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काशी विद्यापीठ में वाराणसी डाक परिक्षेत्र के प्रथम नेक्स्ट जेनरेशन डाकघर का उद्घाटन, मिलेगी ये सहूलियत

काशी विद्यापीठ में वाराणसी डाक परिक्षेत्र के प्रथम नेक्स्ट जेनरेशन डाकघर  का उद्घाटन, मिलेगी ये सहूलियत
Apr 03, 2026, 08:25 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: भारतीय डाक विभाग द्वारा आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महात्‍मा गांधी काशी विद्यापीठ परिसर स्थित डाकघर में “नेक्स्ट जेनरेशन डाकघर (N-Gen Post Office)” का शुभारंभ किया गया. इस आधुनिक डाकघर का उद्घाटन पद्मगन्धा मिश्रा, पोस्टमास्टर जनरल, वाराणसी क्षेत्र तथा प्रो. आनंद कुमार त्यागी, कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा संयुक्त रूप से किया गया. इस अवसर पर पोस्टमास्टर जनरल, वाराणसी क्षेत्र ने अपने संदेश में कहा कि यह पहल, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम.


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सिंधिया के दृष्टिकोण से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य डाकघरों को जीवंत, विद्यार्थी-केंद्रित, प्रौद्योगिकी-सक्षम स्थानों के रूप में पुनर्परिभाषित करना है जो वास्तव में नई पीढ़ी के युवाओ व छात्रों के साथ तालमेल बिठाते हैं. N-Gen Post Office परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम है.


डाकघर की विशेषताएं


इस आधुनिक डाकघर की विशेषता यह है कि यहां छात्र-छात्राएं न केवल डाकघर की सेवाएँ प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि एक अनुकूल वातावरण में बैठकर चाय-कॉफी का आनंद भी ले सकते हैं. इसके लिए डाकघर परिसर में आरामदायक टेबल और कुर्सी की व्यवस्था की गई है, जिससे युवा व छात्र मिनी लाइब्रेरी, टीवी, वीडियो गेम, शतरंज, कैरम आदि की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं. भारतीय डाक विभाग, जो सदियों से लोगों को जोड़ने का कार्य करता आया है, अब डिजिटल सेवाओं, बैंकिंग, ई-कॉमर्स और वैश्विक कनेक्टिविटी के माध्यम से नए युग में प्रवेश कर चुका है. N-Gen डाकघर इसी परिवर्तन की अगली कड़ी है, जिसे विशेष रूप से युवा पीढ़ी और छात्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है.


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नवाचार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका


उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि भविष्य का उद्यमी, नवाचारकर्ता और राष्ट्र निर्माता है. इस दृष्टि से यह डाकघर छात्रों को उनके स्टार्ट-अप, ऑनलाइन व्यवसाय और नवाचारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इस N-Gen डाकघर में ग्राहकों को डिजिटल डाक सेवाएं, स्पीड पोस्ट एवं पार्सल सेवाएं, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग सेवाएं तथा इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस स्थान को छात्रों के अनुकूल क्षेत्र के रूप में परिकल्पित किया गया है.


एक ऐसी जगह जहाँ कोई केवल डाक संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ही नहीं, बल्कि जुड़ने, सहयोग करने और रचनात्मक कार्य करने के लिए भी आ सकता है. चाहे वह देश भर में या विदेश में महत्वपूर्ण दस्तावेज़ भेजना हो या डिजिटल सेवाओं का उपयोग करना हो, दोस्तों के साथ समय बिताना हो,वाई-फाई का उपयोग करना हो, गेम खेलना हो या किताबें और पत्रिकाएँ पढ़ने के लिए मिनी-लाइब्रेरी का आनंद लेना हो.


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पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि इंडिया पोस्ट देश के सबसे बड़े और विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में से एक है, जिसके माध्यम से देश के सुदूर क्षेत्रों तथा विदेशों तक भी सेवाएं प्रदान की जाती हैं. उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि यदि उनके पास कोई नवाचार या स्टार्ट-अप विचार है, तो उसे विश्व स्तर तक पहुंचाने में इंडिया पोस्ट उनका प्रभावी सहयोगी बनेगा.

