Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

रेलवे लाइन पर एके 47 मिलने से हड़कंप, जांच में सामने आई यह बजह

रेलवे लाइन पर एके 47 मिलने से हड़कंप, जांच में सामने आई यह बजह
Apr 07, 2026, 07:13 AM
|
Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: जैतपुरा थाना क्षेत्र के सरैया रेलवे लाइन पर स्‍वचालित हथियार एक 47 मिलने की सूचना से क्षेत्र में कुछ देर के लिए हड़कंप मच गया. बताया जाता है कि एक व्यक्ति को रेल लाइन के पास राइफल जैसी संदिग्ध वस्तु दिखाई दी. सतर्कता दिखाते हुए उसने उसे उठाकर पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही जैतपुरा थाना प्रभारी उपेंद्र प्रताप सिंह और आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की गई. प्रारंभिक जांच में बरामद वस्तु एके-47 राइफल होने की बात सामने आई, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गईं.


jkiuj


घोर लापरवाही आई सामने


जांच के दौरान सामने आया कि हथियार ड्यूटी पर जा रहे किसी सीआरपीएफ जवान का हो सकता है, जो किसी कारणवश ट्रेन से गिर गया था. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित एजेंसियों से संपर्क साधा और पूरी स्थिति स्पष्ट की. पुलिस अधिकारियों ने जांच पूरी करने के बाद सीआरपीएफ के कमांडर से वार्ता की. पुष्टि होने पर बरामद एके-47 को विधिवत रूप से संबंधित सीआरपीएफ अधिकारी को सौंप दिया गया. फिलहाल मामले में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं. वही थानाध्यक्ष जैतपुरा ने बताया कि एक स्पेशल ट्रेन जो कैंट की ओर से डीडीयू जंक्शन जा रही थी. जिसमें सीआरपीएफ के जवान मौजूद थे.


o


जवानों की खोज करने लगे


सरैया डॉटपुल के पास चार सीआरपीएफ के जवान ट्रेन से उतर गए और जब स्पेशल ट्रेन डीडीयू जंक्शन पहुंची तो साथी जवानों की खोज करने लगे. कुछ देर बाद पता चला तो सीआरपीएफ के कमांडेंट अपने उच्च अधिकारियों को घटना से अवगत कराया. चौकी पर आकर कागजी लिखा पढ़ी के बाद एक-47 को अपने कब्जे में लेकर चले गए. वही घटना की जानकारी होने के बाद डीसीपी और एसीपी भी सरैया चौकी पर पहुंचे थे.


juy


यह भी पढ़ें: आंधी-ओले संग होगी झमाझम बारिश, दिल्ली NCR और 8 राज्यों में बदलेगा मौसम


जानकारी के अनुसार सरैया सरिया हाजी कटरा निवासी व्यक्ति एके-47 पाने के बाद क्षेत्र में लेकर घूम रहा था. एक 200 स्क्वायर फीट के खंडहर नुमा बाउंड्री में छुपा कर रखा था. व्यक्ति ने चौकी पर सूचना दी और वहां से दो सिपाही आए और एके-47 अपने साथ लेकर चले गए. वहीं मौजूद सरकारी कैमरे का चिप भी निकाल कर अपने कब्जे में ले लिया है. मामले की जांच के बाद ही पूरी स्‍थ‍ित‍ि स्‍पष्‍ट हो सकेगी. वहीं इसे घोर लापरवाही ब4ाया जा रहा है.

