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स्वतंत्रता संग्राम में बनारस का बौद्धिक योगदान, तिरंगी बर्फी बनी देशभक्ति की मीठी पहचान

स्वतंत्रता संग्राम में बनारस का बौद्धिक योगदान, तिरंगी बर्फी बनी देशभक्ति की मीठी पहचान
Aug 15, 2025, 07:59 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: काशी हमेशा से धर्म, अध्यात्म और ज्ञान का केंद्र रही है.लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह शहर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी एक अहम भूमिका निभा चुका है. यहाx के मंदिरों, घाटों, गलियों और चौराहों से लेकर विश्वविद्यालय की कक्षाओं और पान की दुकानों तक , हर जगह आज़ादी की गूंज सुनाई देती थी.


जहां हर गली थी आज़ादी की चौपाल


बीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के प्रांगण, चौक और मदनपुरा की गलियाँ, कटरा का इलाका, और पान की दुकानों पर देश की आज़ादी पर चर्चा होना आम बात थी. लोग एक साथ बैठकर अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ रणनीतियाँ बनाते थे. ये बैठकें कभी खुलेआम तो कभी गुपचुप तरीके से होती थीं, ताकि अंग्रेजी पुलिस को भनक न लगे. इस शहर के कवि, लेखक, छात्र और क्रांतिकारी एक साथ मिलकर आज़ादी के विचार को फैलाने में जुटे रहते थे भाषण, कविताएँ, नाटक और अख़बार ,ये सब हथियार बन गए थे आज़ादी की लड़ाई में.


जब मिठाई बनी देशभक्ति का प्रतीक


इसी दौर में एक अनोखी और मीठी कहानी भी जन्मी .“तिरंगी बर्फी” की. 1920 के दशक में चौक इलाके की मशहूर “लाला बद्री प्रसाद हलवाई” की दुकान के मालिक गहरी देशभक्ति से भरे हुए थे. उन्होंने सोचा कि क्यों न मिठाई के ज़रिये भी लोगों के दिलों में आज़ादी का जज्बा जगाया जाए. लाला बद्री प्रसाद ने एक नई बर्फी तैयार की, जिसमें तीन परतें थीं . सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफ़ेद और सबसे नीचे हरा रंग ये रंग उस समय के स्वतंत्रता आंदोलन में इस्तेमाल होने वाले झंडे से लिए गए थे, जो आगे चलकर हमारे राष्ट्रीय ध्वज की प्रेरणा बना.ये तिरंगी बर्फी सिर्फ खाने की चीज़ नहीं थी, बल्कि एक मौन संदेश थी , “हम एक हैं और हमें आज़ाद होना है.” इसे देखकर लोगों के दिल में गर्व और जोश भर जाता था. मिठाई खरीदने के बहाने लोग क्रांतिकारियों से मिलते, बातें करते और आंदोलन की योजनाएं साझा करते थे.

अंग्रेज़ी हुकूमत की बेचैनी


जब अंग्रेजी प्रशासन को पता चला कि एक मिठाई लोगों में देशभक्ति का भाव जगा रही है, तो उन्हें चिंता होने लगी. उन्होंने दुकानदार को चेतावनी दी और इस मिठाई को बनाने पर रोक लगाने की कोशिश की. लेकिन काशी के लोग डरने वाले नहीं थे. कई हलवाई गुपचुप तरीके से तिरंगी बर्फी बनाते और अपने ग्राहकों को देते रहे.ये एक तरह से ‘मीठा आंदोलन’ था, जिसमें मिठास के साथ-साथ विरोध की चुप्पी भी थी.अंग्रेज चाहकर भी इस छोटे लेकिन असरदार कदम को पूरी तरह रोक नहीं पाए.


बनारस का बौद्धिक योगदान


जहाँ एक तरफ दिल्ली और बंबई में बड़े राजनीतिक आंदोलन हो रहे थे, वहीं काशी में बौद्धिक मोर्चा मजबूत किया जा रहा था. पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे नेता, भगत सिंह के साथी क्रांतिकारी और कई जाने-माने कवि-लेखक बनारस की बैठकों में शामिल होते थे .काशी से निकलने वाले अख़बार और पत्रिकाएँ आज़ादी के विचार को पूरे देश में फैलाते थे.विश्वविद्यालयों और साहित्यिक मंचों पर होने वाली बहसों ने नौजवानों को स्वतंत्रता आंदोलन की ओर प्रेरित किया.


75 साल बाद भी ज़िंदा है मिठास


आजादी के 75 साल बाद भी, बनारस के चौक और गोदौलिया के कुछ पुराने हलवाई इस परंपरा को ज़िंदा रखे हुए हैं. हालांकि अब तिरंगी बर्फी को सीधा राजनीतिक प्रतीक मानकर नहीं बेचा जाता, बल्कि इसे रंग-बिरंगे स्वाद के रूप में पेश किया जाता है. फिर भी, बुजुर्ग ग्राहकों का कहना है कि जब भी वे इस बर्फी का स्वाद लेते हैं, उन्हें आज़ादी के उस दौर की याद आ जाती है, जब हर निवाले में उम्मीद, एकता और संघर्ष की मिठास घुली होती थी.


