भारत के ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से ही लोककल्याण संभव : सुनील आंबेकर...

वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में आयोजित विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन के द्वितीय दिवस के तृतीय सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से ही लोककल्याणकारी विज्ञान का निर्माण संभव है.उन्होंने विज्ञान भारती के कार्यकर्ताओं से भारतीय ज्ञान-विज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच प्रभावी सेतु बनने का आह्वान किया.
सुनील आंबेकर ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तीव्र तकनीकी परिवर्तन के इस युग में भी भारत की सांस्कृतिक और दार्शनिक दृष्टि की प्रासंगिकता पहले से अधिक बढ़ गई है.आधुनिक विज्ञान मानव जीवन को सुविधाएं प्रदान करता है, लेकिन उसके उपयोग की दिशा और उद्देश्य तय करने के लिए भारतीय दर्शन का एकात्म दृष्टिकोण आवश्यक है.
उन्होंने कहा कि विज्ञान भारती के कार्यकर्ताओं को आधुनिक विज्ञान के विभिन्न विषयों की गहरी समझ विकसित करने के साथ-साथ भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का भी गंभीर अध्ययन करना होगा.इससे समकालीन वैज्ञानिक विमर्श में भारतीय दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकेगा.

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विज्ञान को केवल तकनीकी दृष्टि से नहीं, बल्कि दार्शनिक और सभ्यतागत दृष्टिकोण से भी समझने की आवश्यकता है.उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाबद्ध तरीके से भारत की ज्ञान-विज्ञान परंपरा को अंधविश्वास के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे समाज अपने बौद्धिक वैभव से दूर होता गया.
आंबेकर ने आत्मनिर्भरता और स्वदेशी प्रौद्योगिकी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि केवल विदेशी तकनीक, ज्ञान और पेटेंट के आधार पर भारत का दीर्घकालिक विकास संभव नहीं है.देश को मौलिक अनुसंधान, स्वदेशी तकनीक और नवाचार आधारित उत्पादन प्रणाली को मजबूत करना होगा.
उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मॉडल विकसित करना चाहिए जो भारतीय दृष्टि, विश्वकल्याण और सतत विकास के मूल्यों पर आधारित हो.साथ ही विज्ञान भारती के कार्यकर्ताओं से अध्ययन, अनुसंधान, जनजागरण और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने का आह्वान किया.
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कार्यक्रम में देशभर से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विज्ञान भारती के पदाधिकारियों ने सहभागिता की.



