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BHU के लचर व्यवस्था के आगे लाचार दिखे मरीज व परिजन, इलाज के लिए दिनभर करना पड़ रहा इंतजार...

BHU के लचर व्यवस्था के आगे लाचार दिखे मरीज व परिजन, इलाज के लिए दिनभर करना पड़ रहा इंतजार...
Jul 09, 2026, 05:56 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी: पूर्वांचल के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) अस्पताल में मरीजों को इलाज से ज्यादा अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है. सुबह ओपीडी खुलने के साथ ही अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतारें लग गईं. सुबह से ही सैकड़ों लोग पंजीकरण और डॉक्टर से परामर्श, दवा वितरण और अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के लिए अपनी नंबर का इंतजार करते दिखाई दिए.


बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए दूर-दराज के जिलों से मरीज बड़ी उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन यहां की व्यवस्थाएं उनकी परेशानियों को और बढ़ा रही हैं. मरीजों का कहना है कि डॉक्टर तक पहुंचने में ही कई घंटे बीत जाते हैं. इसके बाद दवा प्राप्त करने के लिए अलग से लंबी कतार में लगना पड़ता है. दवा मिलने के बाद उसे किस प्रकार खाना है, इसकी जानकारी लेने के लिए भी मरीजों को अलग लाइन में खड़ा होना पड़ता है. पूरी प्रक्रिया में मरीजों का लगभग पूरा दिन अस्पताल में ही लग जाता है.BHU


अस्पताल परिसर में घंटों तक खड़े रहने को मजबूर मरीजों की हालत और खराब हो रही है. कई मरीज कमजोरी, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याओं से जूझते दिखाई दिए. सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ आए परिजनों को उठानी पड़ रही है.


वही सुमित्रा देवी ने बताया कि वह सुबह करीब आठ बजे अस्पताल पहुंची थीं, लेकिन उनका नंबर दोपहर करीब एक बजे आया. इसके बाद दवा लेने के लिए उन्हें लगभग दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा. उन्होंने कहा कि अस्पताल में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. सीमित संख्या में लगी कुर्सियां मरीजों की संख्या के सामने बेहद कम साबित हो रही हैं. ऐसे में अधिकांश लोगों को घंटों खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है.


अस्पताल पहुंचे कई अन्य मरीजों और परिजनों ने भी व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की, उनका कहना था कि बीएचयू जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं का विस्तार उसी अनुपात में नहीं हो पाया है. दवा वितरण काउंटरों की संख्या कम होने के कारण लोगों को लंबे समय तक कतार में खड़ा रहना पड़ता है.


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मरीजों के साथ आए देवेन्द्र का कहना है कि अस्पताल परिसर में पर्याप्त पेयजल, बैठने की सुविधा और अतिरिक्त दवा काउंटर की आवश्यकता है, उनका कहना है कि यदि किसी मरीज को जांच कराने की सलाह दी जाती है तो कई बार जांच की तारीख एक सप्ताह या उससे भी अधिक समय बाद की मिलती है. इससे मरीजों को बार-बार अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी बढ़ जाती है.


वही मरीज के परिजन राहुल ने कहा कि पूर्वांचल और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में लोग बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं. ऐसे में यहां की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुगम तथा व्यवस्थित बनाने की जरूरत है. उनका मानना है कि अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों की तैनाती, दवा वितरण काउंटरों की संख्या में वृद्धि और वेटिंग रूम की बेहतर व्यवस्था की जानी चाहिए.

