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देशभर में दशहरा की धूम, जाने इस तरह आया था रावण की नाभि में अमृत

देशभर में दशहरा की धूम, जाने इस तरह आया था रावण की नाभि में अमृत
Oct 02, 2025, 08:39 AM
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Posted By Preeti Kumari

Dussehra News: देशभर में आज दशहरा का त्योहार मनाया जा रहा है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है. रावण दहन करने का तात्पर्य है कि बुराई का अंत हो जाना. देशभर में आज रावण का पुतला फूंका जाएगा. कहीं पर 221 फीट के रावण का दहन होगा तो कहीं 80 से 100 फीट तक के पुतले फूंके जाएंगे. रावण दहन के कार्यक्रम की बात करे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली की श्री रामलीला कमेटी इंद्रप्रस्थ में होने वाले रावण दहन कार्यक्रम में शामिल होंगे. लवकुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि महाबली रावण का पुतला 100 फीट, कुंभकरण का 90 फीट तथा मेघनाथ के पुतले की ऊंचाई 80 फीट की है.


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क्या है पुतलों का आकर्षण


यहां रावण के साथ-साथ बाकी पुतले भी आर्कषक का केंद्र बन बैठे हैं. इस पुतले की खासियत इतनी अद्भुत है कि जब प्रभु श्री राम रावण के पुतले पर तीर चलाएंगे तो नाभी से अमृत गिरेगा, आंखें मटकेंगी, खून के आंसू टपेंगे, हाथ में तलवारें घूमती नजर आएंगी, गले की मालाएं रंग- बिरंगी अलग अलग रंगों में नजर आएंगी, हे राम- हे राम का उदघोष करते हुए पुतले का दहन होगा...


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बिलासपुर में 101 फीट का बना रावण


बिलासपुर में साइंस कॉलेज मैदान में भव्य दशहरा उत्सव का आयोजन होने जा रहा है. मैदान में करीब 101 फीट का रावण तैयार किया गया है. इसके दहन और दशहरा उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू,अध्यक्षता बिलासपुर विधायक श्री अमर अग्रवाल करेंगे. वहीं अतिथि के रूप में विधायक धर्मजीत सिंह, अटल श्रीवास्तव और सुशांत शुक्ला उपस्थित रहेंगे. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि महापौर श्रीमती पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी है.


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रावण की नाभि में कैसे आया अमृत


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण की नाभि में अमृत ब्रह्माजी द्वारा प्रदान किया गया था. उन्होंने रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान में एक अमृत कुंड दिया था. यह उसकी नाभी में स्थापित किया गया था, ताकि वह लगभग अमर हो जाए, क्योंकि यह कुंड अग्नि बाण से ही सूख सकता था और केवल भगवान विष्णु ही उसका उपयोग कर सकते थे. रावण की नाभि में अमृत होने का श्रेय उसकी पत्नी मंदोदरी को जाता है, जिसने इसे अपने पति में स्थापित कराया. इसके बारे में रावण और मंदोदरी के अलावा एक ही शख्स जानता था और वह था विभीषण, जो उनका सबसे छोटा भाई था.


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मंदोदरी ने रावण को अमर बनाने का उठाया था बीड़ा


धर्म ग्रंथों के अनुसार, बाली और रावण के बीच एक बार युद्ध हुआ. इसमें रावण को अंदरूनी चोट लगी, जिससे लंकापति रावण बहुत ज्यादा बीमार पड़ गया. इसके चलते उसकी पत्नी मंदोदरी बहुत चिंता में पड़ गई. उसने तय किया कि वह महाराज रावण को अमर बना कर ही रहूंगी. इसके लिए मंदोदरी अपने माता-पिता के पास पहुंची.


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वह मयदानव की बेटी थी. उसके पिता अद्भुत ताकतों के स्वामी थे. मां कई शक्तियों से परिपूर्ण थीं. अमृतकलश चंद्रलोक पर था. वहां मंदोदरी जा नहीं सकती थी, क्योंकि उसके पास वहां उड़कर जाने की शक्ति नहीं थी. उसके मां-पति ने ये शक्तियां उसे दीं. वह उड़कर चंद्रलोक गई. हालांकि वहां जाकर भी वहां के अमृतकलश कुंड से अमृत की कुछ बूंदें लाना भी आसान नहीं था.


