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काशी से “भारत संवाद” अभियान का आगाज़, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता पर जोर

काशी से “भारत संवाद” अभियान का आगाज़, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता पर जोर
May 15, 2026, 11:26 AM
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Posted By Preeti Kumari

“Bharat Samvad” campaign begins from Kashi, emphasis on harmony and national unity


वाराणसी: जमीयत सद्भावना मंच, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के तत्वावधान में गुरुवार को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर, वाराणसी में “भारत संवाद” अभियान का भव्य शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज से जुड़े धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया. सम्मेलन में संवाद, सामाजिक सद्भाव, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया.


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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संकट मोचन मंदिर के महंत एवं आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने कहा कि काशी भारत की साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि इस मिट्टी में सभी समुदायों का समान योगदान और इतिहास शामिल है. उन्होंने कहा, “अगर किसी समुदाय को देश से निकालने की बात की जाती है तो पहले इस मिट्टी को निकालना होगा, क्योंकि इस मिट्टी में हर समुदाय का खून शामिल है.”


मजबूत समाज के लिए केवल बोलना ही नहीं, सुनना भी जरूरी


उन्होंने “भारत संवाद” को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि समाज में बढ़ती दूरियों को समाप्त करने के लिए निरंतर संवाद जरूरी है. उन्होंने कहा कि वे मौलाना महमूद मदनी के साथ मिलकर इस अभियान को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का कार्य करेंगे. डायोसिस ऑफ वाराणसी के बिशप राइट रेव.


डॉ. यूजीन जोसेफ ने कहा कि मजबूत समाज के लिए केवल बोलना ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे को सुनना भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि आज समाज में गलतफहमियाँ इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि लोग एक-दूसरे को समझने की कोशिश कम कर रहे हैं. उन्होंने “भारत संवाद” को विश्वास और भाईचारे को मजबूत करने वाली पहल बताते हुए वर्ष 2030 तक काशी में 1000 संवाद सभाएँ आयोजित करने का सुझाव दिया.


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डर और भेदभाव से मुक्त समाज


प्रथम सत्र “संवाद और सद्भाव” में पूर्व निदेशक, गांधीयन इंस्टीट्यूट ऑफ स्टडीज़ प्रो. दीपक मलिक ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक संवाद पहुँचाने और ग्राम स्तर पर संवाद सभाओं के आयोजन पर बल दिया. बीएचयू के प्रोफेसर प्रो. आर.के. मंडल ने भयमुक्त समाज को लोकतंत्र की बुनियाद बताते हुए कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता तभी संभव है जब समाज डर और भेदभाव से मुक्त हो. ब्राह्मण महासभा के महासचिव राकेश रंजन त्रिपाठी ने समाज के वंचित और उपेक्षित वर्गों के साथ संवाद को सामाजिक समरसता के लिए आवश्यक बताया. सामाजिक कार्यकर्ता श्रुति नागवंशी ने कहा कि समाज जाति, वर्ग और विचारधारात्मक खाँचों में बंटता जा रहा है, जिसे समाप्त कर मानवीय मूल्यों और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की जरूरत है.


कार्यक्रम का संचालन


कार्यक्रम का संचालन कर रहे जमीयत सद्भावना मंच के संयोजक मेहदी हसन ऐनी क़ासमी ने कहा कि “भारत संवाद” का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों और विचारधाराओं के बीच रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना तथा सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और पारस्परिक विश्वास को मजबूत करने की दीर्घकालिक पहल है.


अहिंसा, सच्चाई और सद्भाव को जीवन का हिस्सा बनाएं


द्वितीय सत्र “राष्ट्र निर्माण में संवाद की भूमिका” में कबीर चौरा मठ के चिंतक उमेश कबीर ने संत कबीरदास की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि अहिंसा, सच्चाई और सद्भाव को जीवन का हिस्सा बनाना होगा. उन्होंने कहा कि केवल बातें करने से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि हर व्यक्ति को अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभानी होगी. उन्होंने कहा कि भय और अविश्वास को समाप्त करने का सबसे प्रभावी मार्ग यह है कि सभी लोग मिलकर साथ चलें और समाज में आपसी विश्वास को मजबूत करें. प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव एवं वरिष्ठ लेखक संजय श्रीवास्तव ने कहा कि आज समाज में फैल रही कटुता और नफरत चिंता का विषय है और देश को सबसे ज्यादा जरूरत सद्भाव और आपसी विश्वास की है.


मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला कासमी, महासचिव, जमीयत उलमा-ए-उत्तर प्रदेश ने कहा कि वर्तमान समय में समाज के विभिन्न तबकों के बीच दूरियाँ और मनभेद बढ़ते जा रहे हैं, जिन्हें केवल संवाद, आपसी विश्वास और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से ही समाप्त किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि जमीयत सद्भावना मंच का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रेम, भाईचारा, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुँचाना है. उन्होंने लोगों से अपने दायरे से बाहर निकलकर समाज के हर वर्ग के साथ संवाद बढ़ाने और आपसी रिश्तों को मजबूत करने की अपील की.


