संस्कृत शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर मंथन, डिजिटल गुरुकुल और संस्कृत AI पर जोर

वाराणसी : सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने और भारतीय ज्ञान-परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने को लेकर सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के अंतर्गत बैठक आयोजित की गई। इसमें डिजिटल गुरुकुल, संस्कृत AI, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और ज्ञानसेतु जैसे विषयों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से संस्कृत शिक्षा को अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विद्या विभाग के प्रो. डॉ. रविशंकर पांडेय ने की। बैठक में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने इस बात पर विचार किया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से संस्कृत साहित्य और प्राचीन ज्ञान को नई पीढ़ी तक कैसे पहुंचाया जाए। साथ ही, शिक्षा में डिजिटल संसाधनों के उपयोग और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में प्राचीन संस्कृत पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण को महत्वपूर्ण बताया गया। वक्ताओं का कहना था कि डिजिटल माध्यमों की मदद से पुरानी ज्ञान-संपदा को सुरक्षित रखने के साथ उसे अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। वहीं, संस्कृत AI के जरिए संस्कृत भाषा के अध्ययन को आसान बनाने और विद्यार्थियों के लिए नए शैक्षिक अवसर विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और विभिन्न विषयों पर समूह बनाकर नवाचार से जुड़े विचार साझा किए। शिक्षा के साथ सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता के विकास को भी जरूरी बताया गया। आयोजन का उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों के सहयोग से नए विचारों को व्यावहारिक रूप देना तथा परंपरा और तकनीक के समन्वय से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना रहा।
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कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन शिवानन्द मिश्र ने किया। इस अवसर पर डॉ. बालेश्वर झा, डॉ. सूर्यभान कुमार, डॉ. मुकेश जी मेहता, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. श्रवण कुमार, डॉ. विशाखानंद बंसोड़ सहित अन्य शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



