BHU के लचर व्यवस्था के आगे लाचार दिखे मरीज व परिजन, इलाज के लिए दिनभर करना पड़ रहा इंतजार...

वाराणसी: पूर्वांचल के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) अस्पताल में मरीजों को इलाज से ज्यादा अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है. सुबह ओपीडी खुलने के साथ ही अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतारें लग गईं. सुबह से ही सैकड़ों लोग पंजीकरण और डॉक्टर से परामर्श, दवा वितरण और अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के लिए अपनी नंबर का इंतजार करते दिखाई दिए.
बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए दूर-दराज के जिलों से मरीज बड़ी उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन यहां की व्यवस्थाएं उनकी परेशानियों को और बढ़ा रही हैं. मरीजों का कहना है कि डॉक्टर तक पहुंचने में ही कई घंटे बीत जाते हैं. इसके बाद दवा प्राप्त करने के लिए अलग से लंबी कतार में लगना पड़ता है. दवा मिलने के बाद उसे किस प्रकार खाना है, इसकी जानकारी लेने के लिए भी मरीजों को अलग लाइन में खड़ा होना पड़ता है. पूरी प्रक्रिया में मरीजों का लगभग पूरा दिन अस्पताल में ही लग जाता है.
अस्पताल परिसर में घंटों तक खड़े रहने को मजबूर मरीजों की हालत और खराब हो रही है. कई मरीज कमजोरी, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याओं से जूझते दिखाई दिए. सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ आए परिजनों को उठानी पड़ रही है.
वही सुमित्रा देवी ने बताया कि वह सुबह करीब आठ बजे अस्पताल पहुंची थीं, लेकिन उनका नंबर दोपहर करीब एक बजे आया. इसके बाद दवा लेने के लिए उन्हें लगभग दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा. उन्होंने कहा कि अस्पताल में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. सीमित संख्या में लगी कुर्सियां मरीजों की संख्या के सामने बेहद कम साबित हो रही हैं. ऐसे में अधिकांश लोगों को घंटों खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है.
अस्पताल पहुंचे कई अन्य मरीजों और परिजनों ने भी व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की, उनका कहना था कि बीएचयू जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं का विस्तार उसी अनुपात में नहीं हो पाया है. दवा वितरण काउंटरों की संख्या कम होने के कारण लोगों को लंबे समय तक कतार में खड़ा रहना पड़ता है.
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मरीजों के साथ आए देवेन्द्र का कहना है कि अस्पताल परिसर में पर्याप्त पेयजल, बैठने की सुविधा और अतिरिक्त दवा काउंटर की आवश्यकता है, उनका कहना है कि यदि किसी मरीज को जांच कराने की सलाह दी जाती है तो कई बार जांच की तारीख एक सप्ताह या उससे भी अधिक समय बाद की मिलती है. इससे मरीजों को बार-बार अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी बढ़ जाती है.
वही मरीज के परिजन राहुल ने कहा कि पूर्वांचल और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में लोग बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं. ऐसे में यहां की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुगम तथा व्यवस्थित बनाने की जरूरत है. उनका मानना है कि अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों की तैनाती, दवा वितरण काउंटरों की संख्या में वृद्धि और वेटिंग रूम की बेहतर व्यवस्था की जानी चाहिए.



