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रेलवे कॉलोनियों में मिलेगी पाइप्ड नेचुरल गैस, गेल आपूर्ति पर समझौता

रेलवे कॉलोनियों में मिलेगी पाइप्ड नेचुरल गैस, गेल आपूर्ति पर समझौता
Mar 18, 2026, 12:30 PM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: ईस्ट सेंट्रल रेलवे के पं. दीन दयाल उपाध्याय मंडल और गेल गैस लिमिटेड के बीच बुधवार को एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. इस समझौते के तहत रेलवे कॉलोनियों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, जिससे रेलवे कर्मचारियों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक ईंधन उपलब्ध हो सकेगा. इस योजना के अंतर्गत पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर में लगभग 4000 रेलवे आवासों में पीएनजी सप्लाई शुरू की जाएगी. साथ ही सभी रनिंग रूम में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. इसके अतिरिक्त डीडीयू जंक्शन पर कार्यरत वेंडरों एवं रेलवे वर्कशॉप में भी इस सुविधा का लाभ मिलेगा, जिससे उनके कार्य में सुविधा, सुरक्षा और दक्षता बढ़ेगी.


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सीनियर मैनेजर श्रीकांत राउत कार्यक्रम में शामिल


इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना की गरिमामयी उपस्थिति रही. कार्यक्रम में सूरज कुमार (वरीय मंडल अभियंता-समन्वय, डीडीयू), अजय कुमार (मंडल अभियंता- मुख्यालय, डीडीयू) तथा गेल गैस लिमिटेड के डिप्टी जनरल मैनेजर एवं ऑफिसर इनचार्ज रणधीर कुमार मिश्रा उपस्थित रहे. साथ ही गेल गैस लिमिटेड की ओर से चीफ मैनेजर अजय सेठी एवं सीनियर मैनेजर श्रीकांत राउत (गेल गैस/डीडीयू) भी कार्यक्रम में शामिल हुए.


रेलवे कॉलोनियों में आधुनिक सुविधाओं को बढ़ावा


अधिकारियों ने बताया कि यह पहल रेलवे कॉलोनियों में आधुनिक सुविधाओं को बढ़ावा देने और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. पीएनजी (PNG) कनेक्शन से न केवल रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि यह पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अधिक सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण के लिए बेहतर भी साबित होगा.


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विशेष रूप से यह जानकारी दी गई कि रेलवे कर्मचारियों से पीएनजी (PNG) कनेक्शन हेतु कोई रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा. गेल गैस के अधिकारियों द्वारा यह भी बताया गया कि परियोजना का प्रथम चरण जून माह के द्वितीय सप्ताह तक कार्यरत होने की संभावना है.

