शास्त्रार्थ महाविद्यालय में हिंदी दिवस पर आयोजन, संस्कृत के साथ हिंदी को भी बताया सहज और मधुर भाषा

वाराणसी। हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को काशी के प्राचीन गुरुकुल शास्त्रार्थ महाविद्यालय में अनूठा आयोजन हुआ। यहां संस्कृत के बटुकों ने हिंदी भाषा के प्रति अपनी रुचि और जुड़ाव बढ़ाने के लिए प्रतिदिन एक पेज हिंदी लिखने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने कहा कि संस्कृत के अध्ययन के साथ हिंदी भाषा का नियमित अभ्यास भी उनकी लेखन क्षमता को मजबूत करेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डा. पवन कुमार शुक्ला ने कहा कि हिंदी देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली भारत की प्रमुख भाषाओं में से एक है। देश में हिंदी सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषाओं में शामिल है। हिंदी दिवस के अवसर पर विद्यालयों और महाविद्यालयों में निबंध लेखन, भाषण, कविता पाठ और नाटक जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जिससे विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ती है।
मुख्य अतिथि शिक्षाविद डा. गणेश दत्त शास्त्री ने कहा कि संस्कृत के साथ हिंदी भी बहुत ही सरल, मीठी और सहज भाषा है। हमें दैनिक बातचीत और कामकाज में हिंदी का प्रयोग करने पर गर्व होना चाहिए। हिंदी केवल बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि देश की पहचान और हमारी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी भाषा भी है।
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उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्रतिदिन कुछ लिखने की आदत भाषा पर पकड़ मजबूत करने के साथ विचारों को व्यक्त करने की क्षमता भी विकसित करती है।
इस अवसर पर डा. रामलखन पाठक, डा. अशोक पाण्डेय, डा. वैष्णवी शुक्ला और डा. सिद्धिनाथ श्रीवास्तव ने भी हिंदी भाषा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में संस्कृत के विद्यार्थियों ने हिंदी को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और नियमित लेखन का संकल्प लिया।