वाराणसी से स्पाइसजेट की सभी उड़ानें बंद, मुंबई रूट की आखिरी फ्लाइट ने भरी उड़ान...
वाराणसी से स्पाइसजेट की सभी उड़ानें बंद, मुंबई रूट की आखिरी फ्लाइट ने भरी उड़ान...
वाराणसी : लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, बाबतपुर से स्पाइसजेट एयरलाइंस की मुंबई-वाराणसी-मुंबई विमान सेवा गुरुवार से पूरी तरह बंद हो गई. मुंबई रूट पर संचालित अंतिम उड़ान के साथ ही वाराणसी एयरपोर्ट से स्पाइसजेट का संपूर्ण संचालन भी समाप्त हो गया. इससे अब वाराणसी से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक प्रमुख एयरलाइन का विकल्प कम हो गया है.428 यात्रियों ने अंतिम उड़ानों से की यात्राएयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, स्पाइसजेट की अंतिम मुंबई-वाराणसी उड़ान (एसजी-505) निर्धारित समय दोपहर 2:35 बजे के बजाय करीब 40 मिनट की देरी से मुंबई से रवाना हुई और शाम 5:30 बजे वाराणसी पहुंची. इस उड़ान में 213 यात्री सवार थे. वहीं वाराणसी से मुंबई जाने वाली अंतिम उड़ान (एसजी-506) शाम 5:25 बजे के बजाय 6:13 बजे रवाना हुई, जिसमें 215 यात्रियों ने सफर किया. दोनों दिशाओं में कुल 428 यात्रियों ने अंतिम उड़ानों से यात्रा की.स्पाइसजेट लंबे समय से वाराणसी और मुंबई के बीच नियमित उड़ान सेवा संचालित कर रही थी. इससे पहले एयरलाइन वाराणसी से दिल्ली समेत कई प्रमुख शहरों के लिए भी विमान सेवाएं देती थी, लेकिन समय के साथ विभिन्न रूटों पर परिचालन बंद होता गया. अब मुंबई रूट के बंद होने के बाद वाराणसी एयरपोर्ट से स्पाइसजेट की सभी सेवाएं समाप्त हो गई हैं.हालांकि मुंबई और अन्य शहरों के लिए इंडिगो, एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर जैसी अन्य एयरलाइंस की उड़ानें अभी भी उपलब्ध हैं, लेकिन स्पाइसजेट के हटने से यात्रियों के पास विकल्प पहले की तुलना में कम हो गए हैं.ALSO READ : नौवीं मोहर्रम पर परंपरा का अद्भुत नज़ारा, अंगारों पर दौड़े दूल्हा को देखने उमड़ा जनसैलाब...स्पाइसजेट की ओर से सेवा बंद करने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है. हालांकि विमानन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि बढ़ती परिचालन लागत, विमानों की सीमित उपलब्धता और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की बढ़ती कीमतें एयरलाइंस के रूट संचालन को प्रभावित कर रही हैं. यही कारण है कि पिछले कुछ समय में कई एयरलाइंस ने भी अपने कुछ रूटों पर सेवाएं बंद की हैं.
नौवीं मोहर्रम पर परंपरा का अद्भुत नज़ारा, अंगारों पर दौड़े दूल्हा को देखने उमड़ा जनसैलाब...
नौवीं मोहर्रम पर परंपरा का अद्भुत नज़ारा, अंगारों पर दौड़े दूल्हा को देखने उमड़ा जनसैलाब...
वाराणसी : नौवीं मोहर्रम की रात वाराणसी में परंपरा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला. शिवाला इमामबाड़े से निकला पारंपरिक "दूल्हा" का जुलूस हजारों अकीदतमंदों और दर्शकों की मौजूदगी में शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरा. इस दौरान सबसे आकर्षण का केंद्र वह पल रहा, जब परंपरा के अनुसार दूल्हा जलते अंगारों पर दौड़ा. यह दृश्य देखने के लिए सड़क के दोनों ओर भारी संख्या में लोग पहले से ही जमा थे.जुलूस की शुरुआत शिवाला घाट पर पारंपरिक गंगा स्नान के बाद हुई. इसके बाद धार्मिक रस्में पूरी कर दूल्हे को विशेष रूप से सजाए गए स्वरूप में बाहर लाया गया. रात बढ़ने के साथ जुलूस शिवाला से विभिन्न इलाकों से गुजरता हुआ इमामबाड़े तक पहुंचा. पूरे रास्ते अकीदतमंद या हुसैन के नारों के साथ मातम करते हुए आगे बढ़ते रहे, जबकि छतों, बालकनियों और खिड़कियों से लोगों ने इस अनूठी परंपरा को देखा.