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ट्रंप के टैरिफ फैसले से तंग हुआ चीन, भारत में लेने लगा दिलचस्पी

ट्रंप के टैरिफ फैसले से तंग हुआ चीन, भारत में लेने लगा दिलचस्पी
Aug 16, 2025, 09:30 AM
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Posted By Preeti Kumari

Trump Tariff: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका की सत्ता क्या संभालने लगे विदेश नीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है. जी हां, डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 50% तक टैरिफ लगाने की धमकी दे बैठे है. उनके इन्हीं फैसलों के चलते भारत और अमेरिका के रिश्तों के बीच दरार आती नजर आ रही हैं. जिसका नतीजा हर किसी के सामने है, भारत की नजदीकिया अब ब्रिक्स देशों से लेकर चीन के करीब आती नजर आ रही हैं.



एक समय था जब 2020 में गलवान घाटी की झड़प के चलते इन दोनों देशों के रिश्ते में एक बड़ी खटास देखने को मिली थी, मगर अब अमेरिका के एक्शन से भारत भी ट्रंप को ये जताने लगा है कि सिर्फ तुम ही तीस मार खां नहीं हो, तुमसे बड़ा भी कोई है और वो है भारत देश, जो अपने फायदे के लिए बनी बनाई दोस्ती में दगेबाजी करना नहीं जानता हैं.


पीएम मोदी जल्द करेंगे चीनी दौरा


भारत और चीन के इस करीबी सफर को देखते हुए ऐसा माना जा रहा है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर चीन के साथ सीधी उड़ाने भरने को तैयार हो चुके हैं. हालांकि, पीएम मोदी का ये कदम डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बढ़ाये जाने वाले टैरिफ फैसले के बाद से उठाया गया है, जिसे देख अमेरिका तिलमिला उठा है. वहीं दूसरी ये कदम भारत औऱ चीन के बीच बिगड़ते रिश्तों को सुधारने की दिशा में मजबूती देगा. इन सभी के बीच ऐसा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन यानी (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन जाने वाले हैं. अगर सच में ऐसा होता है, तो यह सात साल में भारत की पहली चीन यात्रा होगी, जहां पहुंचक पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात भी करेंगे.



भारत और चीनी के बिगड़ते रिश्ते फिर बनेंगे


दरअसल, चीन से देश-विदेश में फैलने वाली कोरोना महामारी के दौरान भारत ने एक बड़ा एक्शन लेते हुए चीन के साथ सीधी उड़ानें बंद कर दी थीं, दूजा ये कि उसी बीच में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, इसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे, जिससे भारत आगबबूला हो उठा था, इसी मसले के बाद से दोनों देशों के यात्रियों को मजबूरन हांगकांग या सिंगापुर जैसे देशों से होकर अपनी यात्रा करनी पड़ती थी. जो काफी दिनों तक चर्चा में रही थी. लेकिन अब भारत सरकार ने इस मसले को बेहतर तरीके से सुधारने के लिए भारतीय एयरलाइंस को चीन के लिए फिर से उड़ानें शुरू करने की बात कही है.



चीनी राजदूत ने ट्रंप की उड़ाई खिल्ली


जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों ने भारत को यह सोचने पर इस हद तक मजबूर कर दिया है कि उसे अपनी ही "रणनीतिक स्वायत्तता" और "रणनीतिक स्वतंत्रता" अब बनाए रखनी होगी. जिसके लिए वो सक्षम भी है. वॉशिंगटन हमेशा से भारत को चीन के खिलाफ एक मजबूत साथी मानता रहा है, लेकिन इस बीच भारत के खिलाफ ऐसे फैसले लेकर ट्रंप ने पीएम मोदी और चीन को एक साझा मंच पर एक साथ खड़ा कर दिया है.



शायद अमेरिका के इसी रवैये को देखते हुए चीन के राजदूत जूफी होंग ने ट्रंप के टैरिफ को "धमकी" बताते हुए भारत को नैतिक समर्थन तक दे बैठा है. जिस पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने एक बड़ा बयान देते हुए ये तक कह दिया कि, ट्रंप द्वारा लिया गया ये टैरिफ फैसला उल्टा कही उन पर ही भारी न पड़ जाए. क्योंकि ट्रंप का मकसद रूस को नुकसान पहुंचाना है, ऐसे में कहीं उनका ये कदम भारत को रूस और चीन के बेहद करीब न ले जाएं.


चीन भी ले रहा भारत में दिलचस्पी


बता दें, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने बात इसलिए कही क्योंकि, सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि चीन भी भारत से अपने संबंधों में सुधार के संकेत देने की कोशिशों में लगा हुआ है. हकीकत तो ये है कि ट्रंप के इस व्यापार युद्धों से चीन भी परेशान हो चुका है जिससे निपटने के लिए वो भारत के साथ आना चाहता है, जिसके लिए उनसे हाल ही में भारत को यूरिया की शिपमेंट पर लगी पाबंदियों में ढील भी दी है


