न रंग बदला, न रूप बदला… 129 साल से ऐसे ही विराजते हैं आंग्रे बाड़ा के गणपति...

वाराणसी : ब्रह्मा घाट स्थित में श्री काशी गणेश उत्सव समिति की ओर से गणेश उत्सव की परंपरा 129 वर्षों से चली आ रही है. समिति की स्थापना वर्ष 1898 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने की थी. यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ देश के स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ा रहा है.
समिति के कार्यकारिणी सदस्य आलोक अनार्थी बताते हैं कि वे बचपन से ही इस संस्था से जुड़े हुए हैं. उनके अनुसार यहां स्थापित होने वाली भगवान गणेश की प्रतिमा इस आयोजन की सबसे खास पहचान है. करीब 129 वर्षों से बप्पा की प्रतिमा का स्वरूप बिल्कुल वैसा ही बना हुआ है. न इसके रंग में बदलाव किया गया और न ही आकार में कोई परिवर्तन हुआ.
खास बात यह है कि जिस परिवार के कारीगर पीढ़ियों से बप्पा की प्रतिमा तैयार करते आ रहे हैं, आज भी उन्हीं के हाथों से प्रतिमा का निर्माण कराया जाता है. यही पुरानी परंपरा इस आयोजन को खास बनाती है.
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आलोक अनार्थी के मुताबिक बप्पा को सात दिनों तक विधि-विधान से विराजमान किया जाता है. पांचवें दिन विशेष कार्यक्रमों के साथ धूमधाम रहती है. सातवें दिन सुबह भंडारे का आयोजन होता है. इसके बाद ढोल-नगाड़ों के बीच शोभायात्रा निकाली जाती है और विधिवत विसर्जन के साथ सात दिवसीय कार्यक्रम का समापन होता है.



