से उकेरा दीप...कार्यक्रम में महानगर उपाध्यक्ष चंद्रशेखर उपाध्याय, नवीन कपूर, महामंत्री पूजा दीक्षित, अजय गुप्ता, अशोक जाटव, मीडिया संयोजक प्रमील पाण्डेय, सत्येंद्र सिंह, अखिलेंद्र सिंह सन्नी, प्रज्ञा पाण्डेय, पंकज चतुर्वेदी, शोभनाथ मौर्या, राजेंद्र शंकर सिंह पटेल, कुशाग्र श्रीवास्तव, हीरा यादव, सुनील यादव, अनुराग शर्मा, प्रीति सिंह और मनोज सोनकर सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे.
खिलाड़ियों और विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला से उकेरा दीप...
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वाराणसी:खेल के मैदान पर जब खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा और अनुशासन का अनूठा प्रदर्शन किया तो नजारा देखने लायक बन गया। शुक्रवार को परमानंदपुर मिनी स्टेडियम में खेल गतिविधियों की जगह एक अनोखा आयोजन हुआ। यहां 410 बालक-बालिकाओं ने एक साथ बैठकर अपने शरीर की आकृति से विशाल दीप का स्वरूप तैयार किया। विद्यार्थियों और खिलाड़ियों की इस अनूठी पहल ने भारतीय परंपरा, एकता और सामूहिक सहभागिता का संदेश दिया।आमतौर पर मिनी स्टेडियम में खिलाड़ियों की दौड़, अभ्यास और विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं देखने को मिलती हैं, लेकिन इस बार मैदान में खेल से इतर रचनात्मकता का अनूठा संगम नजर आया। निर्धारित स्थान पर छात्र-छात्राओं ने अनुशासित ढंग से बैठकर दीप की आकर्षक आकृति बनाई। ऊपर से देखने पर खिलाड़ियों और विद्यार्थियों द्वारा तैयार किया गया यह स्वरूप बेहद मनमोहक दिखाई दे रहा था।AlSO READ: काशी के सर्राफा बाजार में छूट दे रही चुनौती, 0% मेकिंग चार्ज का दावा, कारोबारियों में मची होड़...कार्यक्रम के संयोजक डॉ. एके सिंह ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य 410 बालक-बालिकाओं के माध्यम से विद्यार्थियों और खिलाड़ियों को अपनी भारतीय परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का छोटा सा प्रयास करना है। खेल और शिक्षा के साथ सांस्कृतिक मूल्यों का जुड़ाव भी जरूरी है।