विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला के पात्रों के चयन के लिए तीन दर्जन से अधिक मठों को भेजा गया संदेश...

वाराणसी. विश्वप्रसिद्ध रामनगर रामलीला इस बार 25 सितंबर से शुरू होगी । । काशी राज परिवार के अनुसार इस वर्ष 2 अगस्त को प्रथम गणेश पूजन और 14 सितंबर को द्वितीय गणेश पूजन का आयोजन होगा। काशी नरेश परिवार ने इस वर्ष की रामलीला के लिए पात्र चयन प्रक्रिया का पहला चरण शुरू कर दिया है। राज परिवार ने वाराणसी सहित आसपास के जिलों में संचालित मठों, आश्रमों, वेद विद्यालयों और संस्कृत शिक्षण संस्थानों में पात्रों के चयन की जानकारी भेजी है। प्रथम गणेश पूजन के बाद चयनित पात्रों का प्रशिक्षण आरंभ किया जाएगा।

प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे प्रमुख पात्रों का चयन किया जाएगा। काशी राज परिवार की ओर से भेजे गए संदेश में पात्र चयन की संभावित तिथि 18 जुलाई निर्धारित की गई है। चयन प्रक्रिया रथयात्रा मेले के तीसरे दिन आयोजित होने की संभावना है।
अरविन्द मिश्रा के अनुसार चयन प्रक्रिया में 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बालक भाग ले लेते है।
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इच्छुक बच्चों की परीक्षा केवल अभिनय क्षमता के आधार पर नहीं होगी, बल्कि संस्कृत श्लोकों और रामचरितमानस की चौपाइयों के स्पष्ट, शुद्ध और प्रभावशाली उच्चारण का भी परीक्षण किया जाएगा। चयन के दौरान स्वर की मधुरता, उच्चारण की शुद्धता, आत्मविश्वास और संवाद प्रस्तुति को विशेष महत्व दिया जाएगा। पात्रों का चयन किला परिसर स्थित जवाहर खाने में किया जाएगा। यहां विशेषज्ञों और काशी राज परिवार के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में बच्चों की वाचिक क्षमता का परीक्षण होगा। चयनित बालकों को रामलीला मंचन से पहले विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे अपने पात्रों को पूरी गरिमा और परंपरा के अनुरूप निभा सकें। रामनगर रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी परंपरागत शैली है। यहां आधुनिक मंचीय तकनीकों के बजाय प्राकृतिक वातावरण और मुक्ताकाशी मंचन की परंपरा आज भी जीवंत है। यही कारण है कि इस रामलीला को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी विशेष पहचान प्राप्त है। इसकी ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता के कारण हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इसे देखने रामनगर पहुंचते हैं। लगभग 45 दिनों तक गंगा तट स्थित बलुआ घाट धर्मशाला में इन बाल कलाकारों को संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा, मंच संचालन, स्वर की कोमलता और पारंपरिक अभिनय शैली का अभ्यास कराया जाएगा। इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए काशी राज परिवार हर वर्ष पात्र चयन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया को अत्यंत गंभीरता और परंपरागत विधि से संपन्न कराता है। इस वर्ष भी तैयारियां पूरे उत्साह के साथ शुरू हो चुकी हैं और आयोजन समिति इसे भव्य एवं सफल बनाने में जुटी हुई है।



