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महामना की प्रतिमा और फव्वारे की उपेक्षा पर उठे सवाल, जिम्‍मेदार हुए मौन

महामना की प्रतिमा और फव्वारे की उपेक्षा पर उठे सवाल, जिम्‍मेदार हुए मौन
May 14, 2026, 10:54 AM
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Posted By Preeti Kumari

Questions raised over the neglect of Mahamana's statue and fountain, those responsible remained silent


वाराणसी: बीएचयू की स्थापना करने वाले भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय की स्मृतियों और प्रतिमा की बदहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं. लंका क्षेत्र स्थित मालवीय चौराहे पर लगी महामना की विशाल प्रतिमा और उसके आसपास की व्यवस्था इन दिनों उपेक्षा का शिकार नजर आ रही है. सिंह द्वार नाम से मशहूर मालवीय चौराहा, जो सुंदरलाल चिकित्सालय ट्रॉमा सेंटर के नाम से भी प्रसिद्ध क्षेत्र के समीप स्थित है, वहां स्थापित महामना की प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए वर्षों पहले एक छतरी लगाई गई थी. लेकिन वर्तमान समय में उस छतरी की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है.


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स्थानीय लोगों के अनुसार छतरी को पतले लोहे के रॉड और रस्सियों के सहारे किसी तरह टिकाकर रखा गया है, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकता है. प्रतिमा स्थल के पास लगाया गया आकर्षक फव्वारा भी अब केवल शोपीस बनकर रह गया है. कभी यह स्थान विश्वविद्यालय की पहचान और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता था, लेकिन अब फव्वारा बंद पड़ा है और आसपास की व्यवस्था भी उपेक्षित दिखाई दे रही है. आने-जाने वाले छात्र, मरीज और स्थानीय नागरिक इस स्थिति को देखकर हैरानी जता रहे हैं.


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स्थानीय लोगों और छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल वीआईपी आगमन के समय ही इन व्यवस्थाओं को अस्थायी रूप से दुरुस्त कराता है. जैसे ही कार्यक्रम समाप्त होता है, व्यवस्थाएं फिर पुराने हाल में पहुंच जाती हैं. लोगों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में हर वर्ष मेंटेनेंस और सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर उसकी तस्वीर कुछ और ही दिखाई देती है.


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महामना ने जिस विश्वविद्यालय की स्थापना विश्व के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालय परिसर के रूप में की थी, आज उसी परिसर में उनकी प्रतिमा और स्मृति स्थल की यह स्थिति लोगों को खल रही है. लोगों का कहना है कि यह केवल एक प्रतिमा या फव्वारे का मामला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत और संस्थापक के सम्मान से जुड़ा विषय है.

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स्थानीय नागरिकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि मालवीय जी की प्रतिमा स्थल की तत्काल मरम्मत कराई जाए, जर्जर छतरी को बदला जाए और बंद पड़े फव्वारे को फिर से चालू कराया जाए, ताकि महामना की गरिमा के अनुरूप इस स्थल को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाया जा सके.