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गैस संकट को लेकर उठने वाले सवालों पर मंदिर प्रशासन ने लगाया विराम, कही ये बात
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वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा संचालित अन्नक्षेत्र में कार्यरत एक कर्मचारी रवि द्वारा मीडिया के समक्ष एलपीजी संकट को लेकर जारी बयान पर मचे रार के बीच मंद‍िर प्रशासन सामने आया है. मंद‍िर प्रशासन द्वारा स्‍पष्‍ट किया गया क‍ि रवि केवल हमारे संगठन में एक सामान्य कार्यकर्ता है. उनका काशी विश्वनाथ मंदिर अन्नक्षेत्र की ओर से कोई वेतन संबंध, आधिकारिक दायित्व या अधिकृत प्रतिनिधित्व नहीं है.मीडिया से बातचीत के दौरान रवि ने कहा था कि एलपीजी की कमी के कारण अन्नक्षेत्र में समस्या उत्पन्न हो रही है और भक्तों के लिए भोजन की मात्रा कम की जा रही है. यह स्पष्ट रूप से बताया जाता है कि इस प्रकार का कोई भी कथन न तो उन्हें देने का अधिकार था और न ही उन्हें वास्तविक स्थिति की सही जानकारी थी. उनका यह वक्तव्य पूर्णतः असत्य और निराधार है. संभवतः उन्होंने यह बयान कैमरे के सामने बोलने के उत्साह या असावधानी में दिया है. रसोई व्यवस्था और अन्नक्षेत्र के संचालन के विषय में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पहले ही आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं.अन्नक्षेत्र की रसोई व्यवस्थाइस संदर्भ में, सभी मीडिया संस्थानों तथा जनसाधारण से विनम्र अनुरोध किया गया है कि किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के हास्यास्पद और असत्य वक्तव्यों के आधार पर अनावश्यक सनसनी या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न करें. काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्नक्षेत्र की रसोई व्यवस्था में कोई कमी नहीं है और भक्तों को भोजन की सेवा निरंतर जारी है. अन्नक्षेत्र में कार्यरत सभी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं.बताया गया क‍ि इस प्रकार की भ्रामक सूचनाओं से बचना आवश्यक है, ताकि भक्तों में कोई गलतफहमी न हो. काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का उद्देश्य हमेशा से ही भक्तों की सेवा करना रहा है और इस दिशा में सभी प्रयास किए जा रहे हैं. मंद‍िर प्रशासन की ओर से अनुरोध क‍िया गया है कि इस प्रकार के असत्य बयानों को गंभीरता से न लें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही ध्यान दें.यह भी पढ़ें: नगर निगम ने निजी पार्किंग संचालकों से मांगा ब्यौरा, ई-रिक्शा के लिए बनेंगे 'पिक एंड ड्रॉप प्वांइटकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से सभी भक्तों को आश्वस्त किया जाता है कि अन्नक्षेत्र में भोजन की सेवा में कोई कमी नहीं आएगी और सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चल रही हैं. यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचना चाहिए और सभी को संयमित रहना चाहिए. मंदिर न्यास ने अपने अन्नक्षेत्र की स्थिति को स्पष्ट करते हुए वर्तमान एलपीजी संकट को खार‍िज क‍िया है.
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वाराणसी: शहर को जाम के जंजाल से मुक्त कराने के लिए नगर निगम पार्किंग प्रबंधन को व्यवस्थित करने में जुटा हुआ है. इस क्रम में 12 मार्च गुरुवार को स्मार्ट सिटी बैठक सभागार में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल की अध्यक्षता में पार्किंग प्रबंधन समिति की अहम बैठक हुई. बैठक में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए निजी और सार्वजनिक पार्किंग संचालकों को अपनी कार्यशैली में पारदर्शिता लाने का निर्देश दिया गया. इसके लिए निगम ने निजी पार्किंग संचालकों से एक सप्ताह के भीतर अपने यहां पार्क होने वाले वाहनों की औसत संख्या, उपलब्ध खाली स्पेस और संचालन पर होने वाले खर्च का विस्तृत विवरण तलब किया है.दरअसल, पार्किंग शुल्क को लेकर लगातार आपत्तियां मिल रही थीं. इन आपत्तियों के तार्किक निस्तारण के लिए निगम ने यह डेटा मांगा है ताकि शुल्क का निर्धारण सही ढंग से किया जा सके. वहीं शहर के प्रमुख चौराहों पर लगने वाले जाम को देखते हुए निगम ने पिक एंड ड्रॉप व्यवस्था पर बल दिया है. नगर आयुक्त द्वारा ऑटो और ई-रिक्शा के लिए ऐसे स्थल चिह्नित करने के सुझाव मांगे गए हैं जहां चालक सिर्फ सवारी उतारेंगे और तुरंत वहां से निकल जाएंगे. इन स्थलों पर ऑटो खड़ा करने की सख्त मनाही होगी.यह भी पढ़ें: मजबूत इच्छाशक्ति जीवन की किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम- प्रो. मंगला कपूरइस नई व्यवस्था पर विचार करने के लिए ऑटो यूनियन के प्रतिनिधियों ने निगम से 15 दिन का समय मांगा है. ​बैठक में मुख्य रूप से सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव, निजी पार्किंग संचालक, सार्वजनिक पार्किंग के ठेकेदार और ऑटो यूनियन के पदाधिकारी शामिल रहे. नगर आयुक्त ने दो-टूक कहा कि शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए सभी पक्षों का सहयोग अनिवार्य है.