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दालमंडी कायाकल्प योजनाः शत्रु संपत्ति और मुआवजे का पेंच, बनी सबसे बड़ी चुनौती

दालमंडी कायाकल्प योजनाः  शत्रु संपत्ति और मुआवजे का पेंच, बनी सबसे बड़ी चुनौती
Aug 20, 2025, 06:52 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: काशी विश्वनाथ धाम तक श्रद्धालुओं की पहुंच को आसान बनाने और यातायात को सुगम करने के लिए सरकार ने वाराणसी के ऐतिहासिक दालमंडी इलाके के कायाकल्प की बड़ी योजना को मंजूरी दे दी है. इस परियोजना के तहत लगभग 215 करोड़ रुपये की लागत से 650 मीटर लंबी सड़क को 17.5 मीटर चौड़ा किया जाएगा. यह नई सड़क चौक थाना से होकर सीधे विश्वनाथ धाम तक जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी राहत मिलने की उम्मीद है.


184 मकानों का अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती


इस महत्वाकांक्षी परियोजना के रास्ते में कुल 184 मकान आ रहे हैं, जिन्हें अधिग्रहित कर तोड़ा जाएगा. दूसरी ओर मकान मालिकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया प्रशासन के लिए किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं है. राजस्व विभाग, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम ने सर्वे में पाया कि इन संपत्तियों के मालिकाना हक के कागजात स्पष्ट नहीं हैं. कई जगह जमीन ‘आबादी’ के रूप में दर्ज है. कुछ संपत्तियां एनजेड (गैर-जमीनदारी उन्मूलन) श्रेणी में आती हैं. वहीं, कुछ ही संपत्तियों पर मालिकाना हक का स्पष्ट रिकॉर्ड मौजूद है .इन जटिलताओं के चलते प्रशासन यह तय करने में उलझा है कि असली मुआवजे का हकदार कौन होगा.

‘शत्रु संपत्ति’ ने बढ़ाई कानूनी उलझन


इस योजना में सबसे पेचीदा मसला है उन पांच मकानों का, जो नगर निगम के रिकॉर्ड में ‘शत्रु संपत्ति’ के रूप में दर्ज हैं. शत्रु संपत्ति वे संपत्तियां होती हैं जो भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद पाकिस्तान गए लोगों की थीं और बाद में सरकार के अधिग्रहण में आ गईं.

अब सवाल यह है कि इन मकानों पर वर्षों से रह रहे लोगों को मुआवजा किस आधार पर और किस हद तक दिया जाए. यह कानूनी समस्या परियोजना की रफ्तार धीमी कर सकती है. फिलहाल पीडब्ल्यूडी ने इस पर अंतिम निर्णय के लिए संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी है.


बरसात बाद शुरू होगी मुआवजा और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई


शासन ने सड़क निर्माण, नाली व सीवर शिफ्टिंग, बिजली लाइनों के स्थानांतरण और मकानों के मुआवजे के लिए 215 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है. टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है. अधिकारियों के अनुसार मानसून के बाद मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू होगी और उसके बाद अधिगृहित मकानों का ध्वस्तीकरण किया जाएगा.



परियोजना से होने वाले लाभ


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं. सड़क चौड़ी होने से —


1 . दालमंडी क्षेत्र का जाम खत्म होगा.

2 . मैदागिन, गोदौलिया और चौक जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में यातायात का दबाव कम होगा.

3 . श्रद्धालुओं को विश्वनाथ धाम तक पहुंचने में काफी आसानी होगी.

4 . वाराणसी के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और इसे विश्वस्तरीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी.


प्रशासन की संवेदनशील परीक्षा


हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना के साथ प्रशासन के सामने सबसे संवेदनशील मुद्दा है 184 परिवारों का उचित मुआवजा और पुनर्वास है . यदि इसे सही तरीके से और पारदर्शिता के साथ नहीं निपटाया गया, तो विवाद और असंतोष की स्थिति बन सकती है.

गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
वाराणसी : गुरु पूर्णिमा से पूर्व काशी के श्रद्धालुओं ने सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर शंकराचार्य ने काशीवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।बताया गया कि इस वर्ष शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा से पहले ही उनकी चरण पादुका के पूजन की अनुमति मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय 'गविष्ठी यात्रा' पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया। अपने संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं और शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास उनमें माना गया है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौरक्षा का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए।शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें गौरक्षा आंदोलन और शंकराचार्य की गौरक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।ALSO READ: बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, स्वामी निधिरव्यानंद, गिरीश चंद्र तिवारी, अविनाश मिश्रा, रवि त्रिवेदी, रमेश उपाध्याय, अभय शंकर तिवारी, विमल तिवारी, हजारी कीर्ति शुक्ला, मनीष पाण्डेय, मयंक दोषी, शाश्वत मिश्रा, लता पाण्डेय, मंजरी पाण्डेय, चांदनी चौबे, नीलम दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।