दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक विजेताओं के अभिभावकों का भी होगा सम्मान

वाराणसीः सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 30 जुलाई को होने वाले 44वें दीक्षांत समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं. शुक्रवार को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में विभिन्न समितियों की समीक्षा बैठक हुई. इसमें समारोह की सभी व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लेते हुए समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए.
बैठक में निर्णय लिया गया कि दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के शताब्दी भवन में आयोजित होगा. स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों और उनके महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों को मंच पर सम्मानित किया जाएगा. समारोह से पहले विश्वविद्यालय परिसर में व्यापक स्वच्छता, हरित परिसर और सौंदर्यीकरण अभियान चलाया जाएगा. सुरक्षा, यातायात, प्रोटोकाल और अतिथि सत्कार की व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर बैठक में दिया गया.
इस दौरान अतिथियों का स्वागत, शाल एवं स्मृति-चिह्न, स्वर्ण पदक वितरण, उपाधि-पत्र एवं अंकपत्रों की व्यवस्था, परिधान, वीडियो एवं फोटोग्राफी, स्वास्थ्य सेवाएं, बैठक व्यवस्था, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, परिसर के सौंदर्यीकरण और सुरक्षा सहित सभी व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई.
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कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत की गौरवशाली विरासत और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर होगा. उन्होंने सभी समितियों से अनुशासन, समन्वय और समयबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया.
दीक्षांत समारोह की श्रृंखला में आयोजित चित्रकला, निबंध, पुस्तक पठन और पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं की तैयारियों की भी समीक्षा की गई. मुख्य समारोह में देशभक्ति गीतों और पूर्वांचल के पारंपरिक लोकनृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र होंगी. बैठक में कुलसचिव राकेश कुमार, परीक्षा नियंत्रक डा. दिनेश कुमार सहित विभिन्न संकायों के प्रोफेसर, समिति अध्यक्ष, संयोजक और सदस्य उपस्थित रहे.



