वाराणसी में तीन दिवसीय विक्रमादित्य महानाट्य, UP और MP के सीएम करेंगे उद्घाटन

वाराणसी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचेंगे. सीएम योगी व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ बीएलडब्ल्यू में सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी पर आधारित महानाट्य का शुभारंभ करेंगे. 3 से 5 अप्रैल तक मंचन वाले इस महानाट्य का उद्देश्य देश के गौरवशाली इतिहास, विक्रम संवत की वैज्ञानिकता और उस युग के अनुपम योगदान से जनमानस को परिचित कराना है. आयोजन स्थल पर विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियां भी लगाई जा रही हैं. सम्राट विक्रमादित्य आधारित महानाट्य की प्रस्तुति लगभग 1.45 घंटे की होगी. मंच पर 175 से अधिक कलाकार और सहयोगी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे. काय्रक्रम अवधि में बरेका को नो फ्लाईजाेन घोषित किया गया है.

3 भव्य मंच, 18 घोड़े, 2 रथ, 4 ऊँट, 1 पालकी और 1 हाथी के साथ जीवंत दृश्य
महानाट्य को विराट और जीवंत स्वरूप प्रदान करने के लिए तीन भव्य मंचों का निर्माण किया जा रहा है. केंद्र में 80×62 का मुख्य मंच तथा दोनों ओर 42×42 के लेफ्ट और राइट मंच तैयार किए जा रहे हैं. इन मंचों पर सिंहासन बत्तीसी, बेताल पच्चीसी और भविष्य पुराण के प्रसंगों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के अद्वितीय व्यक्तित्व, सुशासन और न्यायप्रियता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा. साथ ही उनके दरबार के नवरत्न—कालिदास, वराहमिहिर सहित अन्य विद्वानों की विद्वता का भी सजीव चित्रण होगा. लेफ्ट मंच पर महाकाल मंदिर की भव्य संरचना और 8 फीट के शिवलिंग पर दिव्य भस्म आरती का अलौकिक दृश्य आकर्षण का केंद्र बनेगा. महानाट्य को और अधिक जीवंत बनाने के लिए 18 घोड़े, 2 रथ, 4 ऊँट, 1 पालकी और 1 हाथी के साथ भव्य प्रस्तुतिकरण किया जाएगा.

बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अर्पण
कालगणना के केन्द्र महाकाल की नगरी उज्जैन में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के स्थापना के बाद यह भारतवर्ष में स्थापित ज्योतिर्लिंगों में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना की श्रृंखला में मुख्यमंत्री डॉ. यादव जी की मंशा अनुसार सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घडी अर्पण की जा रही है. भारत के स्वाभिमान के पुनर्स्थापन के लिए भारतीय काल गणना पर आधारित विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना उज्जैन में की गयी है. जिसका लोकार्पण माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2024 में किया गया था. इस घड़ी को वैदिक काल गणना के समस्त घटकों को समवेत कर बनाया गया है. यह घड़ी सूर्योदय से परिचालित है. अतः जिस स्थान पर जो सूर्योदय का समय होगा उस स्थान की काल गणना तदनुसार होगी. स्टेंडर्ड टाइम भी उसी से जुड़ा रहेगा. इस घड़ी के माध्यम से वैदिक समय, लोकेशन, भारतीय स्टेंडर्ड टाइम, भारतीय पंचांग, विक्रम सम्वत् मास, ग्रह स्थिति, भद्रा स्थिति, चंद्र स्थिति आदि की जानकारी समाहित है.

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की विशेषताएं
समय का वैज्ञानिक और सटीक विभाजन
एक दिन = 30 मुहूर्त
दो सूर्योदय के बीच
* 30 मुहूर्त (घंटे)
* 30 काल (मिनट)
* 30 काष्ठा (सेकंड)
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी में वैदिक समय विभाजन तालिका
(सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक)
* मुहूर्त : एक दिन में 30 मुहूर्त होते हैं, जिनकी अवधि लगभग 48 मिनट होती है.
* कला : एक दिन में 900 कला होती हैं (30×30), जिनकी अवधि लगभग 96 सेकंड होती है.
* काष्ठा : एक दिन में 27,000 काष्ठा होती हैं (30×30×30), जिनकी अवधि लगभग 3.2 सेकंड होती है.
यह भी पढ़ें: 3 से 5 अप्रैल तक महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' का मंचन, बाबा विश्वनाथ को अर्पित होगा वैदिक घड़ी

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप की विशेषताएं
* वैदिक घड़ी : 30 घंटे की वास्तविक वैदिक समय प्रणाली
* पंचांग और विक्रम संवत कैलेंडर : 5800 वर्षों के लिए उपलब्ध
* मुहूर्त अलार्म : हर मुहूर्त के शुभ-अशुभ संकेत और अलार्म सेटिंग
* स्थान और मौसम : आपके शहर का लाइव तापमान, हवा, आर्द्रता
* 180+ भाषाओं में उपलब्ध

