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भारत के लाल ने बनाई रियुजेबल ऑटोमैटिक मिसाइल

भारत के लाल ने बनाई रियुजेबल ऑटोमैटिक मिसाइल
Nov 09, 2025, 01:36 PM
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Posted By Preeti Kumari

India's Lal has developed the reusable automatic missile RAM.


मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के रहने वाले 19 साल के युवा प्रखर विश्वकर्मा जो चर्चा का विषय बन बैठे है. इस चर्चा का कारण यह है कि उन्हें "मप्र के मिसाइल मैन" के नाम से जाना जाता है. क्योंकि, वे एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार कर रहे हैं. जिसके लिए प्रखर विश्वकर्मा ने एयरोएक्स स्पेस टेक्नोलॉजी की स्थापना की, साथ ही मिसाइल और ड्रोन जैसे तकनीकों में आगे बढ़ने के लिए वो दिन-रात मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. इसी कामयाबी ने उन्हें वैज्ञानिक का टैग दिया हैं, जिसे पाकर वो खुशी से झूम उठे हैं.


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कंधों पर वैज्ञानिक का टैग और आंखों में आसमान छूने के सपनों को लेकर प्रखर विश्वकर्मा एक युवा वैज्ञानिक हैं. जो कई मुसीबतों को झेलते हुए जी-जान लगाकर की अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए कोशिशों में लगे हुए हैं. उन्होंने अपने काम का जिक्र कर बताया कि, "प्रोजेक्ट RAM" उनका काम ही नहीं ये वो सपना है जिसमें देश की सेवा बसी हैं, जिसके लिए उन्होंने एक अनोखी रियूजेबल मिसाइल (RAM) विकसित की है, बड़े ही सिद्दत के साथ प्रखर ने रियूजेबल मिसाइल (RAM) तकनीकि पर काम किया हैं. इसी प्रोजेक्ट ने इन्हें वैज्ञानिक कहलाने की पहचान दी है.


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ये प्रोजेक्ट एक अत्याधुनिक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी खासियत यह है कि, जो हमला करने के बाद अपने लॉन्चिंग पॉइंट पर खुद ही वापस लौट आता है, इससे भी बड़ी बात तो यह है कि इसे दुबारा से उपयोग किया जा सकता है. यह तकनीक भारत के लिए काफी बेहतर होगा, क्योंकि कम लागत के साथ ये प्रोजेक्ट बार-बार हमला करने की क्षमता रखता हैं. जिससे रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त होने की काफी उम्मीद हैं.


नासा और इसरो से सम्मानित हुए प्रखर युवा


अब सवाल ये उठता है कि इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करने के बाद भी आखिर ऐसी क्या वजह है जिसके चलते मिसाइल मैन" प्रखर विश्वकर्मा अपना जीवन-त्यागने को तक तैयार हो चुके हैं! इन सभी के पीछे की वजह 'संदिग्ध तत्वों' को माना जा रहा है. उनके जीवन की बात करें तो अपने काम को लेकर 2020 में नासा और इसरो दोनों से ही वो सम्मान पा चुके है, आखिरकार ऐसे में प्रखर को किस बात की चिंता सताने लगी है. जिसके चलते वो अब पुरी तरह से निराश हो चुके हैं. अपनी आप-बीती को लेकर उनका कहना है कि कुछ संदिग्ध लोगों द्वारा वो काफी परेशान हो चुके है, जिससे उनका वैज्ञानिक सफर चकना-चूर होने के सफर पर आ चुका है.


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यहीं कारण है कि उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त किया और कहा कि, उनके सभी मिसाइल प्रोजेक्ट भारत सरकार को सौंप दिए जाएं ताकि उनका शोध देश के काम आ सके. क्योंकि, “मैं देश के लिए जीता रहा हूं, अगर ऐसे में मेरी प्रतिभा देश को काम आ जाए तो यही मेरी सच्ची श्रद्धांजलि होगी” हालांकि, अपने जीवन में इस मिसाइल के लिए आगे बहुत कुछ करना था, पर अफसोस कि सब कुछ अधूरा सा रह गया हैं. इसलिए मैं अपनी आखिरी इच्छा देश के सामने रख रहा हूं. अगर ये संभव नहीं हो पाया तो मैं अपने सभी पुरस्कारों और मिसाइल प्रोजेक्ट्स की फाइलों को वाराणसी में गंगा नदी में विसर्जित कर दूंगा.


भारत के भविष्य को बचाने का देश ने लिया जिम्मा


वैज्ञानिक जैसी कामयाबी हासिल करने वाले और भारत को गर्व महसूस कराने वाले प्रखर ने अपनी पीड़ा को भारत देश के सामने रखा हैं. प्रखर द्वारा बंया किया गया ये दर्द हर किसी के जहन में उथल-पुथल मचाने लगा है. आखिर ऐसी क्या वजह है जो उन्हें अपना जीवन बर्बाद करने को मजबूर कर दिया है. खास बात तो यह है कि वैज्ञानिक प्रखर के दुख-दर्द को महसूस कर देशभर में लोगों ने सोशल मीडिया पर ‘#SavePrakhar’ मुहिम शुरू कर दी है. वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और समाज के बुद्धिजीवियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि भारत के इस प्रतिभा को समय रहते बचाया जा सके. इस जनता का स्पष्ट संदेश है —“एक प्रखर नहीं, यह भारत का भविष्य है जिसे बचाना होगा.”


अंतरिक्ष प्रेमी बने प्रखर


प्रखर विश्वकर्मा के माता-पिता का नाम श्रीमती अरुण विश्वकर्मा (माता) और श्री रघुनंदन विश्वकर्मा (पिता) जो कि किराना दुकान चलाते है. उनकी बहन का नाम साक्षी विश्वकर्मा है. परिवार से मिली वैज्ञानिक सोच और देशभक्ति की प्रेरणा ने उन्हें "प्रोजेक्ट RAM" जैसे काम करने का हौसला दिया. प्रखर विश्वकर्मा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गवर्नमेंट मॉडल स्कूल पालेरा से की, यहां से उन्होंने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की है. हालांकि, वर्तमान में वे Bansal Institute of Technology से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक कर रहे हैं. अंतरिक्ष प्रेमी होने के नाते वे भारतीय अंतरिक्ष टीम के प्रणोदन विभाग में शोध करने की तैयारी में लगे हुए हैं.


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वे कहते हैं कि जैसे ही प्रशासन से सैन्य अड्डे पर मिसाइल परीक्षण की अनुमति मिलेगी, वे इसे जल्द से जल्द ही लॉन्च करेंगे. वे वर्तमान में इको-फ्रेंडली रॉकेट, आत्मघाती सैटेलाइट, खतरनाक सैटेलाइट और रिलॉन्च ऑटोमैटिक मिसाइल (प्रोजेक्ट RAM) पर काम कर रहे हैं. यह परियोजना बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के साथ सहयोग में चल रही है. प्रखर BHU के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को पेटेंट करवाने और देश की सेवा में लाने की योजना बना रहे हैं. यह नवाचार भारत के रक्षा क्षेत्र को नई दिशा देगा और प्रखर का उद्देश्य भारत को अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है. उनका लक्ष्य भारत को अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में मजबूती के साथ आगे बढ़ाना है.


प्रखर बने ISRO के अंतरिक्ष प्रशिक्षक


जानकारी के मुताबिक, प्रखर विश्वकर्मा को NASA और ISRO द्वारा Aditya L1 क्विज़ में भागीदारी के लिए प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया है. इतना ही नहीं, प्रखर चंद्रयान-3 के लॉन्चिंग टीम में शामिल भी हुए है. ये वहीं प्रखर है जिन्हें साल 2023 में जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय एग्ज़िबिशन में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया था, साथ ही उन्होंने नेहरू विज्ञान केंद्र (मुंबई), बिरला इंडस्ट्रियल म्यूजियम (कोलकाता), विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र और ISRO – स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (अहमदाबाद) में प्रेजेंटेशन समेत वर्कशॉप में भागीदारी निभाई है. युवा वैज्ञानिक के इसी प्रतिभा के कारण भारतदेश में 132वें ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें ISRO ने अपना अंतरिक्ष प्रशिक्षक बनाया है.


प्रखर बने प्रेरणादायक युवा वैज्ञानिक


वहीं, प्रखर जब सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण में शामिल हुए, तब उन्होंने वैज्ञानिकों से रॉकेट और इंजन की जानकारी लेते हुए लॉन्चिंग गैलरी से चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण देखा. उनकी इच्छा है कि, उनकी मिसाइल तकनीक को भारत सरकार, DRDO और ISRO जैसे संस्थानों का समर्थन मिले. ताकि, इसका प्रयोगात्मक विकास हो सके और यह भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाए रखे. इन्हीं खूबियों की वजह से प्रखर इस वर्तमान काल में और आने वाले पीढ़ीयों के लिए एक बड़े प्रेरणादायक युवा वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ मिसाइल इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष जैसे प्रोजेक्ट्स में हुनर दिखाया हैं.

IIT (BHU) में CONFLUENTIA ’26 का समापन, AI और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर हुआ मंथन.
IIT (BHU) में CONFLUENTIA ’26 का समापन, AI और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर हुआ मंथन.
वाराणसी, 25 अक्टूबर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT-BHU), वाराणसी में आयोजित तीन दिवसीय उद्योग-अकादमिक सम्मेलन ‘CONFLUENTIA ’26’ का रविवार को समापन हो गया। 23 से 25 अक्टूबर तक चले इस सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उभरती प्रौद्योगिकियों और उद्योग-अकादमिक सहयोग को लेकर विशेषज्ञों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, पूर्व छात्रों और विद्यार्थियों ने विचार साझा किए। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक शोध और औद्योगिक जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करना रहा। संस्थान के Student Alumni Interaction Cell (SAIC) की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में तकनीकी सत्र, उद्योग विशेषज्ञों के साथ परिचर्चा, कार्यशालाएं, हैकाथॉन, मेंटरशिप और नेटवर्किंग कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योग जगत की वास्तविक समस्याओं को समझने, नए तकनीकी समाधान विकसित करने और विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिला। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में IIT (BHU) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा और शीर्ष प्रायोजक HCL Technologies के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उद्घाटन समारोह की शुरुआत संस्कृत श्लोक पाठ के साथ हुई। इसके बाद भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन और संस्थान के कुलगीत की प्रस्तुति हुई।चार प्रमुख क्षेत्रों में उद्योग विशेषज्ञों ने साझा किए विचारसम्मेलन का प्रमुख आकर्षण टनलिंग, फार्मास्यूटिकल्स एवं हेल्थ टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग ऑटोमेशन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे चार क्षेत्रों पर आयोजित उद्योग परिचर्चाएं रहीं। इनमें विशेषज्ञों और संस्थान के शिक्षकों ने तकनीकी विकास, औद्योगिक चुनौतियों और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्री 4.0, इलेक्ट्रिक वाहनों और उन्नत इंजीनियरिंग जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।AI और मशीन लर्निंग पर हैकाथॉनविद्यार्थियों की तकनीकी प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए आयोजित हैकाथॉन में Applied Machine Learning और Reinforcement Learning जैसे विषयों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों ने मेंटरशिप और जूरी सत्रों के माध्यम से अपने तकनीकी विचारों और समाधानों पर काम किया। इस पहल को IIT BHU Foundation के Above & Beyond Fund, Physics Wallah और Tredence का सहयोग मिला, जबकि HCL Technologies आयोजन का शीर्ष प्रायोजक रहा।सम्मेलन के दौरान वित्तीय निर्णय क्षमता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर केंद्रित कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। संस्थान के पूर्व छात्र अनिल सनाध्या ने निवेश और वित्तीय निर्णयों से संबंधित कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को जानकारी दी। वहीं, Nihilent और nSEPIA के सहयोग से आयोजित सत्र में AI आधारित भावनात्मक जागरूकता और उससे जुड़ी तकनीकी चुनौतियों पर चर्चा हुई। Tredence की AI Foundry कार्यशाला में जनरेटिव AI और एजेंटिक AI के व्यावहारिक उपयोग पर जोर दिया गया। इसमें व्यावसायिक समस्याओं की पहचान, कार्यप्रवाह का विश्लेषण, AI एजेंट तैयार करने, मानव निगरानी और समाधानों के परीक्षण जैसे पहलुओं को समझाया गया। इसके अलावा, HCL Technologies की ओर से Physical AI पर इंटरैक्टिव कार्यशाला भी आयोजित की गई।ALSO READ : आसमान में फाइटर विमानों की गर्जना से गूँज उठी काशी, पीएम गदगद, लाखों लोग हुए रोमांचितपूर्व छात्रों और विद्यार्थियों के बीच संवाद पर जोरसमापन दिवस पर आयोजित ग्रैंड प्लेनरी सत्र में पूर्व छात्र संघ के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ शिक्षकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए। निर्धारित कार्यक्रम के तहत HCL Technologies के सेहसाद्री टी. का संबोधन, HaBuild के सह-संस्थापक सौरभ बोथरा के साथ फायरसाइड चैट और कर्नाटक डिजिटल इकोनॉमी मिशन (KDEM) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव कुमार गुप्ता का मुख्य वक्तव्य शामिल रहा। विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के बीच संवाद को मजबूत करने के लिए ‘Match Circles’ पहल आयोजित की गई। वहीं, ‘Internship Preparation League’ (IPL) के माध्यम से विद्यार्थियों को वास्तविक औद्योगिक समस्याओं से परिचित कराने और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पहचान करने का प्रयास किया गया। सम्मेलन में हैकाथॉन का अंतिम चरण भी आयोजित हुआ।कार्यक्रम का समापन अनन्या शर्मा की सांस्कृतिक प्रस्तुति, पुरस्कार वितरण और समापन समारोह के साथ हुआ।कुल मिलाकर, CONFLUENTIA ’26 ने तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग जगत के बीच सहयोग को नई दिशा देने का प्रयास किया। सम्मेलन में AI और उभरती प्रौद्योगिकियों पर चर्चा के साथ विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उद्योग से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
आसमान में फाइटर विमानों की गर्जना से गूँज उठी काशी, पीएम गदगद, लाखों लोग हुए रोमांचित
आसमान में फाइटर विमानों की गर्जना से गूँज उठी काशी, पीएम गदगद, लाखों लोग हुए रोमांचित
वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी रविवार को काशी के नमो घाट पर वायु सेना के भव्‍य हवाई प्रदर्शन के साक्षी बनें. पीएम पुलिस लाइन से सडक मार्ग से नमो घाट पहुंचे. वहीं, एयर शो की शुरुआत ‘काशी’ फॉर्मेशन से हुई. तीन किरण विमानों ने वी आकार के फॉर्मेशन में उड़ान भरी. विमानों के पीछे निकलती तिरंगे के रंगों वाली धुएं की धारियों ने गंगा के ऊपर आसमान को अलग रंग दे दिया. घाटों पर मौजूद दर्शकों ने एक साथ उड़ते विमानों को देखकर तालियां बजाईं. फॉर्मेशन का नाम काशी की पहचान से जुड़ा होने के कारण यह प्रदर्शन स्थानीय दर्शकों के लिए खास मायने रखता था. विमान तय दूरी बनाए रखते हुए आगे बढ़े और उनकी समन्वित उड़ान ने हवाई प्रदर्शन की शुरुआत का संकेत दिया. घाटों और दूसरी ओर गंगा पार रामनगर से लोग आसमान में बनती आकृति को देखते रहे. तिरंगे की धारियां दिखाई देने पर दर्शकों की निगाहें विमानों के पीछे बन रही रंगीन रेखाओं पर टिक गईं.सूर्यक‍िरण व‍िमानों के प्रदर्शन के साथ ही वाराणसी का एयर शो समाप्‍त हुआ. नौ सूर्यक‍िरण व‍िमानों ने आयोजन के आख‍िरी पलों को यादगार बना द‍िया. आसमान में ति‍रंगा फार्मेंशन करते हुए आसमान को त‍िरंगे से रंग द‍िया. व‍िमानों के फार्मेशन ने आसमान में त‍िरंगा बनाया तो दर्शक उत्‍साह‍ित नजर आए. सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने अपने समन्वित हवाई करतब प्रस्तुत किए. समूह में उड़ते विमानों ने गंगा के ऊपर आकृतियां बनाईं और रंगीन धुएं से आसमान में तिरंगे की छटा उभरी. नीचे घाटों और नदी के दूसरे किनारे मौजूद दर्शकों ने आसमान की ओर देखकर तालियां बजाईं. सूर्यकिरण टीम का प्रदर्शन एयर शो के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा.काकपिट से गूंजा शुभकामना संदेशइसके पूर्व व‍िमान के कॉकप‍िट से काशी के सभी लोगों के भारतीय वायुसेना की ओर से हार्द‍िक शुभकामना का संदेश भी गूंजा. नमो घाट पर पीएम मोदी ने करीब एक घंटे तक वायु सेना का शौर्य देखा. इसके बाद वायु सेना के चीफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया. इस दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, सीएम योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहीं. नमो घाट पर एयर शो के दौरान वायुसेना का शौर्य देखने के लिए पीएम मोदी की नजरें आसमान में टिकी रहींं. इस दौरान गंगा की लहरों और काशी के आसमान में वामानों ने अपने करतब दिखाए तो गंगा घाटों पर मौजूद लोगों का उत्साह बढ़ता ही गया. कड़ी धूप के बीच भी लोग अड़े रहे.सुखोई, राफेल और तेजस जैसे विमानों ने कलाबाजी दिखाई तो लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था. नमो घाट और आसपास के घाटों के साथ ही गंगा पार डोमरी घाट पर लाखों की संख्या में दर्शकों ने जमकर हूटिंग की. गंगा के ऊपर लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों के प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम में भारतीय वायुसेना की क्षमता और साहस का प्रदर्शन किया गया.एयर शो पर वायुसेना का विशेष डाक टिकट जारीवायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने रविवार को वाराणसी में चल रहे भव्य एयर शो ‘विंग्स ओवर गंगा’ के अवसर पर विशेष डाक टिकट जारी किया. इस समारोह में वाराणसी की डाक प्रमुख भी मौजूद रहीं. एयर चीफ मार्शल ने इस मौके पर आम जनता के बीच जाकर लोगों से मुलाकात की और हाथ मिलाकर उनका उत्साह बढ़ाया.नमो घाट पर आयोजित इस कार्यक्रम में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हवाई प्रदर्शन को यादगार बनाने के लिए डाक विभाग द्वारा तैयार किए गए स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया।टिकट पर गंगा के ऊपर उड़ान भरते लड़ाकू विमानों और काशी की सांस्कृतिक छवि को दर्शाया गया है. समारोह में डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि भी मौजूद थे. एयर चीफ मार्शल ने कहा कि यह डाक टिकट न केवल वायुसेना की शक्ति और कौशल का प्रतीक है, बल्कि काशी की पवित्र भूमि पर आयोजित इस ऐतिहासिक एयर शो को भी अमर बनाता है. उन्होंने डाक विभाग के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में देशभक्ति और वायुसेना के प्रति आकर्षण जगाते हैं. समारोह के बाद एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सुरक्षा घेरे से बाहर निकलकर घाट पर जमा लोगों से सीधे मुलाकात की. उन्होंने बच्चों और युवाओं से हाथ मिलाया, उनकी बातें सुनीं और उन्हें वायुसेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया. इस दौरान लोग एयर चीफ मार्शल के आसपास जमा हो गए और उनका जोरदार स्वागत किया. कई लोगों ने सेल्फी भी ली.ALSO READ : सेंट मैरी स्कूल के बाद 39 जीटीसी में तेंदुए की आहट, छावनी में दहशतइस बार जुटी ज्‍यादा भीड़रविवार की छुट्टी और प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने वायु सेना के एयर शो को और भव्‍य बना दिया. एयर शो का आयोजन 22, 24 और 25 अक्‍टूबर को हुआ. अन्‍य दिनों की अपेक्षा आज ज्‍यादा लोग काशी के घाटों पर पहुंचे. कड़ी धूप के बावजूद लोगों के कदम पीछे नहीं हटे बल्कि डटे रहे. इस बार गंगा उस पार का नजारा भी दिव्‍य रहा. लाखों की संख्‍या में रेती पर लोग जुटे और हवाई प्रदर्शन देखकर रोमांचित हुए. लोग बनारसी अंदाज में एयर शो की कमेंट्री करते दिखाई पड़े.
सेंट मैरी स्कूल के बाद 39 जीटीसी में तेंदुए की आहट, छावनी में दहशत
सेंट मैरी स्कूल के बाद 39 जीटीसी में तेंदुए की आहट, छावनी में दहशत
वाराणसी : कैंट थाना क्षेत्र के छावनी स्थित सेंट मैरी स्कूल परिसर के बाद अब 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर (जीटीसी) इलाके में भी उसके देखे जाने की चर्चा से दहशत फैल गई है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, शनिवार देर रात करीब 9:30 बजे 39 जीटीसी क्षेत्र में तेंदुआ दिखाई दिया. परिसर में मौजूद दो सैन्य कर्मियों ने उसकी घेराबंदी कर पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह चकमा देकर एक बार फिर भागने में सफल रहा. लगातार दूसरे स्थान पर जंगली जानवर दिखाई देने की सूचना से छावनी क्षेत्र के लोगों में भय का माहौल है. लोगों को आशंका है कि तेंदुआ आसपास की झाड़ियों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर छिपा हो सकता है. हालांकि, 39 जीटीसी क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है. हालांकि मार्निंग वॉक करने वालों ने दूरी बना ली है.ALSO READ : पुलिस लाइन से नमो घाट तक प्रधानमंत्री मोदी का रोड शो, हाथ हिलाकर किया अभिवादनगौरतलब है कि 22 अक्टूबर को सेंट मैरी स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में एक बड़ा जंगली जानवर दिखाई देने के बाद तेंदुआ होने की आशंका जताई गई थी. इसके बाद वन विभाग और पुलिस की टीमों ने परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों में तलाश की थी. हालांकि, तलाशी के दौरान तेंदुए के पंजों के निशान नहीं मिले थे और वन विभाग ने उसकी मौजूदगी की पुष्टि नहीं की थी. हालांकि वन विभाग की टीमें बराबर निगरानी कर रही हैं.