वाराणसी में स्कूल की बदहाली का वीडियो पोस्ट करना पड़ा भारी, आप प्रवक्ता मुकेश सिंह गिरफ्तार
वाराणसी में स्कूल की बदहाली का वीडियो पोस्ट करना पड़ा भारी, आप प्रवक्ता मुकेश सिंह गिरफ्तार
वाराणसी : स्‍कूल की बदहाली का वीडियो पोस्‍ट करना आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्‍ता को भारी पड़ गया. आम आदमी पार्टी के 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत आदमपुर थाना क्षेत्र के कोनिया प्राथमिक विद्यालय की स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के मामले में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश सिंह को आदमपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है. पुलिस ने मंडीलय अस्‍पताल में आरोपी का मेडिकल मुआयना कराया.आम आदमी पार्टी प्रदेश में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को उजागर करने के लिए 'स्कूल ठीक करो' अभियान चला रही है. इसी के तहत आप प्रदेश प्रवक्ता मुकेश सिंह ने आदमपुर क्षेत्र स्थित प्राथमिक विद्यालय (कोनिया पंचायत भवन) का एक वीडियो बनाकर अपने एक्स (ट्विटर) हैंडल पर शेयर किया था. पोस्ट में दावा किया गया था कि गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित करने के लिए इस स्कूल को बंद कर दिया गया है.स्कूल प्रशासन का पक्षदूसरी ओर, स्कूल के प्रधानाध्यापक कमलेश दत्त पांडेय ने पुलिस को दी गई तहरीर में इन दावों को भ्रामक और असत्य बताया. प्रधानाध्यापक के अनुसार, जुलाई 2023 में जर्जर भवन की छत का एक हिस्सा गिर गया था, जिसके बाद बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई पास के 'कोनिया सट्टी प्राथमिक विद्यालय' के भवन में स्थानांतरित कर दी गई थी. वर्तमान में स्कूल बंद नहीं है, 52 नामांकित बच्चों को शिक्षक नियमित रूप से पढ़ा रहे हैं.ALSO READ : ट्रेन में बीमार मिली नाबालिग को RPF ने पहुंचाया अस्पताल, मंडलीय चिकित्सालय में हुआ इलाजपुराने भवन का मामला कोर्ट में लंबित होने और स्टे ऑर्डर होने की वजह से वहां नया निर्माण नहीं हो पा रहा है. आदमपुर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है. इस मामले में एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह ने बताया की आप प्रवक्ता मुकेश सिंह को गिरफ्तार किया गया है. वीडियो के साथ-साथ सोशल मीडिया पोस्ट के तथ्यों की जांच कर रही है.
ट्रेन में बीमार मिली नाबालिग को RPF ने पहुंचाया अस्पताल, मंडलीय चिकित्सालय में हुआ इलाज
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वाराणसी : इंटरसिटी एक्सप्रेस के प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर ठहराव के दौरान जनरल कोच में एक 17 वर्षीय नाबालिग बालिका अस्वस्थ अवस्था में मिली. ड्यूटी पर तैनात RPF कांस्टेबल विनय कुमार राय की नजर बालिका पर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने तत्काल इसकी सूचना अधिकारियों को दी.सूचना मिलते ही उप निरीक्षक भोला प्रसाद राम मौके पर पहुंचे और RPF पोस्ट वाराणसी सिटी के प्रभारी निरीक्षक को मामले की जानकारी दी. इसके बाद RPF और GRP के जवानों ने बालिका को सुरक्षित रूप से स्टेशन के मुख्य द्वार तक पहुंचाया और 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी.महिला कांस्टेबल शशिकला भारती की निगरानी में बालिका को उपचार के लिए जिला अस्पताल कबीर चौरा में भर्ती कराया गया. चिकित्सकीय उपचार के बाद बालिका को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया, जिसके बाद उसे RPF पोस्ट वाराणसी सिटी लाया गया.मामले की जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को दी गई. चाइल्ड हेल्पलाइन की केस वर्कर के पोस्ट पर पहुंचने के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई और बालिका को सुरक्षित रूप से उनके सुपुर्द कर दिया गया.ALSO READ : यूजीसी बिल पर केसरिया भारत का विरोध, वापस लेने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापनपूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल की ओर से बताया गया कि यात्रियों की सुरक्षा और सहायता के साथ-साथ संकट में मिले बच्चों को तत्काल मदद उपलब्ध कराने के लिए RPF लगातार सक्रिय है. रेलवे संपत्ति की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए भी मंडल में सघन निगरानी एवं प्रभावी कार्रवाई जारी है.
यूजीसी बिल पर केसरिया भारत का विरोध, वापस लेने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
यूजीसी बिल पर केसरिया भारत का विरोध, वापस लेने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
वाराणसी: यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन बिल-2026 को लेकर केसरिया भारत ने विरोध जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है. संस्था की ओर से कहा गया कि प्रस्तावित नियमों में आरक्षण व्यवस्था को आर्थिक आधार पर लागू किया जाना चाहिए, ताकि सभी वर्गों के छात्रों और शिक्षकों के साथ समानता का व्यवहार सुनिश्चित हो सके.केसरिया भारत के पदाधिकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सामाजिक समरसता और समान अवसर बनाए रखना रखने के लिए आज जिला मुख्यालय पर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा.संस्था के पदाधिकारीयों ने स्पष्ट किया कि वह सामान्य वर्ग समेत सभी आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हितों को लेकर अपनी आवाज उठाती रहेगी.केसरिया भारत ने आरोप लगाया कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन बिल-2026 के प्रावधान सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के हितों के खिलाफ एकतरफा माहौल तैयार कर सकते हैं. संस्था का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में अवसरों की समानता सुनिश्चित करने के लिए किसी भी प्रकार की व्यवस्था भेदभाव रहित और सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए.संस्था ने मांग की कि प्रस्तावित रेगुलेशन पर पुनर्विचार किया जाए और इसे वापस लेकर ऐसी नीति तैयार की जाए, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों और जरूरतमंदों को प्राथमिकता मिले. केसरिया भारत ने सरकार और संबंधित संस्थाओं से इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा कर सभी पक्षों की चिंताओं को दूर करने की अपील की है.ALSO READ: वाराणसी एयरपोर्ट पर विमान यात्री के पास से 10 लाख बरामद, आयकर अधिकारी कर रहे पूछताछ