हिंदी दिवस पर BHU में शिक्षामंत्री के संदेश का हुआ वाचन, कार्यालयी कामकाज में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर
हिंदी दिवस पर BHU में शिक्षामंत्री के संदेश का हुआ वाचन, कार्यालयी कामकाज में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर
वाराणसी। हिंदी दिवस के अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में सोमवार को विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। केंद्रीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी का संदेश पढ़कर सुनाया।शिक्षामंत्री ने अपने संदेश में कहा कि हिंदी दिवस केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित रहने का अवसर नहीं है, बल्कि हिंदी को दैनिक कार्य-व्यवहार का स्वाभाविक माध्यम बनाने का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, शोध, नवाचार और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिंदी के व्यापक उपयोग से ज्ञान को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का कार्य और अधिक मजबूत होगा।कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी का संदेश भी पढ़ा गया। हिंदी अधिकारी डॉ. शिव कुमार त्रिपाठी ने कुलपति का संदेश वाचन किया। कुलपति ने विश्वविद्यालय परिवार को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए सभी अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी अपने कार्यालयी कामकाज का अधिकाधिक हिस्सा हिंदी में करें। साथ ही, सहयोगियों को भी हिंदी के प्रयोग के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।ALSO READ:हरितालिका तीज पर मां मंगलागौरी मंदिर में उमड़ी महिलाओं की भीड़, विधि-विधान से किया पूजनकार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रमेश सिंह ने किया। इस अवसर पर विधि प्रकोष्ठ समन्वयक प्रो. रजनीश कुमार सिंह, आंतरिक अंकेक्षण अधिकारी उदय शंकर उपाध्याय, संयुक्त कुलसचिव (लेखा) डॉ. संजय कुमार, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह, उपकुलसचिव (शिक्षण) डॉ. रंजीत शांडिल्य, सहायक कुलसचिव (सामान्य प्रशासन) अशोक कुमार शर्मा सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और अन्य सदस्य मौजूद रहे। राजभाषा प्रकोष्ठ के अंशुमान पटेल, रामजी त्रिपाठी सहित अन्य सदस्य भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
हरितालिका तीज पर मां मंगलागौरी मंदिर में उमड़ी महिलाओं की भीड़, विधि-विधान से किया पूजन
हरितालिका तीज पर मां मंगलागौरी मंदिर में उमड़ी महिलाओं की भीड़, विधि-विधान से किया पूजन
वाराणसी : हरितालिका तीज के पर्व पर काशी के मां मंगलागौरी मंदिर में महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। दूर-दराज से पहुंची सुहागिन महिलाओं ने मां के दर्शन-पूजन किए और अपने पति की लंबी उम्र व अखंड सौभाग्य की कामना की।हरितालिका तीज को भगवान शिव और माता पार्वती की कथा से जुड़ा पर्व माना जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी आस्था के साथ महिलाएं तीज पर व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।मां मंगलागौरी मंदिर में महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और मां को सोलह श्रृंगार अर्पित किया। चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी समेत श्रृंगार की सामग्री चढ़ाकर महिलाओं ने सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की प्रार्थना की।ALSO READ : सेवा, समर्पण और क्षेत्रीय दक्षता से बनेगा सामाजिक कार्य का सशक्त भविष्यइस पर्व की खास बात यह रही कि कई महिलाएं अपने परिवार में चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मां मंगलागौरी के दर्शन के लिए पहुंचीं। महिलाओं का कहना है कि तीज पर मां के दर्शन और पूजन से उन्हें विशेष आध्यात्मिक संतुष्टि और आशीर्वाद की अनुभूति होती है।मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा। तीज के पारंपरिक पूजन के साथ महिलाओं ने मां मंगलागौरी के चरणों में अपने सुहाग और परिवार की खुशहाली की कामना की।
सेवा, समर्पण और क्षेत्रीय दक्षता से बनेगा सामाजिक कार्य का सशक्त भविष्य
सेवा, समर्पण और क्षेत्रीय दक्षता से बनेगा सामाजिक कार्य का सशक्त भविष्य
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के अंतर्गत संचालित एमए इन सोशल वर्क कार्यक्रम में प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए प्लेसमेंट, व्यावसायिक दक्षता और करियर की संभावनाओं को लेकर विशेष संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में चिल्ड्रेन्स रिसर्च यूनिवर्सिटी, गुजरात के सहायक प्रोफेसर डॉ. शैलेश ब्रह्मभट्ट ने विद्यार्थियों को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में रोजगार, नेतृत्व और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी दी।पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. वीके लहरी ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों को प्लेसमेंट टीम की कार्यप्रणाली और करियर निर्माण में उसकी भूमिका से परिचित कराया। उन्होंने समाज सेवा को भारतीय जीवन-दर्शन और ‘सेवा परमो धर्मः’ की भावना से जोड़ते हुए कहा कि एक सफल समाजसेवी के व्यक्तित्व में सहयोग और योगदान का समन्वय होना जरूरी है।डॉ. शैलेश ब्रह्मभट्ट ने विद्यार्थियों के साथ अपनी संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा और अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य के प्रति अडिग रहना सफलता की पहली सीढ़ी है। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रेरक संकल्पना ‘तेजस्वी बालक, तेजस्वी भारत’ का उल्लेख करते हुए सामाजिक कार्य के क्षेत्र में सेवा, संवेदना, समर्पण और सामाजिक परिवर्तन के महत्व पर प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO), क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम, ब्लड बैंक, मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोरोग सेवाओं, बाल संरक्षण सोसायटी, आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में रोजगार और नेतृत्व के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।डॉ. ब्रह्मभट्ट ने ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ श्लोक का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को कर्मनिष्ठा, आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य की व्यावसायिक दक्षता केवल किताबों तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर निकलकर समुदाय के बीच जाना, लोगों की समस्याओं को समझना, संवाद स्थापित करना और नियमित क्षेत्रकार्य करना जरूरी है।ALSO READ : आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी मणिकर्णिका घाट से गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर प्रताड़ित करने का आरोपउन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रेरक उद्घोष के माध्यम से विद्यार्थियों में साहस, संकल्प और चुनौतियों का सामना करने की भावना विकसित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने सामाजिक कार्य के क्षेत्र में करियर और उच्च शिक्षा से जुड़े सवाल भी पूछे।यह संवाद सत्र विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक रहा। कार्यक्रम ने उन्हें सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उपलब्ध व्यावसायिक, शैक्षणिक और शोधपरक अवसरों से परिचित कराया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अशोक श्रीवास्तव ने किया।