अमृत को चुराना काफी मुश्किल


कोई इसे चुरा नहीं सकता था. मंदोदरी के पिता ने ही उसे स्वर्ग लोक में स्थापित किया था. चमत्कारिक और विद्युत शक्तियों द्वारा इस कलश को स्थापित किया गया था. कोई व्यक्ति इसके पास भी नहीं पहुंच सकता था. कलश के नीचे से बहुत सारी विषैली गैसें निकलती थीं. जिससे मृत्यु हो जाती थी. इसके चारों ओर गर्म लावा निकलता रहता था. इसलिए अमृत कलश को चुराना काफी असंभव था.


चंद्रलोक का एक नियम है कि, चन्द्र देव साल में एक बार अश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) के दिन इस अमृत कलश को वहां से निकालते हैं. तब धरती पर इसकी कुछ बूंदें गिराते हैं. मंदोदरी के सामने ये अच्छा मौका था. जिस दिन मंदोदरी चंद्रलोक गई, उसके दो दिन बाद ही पूर्णिमा थी. जैसे ही पूर्णिमा की रात चंद्र देव ने अमृत कलश वहां से बाहर निकाला, तभी रावण की पत्नी मंदोदरी मौका पाकर अमृत कलश चुराकर भागने लगी.


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देवताओं को इस बात का पता लगते ही उन्होंने मंदोदरी का पीछा किया. घबराई मंदोदरी ने अमृत की कुछ बूंदें एक अंगूठी में भरकर नीचे धरती की ओर छलांग लगी दी. पति को अमर करने के काम में उसने देवर विभीषण का सहारा लिया. हालांकि विभीषण ने पहले यही कहा कि चोरी के अमृत का इस्तेमाल कतई उचित नहीं है, लेकिन भाई को बचाने के लिए मजबूरी में वह तैयार हो गए.


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विभीषण ने खोला अमृत का राज


शरद पूर्णिमा के दिन इस अमृत की बूंद को रावण की नाभि में स्थापिक करने का फैसला किया गया. पहले इसके लिए अशोक वाटिका में रावण को बेहोश या अचेत किया गया. फिर विभीषण ने अमृत बूंदों को रावण की नाभि में स्थापित कर दिया, जिससे रावण अमर हो गया. विभीषण ही ऐसे शख्स थे, जिन्हें नाड़ी का ज्ञान था, वह उस समय के एकमात्र वैस्कुलर सर्जन भी थे. इसी अमृत के बारे में विभीषण ने श्री राम को बताया. जिसकी मदद से श्री राम ने आग्नेय बाण से उसे सुखा दिया, जिसके कारण रावण की मृत्यु हो सकी थी.

