अजय राय की विदाई, चुनावी रणनीति या कुछ और, चर्चाओं को लगे पंख

वाराणसी : उत्तर प्रदेश कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक फेरबदल के बाद अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर आराधना मिश्रा ‘मोना’ को नई जिम्मेदारी दी गई है. दोनों नेताओं ने बदलाव के बाद राहुल गांधी के प्रति आभार जताया है. कांग्रेस ने इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष और देविंदर निषाद व आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। पार्टी ने अजय राय के योगदान की भी सराहना की है. शुक्रवार को फेरबदल अचानक होने पर चर्चाओं को भी पंख लग गए हैं. एक तरफ इस बदलाव को लेकर अजय राय के समर्थक खामोश हैं. वहीं इस बात की भी आस है कि उन्हें पार्टी में कोई बडी जिम्मेदारी साैंपी जा सकती है. समर्थकों का मामना है कि विधानसभा चुनाव के बाद यह कदम उठाना चाहिए.
इस बदलाव के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है. पार्टी के नेता अपने स्तर से आकलन लगा रहे हैं कि बदलाव के पीछे मंशा और परिणाम को लेकर तरह तरह की कानाफूसी शुरू हो गई है. फेरबदल के पीछे समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव के साथ सीट बंटवारे को लेकर अजय राय की मुखर भूमिका तो नहीं है. उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में कांग्रेस ने अजय राय को हटाने की वजह के तौर पर अखिलेश यादव या सपा से टकराव का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है. इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक चर्चा और विश्लेषण के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.
2027 विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच सीट शेयरिंग पर बातचीत अभी अंतिम रूप नहीं ले पाई है. कांग्रेस की ओर से यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा था कि पार्टी गठबंधन में कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. अजय राय ने भी कहा था कि कांग्रेस 150 से कम सीटों पर समझौता नहीं करेगी. इसी दौरान अखिलेश यादव ने 403 में से 350 विधानसभा सीटों पर तैयारी की बात कही थी. इससे दोनों दलों के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर राजनीतिक संदेश और बातचीत दोनों महत्वपूर्ण हो गए.
राहुल के गढ़ में पीडीए रथ और बढ़ी चर्चा
24 सितंबर 2026 को अखिलेश यादव ने अपनी पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत रायबरेली से की थी. रायबरेली लोकसभा सीट राहुल गांधी के प्रतिनिधित्व वाली सीट है, इसलिए इस कार्यक्रम को सपा-कांग्रेस संबंधों के संदर्भ में राजनीतिक तौर पर देखा गया. रथयात्रा की भीड ने कांग्रेस में हलचल बढ़ा दी. अजय राय ने उस समय कहा था कि कांग्रेस सपा की रणनीति को समझती है और 150 सीटों से कम पर समझौता नहीं करेगी. रिपोर्टों के मुताबिक, सपा से जुड़े सूत्रों ने कांग्रेस के लिए 55 सीटों की सीमा की बात कही थी, हालांकि यह कोई अंतिम सार्वजनिक सीट-बंटवारा समझौता नहीं था.
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पीएम के खिलाफ ताल ठोंक कर पर आए चर्चा में
अजय राय अगस्त 2023 से यूपी कांग्रेस अध्यक्ष थे और 2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव में ताल ठोंका था. 2024 में उन्हें 4,60,457 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे. शुरूआती बढ़त ने पार्टी में अजय राय के कद को भी बढ़ाया. अजय राय वाराणसी की पूर्व की कोलसला विधानसभा सीट से नौ बार विधायक रहे उदल को 1996 में हराकर भाजपा के विधायक बने. वह 2002 और 2007 में भी विपरीत परिस्थितियों में भाजपा से विधायक चुने गए. भाजपा ने 2009 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी संसदीय सीट से अपने राष्ट्रीय नेता डा. मुरली मनोहर जोशी को मैदान में उतारा तो अजय राय ने इसका विरोध करते हुए पार्टी छोड़ दी. उनके खिलाफ चुनावी मैदान में कूद पड़े अजय राय जीते तो नहीं लेकिन सदस्यता जाने के बाद 2009 में हुए उप चुनाव में निर्दल प्रत्याशी के रूप में एक बार फिर विधायक बन गए. 2012 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंचे. वह 2014, 2019, और 2024 में लगातार मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव में चुनौती दे रहे हैं.



