बाबा विश्वनाथ को चढ़ेगी नासिक के त्रयंबकेश्वर से लाई गई हल्दी, भक्तों का होगा ड्रेस कोड

वाराणसी : बसंतपंचमी के बाद अब बाबा विश्वनाथ की "हल्दी रस्म" की तैयारी चल रही है. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर काशी में बाबा विश्वनाथ के विवाहोत्सव की पहली मंगल बेला पर 'हल्दी रस्म' का भव्य आयोजन किया जाएगा. इस अवसर पर काशी की गलियों में डमरू की गूंज सुनाई देगी, जब बाबा विश्वनाथ सजेंगे.
इस वर्ष विशेष रूप से बाबा को चढ़ाई जाने वाली हल्दी, ज्योतिर्लिंग श्री त्रयंबकेश्वर (नासिक) से विद्वान पुजारियों द्वारा काशी लाई जा रही है. हल्दी के इस दिव्य लेपन के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के पंच बदन बाबा को गाजे-बाजे के साथ सजाया जाएगा.
इस मंगल उत्सव में सामूहिक रुद्राभिषेक पीठ, काशी के सदस्य और बाबा सारंगनाथ के भक्त "ससुराल पक्ष" के रूप में शामिल होकर इस रस्म की शोभा बढ़ाएंगे. यह एक अद्वितीय अवसर है, जहां भक्तगण एकत्रित होकर बाबा विश्वनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे. भक्तों के लिए ड्रेस कोड भी निर्धारित किया गया है. सभी भक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे सनातनी परंपरा के अनुरूप पीले रंग के वस्त्र पहनकर आएं. यह रंग इस रस्म की विशेषता को और बढ़ाएगा. कार्यक्रम 13 फरवरी की सायं 6:00 बजे से टेढ़ीनीम स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के आवास पर होगा.
महाशिवरात्रि पर पूजा-आरती का समय निर्धारित
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर मंगला आरती प्रातः 2 बजकर 15 मिनट से प्रारंभ होगी, जबकि मंदिर प्रातः 3 बजकर 30 मिनट पर दर्शनार्थियों के लिए खोल दिया जाएगा. मध्याह्न भोग आरती प्रातः 11 बजकर 40 मिनट से होगी. महाशिवरात्रि पर चारों प्रहर की विशेष आरती भी संपन्न होगी, जिसमें रात्रि से प्रातः तक श्रद्धालुओं को बाबा विश्वनाथ के दर्शन का अवसर मिलेगा. मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं से व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है.
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