वाराणसी में ट्रेन से बकरियों को बचाने में पड़े जान के लाले, भाई-बहन की मौत...
वाराणसी में ट्रेन से बकरियों को बचाने में पड़े जान के लाले, भाई-बहन की मौत...
वाराणसी : मिर्जामुराद राजपुर गांव के समीप बुधवार देर शाम हुए दर्दनाक रेल हादसे में भाई-बहन की मौत हो गई. बकरी को रेलवे ट्रैक से हटाने के प्रयास में 19 वर्षीय युवती ट्रेन की चपेट में आ गई. उसे बचाने दौड़ा उसका 17 वर्षीय भाई भी ट्रेन की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हो गया. युवती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि घायल भाई ने गुरुवार सुबह उपचार के दौरान दम तोड़ दिया. घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया.मिर्जामुराद क्षेत्र के राजपुर गांव निवासी अन्नू पाल की पुत्री हीरामणि (19) बुधवार शाम रेलवे ट्रैक के किनारे बकरी चरा रही थी. इसी दौरान वाराणसी से प्रयागराज की ओर जा रही तेज रफ्तार ट्रेन आ गई. बताया गया कि बकरियों को ट्रैक से हटाने के दौरान हीरामणि ट्रेन की चपेट में आ गई. बहन को बचाने के लिए उसका छोटा भाई टिंकू पाल (17) दौड़ा, लेकिन वह भी ट्रेन की चपेट में आ गया. हादसे में हीरामणि की मौके पर मौत हो गई, जबकि टिंकू गंभीर रूप से घायल हो गया.परिजन घायल टिंकू को उपचार के लिए कछवा स्थित निजी अस्पताल ले गए. हालत नाजुक होने पर उसे रेफर कर दिया गया, जहां गुरुवार सुबह इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई.ALSO READ:काशी विद्यापीठ में बीएससी बायो ग्रुप के अभ्यर्थियों की काउन्सिलिंग दो दिन होगी...कार्रवाई के डर से शव भूसा घर में छि‍पायाइधर, पुलिस कार्रवाई के डर से परिजनों ने मृतका का शव घर के भूसा घर में रख दिया. सूचना पर पहुंची मिर्जामुराद पुलिस और जीआरपी को घटनास्थल पर शव नहीं मिला. ग्रामीणों से जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने परिजनों को समझाकर करीब तीन घंटे बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. परिजनों के मुताबिक युवती दसवीं तक पढाई की थी. उसकी मानसिक हालत इन दिनों ठीक नहीं चल रही थी. जिसका इलाज चल रहा था. घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है. पुलिस घटना से जुडे सभी पहलुओं पर जांच कर रही है.
काशी विद्यापीठ में बीएससी बायो ग्रुप के अभ्यर्थियों की काउन्सिलिंग दो दिन होगी...
काशी विद्यापीठ में बीएससी बायो ग्रुप के अभ्यर्थियों की काउन्सिलिंग दो दिन होगी...
वाराणसीः महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ मुख्य परिसर में सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश काउन्सिलिंग के क्रम में बीएससी बायो ग्रुप के अभ्यर्थियों की काउन्सिलिंग 9-10 जुलाई को होनी है. ऐसे अभ्यर्थी जिनको ई-मेल पर लिंक भेजा गया है वे गेट पास के साथ अपने मूल प्रमाण पत्रों, सभी की एक सेट फोटो स्टेट, स्वयं की दो फोटो अपनी कटेगरी का अद्यतन प्रमाण पत्र सुबह वाणिज्य एवं प्रबन्ध शास्त्र संकाय पर काउन्सिलिंग के लिए उपस्थित होगें. मेरिट सूची विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड है, अभ्यर्थी उसको देखकर गेट पास डाउनलोड कर सकते हैं.वहीं बुधवार को बीएससी गणित में 21 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया. इस तरह बीएससी गणित में अब तक 218 विद्यार्थी प्रवेश ले चुके हैं और आनलाइन शुल्क जमा कर सकते हैं. प्रवेश सेल के उप समन्वयक प्रो. नलिनी श्याम कामिल ने बताया कि शुल्क जमा करने के बाद नव प्रवेशित विद्यार्थियों को परिचय पत्र एवं लाइब्रेरी कार्ड काउन्सिलिंग स्थल पर ही जारी किया गया.ALSO READ:BHU के लचर व्यवस्था के आगे लाचार दिखे मरीज व परिजन, इलाज के लिए दिनभर करना पड़ रहा इंतजार...अभ्यर्थियों को काउन्सिलिंग के बाद निर्धारित शुल्क उसी दिन आनलाइन (पेटीएम, गूगल पे, डेबिट कार्ड, यूपीआई आदि) के द्वारा जमा करना अनिवार्य होगा. प्रवेश से सम्बन्धित किसी भी जानकारी के लिये अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की वेबसाइट का नियमित अवलोकन करते रहें क्योंकि प्रवेश काउन्सिलिंग से सम्बन्धित सूचना ईमेल या एसएमएस के माध्यम से मात्र दी जाएगी. नए सत्र में प्रवेश शुरू होने के साथ परिसर में चहल-पहल बढ़ गई है. जहां नए विद्यार्थी अलग—अलग कोर्स में प्रवेश के लिए आ रहे हैं वहीं पहले से प्रवेश ले चुके विद्यार्थियों ने अपनी क्लास शुरू कर दी है.