आपसी विश्वास, सद्भाव और सकारात्मक संवाद की आवश्‍यकता


ऐतिहासिक ज्ञानवापी मस्जिद के इमाम मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि सभी धर्मगुरुओं और सामाजिक संगठनों को मिलकर जमीनी स्तर पर नफरत और विभाजनकारी सोच के खिलाफ कार्य करना होगा. उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती दूरियों और गलतफहमियों को केवल आपसी संवाद, भाईचारे और इंसानियत के माध्यम से ही समाप्त किया जा सकता है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जमीयत उलमा-ए-उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मुफ्ती अफ्फान मंसूरपुरी ने कहा कि आज के दौर में समाज को सबसे अधिक आवश्यकता आपसी विश्वास, सद्भाव और सकारात्मक संवाद की है. उन्होंने कहा कि विचारों का अलग होना स्वाभाविक है, लेकिन मतभेद को मनभेद में बदलने देना समाज और देश दोनों के लिए अत्यंत नुकसानदायक है. उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता, साझा संस्कृति और आपसी भाईचारे में है.


देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब ने हमेशा विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने का कार्य किया है. उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती नफरत, कटुता और अविश्वास को समाप्त करने के लिए केवल भाषण नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर संवाद और सामाजिक सहभागिता को बढ़ाना होगा. उन्होंने कहा कि राष्ट्र केवल सीमाओं और भूगोल का नाम नहीं, बल्कि दिलों के जुड़ाव, पारस्परिक सम्मान और साझा जिम्मेदारियों का नाम है. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज में प्रेम, इंसानियत, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के संदेश को आगे बढ़ाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ. उन्होंने कहा कि जमीयत सद्भावना मंच का यह अभियान समाज में भरोसा, भाईचारा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे देशभर में आगे बढ़ाया जाना चाहिए.


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पर्यावरण कार्यकर्ता एकता शेखर ने कहा कि पर्यावरण के माध्यम से भी समाज के हर तबके को जोड़ा जा सकता है. सम्मेलन में भानुजा शरण लाल, प्रो. प्रियंकर उपाध्याय, डॉ. मनोज मिश्रा, पंकज पति पाठक, अशोक दास, असद कमाल लारी, व्योमेश शुक्ल, डॉ. लेनिन रघुवंशी, अजीत सिंह ‘गुरिया’, फादर फिलिप डेनिस, एडवोकेट तनवीर सिद्दीकी, रवि शेखर, विवेक उपाध्याय, विवेकानंद जैन सहित अनेक सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक हस्तियों ने शिरकत की. अंत में हाफिज उबैदुल्लाह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया. सम्मेलन में यह संकल्प लिया गया कि “भारत संवाद” अभियान को देश के विभिन्न शहरों, कस्बों और गाँवों तक विस्तारित कर सामाजिक सद्भाव, संवाद और राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जाएगा.