अंगारों पर दौड़ने की रस्म के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे. प्रशासन और पुलिस की टीमें पूरे मार्ग पर तैनात रहीं ताकि जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित रही.ALSO READ :बीएचयू के चिकित्‍सकों की बड़ी उपलब्धि, पहले आयुर्वेदिक N-of-1 क्लिनिकल ट्रायल से डिमेंशिया उपचार पर नई उम्मीद...मोहर्रम की यह परंपरा वाराणसी की गंगा-जमुनी तहजीब और सांस्कृतिक विरासत की अनूठी मिसाल मानी जाती है. हर साल देश-विदेश से लोग इस आयोजन को देखने पहुंचते हैं. इस बार भी हजारों लोगों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी लोगों की आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है.
बीएचयू के चिकित्‍सकों की बड़ी उपलब्धि, पहले आयुर्वेदिक N-of-1 क्लिनिकल ट्रायल से डिमेंशिया उपचार पर नई उम्मीद...
बीएचयू के चिकित्‍सकों की बड़ी उपलब्धि, पहले आयुर्वेदिक N-of-1 क्लिनिकल ट्रायल से डिमेंशिया उपचार पर नई उम्मीद...
वाराणसी : बीएचयू के चिकित्सक वैज्ञानिकों ने आयुर्वेद के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने विश्व का पहला प्रकाशित आयुर्वेदिक N-of-1 क्लिनिकल ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया है. यह अध्ययन डिमेंशिया की शुरुआती अवस्था माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट (MCI) से पीड़ित एक मरीज पर किया गया.N-of-1 क्लिनिकल ट्रायल एक ऐसी वैज्ञानिक पद्धति है, जिसमें किसी दवा या उपचार के प्रभाव का परीक्षण केवल एक मरीज पर किया जाता है. इसमें मरीज स्वयं ही अपना नियंत्रण (कंट्रोल) होता है और अलग-अलग समय पर उपचार के प्रभाव का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है. आयुर्वेद जैसी व्यक्ति केंद्रित चिकित्सा पद्धति के मूल्यांकन के लिए इसे उपयोगी माना जा रहा है.करीब 14 महीनों तक चले इस अध्ययन में आयुर्वेद की पारंपरिक औषधि 'कल्याणक घृत' का मूल्यांकन किया गया. बेयसियन सांख्यिकीय विश्लेषण के आधार पर मरीज की स्मृति, सोचने-समझने की क्षमता, दैनिक कार्य करने की क्षमता और अवसाद के लक्षणों में सुधार के संकेत मिले. शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह अध्ययन केवल एक मरीज पर आधारित है, इसलिए इसे सभी मरीजों पर समान रूप से लागू नहीं माना जा सकता. उन्होंने यह भी सलाह दी कि किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन केवल प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख और परामर्श में ही किया जाना चाहिए.शोध के अनुसार, कल्याणक घृत आयुर्वेद का एक बहु-औषधीय योग है, जिसमें हरड़, आंवला, बहेड़ा, हल्दी, जटामांसी, देवदार, चंदन सहित कई औषधीय द्रव्यों का उपयोग किया जाता है. आयुर्वेद में इसे स्मृति, बुद्धि और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है.यह अध्ययन बीएचयू के आयुर्वेद, चिकित्सा एवं विज्ञान संकायों के विशेषज्ञों के संयुक्त सहयोग से पूरा किया गया. शोध हाल ही में जर्नल ऑफ एथ्नोफार्माकोलॉजी में प्रकाशित हुआ है.ALSO READ : वाराणसी में सिगरा और कैंट स्‍टेशन से भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद, तीन गिरफ्तार...शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में यदि ऐसे और N-of-1 क्लिनिकल ट्रायल किए जाते हैं, तो आयुर्वेदिक उपचारों के वैज्ञानिक प्रमाण और अधिक मजबूत हो सकेंगे तथा व्यक्तिकेंद्रित चिकित्सा पद्धति को वैज्ञानिक आधार मिलेगा.