कम ब्याज वाले लोन के नाम पर झांसा, वाराणसी में तीन लोगों से 30 लाख रुपये की ठगी...

वाराणसी : तमाम जागरूकता के बावजूद शहर में साइबर अपराधियों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है. साइबर थाना पुलिस के पास करीब 30 लाख रुपये की ठगी के तीन बड़े मामले पहुंचे हैं. कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा, वाट्सएप पर APK फाइल भेजकर मोबाइल हैक करना और UPI के जरिए ठगी जैसी वारदातों को अंजाम देकर साइबर ठगों ने लोगों को लाखों रुपये का चूना लगाया है. शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. जल्द ही आरोपियों पर शिकंजा कसने की तैयारी है.
इंस्टाग्राम पर दिखे लोन विज्ञापन ने लगाया लाखों का चूना
चेतगंज थाना क्षेत्र के सेनपुरा निवासी विवेक अग्रहरि को 20 लाख रुपये के लोन की जरुरत थी. इसी दौरान उन्हें इंस्टाग्राम पर एक निजी फाइनेंस कंपनी का विज्ञापन दिखाई दिया. लिंक पर क्लिक करने के कुछ देर बाद एक अज्ञात नंबर से कॉल आई. कॉल करने वाले ने खुद को महाराष्ट्र निवासी और कंपनी का अधिकृत एजेंट अनिकेत बताया. उसने कम ब्याज दर पर लोन दिलाने का भरोसा दिया. इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, हेल्थ इंश्योरेंस और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर कई किश्तों में पैसे जमा कराए गए. जब तक विवेक को ठगी का एहसास हुआ, तब तक उनके खाते से कुल 8 लाख 91 हजार 726 रुपये निकल चुके थे.
APK फाइल डाउनलोड करते ही खाते से उड़ गए 11 लाख रुपये
दूसरा मामला शिवपुर थाना क्षेत्र के नवलपुर निवासी विजय कुमार का है. विजय कुमार के मोबाइल पर 11 मई को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप के माध्यम से APK फाइल भेजी गई.
फाइल डाउनलोड करने के बाद साइबर ठगों ने उनके बैंक ऑफ बड़ौदा खाते तक पहुंच बना ली. इसके बाद खाते से छह अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 11 लाख 1 हजार 309 रुपये 19 पैसे निकाल लिए गए. पीड़ित के अनुसार उनके खाते में लगभग 4.30 लाख रुपये बचत खाते में और 6.75 लाख रुपये फिक्स डिपॉजिट के रूप में जमा थे. खाते से रकम गायब होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की.
तीन मामलों में 30 लाख तक पहुंची ठगी की रकम
साइबर थाना पुलिस के अनुसार पिछले 72 घंटे में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों में ठगी की कुल रकम लगभग 30 लाख रुपये तक पहुंच गई है. पुलिस डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है.
साइबर पुलिस ने जारी की एडवाइजरीसाइबर थाना पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले सस्ते लोन या कम ब्याज वाले ऑफर पर बिना जांच भरोसा न करें. पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान APK फाइल को डाउनलोड न करें, क्योंकि ऐसी फाइलों में वायरस या मैलवेयर छिपा हो सकता है, जो मोबाइल और बैंकिंग जानकारी चुरा सकता है.
इसके अलावा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बैंक खाते में पैसे प्राप्त करने के लिए कभी भी UPI PIN डालने या QR कोड स्कैन करने की जरूरत नहीं होती. यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी, बीमा एजेंट या लोन प्रतिनिधि बनकर पैसे मांगता है तो उसकी सत्यता जरूर जांचें.
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ठगी होने पर तुरंत करें यह काम
साइबर अपराध का शिकार होने पर पीड़ित को तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करनी चाहिए या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए. पुलिस का कहना है कि समय पर शिकायत मिलने पर ठगी गई रकम को रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है. साइबर थाना पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लिंक, फाइल या कॉल से सावधान रहें और डिजिटल लेनदेन करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतें.



