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भारत के लाल ने बनाई रियुजेबल ऑटोमैटिक मिसाइल

भारत के लाल ने बनाई रियुजेबल ऑटोमैटिक मिसाइल
Nov 09, 2025, 01:36 PM
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Posted By Preeti Kumari

India's Lal has developed the reusable automatic missile RAM.


मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के रहने वाले 19 साल के युवा प्रखर विश्वकर्मा जो चर्चा का विषय बन बैठे है. इस चर्चा का कारण यह है कि उन्हें "मप्र के मिसाइल मैन" के नाम से जाना जाता है. क्योंकि, वे एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार कर रहे हैं. जिसके लिए प्रखर विश्वकर्मा ने एयरोएक्स स्पेस टेक्नोलॉजी की स्थापना की, साथ ही मिसाइल और ड्रोन जैसे तकनीकों में आगे बढ़ने के लिए वो दिन-रात मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. इसी कामयाबी ने उन्हें वैज्ञानिक का टैग दिया हैं, जिसे पाकर वो खुशी से झूम उठे हैं.


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कंधों पर वैज्ञानिक का टैग और आंखों में आसमान छूने के सपनों को लेकर प्रखर विश्वकर्मा एक युवा वैज्ञानिक हैं. जो कई मुसीबतों को झेलते हुए जी-जान लगाकर की अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए कोशिशों में लगे हुए हैं. उन्होंने अपने काम का जिक्र कर बताया कि, "प्रोजेक्ट RAM" उनका काम ही नहीं ये वो सपना है जिसमें देश की सेवा बसी हैं, जिसके लिए उन्होंने एक अनोखी रियूजेबल मिसाइल (RAM) विकसित की है, बड़े ही सिद्दत के साथ प्रखर ने रियूजेबल मिसाइल (RAM) तकनीकि पर काम किया हैं. इसी प्रोजेक्ट ने इन्हें वैज्ञानिक कहलाने की पहचान दी है.


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ये प्रोजेक्ट एक अत्याधुनिक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी खासियत यह है कि, जो हमला करने के बाद अपने लॉन्चिंग पॉइंट पर खुद ही वापस लौट आता है, इससे भी बड़ी बात तो यह है कि इसे दुबारा से उपयोग किया जा सकता है. यह तकनीक भारत के लिए काफी बेहतर होगा, क्योंकि कम लागत के साथ ये प्रोजेक्ट बार-बार हमला करने की क्षमता रखता हैं. जिससे रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त होने की काफी उम्मीद हैं.


नासा और इसरो से सम्मानित हुए प्रखर युवा


अब सवाल ये उठता है कि इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करने के बाद भी आखिर ऐसी क्या वजह है जिसके चलते मिसाइल मैन" प्रखर विश्वकर्मा अपना जीवन-त्यागने को तक तैयार हो चुके हैं! इन सभी के पीछे की वजह 'संदिग्ध तत्वों' को माना जा रहा है. उनके जीवन की बात करें तो अपने काम को लेकर 2020 में नासा और इसरो दोनों से ही वो सम्मान पा चुके है, आखिरकार ऐसे में प्रखर को किस बात की चिंता सताने लगी है. जिसके चलते वो अब पुरी तरह से निराश हो चुके हैं. अपनी आप-बीती को लेकर उनका कहना है कि कुछ संदिग्ध लोगों द्वारा वो काफी परेशान हो चुके है, जिससे उनका वैज्ञानिक सफर चकना-चूर होने के सफर पर आ चुका है.


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यहीं कारण है कि उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त किया और कहा कि, उनके सभी मिसाइल प्रोजेक्ट भारत सरकार को सौंप दिए जाएं ताकि उनका शोध देश के काम आ सके. क्योंकि, “मैं देश के लिए जीता रहा हूं, अगर ऐसे में मेरी प्रतिभा देश को काम आ जाए तो यही मेरी सच्ची श्रद्धांजलि होगी” हालांकि, अपने जीवन में इस मिसाइल के लिए आगे बहुत कुछ करना था, पर अफसोस कि सब कुछ अधूरा सा रह गया हैं. इसलिए मैं अपनी आखिरी इच्छा देश के सामने रख रहा हूं. अगर ये संभव नहीं हो पाया तो मैं अपने सभी पुरस्कारों और मिसाइल प्रोजेक्ट्स की फाइलों को वाराणसी में गंगा नदी में विसर्जित कर दूंगा.