BHU के लचर व्यवस्था के आगे लाचार दिखे मरीज व परिजन, इलाज के लिए दिनभर करना पड़ रहा इंतजार...
BHU के लचर व्यवस्था के आगे लाचार दिखे मरीज व परिजन, इलाज के लिए दिनभर करना पड़ रहा इंतजार...
वाराणसी: पूर्वांचल के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) अस्पताल में मरीजों को इलाज से ज्यादा अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है. सुबह ओपीडी खुलने के साथ ही अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतारें लग गईं. सुबह से ही सैकड़ों लोग पंजीकरण और डॉक्टर से परामर्श, दवा वितरण और अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के लिए अपनी नंबर का इंतजार करते दिखाई दिए.बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए दूर-दराज के जिलों से मरीज बड़ी उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन यहां की व्यवस्थाएं उनकी परेशानियों को और बढ़ा रही हैं. मरीजों का कहना है कि डॉक्टर तक पहुंचने में ही कई घंटे बीत जाते हैं. इसके बाद दवा प्राप्त करने के लिए अलग से लंबी कतार में लगना पड़ता है. दवा मिलने के बाद उसे किस प्रकार खाना है, इसकी जानकारी लेने के लिए भी मरीजों को अलग लाइन में खड़ा होना पड़ता है. पूरी प्रक्रिया में मरीजों का लगभग पूरा दिन अस्पताल में ही लग जाता है.अस्पताल परिसर में घंटों तक खड़े रहने को मजबूर मरीजों की हालत और खराब हो रही है. कई मरीज कमजोरी, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याओं से जूझते दिखाई दिए. सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ आए परिजनों को उठानी पड़ रही है.वही सुमित्रा देवी ने बताया कि वह सुबह करीब आठ बजे अस्पताल पहुंची थीं, लेकिन उनका नंबर दोपहर करीब एक बजे आया. इसके बाद दवा लेने के लिए उन्हें लगभग दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा. उन्होंने कहा कि अस्पताल में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. सीमित संख्या में लगी कुर्सियां मरीजों की संख्या के सामने बेहद कम साबित हो रही हैं. ऐसे में अधिकांश लोगों को घंटों खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है.अस्पताल पहुंचे कई अन्य मरीजों और परिजनों ने भी व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की, उनका कहना था कि बीएचयू जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं का विस्तार उसी अनुपात में नहीं हो पाया है. दवा वितरण काउंटरों की संख्या कम होने के कारण लोगों को लंबे समय तक कतार में खड़ा रहना पड़ता है.ALSO READ:₹24.34 करोड़ की लागत से चौड़ी होगी साधोगंज-भिटी सड़क, विधायक डॉ. अवधेश सिंह ने किया भूमिपूजन...मरीजों के साथ आए देवेन्द्र का कहना है कि अस्पताल परिसर में पर्याप्त पेयजल, बैठने की सुविधा और अतिरिक्त दवा काउंटर की आवश्यकता है, उनका कहना है कि यदि किसी मरीज को जांच कराने की सलाह दी जाती है तो कई बार जांच की तारीख एक सप्ताह या उससे भी अधिक समय बाद की मिलती है. इससे मरीजों को बार-बार अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी बढ़ जाती है.वही मरीज के परिजन राहुल ने कहा कि पूर्वांचल और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में लोग बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं. ऐसे में यहां की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुगम तथा व्यवस्थित बनाने की जरूरत है. उनका मानना है कि अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों की तैनाती, दवा वितरण काउंटरों की संख्या में वृद्धि और वेटिंग रूम की बेहतर व्यवस्था की जानी चाहिए.