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करसड़ा में अब खत्म होगा कूड़े का पहाड़, 25 एकड़ जमीन पर लहलहाएगा मियावाकी जंगल

करसड़ा में अब खत्म होगा कूड़े का पहाड़, 25 एकड़ जमीन पर लहलहाएगा मियावाकी जंगल
Apr 26, 2026, 01:27 PM
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Posted By Preeti Kumari

The garbage mountain in Karasada will now end, and a Miyawaki forest will flourish on 25 acres of land.


वाराणसी: करसड़ा स्थित कूड़े के विशालकाय पहाड़ से जल्द ही मुक्ति मिलने वाली है. नगर निगम ने वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निस्तारण की कवायद तेज कर दी है, इसके बाद खाली होने वाली 25 एकड़ भूमि पर मियावाकी तकनीक से सघन जंगल विकसित किया जाएगा, जो पर्यावरण को नई संजीवनी देगा. इस दौरान निगम ने करसड़ा में जमा लाखों मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण के लिए बायोमाइनिंग का रास्ता चुना है, इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए जीआइजेड और आरपीयूईएस कंपनियों की मदद ली जा रही है. जापानी तकनीक का उपयोग करते हुए इन कंपनियों ने पूरे डंपिंग ग्राउंड की मैपिंग और कचरे की मात्रा का सटीक आकलन कर लिया है, निगम की ओर से बायोमाइनिंग के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है, जिससे निस्तारण कार्य जल्द ही धरातल पर उतरेगा.


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नगर निगम ने कचरे को हटाने के लिए शुरू की कवायद


​करसड़ा में पिछले एक दशक से जमा लगभग 1264 लाख मीट्रिक टन कचरे के कारण आसपास के क्षेत्रों में भयंकर दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या बनी हुई है, हालांकि, कचरे की विशाल मात्रा को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया में करीब एक से डेढ़ वर्ष का समय लग सकता है. शासन से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है. शहर में प्रतिदिन औसतन 1000 से 1200 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है, इस कचरे के निपटान के लिए निगम के पास वर्तमान में करसड़ा में 600 मीट्रिक टन क्षमता का 'वेस्ट टू कंपोस्ट' प्लांट और रमना में 600 मीट्रिक टन क्षमता का 'वेस्ट टू चारकोल', इसके अलावा रमना में ही मलबे से ईंट और टाइल्स बनाने के लिए सीएंडडी प्लांट भी कार्यरत है.प्लांट मौजूद है.


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डेढ़ साल में मिलेगी दुर्गंध से निजात


इसी सिलसिले में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि करसड़ा का कूड़ा पहाड़ समाप्त होने के बाद, वहां विकसित होने वाला 25 एकड़ का मियावाकी वन शहर के 'ग्रीन लंग्स' (फेफड़ों) के रूप में काम करेगा, ​"करसड़ा के कूड़े के पहाड़ का निस्तारण हमारी प्राथमिकता है. बायोमाइनिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और कूड़ा साफ होने के बाद वहां 25 एकड़ में मियावाकी वन विकसित किया जाएगा, जो वाराणसी को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा."


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वाराणसी एयरपोर्ट पर 'हब एंड स्पोक' विमान सेवा की शुरुआत, मंत्री ने चार यात्रियों को दिए बोर्डिंग पास...
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वाराणसी : लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्‍ट्रीय एयरपोर्ट पर बुधवार की शाम केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने 'हब एंड स्पोक' विमान सेवा का शुभारंभ किया. इस दौरान उन्होंने चार यात्रियों को बोर्डिंग पास दिया. इस मॉडल का उद्देश्य भारत को दुनिया से और दुनिया को भारत से जोड़ना है. ईज़ी कनेक्ट सर्विस के तहत पहली फ्लाइट एआई 1111 आज सुबह 9:23 बजे वाराणसी से रवाना हुई. इस फ्लाइट में ऐसे अंतरराष्ट्रीय यात्री सवार थे जो दिल्ली से आगे भारत के बाहर 9 गंतव्यों - जैसे दुबई, कोलंबो, जेद्दा, रियाद, काठमांडू और फुकेत - के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट लेने वाले थे. उत्तर प्रदेश के मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्‍हा और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष विपिन कुमार की उपस्थिति में एक विशेष कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ. मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन के अपर सचिव पुनीत कंसल और मंडलायुक्त वाराणसी एस. राजलिंगम भी इस अवसर पर मौजूद रहे.हब एंड स्‍पोक एक विमानन नेटवर्क प्रणाली है, जहाँ एक केंद्रीय हवाई अड्डे (हब) का उपयोग यात्री यातायात को केंद्रित करने और उसे छोटे हवाई अड्डों (स्पोक) से जोड़ने के लिए किया जाता है. इस अवसर पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने कहा कि यहां की हवा, पानी, धरती और मिट्टी के हर कण में शंकर की शक्ति नजर आती है. यह हम सबके लिए एक महत्वपूर्ण दिन है. आज का यह विशेष कार्यक्रम वाराणसी से शुरू होकर भारत में इतिहास रचने वाला है. इसके लिए सभी को आनंद और गौरव की अनुभूति हो रही है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद और उनके नेतृत्व में शुरू हो रहा है. भारत इस कार्यक्रम का लंबे समय से इंतजार कर रहा था. नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार ने कहा कि पिछले 12 साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हवाई यात्रा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. नगर विमानन क्षेत्र में भी उल्लेखनीय विकास देखने को मिला है. विश्व में किसी अन्य देश में ऐसा विकास नहीं देखा गया है. 2014 में भारत में 74 हवाई अड्डे थे, जो अब 160 से अधिक हो गए हैं। दुनिया इतने कम समय में इतने हवाई अड्डे बनने से हैरान है. यात्रियों की संख्या भी दोगुनी हो गई है.वहीं एयर इंडिया ने वाराणसी से दिल्ली के माध्यम से विश्व के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को जोड़ने वाली अपनी पहली हब एंड स्पोक उड़ान सेवा का शुभारंभ किया. एयर इंडिया ने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन से जोड़ा है, जिसके तहत भारत को वैश्विक विमानन हब और अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात का प्रमुख केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है.नई व्यवस्था के तहत वाराणसी से दिल्ली पहुंचने वाले यात्रियों को दिल्ली हब के माध्यम से यूरोप, उत्तरी अमेरिका, खाड़ी देशों, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए बेहतर और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी. इससे पूर्वांचल के यात्रियों, व्यापारियों, छात्रों और पर्यटकों को विशेष लाभ होने की उम्मीद है.ALSO READ : वरुणा नदी के कायाकल्प का रोडमैप तैयार, रिवरफ्रंट संवारने को VDA-ONGC में समझौता...एयर इंडिया के स्टेशन मैनेजर आतिफ इदरीश ने बताया कि हब एंड स्पोक मॉडल के माध्यम से क्षेत्रीय शहरों को देश के प्रमुख विमानन केंद्रों से जोड़कर यात्रियों को अधिक विकल्प, बेहतर कनेक्शन समय और व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक शहर को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ना एयर इंडिया की रणनीति का अहम हिस्सा है.वाराणसी एयरपोर्ट के निदेशक पुनीत गुप्ता ने कहा कि इस सेवा के शुरू होने को पूर्वांचल की हवाई कनेक्टिविटी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा आसान होगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है.
वरुणा नदी के कायाकल्प का रोडमैप तैयार, रिवरफ्रंट संवारने को VDA-ONGC में समझौता...