भारत के भविष्य को बचाने का देश ने लिया जिम्मा


वैज्ञानिक जैसी कामयाबी हासिल करने वाले और भारत को गर्व महसूस कराने वाले प्रखर ने अपनी पीड़ा को भारत देश के सामने रखा हैं. प्रखर द्वारा बंया किया गया ये दर्द हर किसी के जहन में उथल-पुथल मचाने लगा है. आखिर ऐसी क्या वजह है जो उन्हें अपना जीवन बर्बाद करने को मजबूर कर दिया है. खास बात तो यह है कि वैज्ञानिक प्रखर के दुख-दर्द को महसूस कर देशभर में लोगों ने सोशल मीडिया पर ‘#SavePrakhar’ मुहिम शुरू कर दी है. वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और समाज के बुद्धिजीवियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि भारत के इस प्रतिभा को समय रहते बचाया जा सके. इस जनता का स्पष्ट संदेश है —“एक प्रखर नहीं, यह भारत का भविष्य है जिसे बचाना होगा.”


अंतरिक्ष प्रेमी बने प्रखर


प्रखर विश्वकर्मा के माता-पिता का नाम श्रीमती अरुण विश्वकर्मा (माता) और श्री रघुनंदन विश्वकर्मा (पिता) जो कि किराना दुकान चलाते है. उनकी बहन का नाम साक्षी विश्वकर्मा है. परिवार से मिली वैज्ञानिक सोच और देशभक्ति की प्रेरणा ने उन्हें "प्रोजेक्ट RAM" जैसे काम करने का हौसला दिया. प्रखर विश्वकर्मा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गवर्नमेंट मॉडल स्कूल पालेरा से की, यहां से उन्होंने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की है. हालांकि, वर्तमान में वे Bansal Institute of Technology से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक कर रहे हैं. अंतरिक्ष प्रेमी होने के नाते वे भारतीय अंतरिक्ष टीम के प्रणोदन विभाग में शोध करने की तैयारी में लगे हुए हैं.


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वे कहते हैं कि जैसे ही प्रशासन से सैन्य अड्डे पर मिसाइल परीक्षण की अनुमति मिलेगी, वे इसे जल्द से जल्द ही लॉन्च करेंगे. वे वर्तमान में इको-फ्रेंडली रॉकेट, आत्मघाती सैटेलाइट, खतरनाक सैटेलाइट और रिलॉन्च ऑटोमैटिक मिसाइल (प्रोजेक्ट RAM) पर काम कर रहे हैं. यह परियोजना बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के साथ सहयोग में चल रही है. प्रखर BHU के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को पेटेंट करवाने और देश की सेवा में लाने की योजना बना रहे हैं. यह नवाचार भारत के रक्षा क्षेत्र को नई दिशा देगा और प्रखर का उद्देश्य भारत को अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है. उनका लक्ष्य भारत को अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में मजबूती के साथ आगे बढ़ाना है.


प्रखर बने ISRO के अंतरिक्ष प्रशिक्षक


जानकारी के मुताबिक, प्रखर विश्वकर्मा को NASA और ISRO द्वारा Aditya L1 क्विज़ में भागीदारी के लिए प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया है. इतना ही नहीं, प्रखर चंद्रयान-3 के लॉन्चिंग टीम में शामिल भी हुए है. ये वहीं प्रखर है जिन्हें साल 2023 में जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय एग्ज़िबिशन में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया था, साथ ही उन्होंने नेहरू विज्ञान केंद्र (मुंबई), बिरला इंडस्ट्रियल म्यूजियम (कोलकाता), विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र और ISRO – स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (अहमदाबाद) में प्रेजेंटेशन समेत वर्कशॉप में भागीदारी निभाई है. युवा वैज्ञानिक के इसी प्रतिभा के कारण भारतदेश में 132वें ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें ISRO ने अपना अंतरिक्ष प्रशिक्षक बनाया है.


प्रखर बने प्रेरणादायक युवा वैज्ञानिक


वहीं, प्रखर जब सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण में शामिल हुए, तब उन्होंने वैज्ञानिकों से रॉकेट और इंजन की जानकारी लेते हुए लॉन्चिंग गैलरी से चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण देखा. उनकी इच्छा है कि, उनकी मिसाइल तकनीक को भारत सरकार, DRDO और ISRO जैसे संस्थानों का समर्थन मिले. ताकि, इसका प्रयोगात्मक विकास हो सके और यह भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाए रखे. इन्हीं खूबियों की वजह से प्रखर इस वर्तमान काल में और आने वाले पीढ़ीयों के लिए एक बड़े प्रेरणादायक युवा वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ मिसाइल इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष जैसे प्रोजेक्ट्स में हुनर दिखाया हैं.