वरुणा नदी के कायाकल्प का रोडमैप तैयार, रिवरफ्रंट संवारने को VDA-ONGC में समझौता...
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वाराणसी : काशी की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरणीय पहचान से जुड़ी वरुणा नदी के कायाकल्प की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. वरुणा रिवरफ्रंट विकास परियोजना के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) और ओएनजीसी के बीच 260.61 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए. ओएनजीसी अपनी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) निधि से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का वित्तपोषण करेगी. इससे वरुणा नदी के तटों का सुनियोजित विकास होने के साथ काशी में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधाओं को नया आयाम मिलेगा.वीडीए सभागार में पिछले दिनों आयोजित कार्यक्रम में वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा और ओएनजीसी के सीएसआर प्रमुख नीरज कुमार बंसल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य वरुणा नदी को केवल स्वच्छ और संरक्षित बनाना ही नहीं, बल्कि इसे आधुनिक रिवरफ्रंट के रूप में विकसित करना भी है. इसके तहत नदी तटों को हरित क्षेत्रों, पैदल पथ, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधाओं, सार्वजनिक उपयोग के खुले स्थलों और अन्य आधुनिक शहरी सुविधाओं से विकसित किया जाएगा.परियोजना मंडलायुक्त एवं वीडीए अध्यक्ष एस. राजलिंगम के मार्गदर्शन में तैयार की गई है. वहीं, ओएनजीसी के महाप्रबंधक अटल श्रीवास्तव ने इसे अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यह परियोजना भारत सरकार के जल निकाय पुनर्जीवन मिशन की अवधारणा के अनुरूप है. इससे जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और सतत शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधुनिक सुविधाओं से युक्त काशी की परिकल्पना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नदी संरक्षण एवं शहरी विकास की प्राथमिकताओं को भी गति देगी.नदी तट का विकासपरियोजना के मुख्य उद्देश्य यह परियोजना काशी के शहरी सुंदरीकरण, पर्यावरण संरक्षण और नदी तट विकास पर केंद्रित है. इसका लक्ष्य पर्यटन संवर्धन और जनसुविधाओं का विस्तार करना भी है. ओएनजीसी सीएसआर से इस परियोजना को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी. इसका उद्देश्य वाराणसी को एक आधुनिक, स्वच्छ और हरित नगर के रूप में स्थापित करना है.परियोजना के तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने से लेकर निर्माण कार्य तक सभी चरण तय समयबद्ध योजना के अनुसार पूरे किए जाएंगे.ALSO READ:काशी विद्यापीठ में छात्रों ने किया कुलपति का घेराव, हाॅस्‍टल से निकाले जाने पर जताया विरोध...वरुणा नदी काशी की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है. लंबे समय से इसके संरक्षण और विकास की आवश्यकता महसूस की जा रही थी. यह परियोजना नदी के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उसके किनारों को व्यवस्थित और आकर्षक बनाएगी. - पुर्ण बोरा, वीडीए उपाध्यक्ष
काशी विद्यापीठ में छात्रों ने किया कुलपति का घेराव, हाॅस्‍टल से निकाले जाने पर जताया विरोध...
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वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में हॉस्‍टल के कमरों पर अवैध कब्‍जा खाली कराने मामला गरम हो गया है. बुधवार को छात्रों ने हॉस्टल से निकाले जाने का विरोध करते हुए कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्‍यागी और अन्य अधिकारियों का घेराव किया. इस दौरान परिसर में काफी गहमागहमी का माहौल बना रहा. हंगामे की स्थिति को देखते हुए परिसर में पुलिस तैनात की गई है.छात्रों का आरोप है कि उन्हें हॉस्टल से जबरन बाहर निकाला गया है. वे इस कार्रवाई को गलत और अन्यायपूर्ण बता रहे हैं. विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई. मौके पर पुलिस प्रशासन भी पहुंच गया. पुलिस ने मामले को शांत कराने का प्रयास किया. कुलपति ने इस संबंध में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि हॉस्टल में अवैध तरीके से रह रहे लोगों को हटाया जा रहा है. कुलपति ने यह भी स्वीकार किया कि कोई भी काम सौ फीसदी सही नहीं होता है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन छात्रों को परेशानी आ रही है, उनकी जांच की जाएगी. उचित कार्रवाई करके समस्या का समाधान किया जाएगा.ALSO READ:पता पूछने के बहाने महिला से सोने का टप्स झपटने वाले दो आरोपी गिरफ्तार...छात्रों ने हॉस्टल से निकाले जाने पर गहरा असंतोष व्यक्त किया. उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के बाहर किया गया. छात्रों ने इसे मनमाना और अन्यायपूर्ण कदम बताया. उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी दी. छात्रों ने हॉस्टल में रहने के अपने अधिकार पर जोर दिया. फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अडे हुए हैं. कुलपति ने हॉस्टल खाली कराने की कार्रवाई को वैध ठहराया. उन्होंने बताया कि केवल उन लोगों को हटाया जा रहा है जो अवैध रूप से रह रहे हैं. कुलपति ने कहा कि यह व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक है. उन्होंने प्रभावित छात्रों की शिकायतों की जांच का भरोसा दिया. कुलपति ने कहा कि उचित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा.
पता पूछने के बहाने महिला से सोने का टप्स झपटने वाले दो आरोपी गिरफ्तार...
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वाराणसी : लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र में सत्यम नगर कॉलोनी में एक महिला से पता पूछने के बहाने सोने का टप्स झपटकर फरार हुए दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपियों ने 16 जून को महिला से घर के बाहर पता पूछने के बहाने बातचीत की और मौका पाकर कान से सोने का टप्स झपटकर फरार हो गए थे. घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी.फाइनेंस कंपनी में बेच दिया था टप्सपुलिस पूछताछ में सामने आया कि दोनों आराेपियों ने लूटा गया सोने का टप्स एक फाइनेंस कंपनी को बेच दिया था. बिक्री से मिले पैसों में से बचे हुए 8 हजार रुपये पुलिस ने बरामद किए हैं.पुलिस ने नकद के अलावा आरोपियों के कब्‍जे से दो मोबाइल फोन तथा घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी बरामद की है. लालपुर-पांडेयपुर पुलिस की कार्रवाई से झपटमारी की इस घटना का खुलासा करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है.ALSO READ : कांग्रेस ने एसआईटी पर उठाए सवाल, जिला मुख्‍यालय पर गेट बंद करने को लेकर हुआ हंगामा...लूट के मामले में वांछित हिस्ट्रीशीटर गिरफ्तार वाराणसी के मंडुवाडीह थाना क्षेत्र के महेशपुर निवासी हिस्ट्रीशीटर कुंदन गौड़ को पुलिस ने लूट के एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया. आरोपी मुकदमा अपराध संख्या 458/2019 में धारा 392, 411 व 414 आईपीसी के तहत वांछित चल रहा था. पुलिस के अनुसार बुधवार लहरतारा चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक प्रवीण सचान ने टीम के साथ कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया. आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया.