कुर्बानी के लिए सज गई बकरों की मंडी, कीमत जानकर हो जाएंगे हैरान

Goat market set up for sacrifice, you will be surprised to know the price
वाराणसी: बकरीद (ईद-उल-अजहा) का त्योहार 28 मई को मनाया जाएगा. इसके लिए तैयारियां जोरशोर से चल रही है. तीन दिनों तक होने वाली कुर्बानी को लेकर पशुओं की खरीद-फरोख्त तेज हो गई है. शहर की सबसे बड़ी बेनिया बकरा मंडी में इन दिनों सुबह से देर रात तक खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है. यहां 10 हजार से लेकर 1.50 लाख रुपये तक के बकरे बिक रहे हैं. मंडी में तोतापरी, बरबरी, जमुनापारी, अजमेरी समेत देसी नस्ल के बकरे पसंद किए जा रहे हैं. इसके अलावा चार दुम्बे भी बिक्री के लिए लाए गए हैं. बकरीद नजदीक आते ही लोग कुर्बानी के लिए बकरों की खरीदारी में जुट गए हैं.
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आसपास जिलों से भी बड़ी संख्या में खरीदारी
बेनिया मंडी में वाराणसी के साथ आसपास जिलों से भी बड़ी संख्या में खरीदार पहुंच रहे हैं. लोग अपनी पसंद के अनुसार मोलभाव कर बकरे खरीद रहे हैं. शुक्रवार को भी दिनभर मंडी में खरीदारी के लिए रौनक बनी रही. आजमगढ़ के व्यापारी बिस्मिल्लाह जमुनापारी नस्ल के बकरे लेकर आए हैं, जिनकी कीमत एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक बताई जा रही है. हालांकि ग्राहकों की ओर से 70 हजार से एक लाख रुपये तक के भाव लगाए जा रहे हैं. वहीं, चंदौली के एक व्यापारी 1.20 लाख रुपये कीमत वाला अजमेरी बकरा बेच रहे हैं, जिस पर अब तक 80 हजार रुपये तक की बोली लग चुकी है.
दो-तीन दिनों में संख्या और बढ़ने की उम्मीद
मंडी संचालक शाजिद ने बताया कि फिलहाल करीब दो हजार बकरे मंडी में आए हैं और अगले दो-तीन दिनों में संख्या और बढ़ने की उम्मीद है. आजमगढ़, इटावा, कानपुर, गोरखपुर, चंदौली और भदोही समेत कई जिलों के व्यापारी यहां बकरे लेकर पहुंचे हैं. शहर के जल्लालीपुरा, सरैया, बकरियाकुंड, बड़ी बाजार, बजरडीहा और लोहता समेत कई इलाकों में भी छोटी-छोटी मंडियां सजने लगी हैं, जहां बकरों के साथ भैंसे और दुम्बा की भी बिक्री हो रही है.

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जरूरतमंदों की मदद और भाईचारे का संदेश : इस्लाम में बकरीद (ईद-उल-अजहा) त्याग, समर्पण और इंसानियत का पर्व माना जाता है. यह त्योहार हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की उस कुर्बानी की याद में मनाया जाता है, जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपनी सबसे प्रिय चीज कुर्बान करने की तैयारी दिखाई थी. कुर्बानी केवल रस्म नहीं, बल्कि त्याग, जरूरतमंदों की मदद और भाईचारे का संदेश है. बकरीद का असली उद्देश्य दिखावा नहीं, बल्कि इंसानियत, साझेदारी और अल्लाह की रजा हासिल करना है.