उन्होंने काशी विद्यापीठ प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्थान में N-Gen Post Office की स्थापना से छात्रों एवं शिक्षकों को आधुनिक सेवाओं का लाभ मिलेगा तथा यह नवाचार को प्रोत्साहित करने में सहायक सिद्ध होगा.


धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन


मुख्य अतिथि प्रो. ए.के. त्यागी ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है वाराणसी डाक परिक्षेत्र का प्रथम ‘नेक्स्ट जेन पोस्ट ऑफिस’ महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रांगण में स्थापित हुआ है. आगे उन्होंने कहा कि यह डाक विभाग का युवाओं के प्रति एक नई सोच और सुविधा का प्रतीक है. इससे युवाओं का डाक विभाग के प्रति जुड़ाव और भी सुदृढ़ होगा. उन्होंने इंडिया पोस्ट की पहल की तारीफ़ की. विभाग के अधिकारियों ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति, विश्वविद्यालय प्रशासन तथा छात्र-छात्राओं को उनके जोश और सहयोग के लिए धन्यवाद किया. कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी उपस्थित अतिथियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया.

स्वीटजरलैंड के नागरिक का १० लाख का खोया कैमरा मिला
स्वीटजरलैंड के नागरिक का १० लाख का खोया कैमरा मिला
वाराणसी : स्विट्जरलैंड से वाराणसी घूमने आए जोनस बेंजामिन ईहले नामक व्यक्ति द्वारा भारत में फोटोग्राफी करने के लिए काफी अच्छी गुणवत्ता का Leica कंपनी का लगभग 10 लाख रुपए कीमत का कैमरा लेकर आए थे, जिसको वह घाट के पास रखकर कही भूल गए तथा अपने स्तर से काफी खोजने का काफी प्रयास किए किंतु असफल रहे. जिसके पश्चात उनके द्वारा घटना की सूचना दशाश्वमेध चौकी पर जाकर चौकी प्रभारी दशाश्वमेध अनुज मणि तिवारी को दिया, जिसके पश्चात पुलिस द्वारा तत्परता करते हुए सीसीटीवी कैमरा व अन्य माध्यमों से महज 2 घंटे के अंदर कैमरा खोज कर जोनस बेंजामिन ईहले को सुपुर्द किया गया। पुलिस की इतनी तत्परता से कार्यवाही करते हुए अपने काफी महंगे कैमरे को वापस पाकर जोनस बेंजामिन द्वारा वाराणसी पुलिस का अपने शब्दों में कृतज्ञता व्यक्त किया गया। पुलिस टीम में चौकी प्रभारी दशाश्वमेध अनुज मणि तिवारी, उप निरीक्षक शिव स्वरूप पाण्डेय, का. देवेंद्र प्रताप सिंह, भूपेंद्र सिंह, संजय यादव व संजीव कुमार शामिल थे।ALSO READ : प्रो. राजनाथ बने डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के सदस्य
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वाराणसी: सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. राजनाथ को लखनऊ स्थित डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद का सदस्य नामित किया गया है।उत्तर प्रदेश राज्यपाल सचिवालय की ओर से 30 सितंबर 2026 को जारी आदेश के तहत डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 की धारा 14(1)(छ) के अंतर्गत यह नामांकन किया गया है। उनका कार्यकाल पत्र जारी होने की तिथि से दो वर्ष अथवा अग्रिम आदेश तक, जो भी पहले हो, निर्धारित किया गया है।प्रो. राजनाथ वर्तमान में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष के साथ पुस्तकालयाध्यक्ष का दायित्व भी संभाल रहे हैं। विश्वविद्यालय परिवार ने उनके नामांकन पर प्रसन्नता जताते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. महेन्द्र पाण्डेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग समेत विश्वविद्यालय परिवार ने उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की।ALSO READ: बीएचयू के दक्षिणी परिसर में APACON-2026 का शुभारंभ, सतत पशुधन उत्पादन पर वैज्ञानिक मंथन
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वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन APACON-2026 का सोमवार को शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का विषय ‘सतत पशुधन उत्पादकता की दिशा में पशु शरीर क्रिया विज्ञान के उभरते प्रतिमान : विकसित भारत की ओर’ रखा गया है। दक्षिणी परिसर में पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय की ओर से यह पहला राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन है।उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय ने आधारभूत संरचना और संकाय से जुड़ी चुनौतियों को लगातार दूर करते हुए प्रगति की है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन वैज्ञानिकों और युवा शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और संवाद का मंच उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सहयोग, संयुक्त शोध परियोजनाओं, उद्योगों के साथ साझेदारी, नवाचार, पेटेंट और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर जोर दिया।विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (NIAB), हैदराबाद के निदेशक डॉ. रवि कुमार गंधम ने पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता और ताप सहनशीलता जैसे शारीरिक लक्षणों के आनुवंशिक और बाह्य स्तर पर समग्र अध्ययन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में हो रहे शोध को किसानों के लिए उपयोगी समाधानों में बदलना वैज्ञानिकों की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने मीथेन उत्सर्जन को मापने और उसका डेटाबेस तैयार करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के आचार्य प्रभारी प्रो. बी. एम. एन. कुमार ने कहा कि सतत पशुधन उत्पादन में पशु चिकित्सा शरीर क्रिया विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं कृषि विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. सतीश कुमार सिंह ने सटीक पोषण और वास्तविक समय स्वास्थ्य निगरानी को पशुधन स्वास्थ्य सुधार तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी के लिए महत्वपूर्ण बताया।APA के अध्यक्ष डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने पशुधन उत्पादकता, स्वास्थ्य, कल्याण और जलवायु-सहिष्णुता में पशु शरीर क्रिया विज्ञान की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। APA के महासचिव एवं ICAR-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विकास चंद्र ने APA 2025 के विभिन्न पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा की।सम्मेलन के पहले दिन पशुधन प्रजनन, प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी, तनाव शरीर क्रिया विज्ञान, ताप तनाव निगरानी, जलवायु-सहिष्णुता, जीनोम इंजीनियरिंग, क्रायोसंरक्षण, पुनर्योजी चिकित्सा और सतत पशुधन उत्पादन जैसे विषयों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। इसमें युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों से संवाद का अवसर मिला।सम्मेलन में जर्मनी के लाइबनिज इंस्टीट्यूट फॉर एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड बायोइकोनॉमी (ATB), पॉट्सडैम की डॉ. गुंडुला हॉफमैन ने ऑनलाइन माध्यम से बीज वक्तव्य दिया। इसके अलावा डॉ. बी. एस. प्रकाश और अमेरिका के डॉ. आशीष रंजन ने भी व्याख्यान दिए।इस अवसर पर Compendium of Abstracts – APACON-2026, Compendium of Lead Papers – APACON-2026 तथा Fundamentals of Livestock and Poultry Management पुस्तकों का विमोचन किया गया।सम्मेलन के दौरान APA Lifetime Achievement Award-2025 प्रो. बी. एस. प्रकाश को प्रदान किया गया। APA Fellow Awards डॉ. आशीष मिश्रा और डॉ. बी. रामबाबू नाइक को, जबकि APA Best Teacher Awards डॉ. सोहन वीर सिंह, डॉ. निशांत कुमार और डॉ. राकेश कुमार सिंह को दिए गए। इसके अलावा APA Best Girl Student Award, APA Best PhD Thesis Award, Prof. A. K. Pal Best MVSc Thesis Award और APA Best Research Paper Award भी प्रदान किए गए।ALSO READ : वाराणसी में मंत्री के क्षेत्र में लकड़ी का पुल बना आवागमन का सहारा, जलभराव से जीना दुष्‍करपशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. अमित राज गुप्ता ने स्वागत संबोधन में कहा कि पशुधन उत्पादन के भविष्य के लिए मौलिक शरीर क्रिया विज्ञान को जीनोमिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, सहायक प्रजनन तकनीक, सटीक पशुधन पालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विज्ञान जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ना जरूरी है। आयोजन सचिव डॉ. मनीष कुमार ने सम्मेलन की आगामी गतिविधियों की जानकारी दी। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. उत्कर्ष कुमार त्रिपाठी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तुलसीरामन पी. ने किया।पहले दिन का समापन वैज्ञानिक चर्चाओं, शोध प्रस्तुतियों और विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के बीच संवाद के साथ हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों और युवा शोधकर्ताओं की भागीदारी से सतत पशुधन उत्पादन तथा विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर नए शोध और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर मंथन हुआ।