पेट्रोलियम मंत्री ने कहा- भारत में LPG गैस की कमी नहीं...
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा- भारत में LPG गैस की कमी नहीं...
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के चलते देशभर में गैस सिलेंडर को लेकर काफी किल्लते देखने को मिल रही है. जी हां, एलपीजी गैस संकट पर लोकसभा में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक बड़ा बयान दिया और कहा भारत 40 देशों से क्रूड ऑयल ले रहा है, ऐसे में गैस सिलेंडर पर पैनिक होने की कोई बात नहीं है. इतना ही नहीं हरदीप सिंह पुरी ने वेस्ट एशिया संकट पर ये भी कहा कि एनर्जी के इतिहास में दुनिया ने ऐसा दिन पहले कभी नहीं देखा था, होर्मुज स्ट्रेट को इतिहास में पहली बार कमर्शियल शिपिंग के लिए बंद कर दिया गया है. संघर्ष पैदा करने में कोई भी भूमिका नहीं है, इसलिए भारत को किसी भी हाल में इसके सभी नतीजों से निपटना ही होगा.यह भी पढ़ें: गैस संकट को लेकर उठने वाले सवालों पर मंदिर प्रशासन ने लगाया विराम, कही ये बात"भारत की क्रूड ऑयल सप्लाई की स्थिति सुरक्षित"मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने बयानों में ये बताया कि, भारत की क्रूड ऑयल सप्लाई की स्थिति सुरक्षित है. पिछले पांच दिनों में, रिफाइनरी के निर्देशों के जरिए LPG का प्रोडक्शन 28% बढ़ा दिया गया है और असल में आगे की खरीद चल रही है. इस संकट में मोदी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि भारत के 33 करोड़ परिवारों, खासकर गरीबों और जरूरतमंदों की रसोई में किसी भी तरह के संकट से जूझना ना पड़े. घरेलू सप्लाई पूरी तरह से सुरक्षित है और डिलीवरी साइकिल में कोई बदलाव नहीं हुआ है.हरदीप सिंह ने कहा- इंडस्ट्री के लिए बिजली का प्रोडक्शन सुरक्षितहरदीप सिंह पुरी ने कहा कि, बड़े LNG कार्गो लगभग रोज दूसरे सप्लाई रास्तों से आ रहे हैं. भारत के पास गैस प्रोडक्शन और सप्लाई के इतने इंतजाम हैं कि लंबे समय तक लड़ाई चलने पर भी यह स्थिति बनी रहेगी. हर घर और इंडस्ट्री के लिए बिजली का प्रोडक्शन पूरी तरह से सुरक्षित है. अब प्रोक्योरमेंट को एक्टिवली डायवर्सिफाई किया गया है और कार्गो को यूनाइटेड स्टेट्स, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से मंगाया जा रहा है.
गैस संकट को लेकर उठने वाले सवालों पर मंदिर प्रशासन ने लगाया विराम, कही ये बात
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वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा संचालित अन्नक्षेत्र में कार्यरत एक कर्मचारी रवि द्वारा मीडिया के समक्ष एलपीजी संकट को लेकर जारी बयान पर मचे रार के बीच मंद‍िर प्रशासन सामने आया है. मंद‍िर प्रशासन द्वारा स्‍पष्‍ट किया गया क‍ि रवि केवल हमारे संगठन में एक सामान्य कार्यकर्ता है. उनका काशी विश्वनाथ मंदिर अन्नक्षेत्र की ओर से कोई वेतन संबंध, आधिकारिक दायित्व या अधिकृत प्रतिनिधित्व नहीं है.मीडिया से बातचीत के दौरान रवि ने कहा था कि एलपीजी की कमी के कारण अन्नक्षेत्र में समस्या उत्पन्न हो रही है और भक्तों के लिए भोजन की मात्रा कम की जा रही है. यह स्पष्ट रूप से बताया जाता है कि इस प्रकार का कोई भी कथन न तो उन्हें देने का अधिकार था और न ही उन्हें वास्तविक स्थिति की सही जानकारी थी. उनका यह वक्तव्य पूर्णतः असत्य और निराधार है. संभवतः उन्होंने यह बयान कैमरे के सामने बोलने के उत्साह या असावधानी में दिया है. रसोई व्यवस्था और अन्नक्षेत्र के संचालन के विषय में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पहले ही आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं.अन्नक्षेत्र की रसोई व्यवस्थाइस संदर्भ में, सभी मीडिया संस्थानों तथा जनसाधारण से विनम्र अनुरोध किया गया है कि किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के हास्यास्पद और असत्य वक्तव्यों के आधार पर अनावश्यक सनसनी या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न करें. काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्नक्षेत्र की रसोई व्यवस्था में कोई कमी नहीं है और भक्तों को भोजन की सेवा निरंतर जारी है. अन्नक्षेत्र में कार्यरत सभी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं.बताया गया क‍ि इस प्रकार की भ्रामक सूचनाओं से बचना आवश्यक है, ताकि भक्तों में कोई गलतफहमी न हो. काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का उद्देश्य हमेशा से ही भक्तों की सेवा करना रहा है और इस दिशा में सभी प्रयास किए जा रहे हैं. मंद‍िर प्रशासन की ओर से अनुरोध क‍िया गया है कि इस प्रकार के असत्य बयानों को गंभीरता से न लें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही ध्यान दें.यह भी पढ़ें: नगर निगम ने निजी पार्किंग संचालकों से मांगा ब्यौरा, ई-रिक्शा के लिए बनेंगे 'पिक एंड ड्रॉप प्वांइटकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से सभी भक्तों को आश्वस्त किया जाता है कि अन्नक्षेत्र में भोजन की सेवा में कोई कमी नहीं आएगी और सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चल रही हैं. यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचना चाहिए और सभी को संयमित रहना चाहिए. मंदिर न्यास ने अपने अन्नक्षेत्र की स्थिति को स्पष्ट करते हुए वर्तमान एलपीजी संकट को खार‍िज क‍िया है.
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