एक मिठाई, जो बनी इतिहास का हिस्सा


तिरंगी बर्फी सिर्फ एक मिठाई नहीं थी यह उस दौर का सबूत थी कि आज़ादी की लड़ाई सिर्फ हथियारों और भाषणों से नहीं, बल्कि कला, साहित्य, भोजन और हर रोज़मर्रा की चीज़ से भी लड़ी गई थी. बनारस ने यह दिखा दिया था कि बौद्धिकता और रचनात्मकता के ज़रिये भी साम्राज्यवादी ताकतों को चुनौती दी जा सकती है.


आज जब हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, तो शायद हमें इस बात को भी याद करना चाहिए कि हमारे पूर्वजों ने सिर्फ रणभूमि पर ही नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में स्वतंत्रता का परचम लहराया था . चाहे वह विश्वविद्यालय का व्याख्यान हो, अख़बार का लेख हो या फिर मिठाई की दुकान की एक तिरंगी बर्फी.

सारनाथ को वैश्विक सम्मान, बुद्ध की करुणा का संदेश अब और बुलंद: प्रो. वांगछुग दोर्जे नेगी
सारनाथ को वैश्विक सम्मान, बुद्ध की करुणा का संदेश अब और बुलंद: प्रो. वांगछुग दोर्जे नेगी
वाराणसी: केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान (सीआईएचटीएस), सारनाथ के कुलपति प्रो. वांगछुग दोर्जे नेगी ने सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने को भारत की आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी ऐतिहासिक स्थल को मिला सम्मान नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और मानव कल्याण के संदेश को पूरी दुनिया द्वारा स्वीकार किए जाने का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि धम्मचक्कप्पवत्तन दिवस के 2605वें आयोजन से ठीक पहले मिली यह उपलब्धि सारनाथ की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता को नई ऊंचाई प्रदान करती है। यही वह पावन स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश देकर धर्मचक्र का प्रवर्तन किया था। आज भी यह स्थान विश्वभर के बौद्ध श्रद्धालुओं, शोधार्थियों और पर्यटकों के लिए प्रेरणा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।प्रो. नेगी ने कहा कि भारत की पहचान केवल अपनी प्राचीन सभ्यता से नहीं, बल्कि उन सार्वभौमिक मूल्यों से है जिन्हें भगवान बुद्ध ने मानवता के सामने रखा। सत्य, अहिंसा, करुणा और सह-अस्तित्व का उनका संदेश वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है।ALSO READ : शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को देते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।कुलपति ने देशवासियों और विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सारनाथ अब केवल इतिहास का साक्षी नहीं, बल्कि विश्व शांति और मानवता के साझा भविष्य का भी प्रेरणा-स्थल बनकर उभरेगा। उन्होंने अंत में कामना की कि भगवान बुद्ध का करुणा और मैत्री का संदेश संपूर्ण विश्व में सद्भाव, शांति और मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता रहे।
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.
वाराणसी: मंडुआडीह थाना पुलिस ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को शनिवार तड़के बरेका (बीएलडब्ल्यू) आवासीय परिसर से गिरफ्तार किया गया।पुलिस के अनुसार, लहरतारा निवासी एक महिला की तहरीर पर 24 जुलाई को आरोपी किशन कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69, 115(2), 352 और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज के साथ जान से मारने की धमकी दी।मामले की विवेचना उपनिरीक्षक प्रवीण सचान कर रहे हैं। पुलिस टीम ने 25 जुलाई की रात करीब 12:25 बजे आरोपी किशन कुमार (30), निवासी लहरतारा, को बीएलडब्ल्यू आवासीय परिसर से गिरफ्तार कर लिया।ALSO READ : गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजापूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि युवती से उसकी मित्रता थी और दोनों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे। उसने यह भी स्वीकार किया कि मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद वह वाराणसी छोड़कर जाने की तैयारी में था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक प्रवीण सचान, उपनिरीक्षक विवेक यादव, फैंटम-48 के कांस्टेबल अमित कुमार तिवारी तथा कांस्टेबल संदीप शाह शामिल रहे। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
गुरु पूर्णिमा पर नहीं लगेगा जाम  पड़ाव आश्रम में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था का एडीसीपी ने लिया जायजा
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वाराणसी: गुरु पूर्णिमा पर्व पर पड़ाव स्थित श्री सर्वेश्वरी समूह के अवधूत भगवान राम आश्रम में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। 28 और 29 जुलाई को होने वाले आयोजन के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए एडीसीपी ट्रैफिक अंशुमान मिश्र ने शनिवार को आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान एडीसीपी ने यातायात प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, बैरिकेडिंग, श्रद्धालुओं के प्रवेश एवं निकास मार्ग सहित अन्य व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या जाम की स्थिति उत्पन्न न हो।ALSO READ : काशी विद्यापीठ में 'दहेज मुक्त भारत' विषयक भाषण प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने लिया दहेज न लेने-देने का संकल्प.पुलिस प्रशासन ने गुरु पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए विशेष ट्रैफिक एवं पार्किंग प्लान तैयार किया है। इसके तहत प्रमुख मार्गों पर यातायात का सुचारु संचालन, पार्किंग स्थलों का निर्धारण तथा आवश्यक स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जिससे गुरु पूर्णिमा का आयोजन शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।