नेपाल के चुनावी नतीजों ने केपी ओली की बढ़ाई बीपी,  बालेन शाह ने मारी बाजी
नेपाल के चुनावी नतीजों ने केपी ओली की बढ़ाई बीपी, बालेन शाह ने मारी बाजी
नेपाल में बीते गुरुवार को हुए राष्ट्रीय चुनाव के बाद से वोटों की गिनती आज सुबह से शुरू हो चुकी है. पिछले साल हुए Gen-Z हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद से यह देश में पहला आम चुनाव हुआ है. जो 77 सतहत्तर जिलों में 23 हजार केंद्रों पर मतदान हुआ, इसके आने वाले नतीजों पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई है. ये वहीं विरोध प्रदर्शन है जिसके चलते पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गठबंधन सरकार गिर गई थी. बता दें, नेपाल में हुए आम चुनावों में लगभग 60 प्रतिशत वोटिंग हुई है. चुनाव में पूर्व पीएम केपी शर्मी ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल यानि (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) सीपीएन (यूएमएल), शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस और पुष्प दहल प्रजंड की CPN (माओइस्ट सेंटर) के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला है. जहां बालेन शाह की पार्टी आरएसपी ने 69 उनहत्तर सीटों से ज्यादा की बढ़त बनाती नजर आ रही है. वहीं केपी शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन यूएमएल केवल 5 सीटों पर आगे चल रही है.बालेन शाह की सुनामी के आगे बिखरे ओलीवहीं, नेपाली कांग्रेस भी 5 सीटों पर ही अपनी बढ़त बनाए हुए है. तो वहीं, नेपाली कम्‍युनिस्‍ट पार्टी 3 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. केपी ओली खुद भी बालेन शाह की सुनामी के आगे पिछड़ते ही जा रहे हैं. काठमांडू के मेयर रह चुके पूर्व रैपर बालेंद्र शाह यानि (बालेन) करीब 6100 (इकसठ) सौ वोटों से ओली से आगे चल रहे हैं. बालेन की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी भी इस चुनावी मैदान में हुंकार भरती नजर आई हैं. युवाओं में बेहद लोकप्रिय बालेन नेपाल के पुराने दिग्गजों को कड़ी चुनौती दे रहे हैं.49 (उनचास) साल के गगन थापा भी प्रधानमंत्री बनने की रेस में हैं. वह नेपाली कांग्रेस में टूट के बाद देश की सबसे पुरानी पार्टी के नए प्रमुख हैं. आपको बता दें, बलेंद्र शाह यानि (बालेन शाह) नेपाल के एक प्रमुख युवा राजनेता, स्ट्रक्चरल इंजीनियर और पूर्व रैपर हैं, जिन्होंने मई 2022 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के 15वें मेयर के रूप में चुनाव जीतकर इतिहास रचा था. लेकिन इस साल जनवरी 2026 में मेयर पद से इस्तीफा देने के बाद से वह अब 2026 के आम चुनावों के लिए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानि(RSP) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चर्चा में हैं.यह भी पढ़े: इंग्लैंड के वेलिंगबोरो के मेयर की महापौर से शिष्टाचार भेंट, शहरी विकास पर हुई चर्चागजब की बात तो यह है कि, नेपाल में राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी बंपर जीत की ओर बढ़ रही है. Gen-Z के फेवरेट बालेंद्र शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री ओली को काफी पीछे छोड़ दिया है. कोसी, मदेश, बागमती, लुंबीनी लगभग सभी प्रांतों में राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी बढ़त बनाए हुए है. बता दें. मतगणना शुरू होने के 24 घंटे के भीतर सीधे 165 सीटों (एफपीटीपी) के परिणाम जारी करने का दावा किया है. नेपाल के आम चुनाव के शुरुआती रुझान सियासी समीकरण बदलने के संकेत दे रहे हैं। शुरुआती आंकड़ों में बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी पारंपरिक दलों को कड़ी चुनौती देती दिख रही है। करीब 60 फीसदी मतदान के बीच केपी शर्मा ओली और गगन थापा जैसे बड़े नेता भी चुनावी मैदान में हैं। इस चुनाव में भ्रष्टाचार और सिस्टम में बदलाव सबसे बड़े मुद्दों के तौर पर उभरकर सामने आए हैं
इंग्लैंड के वेलिंगबोरो के मेयर की महापौर से शिष्टाचार भेंट, शहरी विकास पर हुई चर्चा
इंग्लैंड के वेलिंगबोरो के मेयर की महापौर से शिष्टाचार भेंट, शहरी विकास पर हुई चर्चा
वाराणसी: इंग्लैंड केवेलिंगबोरो नगर के मेयर राज मिश्रा ने आज वाराणसी प्रवास के दौरान वाराणसी के महापौर अशोक कुमार तिवारी से उनके कक्ष में शिष्टाचार भेंट की. इस अवसर पर महापौर द्वारा उन्हें अंगवस्त्रम एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया. इस दौरान नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल सहित नगर निगम के पार्षदगण भी उपस्थित रहे। मुलाकात के दौरान दोनों जनप्रतिनिधियों के मध्य शहरी विकास, जनसुविधाओं के विस्तार तथा विभिन्न जनकल्याणकारी विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई.उल्लेखनीय है कि राज मिश्रा वर्तमान में इंग्लैंड के वेलिंगबोरो टाउन काउंसिल के मेयर हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद के निवासी हैं तथा 13 मई 2025 को वेलिंगबोरो टाउन काउंसिल के पाँचवें मेयर के रूप में निर्वाचित हुए. उनका कार्यकाल 13 मई 2025 से 13 मई 2026 तक है. वे यूनाइटेड किंगडम की प्रमुख राजनीतिक पार्टी Conservative Party से जुड़े हुए हैं.किसान परिवार में जन्मे श्री राज मिश्रा ने चंडीगढ़ से बी.टेक तथा लंदन से कंप्यूटर साइंस में एम.टेक की डिग्री प्राप्त की है. इसके अतिरिक्त उन्होंने Massachusetts Institute of Technology से डेटा साइंस में प्रमाणन भी हासिल किया है. राजनीति में आने से पूर्व वे सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लगभग 15 वर्षों तक कार्यरत रहे तथा यूके के रक्षा मंत्रालय एवं बैंकिंग सेक्टर में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.यह भी पढ़ें: अब चार रंगों के डस्टबिन से होगा कूड़ा निस्तारण, भवन स्वामियों को मिलेंगे चार प्रकार के बिन्सअपने वर्तमान कार्यकाल में उन्होंने स्थानीय चैरिटी Veterans Community Network तथा Louisa Gregory’s Hospice Campaign को सहयोग देने का संकल्प लिया है. इसके अतिरिक्त अक्टूबर 2025 में उन्होंने उत्तर प्रदेश में एआई डेवलपमेंट सॉल्यूशन प्रोजेक्ट के अंतर्गत लगभग 2500 करोड़ रुपये के संभावित निवेश की घोषणा भी की थी. इस अवसर पर उपस्थित पार्षदगण में सुरेश कुमार चौरसिया, सिंधु सोनकर, मदन दूबे, प्रवीण राय, सुरेश पटेल आदि जनप्रतिनिधियों ने दोनों नगरों के मध्य सहयोग एवं संवाद को भविष्य में और सुदृढ़ करने की आशा व्यक्त की. स्वागत जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने किया.
अब चार रंगों के डस्टबिन से होगा कूड़ा निस्तारण, भवन स्वामियों को मिलेंगे चार प्रकार के बिन्स
अब चार रंगों के डस्टबिन से होगा कूड़ा निस्तारण, भवन स्वामियों को मिलेंगे चार प्रकार के बिन्स
वाराणसी: नगर निगम स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैकिंग के लिए लगातार प्रयासरत है. हालांकि इसके लिए जनसहभागिता बेहद जरूरी है. इसे देखते हुए निगम अब प्रत्येक वार्ड में चार अलग-अलग श्रेणियों के डस्टबिन और जागरूकता स्टिकर वितरित करने का निर्णय लिया है ताकि शतप्रतिशत कूड़े का पृथ्थक्कीकरण (सोर्स सेग्रिगेशन) किया जा सके.स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम का लक्ष्य है कि 'सोर्स सेग्रिगेशन' यानी घर से ही कचरा अलग-अलग होकर निकले. इसके लिए जागरूकता स्टिकर घरों के बाहर लगाए जा रहे हैं. नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जो नागरिक इस नियम का पालन करेंगे, उन्हें प्रोत्साहित किया जाए और जो सहयोग नहीं कर रहे हैं, उन्हें स्वच्छता के नियमों का पाठ पढ़ाया जाए. इस क्रम में अपर नगर आयुक्त सविता यादव ने स्वास्थ्य विभाग से प्रत्येक वार्ड के लिए चार रंगों के कूड़ेदान (बिन्स) जारी देने का निर्देश दिया है. उन्होंने अभियान के पहले चरण में प्रत्येक वार्ड के कम से कम 30 ऐसे भवन स्वामियों को चिन्हित करने जो शत-प्रतिशत कूड़ा पृथक्करण का पालन कर रहे हैं या इसके लिए तत्पर हैं.यह भी पढ़ें: वरिष्ठ नाटककार, रंगकर्मी और निर्देशक नाट्य मोतीलाल गुप्ता का निधनइन नागरिकों को मॉडल के रूप में डस्टबिन और जागरूकता स्टिकर दिए भी जा रहे हैं, ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हो सकें. अपर नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि कूड़ा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सभी मुख्य सफाई एवं खाद्य निरीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वह डस्टबिन वितरण और स्टिकर चिपकाने की फोटो साक्ष्य के साथ रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराएं. इस प्रक्रिया की मॉनिटरिंग के लिए वाट्स-एप ग्रुप और निर्धारित प्रारूप का उपयोग किया जा रहा है. अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे वार्डों में जाकर सीधे लोगों को गीला, सूखा और हानिकारक कचरा अलग रखने के लिए जागरूक करें.