सपा और भाजपा नेता अखाड़े में भिड़े, बराबरी पर छूटा मुकाबला

वाराणसी : बीएचयू परिसर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर, बचऊ वीर अखाड़ा में नाग पंचमी के पावन अवसर पर सोमवार को भव्य दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. दंगल में बच्चों से लेकर बड़े पहलवानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी कुश्ती कला का प्रदर्शन किया.
बड़े पहलवानों के बीच गुल्लू पहलवान और काशी पहलवान का दंगल बराबरी पर छूटा. वहीं सपा नेता अमन यादव और भाजपा पार्षद राम सिंह कल्लू के बीच हुए रोमांचक मुकाबला बराबरी पर छूटा. बच्चों के दंगल में विराट यादव, ओम, श्रेयांश यादव और आरेव यादव सहित अन्य बच्चों ने प्रतिभाग किया. बच्चों को प्रोत्साहन स्वरूप बर्तन एवं ₹101 नगद पुरस्कार प्रदान किया गया. वहीं बड़े पहलवानों को बाल्टी एवं ₹501 नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया.
दंगल प्रतियोगिता में मुख्य रूप से संकटा प्रसाद यादव, सुनील यादव, श्रीराम फौजी, बाबूलाल यादव एवं रवि यादव सहित क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे. सभी की देखरेख एवं सहयोग से दंगल का आयोजन शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. आयोजकों ने कहा कि ऐसे पारंपरिक आयोजनों से युवाओं और बच्चों में कुश्ती एवं भारतीय खेल संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ती है तथा हमारी पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है.
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इसी तरह वाराणसी के दर्जनों अखाड़ों में कुश्ती और शरीर सौष्ठव की प्रतियोगिताएं आयोजित हुई. इस दौरान पहलवानों ने दमखम दिखाया. नागपंचमी पर दंगल यहां की प्राचीन पंरपरा में शुमार है. अखाड़ों पर चहल पहल भी देखी गई. कुश्ती लड़ने के लिए दूर दराज से पहलवानों का आगमन हुआ.दंगल में आजमाए दांव-पेच
शिवपुर स्थित फलहारी बाबा अखाड़ा में नाग पंचमी के अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य कुश्ती एवं दंगल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान जी और अखाड़े की पवित्र मिट्टी के पूजन से हुई. पूजन के बाद पहलवानों ने अखाड़े की मिट्टी माथे पर लगाकर गुरु एवं अखाड़े के प्रति श्रद्धा प्रकट की.
इसके बाद पहलवानों ने एक-दूसरे से गले मिलकर भाईचारे और खेल भावना का संदेश दिया. पूजन के पश्चात अखाड़े में भव्य कुश्ती एवं दंगल प्रतियोगिता शुरू हुई, जिसमें पहलवानों ने अपने दमखम और कुश्ती कौशल का शानदार प्रदर्शन किया. दंगल देखने के लिए क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. नाग पंचमी पर आयोजित यह दंगल भारतीय पारंपरिक कुश्ती और अखाड़ा संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को जीवंत रखने का संदेश देता है.



