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बाबा विश्‍वनाथ को चढ़ेगी नासिक के त्रयंबकेश्वर से लाई गई हल्‍दी, भक्‍तों का होगा ड्रेस कोड

बाबा विश्‍वनाथ को चढ़ेगी नासिक के त्रयंबकेश्वर से लाई गई हल्‍दी, भक्‍तों का होगा ड्रेस कोड
Feb 04, 2026, 11:32 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : बसंतपंचमी के बाद अब बाबा विश्वनाथ की "हल्दी रस्म" की तैयारी चल रही है. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर काशी में बाबा विश्वनाथ के विवाहोत्सव की पहली मंगल बेला पर 'हल्दी रस्म' का भव्य आयोजन किया जाएगा. इस अवसर पर काशी की गलियों में डमरू की गूंज सुनाई देगी, जब बाबा विश्वनाथ सजेंगे.

इस वर्ष विशेष रूप से बाबा को चढ़ाई जाने वाली हल्दी, ज्योतिर्लिंग श्री त्रयंबकेश्वर (नासिक) से विद्वान पुजारियों द्वारा काशी लाई जा रही है. हल्दी के इस दिव्य लेपन के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के पंच बदन बाबा को गाजे-बाजे के साथ सजाया जाएगा.


इस मंगल उत्सव में सामूहिक रुद्राभिषेक पीठ, काशी के सदस्य और बाबा सारंगनाथ के भक्त "ससुराल पक्ष" के रूप में शामिल होकर इस रस्म की शोभा बढ़ाएंगे. यह एक अद्वितीय अवसर है, जहां भक्तगण एकत्रित होकर बाबा विश्वनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे. भक्तों के लिए ड्रेस कोड भी निर्धारित किया गया है. सभी भक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे सनातनी परंपरा के अनुरूप पीले रंग के वस्त्र पहनकर आएं. यह रंग इस रस्म की विशेषता को और बढ़ाएगा. कार्यक्रम 13 फरवरी की सायं 6:00 बजे से टेढ़ीनीम स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के आवास पर होगा.


महाशिवरात्रि पर पूजा-आरती का समय निर्धारित


श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर मंगला आरती प्रातः 2 बजकर 15 मिनट से प्रारंभ होगी, जबकि मंदिर प्रातः 3 बजकर 30 मिनट पर दर्शनार्थियों के लिए खोल दिया जाएगा. मध्याह्न भोग आरती प्रातः 11 बजकर 40 मिनट से होगी. महाशिवरात्रि पर चारों प्रहर की विशेष आरती भी संपन्न होगी, जिसमें रात्रि से प्रातः तक श्रद्धालुओं को बाबा विश्वनाथ के दर्शन का अवसर मिलेगा. मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं से व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है.

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दूध प्रोटीन-एलोवेरा एंटासिड टैबलेट को भारतीय पेटेंट, बीएचयू की शोध टीम की बड़ी उपलब्धि
दूध प्रोटीन-एलोवेरा एंटासिड टैबलेट को भारतीय पेटेंट, बीएचयू की शोध टीम की बड़ी उपलब्धि
वाराणसी : बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की शोध टीम ने दूध प्रोटीन और एलोवेरा से तैयार नवीन मिश्रित एंटासिड टैबलेट के लिए भारतीय पेटेंट हासिल किया है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस आविष्कार को पेटेंट संख्या 597350 प्रदान किया है। इसका आवेदन संख्या 202311057324 है।यह शोध बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी विभाग में किया गया। आविष्कारक टीम में प्रो. दिनेश चन्द्र राय, प्रो. राज कुमार दुआरी, डॉ. अरविंद, डॉ. रुचि चावला, रिधि पांडे और कृष्ण कुमार शामिल हैं।शोध टीम के नेतृत्वकर्ता प्रो. दिनेश चन्द्र राय ने इस उपलब्धि को प्राकृतिक पाचन स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पेटेंट डेयरी फार्म और शोध प्रयोगशाला से निकलकर समाज के दैनिक जीवन तक पहुंचने वाले नवाचार का उदाहरण है।उन्होंने कहा कि पेटेंट मिलने के बाद इस तकनीक के क्लिनिकल परीक्षण, उत्पादन विस्तार और व्यावसायीकरण की संभावनाएं खुलेंगी। साथ ही, अम्लता की समस्या के दैनिक प्रबंधन के लिए प्रोटीन युक्त विकल्प विकसित करने की दिशा में भी यह शोध उपयोगी हो सकता है।ALSO READ : बीएचयू में 7वें बाल चिकित्सा डायलिसिस एवं चिकित्सीय एफेरेसिस मॉड्यूल का शुभारंभप्रो. राय के अनुसार, यह उपलब्धि स्वदेशी नवाचार, डेयरी उत्पादों के मूल्य संवर्धन और साक्ष्य आधारित पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।इस उपलब्धि पर दोनों विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक समुदाय और पूर्ववर्ती छात्र संघों ने शोध टीम को बधाई दी तथा शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में टीम के योगदान की सराहना की।
बीएचयू में 7वें बाल चिकित्सा डायलिसिस एवं चिकित्सीय एफेरेसिस मॉड्यूल का शुभारंभ
बीएचयू में 7वें बाल चिकित्सा डायलिसिस एवं चिकित्सीय एफेरेसिस मॉड्यूल का शुभारंभ
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS-BHU) के बाल रोग विभाग की ओर से शनिवार को सर सुंदरलाल अस्पताल के डॉक्टर्स लाउंज में 7वें बाल चिकित्सा डायलिसिस एवं चिकित्सीय एफेरेसिस मॉड्यूल फॉर इमरजेंसी (PD-TAME) का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में देशभर से बाल रोग विशेषज्ञ, बाल नेफ्रोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ शामिल हुए।आधारशिला रीनल केयर प्रोजेक्ट और रूरल इंडिया सपोर्टिंग ट्रस्ट (RIST) के सहयोग से संचालित यह देशव्यापी क्षमता निर्माण कार्यक्रम बच्चों में गुर्दे से जुड़ी आपात स्थितियों की पहचान और उनके शुरुआती प्रबंधन के लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने पर केंद्रित है। प्रशिक्षण में बाल चिकित्सा डायलिसिस, चिकित्सीय एफेरेसिस और एक्यूट किडनी इंजरी से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण, मानकीकृत प्रोटोकॉल और केस आधारित शिक्षण शामिल है।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि देश में बाल नेफ्रोलॉजिस्ट की कमी को दूर करने की आवश्यकता है। इसके लिए चिकित्सा केंद्रों में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित चिकित्सकों और डायलिसिस की बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता से कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है और मरीजों को बड़े चिकित्सा केंद्रों तक ले जाने की जरूरत भी कम हो सकती है। उन्होंने मरीजों के उपचार में सहानुभूति और संवेदनशीलता के महत्व पर भी जोर दिया।IMS निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने कहा कि विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों से बाल नेफ्रोलॉजी के क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कार्यशाला को चिकित्सकों के ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत ने बच्चों में किडनी इंजरी के मामलों के प्रबंधन के लिए उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई। उन्होंने पेरिटोनियल डायलिसिस और हीमोडायलिसिस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रक्रिया आधारित यह प्रशिक्षण स्वास्थ्यकर्मियों के व्यावहारिक कौशल को मजबूत करने में मदद करेगा।कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. ओ.पी. मिश्रा, एमेरिटस प्रोफेसर, बाल रोग विभाग, हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, वाराणसी तथा वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ एवं बाल नेफ्रोलॉजिस्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी स्नातकोत्तर बाल रोग विशेषज्ञों को हीमोडायलिसिस और चिकित्सीय एफेरेसिस की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि गंभीर रूप से बीमार बच्चों के उपचार में ये महत्वपूर्ण जीवनरक्षक कौशल हैं।PD-TAME के कोर्स निदेशक प्रो. अभिजीत साहा ने पेरिटोनियल डायलिसिस और हीमोडायलिसिस में अधिक संख्या में बाल रोग विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रथम स्तर पर इन क्षमताओं का विकास बच्चों में गुर्दे से जुड़े विकारों के समयबद्ध प्रबंधन में मददगार होगा और महानगरों के उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफरल की आवश्यकता कम हो सकती है।आधारशिला रीनल केयर प्रोजेक्ट की ट्रस्टी नीना जॉली ने कहा कि बाल नेफ्रोलॉजी में शुरुआती स्तर पर छूट जाने वाली समस्या बाद में जटिल रूप ले सकती है। ऐसे में प्रथम स्तर पर मरीज को देखने वाले स्वास्थ्यकर्मी की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी संकेतों की पहचान, उचित उपचार की शुरुआत और मरीज को सही चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने के लिए प्रथम स्तर के स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।ALSO READ : शारदीय नवरात्र 11 अक्‍टूबर से, भगवती का हाथी पर हो रहा आगमन, 10 दिनी होगा महापर्व...कार्यशाला में एक्यूट पेरिटोनियल डायलिसिस, हीमोडायलिसिस, हीमोडायफिल्ट्रेशन, चिकित्सीय एफेरेसिस, ऑटोमेटेड पेरिटोनियल डायलिसिस, प्वाइंट ऑफ केयर अल्ट्रासोनोग्राफी और वैस्कुलर एक्सेस से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।कार्यक्रम में बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. अंकुर सिंह ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि आयोजन सचिव प्रो. अभिषेक अभिनव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
शारदीय नवरात्र 11 अक्‍टूबर से, भगवती का हाथी पर हो रहा आगमन, 10 दिनी होगा महापर्व...
शारदीय नवरात्र 11 अक्‍टूबर से, भगवती का हाथी पर हो रहा आगमन, 10 दिनी होगा महापर्व...
वाराणसी: शक्ति साधना का महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर, रविवार से प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार तक मनाया जाएगा. इस वर्ष नवरात्र में तिथि की वृद्धि होने के कारण यह महापर्व 10 दिनों तक चलेगा. अष्टमी तिथि दो दिन व्याप्त रहने से भक्तों को मां भगवती की भक्ति का विशेष अवसर प्राप्त होगा.अभिजित मुहूर्त पर घटस्‍थापना सर्वोत्‍तमबीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता है. इस वर्ष नवरात्र के प्रथम दिन पूरे समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग की उपस्थिति रहेगी. धार्मिक ग्रंथों में इन योगों के दौरान कलश स्थापना करना वर्जित माना गया है. ऐसी स्थिति में अभिजित मुहूर्त में देवी स्थापना करना शास्त्रसम्मत और सर्वोत्तम माना जाता है.कलश स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सुबह 11:20 से 12:07 के मध्य है. नवरात्र का आरंभ रविवार को होने के कारण मां दुर्गा का आगमन 'हाथी' पर हो रहा है, जो अत्यधिक वर्षा और प्राकृतिक समृद्धि का प्रतीक है. समापन मंगलवार को होने से भगवती का गमन 'मुर्गे' (कुक्कुट) पर होगा. 20 अक्टूबर को विजयादशमी और 21 को नवरात्र व्रत का पारण किया जाएगा.ALSO READ:भोजपुरी गायक रितेश रंजन से मांगाी 10 लाख की रंगदारी, जान से मारने की धमकी का भी आरोप19 अक्टूबर को होगी संधि पूजाख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी ने बताया कि नवरात्र में महाअष्टमी तिथि समाप्त और महानवमी तिथि के आरंभ को संधिकाल कहा जाता है. अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट में संधि पूजा होती है. संधि पूजा 19 अक्टूबर सोमवार को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगी. मान्यता है कि इसी संधिकाल में माता दुर्गा ने चामुंडा रूप धारण कर चंड और मुंड असुरों का वध किया था.