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वाराणसी : काशी की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरणीय पहचान से जुड़ी वरुणा नदी के कायाकल्प की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. वरुणा रिवरफ्रंट विकास परियोजना के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) और ओएनजीसी के बीच 260.61 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए. ओएनजीसी अपनी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) निधि से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का वित्तपोषण करेगी. इससे वरुणा नदी के तटों का सुनियोजित विकास होने के साथ काशी में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधाओं को नया आयाम मिलेगा.वीडीए सभागार में पिछले दिनों आयोजित कार्यक्रम में वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा और ओएनजीसी के सीएसआर प्रमुख नीरज कुमार बंसल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य वरुणा नदी को केवल स्वच्छ और संरक्षित बनाना ही नहीं, बल्कि इसे आधुनिक रिवरफ्रंट के रूप में विकसित करना भी है. इसके तहत नदी तटों को हरित क्षेत्रों, पैदल पथ, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधाओं, सार्वजनिक उपयोग के खुले स्थलों और अन्य आधुनिक शहरी सुविधाओं से विकसित किया जाएगा.परियोजना मंडलायुक्त एवं वीडीए अध्यक्ष एस. राजलिंगम के मार्गदर्शन में तैयार की गई है. वहीं, ओएनजीसी के महाप्रबंधक अटल श्रीवास्तव ने इसे अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यह परियोजना भारत सरकार के जल निकाय पुनर्जीवन मिशन की अवधारणा के अनुरूप है. इससे जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और सतत शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधुनिक सुविधाओं से युक्त काशी की परिकल्पना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नदी संरक्षण एवं शहरी विकास की प्राथमिकताओं को भी गति देगी.नदी तट का विकासपरियोजना के मुख्य उद्देश्य यह परियोजना काशी के शहरी सुंदरीकरण, पर्यावरण संरक्षण और नदी तट विकास पर केंद्रित है. इसका लक्ष्य पर्यटन संवर्धन और जनसुविधाओं का विस्तार करना भी है. ओएनजीसी सीएसआर से इस परियोजना को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी. इसका उद्देश्य वाराणसी को एक आधुनिक, स्वच्छ और हरित नगर के रूप में स्थापित करना है.परियोजना के तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने से लेकर निर्माण कार्य तक सभी चरण तय समयबद्ध योजना के अनुसार पूरे किए जाएंगे.ALSO READ:काशी विद्यापीठ में छात्रों ने किया कुलपति का घेराव, हाॅस्‍टल से निकाले जाने पर जताया विरोध...वरुणा नदी काशी की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है. लंबे समय से इसके संरक्षण और विकास की आवश्यकता महसूस की जा रही थी. यह परियोजना नदी के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उसके किनारों को व्यवस्थित और आकर्षक बनाएगी. - पुर्ण बोरा, वीडीए उपाध्यक्ष
काशी विद्यापीठ में छात्रों ने किया कुलपति का घेराव, हाॅस्‍टल से निकाले जाने पर जताया विरोध...
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वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में हॉस्‍टल के कमरों पर अवैध कब्‍जा खाली कराने मामला गरम हो गया है. बुधवार को छात्रों ने हॉस्टल से निकाले जाने का विरोध करते हुए कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्‍यागी और अन्य अधिकारियों का घेराव किया. इस दौरान परिसर में काफी गहमागहमी का माहौल बना रहा. हंगामे की स्थिति को देखते हुए परिसर में पुलिस तैनात की गई है.छात्रों का आरोप है कि उन्हें हॉस्टल से जबरन बाहर निकाला गया है. वे इस कार्रवाई को गलत और अन्यायपूर्ण बता रहे हैं. विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई. मौके पर पुलिस प्रशासन भी पहुंच गया. पुलिस ने मामले को शांत कराने का प्रयास किया. कुलपति ने इस संबंध में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि हॉस्टल में अवैध तरीके से रह रहे लोगों को हटाया जा रहा है. कुलपति ने यह भी स्वीकार किया कि कोई भी काम सौ फीसदी सही नहीं होता है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन छात्रों को परेशानी आ रही है, उनकी जांच की जाएगी. उचित कार्रवाई करके समस्या का समाधान किया जाएगा.ALSO READ:पता पूछने के बहाने महिला से सोने का टप्स झपटने वाले दो आरोपी गिरफ्तार...छात्रों ने हॉस्टल से निकाले जाने पर गहरा असंतोष व्यक्त किया. उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के बाहर किया गया. छात्रों ने इसे मनमाना और अन्यायपूर्ण कदम बताया. उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी दी. छात्रों ने हॉस्टल में रहने के अपने अधिकार पर जोर दिया. फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अडे हुए हैं. कुलपति ने हॉस्टल खाली कराने की कार्रवाई को वैध ठहराया. उन्होंने बताया कि केवल उन लोगों को हटाया जा रहा है जो अवैध रूप से रह रहे हैं. कुलपति ने कहा कि यह व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक है. उन्होंने प्रभावित छात्रों की शिकायतों की जांच का भरोसा दिया. कुलपति ने कहा कि उचित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा.