Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

भारत के लाल ने बनाई रियुजेबल ऑटोमैटिक मिसाइल

भारत के लाल ने बनाई रियुजेबल ऑटोमैटिक मिसाइल
Nov 09, 2025, 01:36 PM
|
Posted By Preeti Kumari

India's Lal has developed the reusable automatic missile RAM.


मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के रहने वाले 19 साल के युवा प्रखर विश्वकर्मा जो चर्चा का विषय बन बैठे है. इस चर्चा का कारण यह है कि उन्हें "मप्र के मिसाइल मैन" के नाम से जाना जाता है. क्योंकि, वे एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार कर रहे हैं. जिसके लिए प्रखर विश्वकर्मा ने एयरोएक्स स्पेस टेक्नोलॉजी की स्थापना की, साथ ही मिसाइल और ड्रोन जैसे तकनीकों में आगे बढ़ने के लिए वो दिन-रात मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. इसी कामयाबी ने उन्हें वैज्ञानिक का टैग दिया हैं, जिसे पाकर वो खुशी से झूम उठे हैं.


JK


कंधों पर वैज्ञानिक का टैग और आंखों में आसमान छूने के सपनों को लेकर प्रखर विश्वकर्मा एक युवा वैज्ञानिक हैं. जो कई मुसीबतों को झेलते हुए जी-जान लगाकर की अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए कोशिशों में लगे हुए हैं. उन्होंने अपने काम का जिक्र कर बताया कि, "प्रोजेक्ट RAM" उनका काम ही नहीं ये वो सपना है जिसमें देश की सेवा बसी हैं, जिसके लिए उन्होंने एक अनोखी रियूजेबल मिसाइल (RAM) विकसित की है, बड़े ही सिद्दत के साथ प्रखर ने रियूजेबल मिसाइल (RAM) तकनीकि पर काम किया हैं. इसी प्रोजेक्ट ने इन्हें वैज्ञानिक कहलाने की पहचान दी है.


KL


ये प्रोजेक्ट एक अत्याधुनिक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी खासियत यह है कि, जो हमला करने के बाद अपने लॉन्चिंग पॉइंट पर खुद ही वापस लौट आता है, इससे भी बड़ी बात तो यह है कि इसे दुबारा से उपयोग किया जा सकता है. यह तकनीक भारत के लिए काफी बेहतर होगा, क्योंकि कम लागत के साथ ये प्रोजेक्ट बार-बार हमला करने की क्षमता रखता हैं. जिससे रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त होने की काफी उम्मीद हैं.


नासा और इसरो से सम्मानित हुए प्रखर युवा


अब सवाल ये उठता है कि इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करने के बाद भी आखिर ऐसी क्या वजह है जिसके चलते मिसाइल मैन" प्रखर विश्वकर्मा अपना जीवन-त्यागने को तक तैयार हो चुके हैं! इन सभी के पीछे की वजह 'संदिग्ध तत्वों' को माना जा रहा है. उनके जीवन की बात करें तो अपने काम को लेकर 2020 में नासा और इसरो दोनों से ही वो सम्मान पा चुके है, आखिरकार ऐसे में प्रखर को किस बात की चिंता सताने लगी है. जिसके चलते वो अब पुरी तरह से निराश हो चुके हैं. अपनी आप-बीती को लेकर उनका कहना है कि कुछ संदिग्ध लोगों द्वारा वो काफी परेशान हो चुके है, जिससे उनका वैज्ञानिक सफर चकना-चूर होने के सफर पर आ चुका है.


KLJ


यहीं कारण है कि उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त किया और कहा कि, उनके सभी मिसाइल प्रोजेक्ट भारत सरकार को सौंप दिए जाएं ताकि उनका शोध देश के काम आ सके. क्योंकि, “मैं देश के लिए जीता रहा हूं, अगर ऐसे में मेरी प्रतिभा देश को काम आ जाए तो यही मेरी सच्ची श्रद्धांजलि होगी” हालांकि, अपने जीवन में इस मिसाइल के लिए आगे बहुत कुछ करना था, पर अफसोस कि सब कुछ अधूरा सा रह गया हैं. इसलिए मैं अपनी आखिरी इच्छा देश के सामने रख रहा हूं. अगर ये संभव नहीं हो पाया तो मैं अपने सभी पुरस्कारों और मिसाइल प्रोजेक्ट्स की फाइलों को वाराणसी में गंगा नदी में विसर्जित कर दूंगा.


भारत के भविष्य को बचाने का देश ने लिया जिम्मा


वैज्ञानिक जैसी कामयाबी हासिल करने वाले और भारत को गर्व महसूस कराने वाले प्रखर ने अपनी पीड़ा को भारत देश के सामने रखा हैं. प्रखर द्वारा बंया किया गया ये दर्द हर किसी के जहन में उथल-पुथल मचाने लगा है. आखिर ऐसी क्या वजह है जो उन्हें अपना जीवन बर्बाद करने को मजबूर कर दिया है. खास बात तो यह है कि वैज्ञानिक प्रखर के दुख-दर्द को महसूस कर देशभर में लोगों ने सोशल मीडिया पर ‘#SavePrakhar’ मुहिम शुरू कर दी है. वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और समाज के बुद्धिजीवियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि भारत के इस प्रतिभा को समय रहते बचाया जा सके. इस जनता का स्पष्ट संदेश है —“एक प्रखर नहीं, यह भारत का भविष्य है जिसे बचाना होगा.”


अंतरिक्ष प्रेमी बने प्रखर


प्रखर विश्वकर्मा के माता-पिता का नाम श्रीमती अरुण विश्वकर्मा (माता) और श्री रघुनंदन विश्वकर्मा (पिता) जो कि किराना दुकान चलाते है. उनकी बहन का नाम साक्षी विश्वकर्मा है. परिवार से मिली वैज्ञानिक सोच और देशभक्ति की प्रेरणा ने उन्हें "प्रोजेक्ट RAM" जैसे काम करने का हौसला दिया. प्रखर विश्वकर्मा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गवर्नमेंट मॉडल स्कूल पालेरा से की, यहां से उन्होंने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की है. हालांकि, वर्तमान में वे Bansal Institute of Technology से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक कर रहे हैं. अंतरिक्ष प्रेमी होने के नाते वे भारतीय अंतरिक्ष टीम के प्रणोदन विभाग में शोध करने की तैयारी में लगे हुए हैं.


P


वे कहते हैं कि जैसे ही प्रशासन से सैन्य अड्डे पर मिसाइल परीक्षण की अनुमति मिलेगी, वे इसे जल्द से जल्द ही लॉन्च करेंगे. वे वर्तमान में इको-फ्रेंडली रॉकेट, आत्मघाती सैटेलाइट, खतरनाक सैटेलाइट और रिलॉन्च ऑटोमैटिक मिसाइल (प्रोजेक्ट RAM) पर काम कर रहे हैं. यह परियोजना बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के साथ सहयोग में चल रही है. प्रखर BHU के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को पेटेंट करवाने और देश की सेवा में लाने की योजना बना रहे हैं. यह नवाचार भारत के रक्षा क्षेत्र को नई दिशा देगा और प्रखर का उद्देश्य भारत को अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है. उनका लक्ष्य भारत को अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में मजबूती के साथ आगे बढ़ाना है.


प्रखर बने ISRO के अंतरिक्ष प्रशिक्षक


जानकारी के मुताबिक, प्रखर विश्वकर्मा को NASA और ISRO द्वारा Aditya L1 क्विज़ में भागीदारी के लिए प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया है. इतना ही नहीं, प्रखर चंद्रयान-3 के लॉन्चिंग टीम में शामिल भी हुए है. ये वहीं प्रखर है जिन्हें साल 2023 में जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय एग्ज़िबिशन में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया था, साथ ही उन्होंने नेहरू विज्ञान केंद्र (मुंबई), बिरला इंडस्ट्रियल म्यूजियम (कोलकाता), विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र और ISRO – स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (अहमदाबाद) में प्रेजेंटेशन समेत वर्कशॉप में भागीदारी निभाई है. युवा वैज्ञानिक के इसी प्रतिभा के कारण भारतदेश में 132वें ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें ISRO ने अपना अंतरिक्ष प्रशिक्षक बनाया है.


प्रखर बने प्रेरणादायक युवा वैज्ञानिक


वहीं, प्रखर जब सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण में शामिल हुए, तब उन्होंने वैज्ञानिकों से रॉकेट और इंजन की जानकारी लेते हुए लॉन्चिंग गैलरी से चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण देखा. उनकी इच्छा है कि, उनकी मिसाइल तकनीक को भारत सरकार, DRDO और ISRO जैसे संस्थानों का समर्थन मिले. ताकि, इसका प्रयोगात्मक विकास हो सके और यह भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाए रखे. इन्हीं खूबियों की वजह से प्रखर इस वर्तमान काल में और आने वाले पीढ़ीयों के लिए एक बड़े प्रेरणादायक युवा वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ मिसाइल इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष जैसे प्रोजेक्ट्स में हुनर दिखाया हैं.

शुगर पेशेंट्स फलों से बनाए रखे दूरी, जाने क्यों?
शुगर पेशेंट्स फलों से बनाए रखे दूरी, जाने क्यों?
डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसके होने का ज्यादातर लोगों को बहुत देर से पता चलता है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक करीब 90 फीसदी लोगों को देर से पता चलता है कि वे शुगर का शिकार हो गए हैं. बीमारी की चपेट में आने के बाद मरीज को जिंदगी भर दवा के भरोसे शुगर को कंट्रोल रखना पड़ता है. इतना ही नहीं शुगर लेवल न बढ़ जाए, इसके लिए खानपान पर भी खास फोकस रखना काफी जरूरी होता है.जड़ वाली सब्जियों से दूर रहे डायबिटीट मरीज डायबिटीट को लेकर बहुत लोगों का मानना है कि, इस कंडीशन में जड़ वाली सब्जी नहीं खानी चाहिए. आलू से तो दूरी ही बनाकर रखनी चाहिए. वैसे डायबिटीज मरीजों को फल खाने चाहिए या नहीं ये कंफ्यूजन हर किसी के मन में अक्सर बनी रहती है. ये एक मिथक भी है कि शुगर पेशेंट्स को फ्रूट्स भूल से भी नहीं खाने चाहिए. फलों में नेचुरल शुगर (फ्रक्टोज) होता है जो इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ा सकती है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इन्हें फलों को ही नहीं खाना चाहिए. ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि, फलों में शुगर के अलावा फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं. इसलिए बैलेंस तरीके से खाना चाहिए. ज्यादा मात्रा में नहीं, ताकि किसी तरह की कोई भी दिक्कते होने से आप बचें रहे.शुगर का लेवल कितना होना चाहिए ये पहले जानना काफी जरूरी है. बता दें, नॉर्मल शुगर लेवल 120 एमजी/डीएल है. अगर किसी का शुगर लेवल 140 से ज्यादा है तो ये चिंता का कारण है. लेकिन अगर ये 200 के पार है तो तुरंत डॉक्टरी इलाज जरूरी है. कभी-कभी ये लेवल 500 या इससे ज्यादा भी चला जाता है. शुगर को कंट्रोल न किया जाए तो ये धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खत्म करती जाती है. वैसे किसी का शुगर लेवल शूट कर जाए और इसे कंट्रोल न करें तो ऑर्गन तक डैमेज हो जाते हैं. एक्सपर्ट से जानें किन फलों को शुगर में खा सकते हैं और किन्हें नहीं?क्यों फलों से बढ़ता है डायबिटीजशुगर में फ्रूट्स को लेकर सबसे बड़ा मिथ ये है कि फलों से डायबिटीज बढ़ जाती है. एक्सपर्ट के मुताबिक सच ये है कि फ्रूट्स नेचुरल शुगर के साथ फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन भी देते हैं. ये तत्व ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. हालांकि आप फलों का सेवन किस तरह कर रहे हैं, इसका ध्यान रखना भी जरूरी है. शुगर के मरीज सेब, अमरूद, नाशपाती, पपीता, ऑरेंज/मौसंबी (साबुत), बैरीज, कीवी और अनार को खा सकते हैं. लेकिन खाने के तरीके पर फोकस रखना है जिसमें मात्रा कम हो और साबुत ही खाना चाहिए. ये फ्रूट्स लो टू मॉर्डरेट ग्लाइसेमिक इंडेक्स के होते हैं और शुगर स्पाइक धीरे करते हैं.शुगर पेशेंट न खाएं ये फलएक रिपोर्ट के अनुसार, डायबिटीज के मरीज आम, केला, चीकू, अंगूर, कस्टर्ड एप्पल और सभी तरह के फ्रूट जूस से दूरी बनाकर रखें तो ही अच्छा है. भले ही जूस फ्रेश ही क्यों न हो फिर भी इसे पीने से बचना चाहिए. दरअसल, जूस में फाइबर निकल जाता है और इसे पीने से शुगर सीधे ब्लड में चली जाती है.
NEET छात्रा मौत मामले में अब होगा पर्दाफाश, CBI ने दर्ज की FIR
NEET छात्रा मौत मामले में अब होगा पर्दाफाश, CBI ने दर्ज की FIR
बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों हलचल मचा हुआ है. नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में एक नया मोड आ गया है. अब इस केस में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी (सीबीआई) ने आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कर ली है. जांच एजेंसी ने इस मामले को स्पेशल केस के रूप में दर्ज करते हुए केस नंबर 7S/26 आवंटित किया है. जिसके बाद से मामले की जांच में जुटी एजेंसी ये पता लगाने में लगी हुई है कि छात्रा की मौत के पीछे साजिश है या फिर कुछ और ही सच्चाई है. जिसे लेकर सीबीआई टीम ने अपनी जांच को और भी तेज कर दिया है.वहीं, इस मामले को लेकर सूत्रों का कहना है कि, एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई की टीम अब राज्य पुलिस और गठित की गई विशेष जांच दल यानि (एसआईटी) से अब तक की जांच से जुड़े सभी दस्तावेज, साक्ष्य और केस डायरी को जब्द कर लिया है. इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. माना जा रहा है कि सीबीआई की टीम जल्द ही पटना संबंधित अधिकारियों और गवाहों से पूछताछ शुरू कर सकती है.जानिए क्या है नीट छात्रा का मामला दरअसल, यह मामला सामने आते ही राजनीतिक रूप ले बैठा. विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर हमला करते हुए उस पर सवाल उठाने लगे फिर क्या इस मुद्दे के बहाने सदन से लेकर विधानसभा परिसर तक लगातार हंगामा और प्रदर्शन होने लगे. जहां इस मामले में जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच की मांग करने लगे. इस बढ़ते राजनीतिक दबाव और जनभावनाओं को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते 31 जनवरी को केंद्र सरकार से इस प्रकरण की सीबीआई जांच कराने का आग्रह किया, इस अपील के पीछे की वजह ये है कि नीतीश कुमार अपने पार्टी को फजीयत होने से बचाना चाहते है, जिसके चलते प्रदर्शन को देख उनकी बीपी हाई होने लगी.इस बात की जानकारी नीतीश कुमार के पार्टी के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के जरिए दी थी, राज्य सरकार के काफी अनुरोध करने पर केंद्र की मोदी सरकार ने इस मामले में जांच के लिए अपनी मंजूरी दी, जिसके बाद से सीबीआई ने नीट केस की कमान अपने हाथ में लेते हुए मामले का पर्दाफाश करने में लगी हुई है. यहीं कारण है कि अब हर किसी की निगाहें इस जांच एजेंसी पर जा टिकी हैं.पीड़ित परिजनों का आरोप आपको बता दें, कि छात्रा के पीड़ित परिजनों ने आरोप लगाया था कि एसआईटी उन पर दबाव बना रही है. बार-बार एक ही तरह की बातें पूछी जा रही हैं. वे लोग जांच से संतुष्ट नहीं हैं. परिजनों ने बिहार के डीजीपी से भी जाकर मुलाकात की थी. अब देखना यह होगा कि सीबीआई जांच शुरू करती है तो क्या कुछ निकलकर आता है.
कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी मामले में 7 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, केबीएन प्‍लाजा जब्त
कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी मामले में 7 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, केबीएन प्‍लाजा जब्त
वाराणसी : कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी मामले में रोहनिया पुलिस ने व्यापक विवेचना पूर्ण करते हुए मुख्य आरोपी भोला प्रसाद जायसवाल समेत कुल 07 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है. यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त वाराणसी के निर्देशन में अपराधों की रोकथाम और अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत की गई. पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन के निर्देशन, अपर पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन के नेतृत्व तथा सहायक पुलिस आयुक्त रोहनिया एवं प्रभारी निरीक्षक रोहनिया के पर्यवेक्षण में गठित टीम ने सुनियोजित तरीके से साक्ष्य संकलित कर आरोपियों के विरुद्ध मजबूत केस तैयार किया. उधर, कोतवाली में दर्ज मुकदमे में न्‍यायालय के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने महमूरगंज स्थित आरोपी भोला जायसवाल की संपत्ति केबीएन प्‍लाजा पर जब्‍ती की कार्रवाई की. इसी संपत्ति को पूर्व में रोहनिया पुलिस ने भी फ्रीज किया था.मुकदमे का पंजीकरण और विवेचना की दिशाथाना रोहनिया कमिश्नरेट वाराणसी पर मु0अ0सं0 0343/2025 धारा 8, 21, 25, 29 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत केस दर्ज किया गया था. प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी संगठित तरीके से कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध खरीद-फरोख्त कर रहे थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल गठित किया गया, जिसने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, बैंकिंग लेनदेन, परिवहन रिकॉर्ड और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ीं.विवेचना के दौरान ई-वे बिल, बैंक स्टेटमेंट, नगद जमा पर्चियां, विभिन्न बैंकों की सीसीटीवी फुटेज, आयकर विवरणी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वाहनों के टोल डेटा, विधि विज्ञान प्रयोगशाला रामनगर की रिपोर्ट, औषधि निरीक्षक की परीक्षण रिपोर्ट तथा संबंधित दवा कंपनियों से प्राप्त दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया. बैंक प्रबंधकों, कैशियरों तथा स्वतंत्र गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए. इन सभी साक्ष्यों से यह प्रमाणित हुआ कि आरोपी बड़े पैमाने पर अवैध तस्करी में संलिप्त थे.बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप का विवरणकार्रवाई के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में कोडीनयुक्त कफ सिरप को बरामद किया था. बरामदगी में PHENSEDYL COUGH SYRUP 100 ML की कुल 18,600 शीशियां तथा ESKUF 100 ML COUGH SYRUP की कुल 75,150 शीशियां शामिल हैं. जांच में पुष्टि हुई कि इन दवाओं की वैध आपूर्ति कागजों में दर्शाई जाती थी, जबकि वास्तविक माल को अवैध रूप से अन्य राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता था.अपराध करने का तरीकाविवेचना से यह तथ्य प्रकाश में आया कि अभियुक्तों ने कागजी और फर्जी फर्म बनाकर हवाला के माध्यम से प्राप्त नगद धनराशि को वैध लेनदेन का रूप दिया. पहले नकदी विभिन्न फर्मों के बैंक खातों में जमा कराई जाती थी, फिर उसे अलग-अलग खातों के माध्यम से शैलि ट्रेडर्स के खाते में स्थानांतरित किया जाता था. इस प्रकार अवैध आय को वैध व्यापारिक लेनदेन के रूप में प्रस्तुत किया जाता था.कोडीनयुक्त कफ सिरप को गुप्त स्थानों पर छिपाकर रखा जाता था और आवश्यकता पड़ने पर ट्रांसपोर्ट के जरिए सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता था. जांच में संकेत मिले कि इस नेटवर्क के तार बांग्लादेश सीमा तक जुड़े थे, जहां माल ऊंचे दामों पर बेचा जाता था. इस अवैध कारोबार से अर्जित धन से चल-अचल संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया. इस संबंध में धारा 68-एफ एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत भी कार्रवाई की गई है.इस आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्रप्रकरण में में आरोपी आजाद जायसवाल, महेश कुमार सिंह, शिवाकांत उर्फ शिव, स्वपलिन केसरी, दिनेश कुमार यादव, आशीष यादव तथा भोला प्रसाद जायसवाल शामिल हैं. इनमें से भोला प्रसाद को शैली ट्रेडर्स का प्रोपराइटर बताया गया है. सभी आरोपियों के विरुद्ध संकलित साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है.ALSO READ : महाशिवरात्रि - एक हजार भक्‍त मंगला आरती में होंगे शामिल, 10 लाख भक्‍तों के पहुंचने का अनुमानमुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहासमुख्य आरोपी भोला प्रसाद के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट और अन्य धाराओं में वाराणसी, सोनभद्र, जौनपुर, चंदौली, झारखंड सहित कई जनपदों में अनेक मुकदमे दर्ज हैं. इसके अतिरिक्त सह अभियुक्तों के विरुद्ध भी विभिन्न थानों में मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े प्रकरण पंजीकृत पाए गए. पुलिस अन्य राज्यों में दर्ज मामलों की जानकारी भी एकत्र कर रही है. वहीं कोतवाली पुलिस ने भोला जायसवाल के व्‍यवसायिक कांप्‍लेक्‍स केबीएन प्‍लाजा को जब्‍त करने की कार्रवाई की.